Tuesday, December 26, 2023
रिपोर्ट शेयर स्किल 23
भवानीपुर कॉलेज ने किया छात्र शिक्षकों का शेयर स्किल सम्मान - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने छात्र शिक्षकों का दिनांक 12 दिसम्बर 2023 को महाविद्यालय परिसर के जुबली हॉल में प्रातः 10:30 बजे से शेयर स्किल सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह समारोह उन सभी छात्रों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था जिन्होंने समग्र वातावरण में अपने साथियों से विभिन्न कौशल सिखाने और सीखने में योगदान दिया था। समारोह की शुरुआत दर्शकों को एक वीडियो दिखाए जाने से हुई, जिसमें फोटोग्राफी, शतरंज, मुक्केबाजी, मोनो एक्ट, वाद्य संगीत, हिप हॉप, गरबा और डांडिया, एक्सेल और फैशन वॉक सहित उन सभी कौशलों के अंश शामिल थे, जिन पर छात्रों ने काम किया। वीडियो इस बात का सार था कि कक्षाएं किस प्रकार सशक्त हो रही थीं और सहयोग के प्रति उनके प्रेम को प्रतिबिंबित कर रही थीं। इसके बाद, छात्र मामलों के रेक्टर और डीन, प्रोदिलीप शाह ने दर्शकों को संबोधित किया और अपने विचार साझा किए कि कौशल विकसित करना कितना महत्वपूर्ण है, उन्होंने इस तथ्य पर भी जोर दिया कि जीवन में सभी बेहतरीन चीजें मुफ्त हैं और यह उद्यम भी ऐसा ही है। कार्यक्रम छात्रों द्वारा कक्षाओं के माध्यम से हासिल किए गए कौशल का प्रदर्शन करने के साथ आगे बढ़ा और यह दर्शकों के लिए एक सच्ची खुशी के अलावा और कुछ नहीं था। फैशन शेयर स्किल टीम ने एक ऐसा क्रम प्रस्तुत किया जो इतना मंत्रमुग्ध कर देने वाला था कि दर्शक उत्साहपूर्वक तालियाँ बजाने से खुद को नहीं रोक सके। इसके अलावा, क्रमशः दीप कंदोई और निखिल जयसवाल द्वारा मोनो एक्ट प्रस्तुत किया गया, जिसने कमरे में मौजूद सभी लोगों को रोमांचित कर दिया। मंच गरबा की धुनों से जीवंत और ऊर्जावान हो गया था और छात्र गुजराती धुनों पर शानदार नृत्य कर रहे थे। देवांग नागर और उनके छात्र-शिक्षक तुषार गुप्ता ने "ऑल ऑफ मी" गीत गाकर भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छात्र-अध्यापकों को कला के क्षेत्र में उनके सराहनीय योगदान के लिए प्रमाण पत्र और प्रशंसा चिह्न के माध्यम से सम्मानित और मान्यता दी गई। वे वास्तव में दर्शकों में से प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा के स्रोत साबित हुए। अंत में मेंटर दिव्या उद्देशी ने उन छात्रों को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस समारोह को सफल बनाया। रिपोर्टर जिया तन्ना और फ़ोटोग्राफ़र फ़कीर अहमद रहे। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
Friday, December 22, 2023
रिपोर्ट विद्यार्थियों द्वारा शेयर स्किल 23
भवानीपुर कॉलेज ने किया छात्र शिक्षकों का शेयर स्किल सम्मान - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने छात्र शिक्षकों का दिनांक 12 दिसम्बर 2023 को महाविद्यालय परिसर के जुबली हॉल में प्रातः 10:30 बजे से शेयर स्किल सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह समारोह उन सभी छात्रों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था जिन्होंने समग्र वातावरण में अपने साथियों से विभिन्न कौशल सिखाने और सीखने में योगदान दिया था। समारोह की शुरुआत दर्शकों को एक वीडियो दिखाए जाने से हुई, जिसमें फोटोग्राफी, शतरंज, मुक्केबाजी, मोनो एक्ट, वाद्य संगीत, हिप हॉप, गरबा और डांडिया, एक्सेल और फैशन वॉक सहित उन सभी कौशलों के अंश शामिल थे, जिन पर छात्रों ने काम किया। वीडियो इस बात का सार था कि कक्षाएं किस प्रकार सशक्त हो रही थीं और सहयोग के प्रति उनके प्रेम को प्रतिबिंबित कर रही थीं। इसके बाद, छात्र मामलों के रेक्टर और डीन, प्रोदिलीप शाह ने दर्शकों को संबोधित किया और अपने विचार साझा किए कि कौशल विकसित करना कितना महत्वपूर्ण है, उन्होंने इस तथ्य पर भी जोर दिया कि जीवन में सभी बेहतरीन चीजें मुफ्त हैं और यह उद्यम भी ऐसा ही है। कार्यक्रम छात्रों द्वारा कक्षाओं के माध्यम से हासिल किए गए कौशल का प्रदर्शन करने के साथ आगे बढ़ा और यह दर्शकों के लिए एक सच्ची खुशी के अलावा और कुछ नहीं था। फैशन शेयर स्किल टीम ने एक ऐसा क्रम प्रस्तुत किया जो इतना मंत्रमुग्ध कर देने वाला था कि दर्शक उत्साहपूर्वक तालियाँ बजाने से खुद को नहीं रोक सके। इसके अलावा, क्रमशः दीप कंदोई और निखिल जयसवाल द्वारा मोनो एक्ट प्रस्तुत किया गया, जिसने कमरे में मौजूद सभी लोगों को रोमांचित कर दिया। मंच गरबा की धुनों से जीवंत और ऊर्जावान हो गया था और छात्र गुजराती धुनों पर शानदार नृत्य कर रहे थे। देवांग नागर और उनके छात्र-शिक्षक तुषार गुप्ता ने "ऑल ऑफ मी" गीत गाकर भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छात्र-अध्यापकों को कला के क्षेत्र में उनके सराहनीय योगदान के लिए प्रमाण पत्र और प्रशंसा चिह्न के माध्यम से सम्मानित और मान्यता दी गई। वे वास्तव में दर्शकों में से प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा के स्रोत साबित हुए। अंत में मेंटर दिव्या उद्देशी ने उन छात्रों को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस समारोह को सफल बनाया। रिपोर्टर जिया तन्ना और फ़ोटोग्राफ़र फ़कीर अहमद रहे। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
टिप्पणी दिगंबर जैन विद्यालय समाप्ति की ओर
बड़े बाजार में एक और स्कूल दिगंबर जैन विद्यालय का बंद होना मारवाड़ियों के जीवन मूल्यों के बदलने की ओर भी संकेत करता है ।शिक्षण संस्थानों को विद्या मंदिर नहीं बल्कि व्यवसायिक लाभ का जरिया समझा जाने लगा है। परिवर्तन शिक्षा में होना चाहिए न शिक्षालयों को तोड़ने में। आधुनिक मांग के अनुरूप पुरानी इमारतें मरम्मत भी मांगती हैं। गलत उद्देश्यों के प्रति आवाज उठाना अभिभावकों और जिम्मेदार नागरिकों का धर्म है। छपते छपते हिंदी दैनिक कोलकाता को धन्यवाद जिसने समाज में होने वाले इस मुद्दे पर जनता का ध्यान आकर्षित किया। विश्वंभर नेवर जी को धन्यवाद ।🙏 🙏 डॉ वसुंधरा मिश्र, भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज, कोलकाता 22.12.2023
अभिज्ञात के काव्य संग्रह जरा सा नॉस्टेलजिया
अभिज्ञात के काव्य संग्रह जरा सा नॉस्टेल्जिया पर संगोष्ठी
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महिलाओं की संस्था साहित्यिकी की ओर से अभिज्ञात के दसवीं कविता संग्रह जरा सा नॉस्टेल्जिया 'पर संगोष्ठी का आयोजन भारतीय भाषा परिषद पुस्तकालय हाल में किया गया ।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर वसुंधरा मिश्र ने कहा कि अभिज्ञात की कविताएं ग्राम्य जीवन व नगरीय जीवन के बीच सेतु हैं ।उनकी कविताओं में उदात्त सकारात्मक संदेश है। संवेदना, हालात के बदलने की बेचैनी और गांव के विछोह की असीम व्यथा है ।वे 20वीं और 21वीं सदी के बड़े रचनाकार हैं ।
नीता अनामिका ने कहा कि अभिज्ञात की कविता में विचार और संवेदना अनूठे ढंग से पिरोई गई हैं। कविताओं में न केवल स्मृतियों का आस्वाद है ,बल्कि वर्तमान और भविष्य के धागे भी उससे जुड़े हैं।
विमलेश त्रिपाठी का कहना था कि जो लोग गांव से प्रवासी होकर शहरों में अरसे से रह रहे हैं उन सबमें स्वाभाविक तौर पर अपनी जड़ों को लेकर नॉस्टेल्जिया है
अभिज्ञात ने अपने पहले ही कविता संग्रह का नाम एक अदहन हमारे अंदर रखकर यह इंगित कर दिया था कि आधहन जैसे शब्दों से शुरू उनकी साहित्यिक यात्रा जड़ों की चिंता की भी यात्रा है। उन्होंने अभिज्ञात की स्त्री जब खुश होती कविता को विशेष तौर पर उल्लेखनीय बताया। फिल्म कार आशुतोष पाठक नेअभिज्ञात की इस बात से सहमति जताई कि कविता हथियार उठाने के लिए ही नहीं प्रेरित करती बल्कि वह हथियार छोड़ने में भी मददगार हो सकती है। डॉक्टर गीता दूबे ने अभिज्ञात की तीन कविताओं की आवृत्ति की । संस्था की अध्यक्ष विद्या भंडारी ने कहा कि अभिज्ञात छोटी कविताओं में भी बड़ी बात कहने का हुनर जानते हैं। उनकी कविता गागर में सागर है। अभिज्ञात
ने कहा कि आप जो भी कहें, जो भी करें उसमें थोड़ी सी कविता भी हो तो बहुत सी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। कविता जीने की पद्धति है जिसे अपनाकर तनाव व हताशा से मुक्ति पाई जा सकती है कार्यक्रम का संचालन करते हुए संजना तिवारी ने कहा कि अभिज्ञात की कविता की हर आवृत्ति के साथ नए अर्थ खुलते हैं ।संस्था का परिचय साहित्यिकी की सचिव डॉक्टर मंजू रानी गुप्ता ने किया।
उमंग 23 वार्षिकोत्सव चार दिवसीय
भवानीपुर कॉलेज में भूलभुलैया के बीच अद्भुत प्राप्ति का सुनहरा मौका चार दिवसीय उमंग 2023 वार्षिकोत्सव - -
हर वर्ष की तरह भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज में "उमंग" - 23 का आगाज़ हो चुका है। कोलकाता की एलगिन रोड फिर से जाम होने वाली है, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज का साहित्यिक - सांस्कृतिक महामहोत्सव की शुरुआत है। क्रिसमस की धूमधाम के साथ ही बस इंतज़ार समाप्त । 26-27-28-29 दिसम्बर चार दिनों तक कोलकाता के कॉलेज युवा प्रतिभागियों का महामहोत्सव चलेगा।
"उमंग" केवल वार्षिकोत्सव नहीं है, कोलकाता के 65 कॉलेज और बाहर से तीन कॉलेज के 3000 सक्रिय युवा प्रतिभागियों का महामहोत्सव है, प्रतिभाओं का चुनाव उत्सव है। एक दिन में 10से 12 इवेंट समानांतर चलेंगे जो कॉलेज परिसर में ही होंगे। कब किसको क्या मिल जाए कहा नहीं जा सकता।
