Saturday, September 2, 2023
कविता की ये तो हद हो गई
ये तो हद हो गई
उनका कहना है कि कुछ नया लिखो
अपनी रचना तो बिल्कुल ही विशुद्ध होती है
कहीं की नकल भी नहीं होती
विशुद्ध चौबीस कैरट का काम है
विगत भूल वर्तमान का इतिहास लिखना
देखिए मुश्किल है
कोई भी किताब पढ़ लो
आधे पन्ने तो पुराने से ही भरे होते हैं
नयापन नये पन्नों की सजावट में है
उसके आवरण में है
उसकी रेखाओं में है
कलाकारों की सोच भी तो
उन्हीं पुरानी सोच की ही नवीनतम तकनीक है
बदलाव होता है दोहराने का
दहेज लेना और देना दोनों ही अपराध
विवाह करना और न करना एक जैसा ही है
पुरानी कहावत ही अभी तक चलती है
नाच न जाने आंगन टेढ़ा,
बंदर क्या जाने अदरख का स्वाद
जानने पर भी वही बदलाव
नृत्य वही है पर नाचने वाला नया
अब तो हर पकवान सब बना लेते हैं
कपड़ों की तो बात ही कुछ और है
फैशन के नाम से भी वही चक्र घूमता रहता है
कभी ऊपर का कपड़ा कम तो कभी नीचे का
प्रेम वही है पर नए रूप में
संस्कृत से लेकर सभी भाषाओं की तह तक
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक या फिर
पश्चिम से पूर्व
लैला-मजनूं हीर रांझा सभी जगह मिलते हैं
किताबों में पढ़ते बड़े हुए
जीवन में देखते सुनते
चरित्र मूल्यों आदर्शों की मिसाल देते रहे
समाज को बांधा और बांटा
आजादी की अभिव्यक्ति के नाम पर आजादी छीनने का काम चला
नयापन नये पन्नों में सिमट कर
संकुचित सा कम्प्यूटर के पन्नों में
एक छोटी-सी मुट्ठी में समा गई दुनिया
@वसुंधरा मिश्र, 2.8.23
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