कुल मिलाकर 80 इवेंट्स हैं जो चार दिन तक चलने वाले हैं। भूलभुलैया के इस सफर में बहुत से आश्चर्यजनक अद्भुत परिणाम छिपे हुए हैं। इस बार उमंग 23 की थीम Maze Amaze रखी गई है। जिसका अर्थ है अपने ही भीतर छिपी प्रतिभा को पाने का। विकास और उन्नति का घेरा मेज या भूलभुलैया है जो कहीं न कहीं हमारे भीतर ही छिपा हुआ है और समय के साथ उसी में अमेज यानी अद्भुत समाधान प्राप्त करते हैं। कॉलेज के रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह द्वारा दी गई इस थीम के विषय में जीवन दर्शन में निहित शक्ति और भविष्य में उससे प्राप्त होने वाले परिणामों के रहस्य पर प्रकाश डाला। बताया कि जिस प्रकार एक पेड़ की जड़ें आपस में उलझी होती हैं और दिखाई नहीं देती लेकिन उसमे अपार संभावनाएं दबी रहती हैं, वे भूलभुलैया की तरह होती हैं लेकिन उसी पेड़ की जड़ें अपनी अद्भुत क्षमता के अनुरूप फल और छाया भी देती हैं। ठीक वैसे ही भविष्य के गर्भ में विशिष्टता प्राप्त विद्यार्थियों में क्या छिपा है, कुछ कहा नहीं जा सकता। उमंग23 में भाग लेने वाले प्रतिभागियों में कौन ऊंचाइयों तक पहुंचेगा यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा। कोलकाता के प्रतिष्ठित कॉलेजों के युवा छात्र छात्राओं में भी हलचल मच जाती है, होड़ लग जाती है कि कौन किस प्रतियोगिता में जीतेगा।
कॉलेज की मीडिया प्रभारी डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि
इस बार उमंग में दस हजार विद्यार्थियों के आने की संभावना है। चार दिवसीय 26-27-28 -29 दिसंबर 2023 के चार दिन हर विद्यार्थी के लिए सचमुच उमंग, उत्साह - ऊर्जा से भर देने वाले होते हैं।
उमंग" केवल उत्सव नहीं है वह एक ऐसा साहित्यिक और सांस्कृतिक मंच है जो कोलकाता के युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र है साथ ही उनके व्यक्तित्व में व्यवस्था, संगठन, नेतृत्व और आत्मविश्वास को विकसित करने का है।
उमंग का आयोजन डीन अॉफिस द्वारा आयोजित किया जाता है जिसमें रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह, प्रातःकालीन सत्र की कोआर्डिनेटर प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिव्या उदेशी, प्रो समीक्षा खंडूरी और चार सौ से अधिक विद्यार्थियों की टीम निरंतर सक्रिय रूप से कार्यरत हैं । संयोजन प्रमुख रूप से कॉलेज के मैनेजमेंट का रहता है।
कॉलेज के वालिया सभागार, जुबली हॉल, प्लेसमेंट हॉल और कॉलेज टर्फ का इन चार दिनों तक भरपूर उपयोग होता है।
सभी कार्य विद्यार्थियों द्वारा किए जाते हैं और उनका निर्देशन डीन ऑफिस द्वारा किया जाता है।
कॉलेज की मीडिया सूचना प्रभारी डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि सभी कॉलेज के प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों को हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराईं जाएंगी और सभी का यथायोग्य स्वागत किया जाएगा। वे चार दिन तक चलने वाले उमंग की प्रत्येक गतिविधियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभायेंगे ।
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह ने विद्यार्थियों को उमंग 2023 की अग्रिम बधाई और शुभकामनाएँ दी।
Thursday, December 21, 2023
भवानीपुर कॉलेज में उमंग का आगाज 22
भवानीपुर कॉलेज में साहित्य ,कला और संगीत महोत्सव "उमंग" का आगाज़: उमंग केवल उत्सव नहीं बल्कि युवा प्रतिभाओं का चुनाव महोत्सव है - - - बस इंतज़ार समाप्त - - 26-27-28-29 दिसंबर 2022
हर वर्ष की तरह भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज में "उमंग" - 22 का आगाज़ हो चुका है। कोलकाता की एलगिन रोड फिर से जाम होने वाली है, विद्यार्थियों की लाइन लगने वाली है। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज का सांस्कृतिक त्योहार "उमंग" आने वाला है क्रिसमस के साथ ही "उमंग" भी बस इंतज़ार समाप्त । "उमंग" केवल वार्षिकोत्सव नहीं है, वह युवा प्रतिभाओं का महोत्सव है, प्रतिभाओं का चुनाव उत्सव है।
कोलकाता के प्रतिष्ठित कॉलेजों के विद्यार्थियों में भी हलचल मच जाती है, होड़ लग जाती है कि कौन किस प्रतियोगिता में जीतेगा।
पिछले छह महीने से कॉलेज के विद्यार्थियों में "उमंग" में भाग लेने की तैयारियाँ जोर शोर से चल रही हैं। 18 कलेक्टिव जैसे क्रिसेंडो, फ्लेम, इन - एक्ट, फैशनिस्टा आदि और अन्य विद्यार्थियों में छिपी प्रतिभाओं को निखारने का काम "उमंग" करता है। 2022 विशेष इसलिए भी है कि "उमंग" दो साल बाद हो रहा है।
चार दिवसीय 26-27-28 -29 दिसंबर 2022 के चार दिन हर विद्यार्थी के लिए सचमुच उमंग, उत्साह - ऊर्जा से भर देने वाले होते हैं।
इस वर्ष "उमंग" की थीम "इंडिया 75 प्लस 25" है जो देश की आजादी के 75 वें वर्ष अमृत महोत्सव के दौरान आने वाले पच्चीस वर्ष कैसे होंगे?,बदलते भारत के उत्थान और समृद्धि को दर्शाने वाले भारत की तस्वीर पर आधारित है। "उमंग" की मंच सज्जा इसी थीम को लेकर की गई है जिसका काम जोरों से चल रहा है।
भवानीपुर कॉलेज कोलकाता के लगभग 50 कॉलेजों के प्रतिभागियों के बेहतरीन प्रदर्शन को मंच देने का महत्वपूर्ण कार्य करता है जो पूरे पश्चिम बंगाल के लिए एक मिसाल है। एजीसी बोस कॉलेज, आर्मी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, आसुतोष कॉलेज, बासंती कॉलेज, बेहला कॉलेज, बेंगाल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, भारतीय विद्या भवन, कोलकाता इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट, गोयनका कॉलेज आफ कॉमर्स एंड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, जे डी बिरला इंस्टीट्यूट डिपार्टमेंट ऑफ़ मैनेजमेंट, जे डी बिरला मैन केंपस, जोगमाया कॉलेज, लेडी ब्रेबोर्न कॉलेज, मेघनाद साहा इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, प्रफुल्ल चंद्र कॉलेज, रानी बिरला गर्ल्स कॉलेज, स्कॉटिश चर्च, सेठ आनंदराम जयपुरिया कॉलेज, श्री अग्रसेन कॉलेज, गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ आर्ट एंड क्राफ्ट, हरिमोहन घोष स्कूल ऑफ़ फैशन, हेरंबा चंद्र कॉलेज, हेरिटेज इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी लॉ कॉलेज, एसीएफए आई, बिजनेस स्कूल इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, जादवपुर यूनिवर्सिटी, टेक्नो मैन साल्ट लेक, दी भवानीपुर डिजाइन अकादमी, द भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज, द हेरिटेज अकादमी, टीएचके जैन कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता, वेदांत फाउंडेशन, वोमैंस क्रिश्चियन कॉलेज, एनएचएम, श्री शिक्षायतन, श्यामबाजार लॉ कॉलेज, निवेदिता यूनिवर्सिटी, सिस्टर निवेदिता स्कूल ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, शिवनाथ शास्त्री कॉलेज, सेंट जेवियर यूनिवर्सिटी, जेवियर कॉलेज, सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज, श्यामा प्रसाद कॉलेज, टेक्नो इंडिया इंस्टिट्यू ऑफ़ टेक्नोलॉजी आदि कॉलेज के प्रतिनिधियों ने भवानीपुर कॉलेज में मीटिंग की और इवेंट के दौरान किस तरह उन्हें कार्य करना है, इस पर विचार विमर्श किया।
"उमंग" केवल उमंग नहीं है वह एक ऐसा महोत्सव है जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में व्यवस्था, संगठन, नेतृत्व और आत्मविश्वास को विकसित करता है।
शैक्षणिक संस्था के माध्यम से इवेंट को किस तरह व्यवस्थित और संगठित करके सफल बनाया जाता है इस प्रकार की शिक्षा दी जाती है। इवेंट को समझना हर प्रोग्राम के कोऑर्डिनेटर को समझाना, किस जगह पर इवेंट होगा उसे बुक करना, गूगल फॉर्म बनाना, बजट बनाना और पास कराना, बजट की स्वीकृति की कॉपी रखना और उस पर निरंतर सलाह - मशवरा करना आवश्यक लिस्ट बनाना, वॉलिंटियर्स को पहचान पत्र देना और उनकी नियुक्ति करना, उनकी लिस्ट बनाना आदि, सलाह देना इवेंट के पहले हल्का संगीत बजाना, निर्धारित समय से 15 मिनट पहले एसी चलाना, प्रतिभागियों और वक्ताओं एवं निर्णायकों की नाश्ते की व्यवस्था करना, स्टेडियम में क्लिपबोर्ड की व्यवस्था करना, पोस्टर आदि लगवाना,रिपोर्टर, फोटोग्राफर की नियुक्ति करना और मेहमानों के हस्ताक्षर लेना, विजिटर डायरीज रखना, इवेंट्स ड्राइव में फोटो अपलोड करना, इसके साथ ही सभी कार्यक्रमों के फीडबैक का गूगल फॉर्म भरवाना इत्यादि अनेक कार्य सीखना होता है जो भविष्य में विद्यार्थियों को एक अच्छा संगठन कर्ता और अच्छा नागरिक बनाने में सहायक होते हैं।इस अवसर पर विभिन्न स्टॉल लगाए जाऐंगे। कॉलेज के वालिया सभागार, जुबली हॉल, प्लेसमेंट हॉल और कॉलेज टर्फ का इन चार दिनों तक भरपूर उपयोग होता है।
सभी कार्य विद्यार्थियों द्वारा किए जाते हैं और उनका निर्देशन डीन ऑफिस द्वारा किया जाता है जहांँ प्रमुख डीन प्रोफेसर दिलीप शाह एवं प्रोफ़ेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिव्या उदेशी का विशेष एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर, शिक्षक - शिक्षिकाएंँ, गैर शैक्षणिक स्टाफ एवं कैंटीन स्टाफ आदि विभिन्न लोगों का सहयोग और योगदान रहता है।
उमंग उत्सव में 50 से अधिक कॉलेजों के 83 इवेंट्स संपन्न किए जाएंगे जिनमें नृत्य, संगीत, खेल, सृजनात्मक लेखन बांग्ला, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में सृजनात्मक लेखन, शास्त्रीय, आधुनिक लोक संगीत, लोक नृत्य, पाश्चात्य नृत्य, नाटक स्ट्रीट प्ले, फैशन शो आदि विभिन्न इवेंट्स तीन दिनों तक चलेंगे और चौथे दिन बाहर से प्रसिद्ध गायक अरमान मल्लिक को बुलाया गया है जो सभी का मनोरंजन तो करेंगे जो विद्यार्थियों, अतिथियों तथा बंगाल के सांस्कृतिक वातावरण को समृद्ध करते हैं।फिल्मों के प्रसिद्ध गायक अरमान मल्लिक को इस बार आमंत्रित किया गया है जिनके गीत युवाओं के हृदय में बसे हैं।खेल में क्रिकेट, टग अॉफ वार, योग, फुटबाल, कबड्डी,खो खो, फिटनेस, बॉलीबॉल, बास्केटबाल आदि की प्रतियोगिताएं हो चुकी हैं। सभी विजेता छात्र - छात्राओं को उमंग में सम्मानित किया जाएगा।
"उमंग" का इंतजार अब खत्म होने वाला है ।
कॉलेज की प्रमुख प्रतिनिधि मेघाली सेनगुप्ता ने बताया कि सभी कॉलेज के प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों को हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराईं जाएंगी और सभी का यथायोग्य स्वागत किया जाएगा। हमारे 275 विद्यार्थी वोलिंटियर्स हैं जो चार दिन चलने वाले उमंग की प्रत्येक गतिविधियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभायेंगे।
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मिराज डी शाह ने विद्यार्थियों को उमंग 22 की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी। इसकी जानकारी डॉ वसुंधरा मिश्र ने दी ।
Monday, December 11, 2023
विशिष्ट अतिथि वक्ता - नारी वंदन अधिनियम बिल 23
राष्ट्र निर्माण मे महिलाओं की भूमिका और नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर परिचर्चा -
भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता शाखा द्वारा सात अक्टूबर 2023 में विषय 'नारीशक्ति वंदन अधिनियम के परिपेक्ष्य में राष्ट्र निर्माण मे महिलाओं की भूमिका' पर भारतीय भाषा परिषद के छोटे सभागार में एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। संस्थापक सलाहकार सरोज भंसाली और अंजू सेठिया ने कार्यक्रम की शुरुआत की। अध्यक्ष चंदा गोलछा ने सबका स्वागत किया। काफी महिलाओं ने अपने अपने विचार प्रकट किए। नवकार मंत्र कल्पना बाफना ममता पीचा, कविता सीमा बैद ,उषा बैद, जास्मिन, प्रमिला नाहर, निर्मला बागरेचा, सुनिता सेठिया, पल्लवी सेठिया, रेशम दुग्गड़ आदि ने विचार रखे। सरोज भंसाली ने आत्म साक्षात्कार पर गीत प्रस्तुति की। शब्दाक्षर की राष्ट्रीय मंत्री अनामिका सिंह ने महिलाओं की स्थिति पर अपने विचार व्यक्त किया। रचनाकार कवयित्री रीमा पांडे ने बेटियों पर गीत की प्रस्तुति दी । सुषमा छाजेड़ ने मुक्ता नैन का परिचय दिया।
आज के कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बिड़ला स्कूल डायरेक्टर मुक्ता नैन, भवानीपुर कालेज प्रोफेसर डाक्टर वसुंधरा मिश्र, छपते छपते अखबार और ताजा टीवी डायरेक्टर वरिष्ठ पत्रकार श्री विश्वंभर नेवर रहे । मुक्त नैन ने स्त्री महिलाओं की समस्याओं और राजनीति में 33% की भागीदारी को सार्थक बताया। बंगाल में भी महिलाओं के लिए शौचालय और नर्सिग की व्यवस्था करने का विचार आरक्षण का ही परिणाम है। डॉक्टर वसुंधरा मिश्र ने अपने वक्तव्य में स्त्रियों की प्रतिभा पर विशेष ध्यान देने को कहा। आरक्षण अभी दूर है। जाति जनगणना के आधार पर अभी उसमें समय लगेगा। स्त्रियां शुरू से ही समाज की स्तंभ रही हैं। विशंभर नेवर ने अपने वक्तव्य द्वारा महिलाओं को संबोधित करते हुए 33 परसेंट की भागीदारी के साथ सरकार और राजनीति पर विशेष वक्तव्य दिया जो महिलाओं के लिए प्रेरणादायी रहा। महिलाओं को अंधविश्वास को छोड़ना होगा और अपने महिला संगठन को प्रमुख धारा में आना होगा। महिला आरक्षण सभी महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर देगी। राजनीति में महिला एक स्वस्थ वातावरण देने में सक्षम है। सुषमा छाजेड़ ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
भारत जैन महामंडल की अंजू सेठिया ने कार्यक्रम संचालन और धन्यवाद ज्ञापन दिया । कार्यक्रम के पश्चात चाय नाश्ते का सुंदर प्रबंध किया गया।
रिपोर्ट भवानीपुर कॉलेज लाइब्रेरी में पढी़ गईं रस्किन बांड की कहानियाँ 23
भवानीपुर कॉलेज लाइब्रेरी में पढी़ गईं रस्किन बांड की कहानियाँ - - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने कॉलेज लाइब्रेरी के बुक रिडिंग सेशन के अंतर्गत रस्किन बांड की कहानियाँ पढ़ीं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य है विद्यार्थियों को पुस्तकें पढ़ने और लेखक के विषय में जानकारी मिले और पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़े।कार्यक्रम का संचालन उज्जवल करमचंदानी और प्रो. सोहेल अहमद ने किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ वसुंधरा मिश्र और चंपा श्रीनिवासन ने किया।
उज्जवल करमचंदानी ने लेखक का परिचय देते हुए कहा कि 19 मई 1934 में जन्मे रस्किन बांड अंग्रेजी भाषा के एक नब्बे वर्षीय विश्वप्रसिद्ध भारतीय लेखक हैं। उनके पिता, ऑब्रे अलेक्जेंडर बॉन्ड भारत में तैनात रॉयल एयर फ़ोर्स (RAF) के एक अधिकारी थे। उन्होंने शिमला के बिशप कॉटन स्कूल में पढ़ाई की। उनके पहले उपन्यास, द रूम ऑन द रूफ को 1957 में जॉन लेवेलिन राइस पुरस्कार मिला। 1992 में हमारे पेड़ स्टिल ग्रो इन द डेहरा, अंग्रेजी में उनके उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बॉन्ड ने बच्चों के लिए सैकड़ों लघु कथाएँ, निबंध, उपन्यास और किताबें लिखी हैं। 1999 में पद्मश्री और 2014 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।वह अपने दत्तक परिवार के साथ मसूरी के लंढौर में रहते हैं।
प्रातःकालीन कॉमर्स सत्र के प्रो सोहेल अहमद ने रस्किन बांड की कहानियों के शिल्प और बुनावट पर अपने विचार व्यक्त किए और आइज आर नॉट हियर कहानी का पाठ किया। इस कहानी ने अंत तक विद्यार्थियों को बांधे रखा उसमें निहित संदेश बहुत ही सुंदर था। प्रो सोहेल ने रस्किन बांड की रचनाधर्मिता पर विस्तार से जानकारी दी। प्रो सुभाषिश दासगुप्ता ने रस्किन बांड की कहानी के छोटे से अंश सुनाया जिसमें प्रौढ लोगों के लिए कुछ प्रश्न उठाए गए। प्रो रीना जोपट ने कहा कि बांड आज भी प्रासंगिक हैं। उनकी कहानियों पर फिल्म बनी है। विद्यार्थियों में कशिश साह ने रस्किन बांड की कहानी द ब्लू अमब्रेला सुनाई। गांव में रहने वालों के लिए एक नीली छतरी कितनी मूल्यवान है इस बात को दर्शाया गया है। छोटी-छोटी चीजों का कितना महत्व होता है इस पर चर्चा की। श्रेयांस ने कहानियों के प्रति अपनी रुचि के विषय में बताया।
देवांग नागर ने अपने बचपन में पढी़ गईं रस्किन बांड की विभिन्न कहानियों की खूबसूरती को बताया। उन्होंने बताया कि रस्किन बांड की कहानियों को पढ़ते समय समुद्र या उसका किनारा नहीं आता बल्कि मसूरी देहरादून कसौली के पहाड़ चिड़िया पेड़ पौधे झरने आदि आते हैं। लेखक के रूप में उनकी सृजनात्मकता विशिष्ट लेखन है। बांग्ला विभाग की प्रो सम्पा सिन्हा ने कहा कि पुस्तकें हमारे विचारों को प्रेरित करती हैं। हमारी रचनात्मकता को बढ़ाती हैं।
इस अवसर पर कॉलेज के रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह ने सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों का स्वागत किया। हमारे कॉलेज के लिए रस्किन बांड विथ बांड और कई पुस्तकों की चर्चा की। पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया।डीन प्रो दिलीप ने उत्साहवर्धन किया जिसके कारण विद्यार्थियों की उपस्थिति बड़ी संख्या में हुई। प्रो चंपा श्रीनिवासन ने कार्यक्रम के आरंभ में सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों का का स्वागत और धन्यवाद किया और कहा कि रस्किन बांड आज भी प्रासंगिक है। कहा कि बांड का साहित्य युग और समय से परे है।
अंत में, डॉ वसुंधरा मिश्र ने कहा कि लेखक और उसके लेखन को जानने से उसे पूर्णता में जानना है। लाइब्रेरी में होने वाले बुक रिडिंग सेशन के अंतर्गत हिंदी अंग्रेजी उर्दू और गुजराती आदि सभी भाषाओं में किताबों को पढ़ने के लिए आमंत्रित किया जाता रहा है। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
रिपोर्ट भवानीपुर कॉलेज ने किया मां दुर्गा का आवाह्न 23
भवानीपुर कॉलेज ने किया मांँ दुर्गा का किया आवाह्न - -
भवानीपुर एजुकेशन कॉलेज में धमाल कार्यक्रम में नवदुर्गा का आवाह्न किया इस अवसर पर गरबा की पूजा नलिनी पारेख के संयोजन से गुजराती परंपरा के अनुरूप गरबा की पूजा की गी। इसके पश्चात माँ दुर्गा की आरती की गई। भवानीपुर कॉलेज के अध्यक्ष रजनीकांत दानी ने इस अवसर पर दीप प्रज्वलित किया। साथ में मैनेजमेंट के प्रमुख पदाधिकारियों में शालिनी शाह, प्रदीप सेठ, बुलबुल भाई, उमेद भाई, राजू भाई रेणुका भट्ट, सोहिला भाटिया और उनके परिवार के साथ सभी ने आरती का शुभारम्भ किया। उसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। भारी संख्या में छात्र छात्राओं ने आरती की। सभी को पेड़ों का प्रसाद वितरित किया गया। सभी विद्यार्थियों को आरती की थाली दी गई। उन्होंने अपने भविष्य के लिए मां दुर्गा का आशीर्वाद लिया। मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और विश्वास प्रकट किया। गरबा का आरंभ सभी पदाधिकारियों और शिक्षक शिक्षिकाओं के गरबा नृत्य से हुआ। प्रोफेसर दिलीप शाह ने पूरे कार्यक्रम का संयोजन किया और सभी वालंटियर विद्यार्थियों ने पूरे कार्यक्रम को बहुत ही सुंदर व्यवस्था में परिणत किया। इस अवसर पर सभी ने रंग-बिरंगे पारंपरिक वेशभूषा गुजराती पहनावे और आधुनिक पहनावे सभी तरह के पहनावे से मां दुर्गा के सामने धुनूची नृत्य करके उन्हें श्रद्धा अर्पित की। सभी ने इस कार्यक्रम को बहुत ही ऊर्जा से भरा नृत्य और अंत में डीजे के साथ सभी विद्यार्थियों और शिक्षक गणों ने आनंद लिया ।इस कार्यक्रम में सभी विद्यार्थियों को अपने आईडी कार्ड और हाथ बैंड से ही प्रवेश दिया गया। बहुत ही स्वस्थ वातावरण में धमाल कार्यक्रम किया गया। पूरे कार्यक्रम का आयोजन डीन और रेक्टर प्रो दिलीप शाह प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी के निर्देशन में किया गया ।प्रो दिव्या उदेशी और प्रो समीक्षा खंडूरी और सभी शिक्षकों का भरपूर सहयोग रहा। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
देवी अवार्ड साहित्य टाइम्स 23
देवी अवार्ड 2023 - - - किसी ने सच कहा है कि घर में भाग्य से बेटा का जन्म होता है लेकिन जिनका सौभाग्य होता है उन्हीं के घर बेटी का जन्म होता है। j
भारत ही ऐसा देश है जहां स्त्री और बेटी को पूजा जाता है यह सम्मान स्वरूप रहा है। यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते तत्र रमन्ते देवता। बात सच है। इसे धर्म या जाति रंग रूप आदि के अर्थ में नहीं देखते हुए स्त्री के कार्यों को देखना चाहिए। इसे प्रतीकात्मक ढंग से सोचना चाहिए। एक स्त्री- बेटी पत्नी बहू मां
नानी दादी परदादी बहुत सारे रोल निभाती है। सच में स्त्री दस हाथों वाली और मनुष्यों के लिए सृष्टि की एक सुंदर रचना है।
नवरात्र के प्रथम दिन आज देवी अवार्ड 23 दिया जा रहा है। किसे दे रहे हैं जिन्होंने समाज को कुछ दिया है। सभी महिलाएं कार्य करती हैं लेकिन उनमें भी कुछ विशिष्ट पहचान लिए होती हैं। कोई शिक्षा, साहित्य, राजनीति, संस्कृति और कला, मीडिया, चिकित्सा, पब्लिक रिलेशन आदि विभिन्न क्षेत्रों में अपना महत्पूर्ण योगदान दिया है।
भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ कुसुम खेमानी निदेशक को साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए लिजेंड लाइफ टाइम एचीवमेंट 23 से नवाजा जा रहा है ।
पश्चिम बंगाल की राज्य वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को शेरा सम्मान 23 दिया जा रहा है । देवी अवार्ड 2023 में पब्लिक सर्विस में विशिष्ट कार्य के लिए काजोरी बंदोपाध्याय, शिक्षा में डॉ शुभ्रा उपाध्याय, साहित्य में दुर्गा व्यास , शिक्षा में मुक्ता नयन, उर्दू शिक्षा में नुसरत जहां, मीडिया और सांस्कृतिक क्षेत्र में अमृता नेवर, इंटरप्रिनर लोपामुद्रा मल्लिक, लोक नृत्य में भाविका पोपट, चिकित्सा में मानसी सिंघवी भायानी को अपने अपने क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान देने के लिए देवी अवार्ड 2023 देकर सम्मानित किया जा रहा है जो कोलकाता पश्चिम बंगाल और देश के लिए गौरव की बात है।
*देवी अवार्ड देवी सम्मान 2023 के इन सभी संस्थाओं का हार्दिक अभिनंदन - - -
साहित्य टाइम्स,विश्व गुजराती सखी समाज, भारतीय भाषा परिषद , 'Little Thespian ' और भारत जैन महामंडल महिला विंग के संयुक्त तत्वावधान में देवी अवार्ड 2023 के लिए उन सभी दस महिला प्रतिभाओं का स्वागत है, जिन्होंने परिवार,समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
निवेदन संस्थाओं में भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ कुसुम खेमानी,
भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता की संस्थापक और सलाहकार अंजू सेठिया ,
*श्री कोलकाता गुजराती समाज के अध्यक्ष रवीन्द्र वाघानी, विश्व गुजराती सखी समाज से भारती ठक्कर*
*लिटिल थेस्पियन सकी 11 प्रमुख उमा झुनझुनवाला एवं आफताब आलम*
*रचनाकार से आदरणीय सुरेश चौधरी रचना शरण सरन, रावेल पुष्प*
*शब्दाक्षर* ' से *रवि प्रताप सिंह व दया शंकर मिश्रा* ,
*साहित्यिकी* से कुसुम जैन, डॉ मंजुरानी गुप्ता, डॉ गीता दूबे,
*अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय संस्था से श्रीमती चंदा प्रहलादका*
*सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन से डॉक्टर संजय जायसवाल , प्रो मधु सिंह*
*वाराही से नीता अनामिका*
*All India Quomi Ekta Manch से आफताब अहमद खान , सतीश कपूर*
*तारा कैंसर फाउंडेशन से बाबू भाई पटेल, निपुन कोठारी*
*संयोजक समिति*
*नरेंद्र कपाडिया, असीम कुमार बोस राजेश वाघानी , भावना बेन हेमानी, धनिश सेठ दीपक गाठानी, मनीष सेठ , , डॉ केयुर मजमूदार, डॉ वसुंधरा मिश्र, डॉ अल्पना सिंह , श्री अमित मुंधड़ा, मनीषा बेन कोटेचा धर्मेश भिमानी , अभिषेक दोशी , जिनेश खारा , निशा सिंह राजपूत, रितु मजमूदार , जिनेश भंसाली , शक्ति कोठारी , पायल भंसाली, रितु पाठक झा रोशन कुमार झा एवं पूरी टीम की ओर से आप सभी को
देवी अवार्ड 2023 के लिए आमंत्रित किया जाता है।
*संचालन अंकित शाव*
तारा कैंसर फाउंडेशन से बाबू भाई पटेल, निपुन कोठारी , '
साहित्य टाइम्स और विश्व गुजराती सखी समाज, भारतीय भाषा परिषद , 'Little Thespian ' की ओर से
एवं पूरी टीम की ओर से आप सभी को
देवी अवार्ड 2023 के लिए शुभकामनाएं।
साहित्य टाइम्स और विश्व गुजराती सखी समाज, श्री कोलकाता गुजराती समाज, भारतीय भाषा परिषद, लिटिल थेस्पियन, भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता, के संयुक्त तत्वावधान में। साहित्यिकी शब्दाक्षर रचनाकार अभ्युदय, सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन #वाराही अॉल इंडिया कौमी एकता तारा कैंसर फाउंडेशन का पूर्ण सहयोगी संस्थाएं
मिलकर स्त्री प्रतिभाओं को सम्मान दे रहे हैं।मेरी पंक्तियाँ हैं - -
--स्त्री को नए स्वर दो
संसार को नये रंगों से सराबोर कर देगी
स्त्री को नया आकाश दो
अपनी प्रतिभा से परिवार समाज देश और विश्व को ऊंचाइयों तक पहुँचा देगी
स्त्री को उड़ान दो
प्रेम और करुणा के नए आयाम रचेगी
स्त्री की आवाज को सुनो पुरुष की सहयात्री समझो
दुनिया के आतंक मिट जायेगें।
हम प्रतिभाओं का सम्मान करेंगे तो और भी प्रतिभाओं का जन्म होगा। अपने स्थान महानगर में सम्मानित होना गौरव की बात है।
कहते हैं घर वाले सराहते हैं तो बाहर भी सम्मानित किया जाता है।
इस देवी अवार्ड 23 मेगा परियोजना के पीछे साहित्य टाइम्स के संस्थापक डॉ केयुर मजमूदार अमित मूंधड़ा और उनके सहयोगी हैं जिनके सद्प्रयास से हर वर्ष यह अवार्ड दिया जाता है। पिछले 6 वर्षों से यह दिया जा रहा है।
भवानीपुर के प्रमुख और लोकप्रिय@ पार्षद असीम दा का भरपूर सहयोग है।
नवरात्र के प्रथम दिन मां दुर्गा का श्रद्धा और विश्वास के साथ आवाह्न करते हुए यही चाहते हैं कि
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 बिल का लाभ आने वाली प्रतिभाशाली नारियों को मिले। बहुत सी और भी देवियाँ आगे आएं और देश को आगे बढ़ाने में योगदान प्रदान करें। चंद्रमा जो कल्पनाओं में था आज चंद्रयान मिशन में भी महिला वैज्ञानिकों का हाथ रहा। a
शक्ति दो ज्ञान दो साहस दो हे मां
अंधेरे को दूर कर रोशनी दो हे माँ
एक बार फिर धरती पर उतरो हे माँ
महिषासुरों का मर्दन कर स्वस्थ समाज दो हे माँ
स्वस्थ समाज दो हे माँ।
रिपोर्ट भवानीपुर कॉलेज ने मनाया इंटर कॉलेज गीत संगीत समारोह यूफोनियस 2023
भवानीपुर कॉलेज ने मनाया इंटर कॉलेज गीत संगीत समारोह यूफोनियस 23 - - -
किसी ने ठीक ही कहा है कि संगीत वह शराब है जो मौन के प्याले को भर देती है। भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (बीईएससी) ने इंटरकॉलेजिएट म्यूजिकल फेस्टिवल, यूफोनियस 23 की मेजबानी की। कॉलेज का संगीत समूह, 'क्रेसेन्डो' द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम कॉलेज परिसर के कॉन्सेप्ट और जुबली हॉल में हुआ। माधुर्य से भरे इस आयोजन का उद्घाटन समारोह प्रोफेसर दिलीप शाह के उत्साहवर्धक शब्दों से संपन्न हुआ। प्रो. शाह ने छात्रों को संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए स्वयं सिंथेसाइज़र पर कुछ भावपूर्ण धुनें बजाकर विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुति देकर अपने संगीत कौशल को सामने रखा। 6अक्टूबर 2023 को प्रातः काल 9 बजे से शाम 6.30 तक चलने वाले इंटर कॉलेज संगीत गीत महोत्सव में भाग लेने के लिए कोलकाता से कई कॉलेजों को आमंत्रित किया गया था। जेवियर्स कॉलेज, जादवपुर विश्वविद्यालय, द हेरिटेज कॉलेज, श्री शिक्षायतन कॉलेज, स्कॉटिश चर्च कॉलेज, हेरम्बा चंद्रा कॉलेज, एनएसएचएम और अन्य कॉलेज ने आयोजित कार्यक्रमों में सक्रिय भाग लिया और संबंधित श्रेणियों में अच्छा प्रदर्शन किया। विशेष अतिथि गायक और संगीतकार के रूप में कृष्णा मुखर्जी, डॉ. कौस्तव बनर्जी, सागर पॉल, मंडी सिंघा (कैप्टन सिंह ए) रहे। सबसे योग्य उम्मीदवार का चयन करने के लिए सौरभ चतुर्वेदी (दिलफेक), सौत्रिक बनर्जी और सुभाजीत गोस्वामी को प्रमुख निर्णायकों के रूप में आमंत्रित किया गया।
यूफ़ोनियस को कई उप-श्रेणियों में डिज़ाइन किया गया जिसमें सोलो ईस्टर्न: हेरंबा चंद्र कॉलेज पहले स्थान पर, जादवपुर विश्वविद्यालय दूसरे स्थान पर और श्री शिक्षायतन कॉलेज तीसरे स्थान पर रहा।सोलो वेस्टर्न: बीईएससी के थियो व्रीक गुप्ता ने जीत हासिल की, जबकि स्कॉटिश चर्च कॉलेज दूसरे और श्री शिक्षायतन तीसरे स्थान पर रहे।
एकल वाद्ययंत्र: बीईएससी (मुख्य) के सुजल सोनकर ने प्रथम पुरस्कार जीता, जबकि स्कॉटिश चर्च कॉलेज को प्रथम उपविजेता और बीईएससी (ओटीएसई) को द्वितीय उपविजेता घोषित किया गया।
सोलो बॉलीवुड: बीईएससी के प्रियांशु दत्ता ने जीत हासिल की, जबकि जादवपुर यूनिवर्सिटी दूसरे और हेरंबा चंद्रा कॉलेज तीसरे स्थान पर रहा।
सोलो रैपिंग: बीईएससी के आर्यन नसीम ने विजयी खिताब जीता, जबकि जादवपुर विश्वविद्यालय को प्रथम उपविजेता घोषित किया गया।
वेस्टर्न बैंड: जैसे ही बीईएससी वेस्टर्न बैंड ने विजेता ट्रॉफी हासिल की तो सिर ऊंचा हो गया।
बॉलीवुड बैंड: सेंट जेवियर्स कॉलेज ने विजेता ट्रॉफी अपने नाम की, जबकि बीईएससी ने दूसरा और जादवपुर विश्वविद्यालय ने तीसरा स्थान हासिल किया।
हमसुफी बैंड के सदस्यों (निर्णायक के रूप में आमंत्रित) ने दर्शकों के लिए "हल्का हल्का सुरूर" और "तेरी दीवानी" जैसे गाने प्रस्तुत किए। कैप्टन सिंह ए और दिलफेक ने शानदार अतिथि प्रस्तुतियां दीं और भीड़ को आश्चर्यचकित कर दिया। उन्होंने कहा, "हमने पहले भी यहां प्रदर्शन किया है और दोबारा प्रदर्शन करने में हमें हमेशा खुशी होगी।"निर्णायकों ने सभी भाग लेने वाले कॉलेजों की प्रशंसा की और विशेष रूप से उनमें से कुछ का उल्लेख करते हुए कहा, "यूफोनियस आत्मविश्वास पैदा करने, प्रतिभा को चित्रित करने और व्यावसायिकता की ओर बढ़ने का एक अद्भुत मंच है।" दर्शकों ने राग भैरवी, राग खमाज, जब दीप जले (राग यमन पर आधारित) जैसे "रागों" की जबरदस्त सुंदर प्रस्तुतियाँ भी सुनी ।प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न गीतों की प्रस्तुतियां दी जैसे 1 सुन ले जरा, मितवा, ओ रे पिया, दिल से रे, आई वांट टू ब्रेक फ्री, स्पीचलेस, स्टिल लविंग यू, चंदेलियर कुछ ऐसे गाने थे जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया। सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाले क्षणों में से एक सोलो वेस्टर्न श्रेणी में टाई-ब्रेकर था जहां स्कॉटिश चर्च कॉलेज, जादवपुर विश्वविद्यालय और श्री शिक्षायतन कॉलेज ने दूसरे और तीसरे स्थान को सुरक्षित करने के लिए एक-दूसरे के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
यूफोनियस'23 पुरस्कार वितरण समारोह के साथ समाप्त हुआ। प्रोफेसर शाह ने अपने वक्तव्य में कहा कि सफलता अंतिम नहीं होती और असफलता घातक नहीं होती और सभी प्रतिभागियों को उनकी उत्कृष्ट खेल भावना के लिए प्रोत्साहन और बधाई दी।
समग्र श्रेणियों में बीईएससी ने जीत हासिल की जबकि जादवपुर विश्वविद्यालय ने दूसरा पुरस्कार हासिल किया। इस दिलचस्प और मनमोहक संगीतमय यात्रा ने हर किसी के चेहरे पर एक व्यापक मुस्कान छोड़ दी और उनके दिलों को जबरदस्त खुशी से भर दिया। यह आयोजन कॉलेज प्रतिनिधि देवांग नागर, एंकर तुशिता चुघानी, अक्षित रे, लक्ष्य शर्मा, निष्ठा शाह, आतिथ्य टीम और पीसीएस स्वयंसेवकों के पूर्ण समर्थन के बिना संभव नहीं होता।कार्यक्रम की रिपोर्ट धृति मेहता और समृद्ध नंदी और फोटोग्राफी पारस गुप्ता, साग्निक घोष, सुवम गुहा ने मिलकर की। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
रिपोर्ट इटली में आयोजित 5वीं विश्व शतरंज बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने जीते कांस्य पदक
इटली में आयोजित 5वीं विश्व शतरंज बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने जीते कांस्य पदक - -
इटली में आयोजित पांचवीं विश्व शतरंज बॉक्सिंग चैंपियनशिप भारतीय चेसबॉक्सिंग टीम ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया।
शतरंजबॉक्सिंग एक अनोखा और दिलचस्प खेल है जो शतरंज की बौद्धिक चुनौती को मुक्केबाजी की भौतिक मांगों के साथ जोड़ता है। यह खेल शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से भी फिट रहने के लिए प्रेरित करता है।
5वीं विश्व शतरंजबॉक्सिंग चैंपियनशिप 28 अक्टूबर से 2 नवंबर 2023 तक रिकसिओन, इटली में आयोजित की गई थी।
चेसबॉक्सिंग के इतिहास में यह भव्य चैंपियनशिप उल्लेखनीय है इसलिए है कि विश्व में चेसबॉक्सिंग के 20 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया।
भारतीय शतरंज मुक्केबाजी संगठन के संस्थापक और अध्यक्ष मोंटू दास के नेतृत्व में टीम इंडिया ने इस मेगा आयोजन में भाग लिया।प्रेरित टीम ने विभिन्न चेसबॉक्सिंग स्पर्धाओं में 2 स्वर्ण, 4 रजत और 6 कांस्य पदक जीते-
सेंचुरी प्लाईबोर्ड्स इंडिया लिमिटेड के कर्मचारी और प्रायोजित आशुतोष कुमार झा ने सीनियर पुरुष -95 किलोग्राम वर्ग में दो कांस्य पदक जीते।
भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की छात्रा और प्रायोजित खुशी लाकड़ा ने सीनियर महिला -70 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता।किंग्शुक साहा ने सीनियर पुरुष -60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता।नोंगशा सिंह ने सीनियर पुरुष -75 किग्रा वर्ग में एक रजत और एक कांस्य पदक जीता। एमएस प्रतिभा थक्कड़पल्ली ने सीनियर महिला -48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। स्नेहा संजय वायकर ने सीनियर महिला -55 किग्रा वर्ग में दो रजत और एक स्वर्ण पदक जीता, माधवी रामचन्द्र गोनबारे ने सीनियर महिला -50 किग्रा वर्ग में दो रजत पदक जीते।पिछले लगातार वर्षों में भारत ने समग्र रूप से सभी चैंपियन ट्रॉफी जीतता आ रहा और भी मजबूत वापसी की उम्मीद रही है। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
टिप्पणी शोधकार्य शिल्प कला
निष्कर्ष - - - भारतीय सभ्यता में वास्तुशिल, मूर्ति कला और शिल्प की जड़ें इतिहास में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। भारतीय मूर्ति कला में स्त्री आकृतियों को अधिक देखा गया है जिसमें पतली कमर, उनके लचीले अंगों को कई दृष्टि से चित्रित किया गया है। भारतीय मूर्तियों में पेड़ - पौधों, जीव- जंतुओं और अनगिनत देवी- देवताओं की मूर्ति कला के उत्कृष्ट नमूने देखे जा सकते हैं। भारत में सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर दक्षिण के मंदिरों, वाराणसी के मंदिरों की नक्काशी, मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर, उड़ीसा के सूर्य मंदिर, सांची स्तूप, सारनाथ संग्रहालय, महाराष्ट्र के एलिफेंटा की गुफाएं, हिंदू, जैन मंदिर आदि बहुत सी- मूर्ति कलाएं पूरे विश्व में अपना उच्चतम स्थान रखती हैं।
भारतीय समाज में नारी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उसके विकास में ही समाज का विकास निहित है। नारी के अभाव में सृष्टि की कल्पना संभव नहीं है। सभ्यता के उदय के साथ ही मानव जाति का विकास करना ही मानव का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य रहा है। यह कार्य निरंतर स्त्रियों के द्वारा ही होता आया है। वैदिक काल से आधुनिक काल तक कला संस्कृति समाज आदि में कई परिवर्तन हुए हैं और उनका प्रभाव हम देखते आ रहे हैं। इतिहास में आता है की अश्वमेध यज्ञ के अवसर पर राम ने सीता की स्वर्ण प्रतिमा निर्मित करवा कर यज्ञ की पूजा पूर्ण की। वास्तुकला, मूर्ति कला और शिल्प कला से ही मनुष्य सभ्यता और संस्कृति से जुड़ा रहा।
किसी भी प्राचीन तस्वीर, पेंटिंग, पांडुलिपियां, स्मारक इत्यादि हमें उसके अतीत के बारे में जानकारी देते हैं। ऐसी चीजें हमें उनके विचारों और जीवन जीने के तरीकों को एक कला के रूप में परिभाषित करते हैं। पृथ्वी पर कई जीव रहते हैं, लेकिन उनमें से मनुष्य ही केवल अपने विचारों और अभिव्यक्तियों को व्यक्त करने की क्षमता रखता है। मनुष्य के जीवन में हर चीज में कला छुपी हुई हैं।बिना किसी नवीनता/नयेपन के मनुष्य का जीवन जानवरों के जैसा प्रतीति होता है। हमारे देश के अनेक हिस्सों में शानदार प्राचीन मूर्तियां, कलाकृतियां, चित्र आदि प्राचीन कला के महान उदहारण के रूप में देखने को मिलते हैं। क्या यह सब सच नहीं है? कला एक ऐसी चीज है जो प्राचीन काल के लोगों की कल्पना शक्ति और उनकी रचनात्मकता को दर्शाती है। यह सब केवल उस कला से सम्बंधित है जो हमें अपने अतीत के लोगों से जोड़ती हैं।हमारे देश की संस्कृति मूल रूप से हमारे जीवन जीने के तरीकों को दर्शाती है। यह हमारे रीति-रिवाजों, विचारों, धर्मों, मान्यताओं, नैतिकताओं इत्यादि के बारे में बताता है, जिसका अनुसरण लोग अपने जीवन जीने के तरीकों में उपयोग करते हैं। बिना कला के संस्कृति को प्रकट नहीं किया जा सकता है। कला एक जादू की तरह है जो विभिन्न धर्मों और उनके संस्कृतियों के बीच अंतर करने में हमारी मदद करता है। संस्कृति लोगों के भोजन, कपड़े, भाषा, त्योहार और उनके धर्मों को अलग-अलग रूप से प्रदर्शित करता हैं। इस तरह से प्रत्येक धर्म एक विशिष्ट संस्कृति और परंपरा का प्रतिनिधित्व करते है।
सृष्टि की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में स्त्री-पुरुष आते हैं।भारतीय स्त्रियां संस्कृति की विरासत के रूप में जानी जाती हैं। यह सच है कि स्त्रियों को वह स्थान नहीं मिला जितना मिलनी चाहिए। हर कला साहित्य संस्कृति में उनकी उपस्थिति रही है इस बात से भी नकारा नहीं जा सकता है क्योंकि पुरुषों द्वारा निर्मित कलाकृतियों में स्त्रियों का योगदान रहा है। कहते हैं कि हर कामयाब पुरुष के पीछे एक स्त्री का हाथ होता है। वर्तमान में कहते हैं कि हर स्त्री की सफलता बिना पुरुष के नहीं है।
महिलाएं आज हर क्षेत्र में परचम लहरा रही है। खासकर कला और संस्कृति के क्षेत्र में तो महिलाएं अपना दबदबा बनाए हुए हैं। मूर्ति कला जो पहले पुरुषों तक ही सीमित थी अब महिला मूर्तिकार भी इस क्षेत्र में अपनी जड़ें जमाने लगी हैं।
प्रथम अध्याय में - - -, द्वितीय अध्याय में - - -
तृतीय अध्याय में - - -
चतुर्थ अध्याय में - - -
पंचम अध्याय में - - -
प्रमुख विषयों को लिया गया।
प्रस्तुत शोध ग्रंथ वर्तमान समय में महिला मूर्तिकारों की कलाकृतियों में उनकी अपनी विचारधारा और शिल्प विषयक भावों को उभारने का प्रयास है। महिला मूर्तिकारों की इस नयी पौध को पहचान देना समाज, देश के लिए मैं एक हितकर कदम समझता हूं। देश की महिलाओं का शिक्षा, साहित्य, कला और संस्कृति में उनके महत्वपूर्ण योगदानों को स्थान मिले, इस आशा से यह शोध विषय लिया गया है।
रिपोर्ट अभिनेता विक्की कौशल का स्वागत किया भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने
अभिनेता विक्की कौशल का स्वागत किया भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने - - - प्रसिद्ध गीत 'माथे पे तिलक जय हिंद लगा वो मेरी निशानी है' फिल्म 'सैम बहादुर' के लोकप्रिय अभिनेता विक्की कौशल का स्वागत भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने किया।विक्की कौशल एक भारतीय अभिनेता हैं जिन्हें 2015 में पुरस्कार विजेता फिल्म मसान में उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है,उरी सर्जिकल स्ट्राइक में विक्की कौशल ने एक सैनिक की भूमिका निभाई थी जिसमें बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला था। सैम बहादुर फिल्म में विक्की कौशल ने मानेकशॉ का जबर्दस्त अभिनय किया है जो रिलीज होने वाली है। फिल्म सैम बहादुर फिल्म के प्रोमो के लिए विक्की कौशल भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी में आए और अपनी फिल्म के प्रोमो को विद्यार्थियों के साथ देखा जो एक दिसम्बर को रीलिज होगी।
यह फिल्म फील्ड मार्शल सैम बहादुर यानि सैम हॉरमुसजी फेम जी जमशेद जी मॉनेक शॉ की बायोपिक पर बनी है। इस फिल्म की निर्देशक मेघना गुलजार हैं। बड़ी संख्या में उपस्थित विद्यार्थियों ने गीतों का आनंद लिया। तू मेरा कोई ना अपना बना ले पिया, फलक से चांद लाऊंगा, वेवफा झूठा प्यार, आदि पंजाबी की कई गीतों की धुन पर सभी छात्र छात्राएँ थिरकते रहे।
कॉलेज के मैनेजमेंट के पदाधिकारियों, रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह और उपाध्यक्ष मिराज डी शाह, शिवानी डी शाह, सोहिला भाटिया ने विक्की कौशल का स्वागत किया ।छात्राओं ने विक्की कौशल का पोट्रेट देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कॉलेज के फ्लेम और इन एक्ट कलेक्टिव ने विक्की कौशल की फिल्मों से विभिन्न नृत्य और सैन्य नाट्य प्रस्तुति दी । मेरा हीरो विक्की विक्की चिल्लाते हुए जोरशोर से हर कदम पर जोश दिखाया जिसे विक्की कौशल ने बहुत पसंद किया ।
विक्की कौशल ने बताया कि इस फिल्म में सभी सैनिक वास्तविक हैं और इसके लिए उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को सैल्यूट किया साथ में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भी किया। फील्ड मार्शल का पद धारण करने वाले सैम बहादुर पहले भारतीय सैन्य अधिकारी थे। मानेकशॉ सैम बहादुर नाम से प्रसिद्ध हुए। सैम बहादुर 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय सेना अध्यक्ष थे और फील्ड मार्शल का पद धारण करने वाले पहले भारतीय सैन्य अधिकारी थे। सैम बहादुर का सैनिक करियर द्वितीय विश्व युद्ध से आरंभ होकर चार दशकों और पांच युद्ध तक विस्तृत रहा।
विक्की कौशल ने विद्यार्थियों के साथ अपनी सेल्फी और बातें शेयर की। यह कार्यक्रम भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के टर्फ पर हुआ।रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी समीक्षा खंडूरी और वोलिंटियर्स विद्यार्थियों द्वारा यह कार्यक्रम बहूत ही कम समय में आयोजित किया गया। इसकी जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
अनु सिंह चौधरी स्क्रिप्ट राइटर
अनु सिंह चौधरी ने विभिन्न प्रकार के लेखन में काम किया है, वह एक पत्रकार, स्क्रीन राइटर, अनुवादक, निर्माता और एक लेखिका रही हैं, वह डोपामाइन मीडिया और मनोरंजन की सह-संस्थापक हैं और आर्य ग्रहण और स्कोप जैसी कई श्रृंखलाओं के लिए स्क्रीन राइटर रही हैं। उसका संग्रहलघु कथाएँ नीला और संस्मरण मामा की डायरी पाठकों के प्रकाशन के बाद उनकी सफलता के बावजूद उन्हें लगता है कि उनके पास अपने कामकाजी जीवन और चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए और अधिक रास्ते हैं, वह कलाम के नवीनतम सत्र में निधि दार एहसास, भुवनेश्वर की महिलाओं के साथ बातचीत कर रही थींप्रभा खेतान फाउंडेशन और श्री सीमेंट लिमिटेड के सहयोग से बंगाल क्लब में, कवि, पत्रकार और भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के एक सदस्य, वसुंधरा मिश्रा, चौधरी और गर्ग ने चौधरी और गर्ग का परिचय कराया और स्वागत भाषण दिया।
वास्तविकता के साथ-साथ कल्पना की दुनिया रोशनी की स्थिति में विद्यमान है, सीमांतता की स्थिति उसकी प्रतिक्रियाशीलता में मदद करती है, वास्तव में नीला स्कार्फ में बहुत सारी कहानियाँ रात के सप्ताह के घंटों में कल्पना की गई थीं जब उसने उसे दोस्त के साथ बिस्तर पर लिटाया था, मुझे लगता है लेखक सिज़ोफ्रेनाइट्स हैं क्योंकिवे लगातार दो शब्दों में कहते हैं कि काल्पनिक दुनिया इतनी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वह लेखक ब्रैड और बटर हैं लेकिन जब लेखक एक विशेष दुनिया से संबंधित नहीं होता है तो उसके पास विभिन्न दुनिया का हिस्सा बनने की लचीलापन होती है जिससे वह प्रेरणा ले सकता है। उनकी कहानियाँ मैं हूँउन्होंने कहा, लिम्बो की स्थिति में सबसे रचनात्मक, जैसे कि हवाई अड्डे या वेटिंग लाउंज में जहां आप कोई और नहीं बल्कि वह चरित्र होते हैं जिसे आपने बनाया है।
उन चुनौतियों के बारे में बोलते हुए जिनका उन्हें सामना करना पड़ा जब उन्हें धूल टीवी श्रृंखला तनुजा तनुजा को आर्य चौधरी बनाने के लिए अनुकूलित करना पड़ा, उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी कठिनाई मूल पाठ के प्रति निष्ठा उर्वरता बनाए रखने की थी, अनुकूलन को न केवल मूल कहानी के प्रति सच्चा रहना होगा बल्कि भीकार्यकारी होना होगा बस उस काल और समाज की जीत जो वह दिखाना चाहता हैलिखना अपने आप में अनुकूलन का एक काम है, वह आपके चारों ओर सोचती है और फिर आप उन्हें शब्दों में ढालते हैं। लिखना अपने आप में आपका कफ अनुकूलन है। आप अपने आस-पास की चीजों को देखते हैं और फिर आप उन्हें शब्दों में ढालते हैं। जब मैंने एक स्क्रीन राइटर के रूप में काम करना शुरू किया तो मैं देख रहा था। उस कार्य के लिए जो होना आवश्यक हैएक पटकथा लेखक के रूप में मेरे पहले काम को सत्य व्यास के उपन्यास '84' को 400 दृश्यों वाली एक श्रृंखला में रूपांतरित करना था, पहली चुनौती उस काम की आत्मा के प्रति सच्चा रहना था जिसे मैं उस नई दुनिया का साक्षात्कार कर रहा था जिसे आप बना रहे हैं। शब्द की आत्मा के प्रति सच्चाआप जिस चीज़ को अपना रहे हैं वह सबसे बड़ी चुनौती है, एक भाषा से दूसरी भाषा में, एक माध्यम से दूसरे माध्यम में या विस्तृत चौधरी से अनुकूलन करना
चौधरी के कई कार्यों में ऐसी महिलाओं को दिखाया गया है जो अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन के बीच संतुलन खोजने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं, क्योंकि वे खुद को एक मां, पत्नी और महत्वाकांक्षी पेशेवर के रूप में अपनी भूमिकाओं को पूरा करने की कोशिश में कठिन परिस्थितियों में पाती हैं, जो कि अधिकांश शिक्षित लोगों के सामने आने वाली इस दुविधा के बारे में बोलती हैंशहरी महिला चौधरी का मानना है कि महिलाओं का जीवन बातचीत के केंद्र में है, महिलाओं को न केवल अपने पेशेवर जीवन में बल्कि अपने व्यक्तिगत जीवन में भी लगातार बातचीत करनी होती है, उन्हें अपने झगड़े और प्राथमिकताएं चुननी होती हैं, फिर उन्हें सभी के साथ बातचीत करनी होती हैउन पर टिके रहोलेकिन चौधरी का यह भी मानना है कि महिला सशक्तिकरण शून्य में नहीं होता है, अगर महिलाएं जीवन में प्रगति करने में सक्षम हैं तो यह कुछ हद तक उन पुरुषों के कारण है जिन्होंने ऐसे स्थान बनाए हैं जहां महिलाएं अपने विचारों को व्यक्त करने और उन्हें आगे बढ़ाने में सुरक्षित महसूस करती हैं।
मेरे सबसे बड़े सहयोगी मेरे आस-पास के पुरुष हैं, मायक्राफ्ट के सबसे शुरुआती समर्थक मेरे भाई और पिता थे, मेरे काम को प्रकाशित करने वाले पहले व्यक्ति वे सभी मेल निर्देशक थे, जिनके साथ मैंने महिला पात्रों और ईमानदारी से चित्रित चित्रों के साथ काम किया है। व्यापारिक महिलाओं के लिएसंवेदनाएं न केवल महिलाओं को बल्कि पुरुषों को भी दबाने में कामयाब रही हैं, महिलाओं को पुरुषों के समर्थन से या तो उन चुनौतियों से फायदा हुआ है जो उनके सामने खड़ी की गई थीं
अनु सिंह चौधरी रिपोर्ट
प्रभा खेतान फाउंडेशन और एहसास ने अनु सिंह चौधरी
लेखक, अनुवादक एवं फ़िल्म निर्माता से की एक मुलाकात--
ज्ञान संस्कृति धरोहर कला और कारोबार के केंद्र कोलकाता महानगर में प्रभा खेतानफाउंडेशन द्वारा आयोजित कलम कोलकाता के सत्र में अनु सिंह चौधरी से मुलाकात की। इसी बंग भूमि पर प्रख्यात नारीवादी लेखिका उद्यमी और परोपकारी डॉक्टर प्रभा खेतान ने 80 के दशक में प्रभा खेतान फाउंडेशन की स्थापना की थी। तब से आज तक फाउंडेशन कला ,साहित्य, शिक्षा और संस्कृति के साथ ही महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अपने काम के कारण दुनिया भर में जाना जाता है। फाउंडेशन की गतिविधियां भारत और विदेश के 40 से भी अधिक शहरों तक पहुंच चुकी है और इसके आगे बढ़ने का सिलसिला लगातार जारी है। कलम का यह आयोजन अपनी भाषा अपने लोग की सोच को बढ़ावा देने वाली एक विशेष पहल का हिस्सा है। कलम के अलावा फाउंडेशन किताब लफ्ज़ एक मुलाकात सुर और साज आखर जैसे कार्यक्रम भी करता है। कलम और ऐसे दूसरे आयोजनों का मकसद भी सम्मानित और कई उदीयमान लेखकों कलाकारों को ऐसा मंच मुहैया कराना है जहां वे चुने हुए प्रशंसकों और पाठकों से सीधे जुडते हैं।
इस सत्र मेंअनु सिंह चौधरीअतिथि लेखिका जुड़ी हैं जिनका दखल विविध विधाओं में है। आप बेस्ट सेलिंग लेखक, वृत्त चित्र, फिल्म निर्माता, पुरस्कार विजेता, पत्रकार और पुरस्कृत पटकथा लेखक हैं। इन क्षेत्रों में आपने दो दशकों से अधिक का अनुभव प्राप्त किया है ।एक पटकथा लेखक के रूप में आपने नामांकित आर्य सीजन 1 2 और 3 का सहलेखन किया है तो डिजनी हॉटस्टार के लिए ग्रहण और नेटफ्लिक्स के लिए स्कोप के अलावा द ग्रेट इंडियन किचन का रूपांतरण भी लिखा है। आपने हैप्पी टीचर्स डे के लिए अतिरिक्त पटकथा और संवाद भी लिखे हैं ।डोपामिन मीडिया की संस्थापक के रूप में आपने नेटफ्लिक्स के लिए अल्मा मैटर्स : इंसाइड व आईआईटी ड्रीम नामक डॉक्यूमेंट्री सीरीज के सहनिर्माण के साथ ही यूट्यूब पर 'द गुड गर्ल शो' का लेखन और निर्देशन किया है। 2013 में पत्रकारिता में उत्कृष्ट कार्य के लिए रामनाथ गोयनका पुरस्कार और ग्रामीण भारत पर आधारित रिपोतार्ज के लिए 2012 में लाडली मीडिया और विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
एनडीटीवी से पत्रकार के रूप में अनु ने अपना करियर शुरू किया और स्टार इंडिया के स्टार राइटर्स प्रोग्राम से भी जुड़ी रहीं। राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फेलो और राइटर इन रेजिडेंस रह चुकी चौधरी तीन सर्वाधिक बिक्री वाली पुस्तकों की लेखिका और सर्वाधिक बिक्री वाली 20 से अधिक पुरस्कार विजेता पुस्तकों की अनुवादक है। भारतीय महिलाओं के जीवन और समय पर आपके स्तंभ अक्सर आउटलुक, स्क्रोल, द वायर, फर्स्ट पोस्ट, राजस्थान पत्रिका, गांव कनेक्शन और सत्याग्रह जैसे प्रमुख प्रकाशनों में दिखाई देते हैं। वर्तमान में आप अपने अगले उपन्यास और एक फिल्म की पटकथा पर काम कर रही हैं जिसका निर्देशन और सहनिर्माण आप 2024 में करेंगी।
उनके कामों की सूची में हमारी बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ाने के लिए हमारे बीच एहसास वूमेन भुवनेश्वर से निधि गर्ग आमंत्रित की गई है जिन्होंने मंच के द्वारा उनके अनुभवों को साझा किया।
उनका लघुकथा संग्रह नीला स्कार्फ़ और संस्मरण मामा की डायरी प्रकाशन के कई वर्षों बाद भी आज पाठकों में लोकप्रिय है। उनकी सफलता के बावजूद उन्हें लगता है कि उनके पास अपने कामकाजी जीवन और चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए और भी अधिक रास्ते खुले हैं।
यह बातचीत प्रभा खेतान फाउंडेशन, श्री सीमेंट लिमिटेड और मीडिया पार्टनर ताजा टीवी के सहयोग से कोलकाता के बंगाल क्लब में आयोजित हुआ।कार्यक्रम के आरंभ में कवि, पत्रकार और भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की हिंदी प्राध्यापिका डॉ वसुंधरा मिश्र ने प्रभा खेतान फाउंडेशन के मंच से स्वागत वक्तव्य देते हुए प्रभा खेतान फाउंडेशन की गतिविधियों की जानकारी दी और प्रसिद्ध स्क्रिप्ट राइटर अनु सिंह चौधरी और मनोवैज्ञानिक डॉ निधी गर्ग का परिचय दिया।
निधि गर्ग ने अनु चौधरी से उनकी सृजन यात्रा के अनुभवों और विभिन्न चुनौतियों से संबंधित लेखन, रूपांतरण और एक महिला होने के कारण मीडिया में आपने कैसे स्थान बनाया आदि के विषय में बातचीत की। बहुत ही चर्चित कहानी संग्रह
नीला स्कार्फ से बातचीत का सिलसिला आरंभ हुआ।
अनु सिंह ने विस्तार से अपनी बातों को श्रोताओं के साथ साझा की। बताया कि नीला स्कार्फ़ की बहुत सारी कहानियाँ रात के उन चंद घंटों में कल्पना की गई जब उसने उसे दोस्त के साथ बिस्तर पर लिटाया था, मुझे लगता है लेखक सिज़ोफ्रेनाइट्स होते हैं क्योंकि वे लगातार जिन शब्दों में कहते हैं उस समय लगता है कि वह काल्पनिक दुनिया बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वह लेखक का ब्रैड और बटर है । लेकिन जब लेखक एक विशेष दुनिया से संबंधित नहीं होता है तो उसके पास विभिन्न दुनिया का हिस्सा बनने का लचीलापन होता है जिससे वह प्रेरणा ले सकता है। उनकी कहानियाँ मैं हूँ। उन्होंने कहा, लिम्बो की स्थिति में सबसे रचनात्मक, जैसे कि हवाई अड्डे या वेटिंग लाउंज में जहां आप कोई और नहीं बल्कि वह चरित्र होते हैं जिसे आपने बनाया है।
अपनी रचनात्मकता की उन चुनौतियों के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि जिनका उन्हें सामना करना पड़ा जब उन्हें डस्ट टीवी श्रृंखला पेनोजा को आर्या सीरीज बनाने के लिए अनुकूलित करना पड़ा, उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी कठिनाई मूल पाठ के प्रति निष्ठा उर्वरता बनाए रखने की होती है।
अनुकूलन को न केवल मूल कहानी के प्रति सच्चा रहना होता है बल्कि उस काल और समाज की जीत जो वह दिखाना चाहता है उसे लिखना अपने आप में अनुकूलन का एक काम है, वह आपके चारों ओर की घटनाओं के बारे में सोचते हैं और फिर आप उन्हें शब्दों में ढालते हैं। लिखना अपने आप में भी रूपांतरण है। आप अपने आस-पास की चीजों को देखते हैं और फिर उन्हें शब्दों में ढालते हैं।
उन्होंने बताया कि जब मैंने एक स्क्रीन राइटर के रूप में काम करना शुरू किया तो पटकथा लेखक के रूप में मेरा पहला काम सत्या व्यास के उपन्यास 'चौरासी ' को 400 दृश्यों वाली एक श्रृंखला में रूपांतरित करना था। पहली चुनौती उस काम की आत्मा के प्रति सच्चा रहना था जिसमें मैं उस नई दुनिया का साक्षात्कार कर रही थी। जिसे बना रही थी । शब्द की आत्मा के प्रति सच्चा होना पड़ता है जिस चीज़ को अपना रहे हैं वह सबसे बड़ी चुनौती है, एक भाषा से दूसरी भाषा में, एक माध्यम से दूसरे माध्यम में या विस्तृत से अन्य माध्यमों में अनुकूलन करना।
हिंदी और भोजपुरी बेल्ट से आने वाली अनु ने हिंदी भाषा को अपना माध्यम बनाया जो फिल्म और वेब सीरीज में नया प्रतिमान है।
चौधरी के कई कार्यों में ऐसी महिलाओं को दिखाया गया है जो अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन के बीच संतुलन खोजने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं, क्योंकि वे खुद को एक मां, पत्नी और महत्वाकांक्षी पेशेवर के रूप में अपनी भूमिकाओं को पूरा करने की कोशिश में कठिन परिस्थितियों में पाती हैं, जो कि अधिकांश शिक्षित लोगों के सामने आने वाली इस दुविधा के बारे में शहरी महिलाएं बोलती हैं। चौधरी का मानना है कि महिलाओं का जीवन बातचीत के केंद्र में है, महिलाओं को न केवल अपने पेशेवर जीवन में, बल्कि अपने व्यक्तिगत जीवन में भी लगातार बातचीत करनी होती है, उन्हें अपने झगड़े और प्राथमिकताएं चुननी होती हैं, फिर उन्हें सभी के साथ बातचीत करनी होती है। उन पर टिके रहो लेकिन चौधरी का यह भी मानना है कि महिला सशक्तिकरण शून्य में नहीं होता है, अगर महिलाएं जीवन में प्रगति करने में सक्षम हैं तो यह कुछ हद तक उन पुरुषों के कारण है जिन्होंने ऐसे स्थान बनाए हैं जहां महिलाएं अपने विचारों को व्यक्त करने और उन्हें आगे बढ़ाने में सुरक्षित महसूस करती हैं।मीडिया पार्टनर ताजा टीवी के डायरेक्टर वरिष्ठ संपादक विश्वंभर नेवर ने अनु चौधरी से पत्रकारिता विषय पर चर्चा की।
कोलकाता के उपस्थित प्रबुद्ध लोगों ने प्रश्न भी पूछे जिसमें अंजू सेठिया आदि रहे। प्रभा खेतान फाउंडेशन की ओर से अनु सिंह चौधरी का सम्मान शॉल ओढ़ा कर किया गया। डॉ कृपाशंकर चौबे,सेराज बातिश, डॉ सत्य प्रकाश दूबे साहित्यकार आदि उपस्थिति रही। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
रिपोर्ट इंट्रा कॉलेज एथलेटिक मीट ऊर्जा 2023 मनाया भवानीपुर कॉलेज ने
इंट्रा कॉलेज एथलेटिक मीट ऊर्जा 2023 मनाया भवानीपुर कॉलेज ने - -
गीतांजलि स्टेडियम में भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के छात्र- छात्राओं ने इंट्रा एथलेटिक मीट ऊर्जा 2023 के अंतर्गत स्पोर्ट्स और एथलीट्स के प्रदर्शन, कॉरनिवाल फेस्ट और फनफेयर रहा। 22 नवंबर को उद्घाटन समारोह में कॉलेज के अध्यक्ष रजनीकांत दानी और रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह ने मशाल प्रज्वलित कर खेल का आरंभ किया। 50 विद्यार्थियों ने समूह नृत्य से खिलाडियों का उत्साहवर्धन किया। साथ में, कॉलेज के डायरेक्टर जनरल डॉ सुमन मुखर्जी, मैनेजमेंट पदाधिकारियों में जीतू भाई, उमेद ठक्कर और प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो समीक्षा खंडूरी, डॉ वसुंधरा मिश्र, प्रो विवेक पटवारी, प्रो चंदन झा, प्रो दर्शना त्रिवेदी और बड़ी संख्या में वोलिंटियर्स विद्यार्थियों आदि की उपस्थिति रही। डॉ सुमन मुखर्जी ने स्वामी विवेकानंद के शब्दों द्वारा बच्चों को खेल के प्रति जागरूक किया। प्रो दिलीप शाह ने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कॉलेज के खेल में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया। कॉलेज के 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सौ - दो सौ - चार सौ रेस, डिस्कस थ्रो, शार्ट पुट, रिले रेस, जेवलिन थ्रो आदि विभिन्न स्पोर्ट्स में कई बैचों में लड़कियों और लड़कों ने अपने अपने शानदार प्रदर्शन किया। खाने, पीने और स्नेक्स आदि के 13 स्टॉल लगाए गए जो विद्यार्थियों ने लगाए।एनसीसी के कैडटों ने मार्चपास्ट किया और तिरंगे को सलामी दी। मार्चपास्ट में कॉलेज के 17 कलेक्टिव के विद्यार्थियों ने अपने-अपने झंडे के साथ सलामी दी। फ्लेम, क्रिसेंडो, इन एक्ट, सेतु, बुलशाई, फैशनिस्टा, सेल्युलायड, एक्सप्रेशन, एनसीसी, एन एस एस आदि सभी के विद्यार्थियों ने पूरे स्टेडियम का चक्कर लगाते हुए झंडे को सलामी दी। । 100 और 200 मीटर रेस में प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान पर आने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। शिक्षकों और नॉन टीचिंग स्टाफ ने भी रेस में हिस्सा लिया जिसमें चंदन झा, विवेक पटवारी, दर्शना त्रिवेदी ने अच्छा प्रदर्शन किया।अंत में, सांस्कृतिक कार्यक्रम संगीतज्ञ सौरभ गोस्वामी के बैंड द्वारा किया गया। सभी विजयी विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त वालों को मेडल ट्राफी और सर्टिफिकेट देकर पुरस्कृत किया गया। सर्वश्रेष्ठ मेल और फीमेल ट्राफी प्रदान की गई। स्पोर्ट्स के रूपेश गांधी का प्रमुख सहयोग रहा। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
चंद्र कला त्रिपाठी की टिप्पणी मन्नू भंडारी का कथा लोक
मन्नू भंडारी पर लिखा यह आलेख वर्तमान साहित्य में प्रकाशित हुआ था।
इसे यहां साझा कर रही हूं।
मन्नू भंडारी का कथा लोक-
एक कोटेशन से बात शुरु करना चाहती हूं । हालांकि यह एक बहुत पुराना संदर्भ है और तब से पुल के नीचे से बहुत पानी बह गया। इतना कि नदी का निशान तक नहीं है फिर भी मन्नू भंडारी और राजेंद्र यादव की साझा किताब 'एक इंच मुस्कान ' का बड़ा ही ज़िंदा प्रसंग यहां है । लिखा है राजेंद्र यादव ने।जिस किताब में यह है उसका नाम है ' 18 उपन्यास ' । अपने तरीक़े की बेहद विचारोत्तेजक क़िताब है। राजेन्द्र यादव के आधुनिक उपन्यासों से संबंधित
बड़े ही ज़हीन परिप्रेक्ष्य संपन्न लेख हैं इसमें।हर पन्ना आपको संदर्भित कुछ अनिवार्य पढ़ने की ओर ढ़केल देता है।इसी में एक रोचक आलेख ' एक इंच मुस्कान 'की रचना प्रक्रिया पर है। राजेन्द्र यादव के विट की ज़बरदस्त दख़ल तो है ही यहां साथ ही बड़े ही स्वाभाविक रंग में मन्नू भंडारी के रचना सरोकारों की झलक भी है। विनोद प्रियता में बसे हुए दोनों शरद देवड़ा के तगादों को झेलते हुए दिखते हैं। वे उनसे इतने आक्रांत हैं कि देवड़ा जी को पठान कहते हैं ।वे इन दोनों के सिर पर सवार होकर उपन्यास के हिस्सों की वसूली सी करते हैं। यही नहीं शरद देवड़ा मन्नू जी के हिस्सों के लिए पाठकों की प्रशंसा का ज़िक्र भी करते हैं जिसे लेकर राजेंद्र यादव अपने स्वाभाविक बिंदास विट और विनोद में दिखाई देते हैं और मन्नू भंडारी भी उसे समझती हैं।
जब इसे पढ़ा था तब मन्नू भंडारी की एक छवि मिली थी -' यही तो उसकी चाल है ।' मैं समझाता हूं , 'मेरे भीतर हीन भावना पैदा कर दो और तुम्हारी प्रशंसा करते रहो, उपन्यासांश समय पर मिलते रहेंगे...'
'कुढ़ो कुढ़ो ' मनु चढ़ाती है फिर सहसा सुस्त होकर कहती है 'लेकिन इस बार क्या होगा ? नौकर का अभी तक इंतज़ाम नहीं हुआ है ;आपसे इतना भी नहीं होता कि नौकर ही तलाश कर दो ।लीला बेचारी क्या क्या करें वह घर का काम करें तो बेबी? नया नया कॉलेज है, इन सबके बीच चैप्टर की बात उठती ही नहीं। मैं साफ कहती हूं जब तक रसोई में सिंक नहीं लगेगा मैं कुछ भी नहीं लिखूंगी'
इसी में यह भी है कि दोनों के बीच किरदारों को लेकर और पाठकीय प्रतिक्रिया को लेकर भी खूब सरस खींचतान चली है । वे अपने अपने लिखे जा रहे हिस्सों में अमला रंजना अमर के क्या क्या हश्र कर देने की बात करते हैं।
राजेन्द्र यादव कहते हैं - 'तुम्हारे पाठकों को कुशवाहा कांत पढ़ने की आदत है'
मगर स्वीकार करते हैं कि मन्नू भंडारी के लिखने में प्रवाह है , स्वाभाविकता है ।सायासता नहीं है ।
मन्नू भंडारी के त्वरित लिख डालने की बात भी यहां आई है।
ऐसे संदर्भ और इन्हीं से मिलते-जुलते लेखिका के कुछ साक्षात्कार और इधर दर्ज़ होती उनकी यादों के सिलसिले सब जैसे बहुत जुड़ कर उनकी जिस लेखकीय छवि को पूरा करते हैं उसमें सबसे ज़रुरी बात जीवन के अनुभवों से उनके रचनाकार का अविभाजित सा रिश्ता है। इस ज़िंदगी को वे उसमें सक्रिय बदलाव वाले तंतुओं को भी वे बहुत जुड़ कर उठाती हैं। रोज़मर्रा की इस ज़िंदगी में बरते हुए रंग हैं चमक है। उनके चुने हुए यथार्थ और मंतव्य को यह रंग ज़िंदगी से भर देता है।
मन्नू भंडारी की कहानियों में आए यथार्थ की जैविकी बड़ी प्रबल है।वह लेखिका को उसके भिन्न किस्म के रचनात्मक रुपांतरण का छूट नहीं देती। यहां तक कि लेखकीय सरोकार कथा के भीतर घुल कर मूल्य से अधिक मर्म का हिस्सा हो जाते हैं। मन्नू जी ने अपने रचनात्मक स्वभाव को समझा भी है।वे भारतीय परिवार में संबंधों की स्थिति या नियति देखते हुए उसमें ज़िंदा गर्माहटों के निकट बनी रहती हैं।'अकेली ' शीर्षक कहानी में वृद्धा का अकेलापन जिस सघन पारिवारिकता में उभरा है वह मुहल्ले वाले पास पड़ोस और नातेदारियों से गझिन ज़िंदगी में है। बुआ के जवान बेटे की मौत हो गई है।पति साधु होकर घर छोड़ चुके हैं मगर बीच बीच में चले भी आते हैं। दोनों के बीच राग अनुराग , एक दूसरे की रक्षा सुरक्षा जैसा कुछ नहीं है।बुआ में जांगर है। ज़रा सा मान देने पर अपनों से कहीं बढ़कर वहां खट उठती है।
मन्नू जी की शैली में कहानी काआरंभ यह है
सोमा बुआ बुढ़िया है
सोमा बुआ परित्यक्ता है
सोमा बुआ अकेली है
उसकी पूछ और उपेक्षा का गणित बदलता रहता है। लेखिका इस कर्मठ मानवीय दिल वाली उत्सव प्रिय वृद्धा के प्रति संवेदनहीन संबंधों की नृशंसता तो देखती है और कहानी को घनघोर उदासी में छोड़ देती है।इस कहानी में मन का टूट जाना आया है। मोहभंग नहीं और सोमा बुआ खंडित निर्वासित व्यक्तित्व नहीं हैं। उन्हें भावनात्मक झटका लगा है मगर उनके राग तंतु उन्हें टूटन में गर्क नहीं होने देते। मन्नू भंडारी की आरंभिक कहानियों में है यह कहानी। मगर उनके सरोकारों को दृढ़ता पूर्वक बता जाने वाली कहानी भी है।
नयी कहानी के दौर की अन्तर्कथा के संदर्भ तो अब ज्ञात हैं और राजेंद्र यादव मोहन राकेश और कमलेश्वर की योजनाबद्धता भी काफी कुछ ज़ाहिर है। मध्यवर्गीय अनुभव वादी रवैए का सबसे बड़ा हिस्सा इन तीनों के पास था।उसी समय पहली नयी कहानी के दावे और दांव भी चले थे।शहर बनाम गांव कथा का भी ज़ोर था। प्रेमचंद के बाद की पीढ़ी अपने अनुभव बोध और चिंतन की भिन्नता के हिसाब से एक वैविध्य मय विस्तृत और विशिष्ट यथार्थ के साथ सक्रिय थी मगर यथार्थ वादिता की लाउड घोषणा के बिना था यह।उसी लोकतांत्रिक ज़मीन से अज्ञेय रेणु अश्क यशपाल जैनैंद्र जैसे लेखक अपनी शैली में थे और नए नज़रिए के साथ थे।इस कड़ी में भीष्म साहनी अमरकांत मार्कंडेय शिवप्रसाद सिंह हुए। मन्नू भंडारी की पीढ़ी में निर्मल वर्मा भुवनेश्वर उषा प्रियवंदा कृष्णा सोबती हुईं। मन्नू जी के जीवनानुभवों के रचनात्मक चुनाव के संदर्भ में मुझे चंद्रकिरण सौनरेक्सा याद आईं। उनके यहां भी आदर्शवादी परिणतियों पर ज़ोर बहुत है और एक भावमयता है।जीवन की विसंगतियों और जटिलताओं के आलोचनात्मक विन्यास पर ध्यान नहीं है। मन्नू भंडारी अपने बहुत सादा शिल्प में इसे कर ले गईं हैं। उनके यहां यथार्थ बोध आदर्शवादी मूल्यों से दब कर नहीं आया।वे मुठभेड़ करती हैं। प्रयोग करती हैं। जैसे 'यही सच है' में या' मैं हार गई' में।
वे जटिलताओं को भी बहुत खोल कर निर्मित करती हैं। उनके ढ़ंग में विशिष्ट यह भी है कि बौद्धिक कलावादी तरीके का अमूर्तन नहीं है। त्रिशंकु देखिए , एक प्लेट सैलाब , स्त्री सुबोधिनी जैसी कहानियां व्यंग्य विदग्धता को बाहरी टूट फूट के प्रति उनके असंतोष मूलक आलोचनात्मक रवैए को व्यक्त करती हैं। औसत खाई अघाई ज़िंदगी सुविधाभोग छल और शहरी पन की फांके यहां दर्ज़ हैं।
इस तरह देखें तो मन्नू भंडारी का रचना संसार नयी कहानी के दौर में उभरता है । वे वहां एक मज़बूत और चर्चित उपस्थिति हैं।उसमें नयी कहानी के प्रचलित रचनात्मक मुहावरों के फार्मूलेशन नहीं हैं। उस दौर में नयी संवेदना 'और भाषा के संदर्भ में जिस अजनबीपन अलगाव और मोहभंग को आधुनिक मनुष्य के लिए नियति जैसी अनिवार्यता में दुहराया गया और कथ्य में उसकी बौद्धिक असंलग्न बुनावट दर्ज़ हुई , उससे मन्नू भंडारी की ज़मीन बहुत अलग थी।उसकी नवैयत भी कुछ ऐसी ही थी कि वह इस असर में आने वाली नहीं थी।
मन्नू भंडारी के लिए भी अनुभव की विश्वसनीयता का ज़ोर बड़ा तो था मगर उनके यहां रचना के लिए अनुभवों का संश्लेषण जिस लेखकीय निकटता में हो रहा था उसमें वस्तुनिष्ठता अलग नवैयत में थी।
निम्न मध्यवर्गीय घर और समाज के आत्मीय प्रसंगों से उभरती ये कथाएं आधुनिक मनुष्य के द्वन्द्व को नज़दीकी स्पर्श में रच देती हैं। यह इतना संप्रेष्य और संवादी है कि मन्नू भंडारी के पाठकों तक जीवंतता में पहुचा है। यहां उनकी आरंभिक कहानियों के कथ्य तो याद आते ही हैं , उनकी 'यही सच है '
आपका बंटी ' में पति पत्नी के बीच पसरे तनाव और टूटे हुए दांपत्य के असर को मन्नू भंडारी ने बंटी की तरफ से देखना तय किया था। मुझे याद है कि तब मैं उस स्त्री को अधिक ज़िम्मेदार मानने के लेखिका के रवैए से असंतुष्ट भी हुई थी । मुझे लगा था दांपत्य में जवाबदेही के हिस्से को मन्नू जी औरत के लिए जिस तरह से तय कर रही हैं वह आधुनिक दृष्टि नहीं है।उस उपन्यास को पढ़ाते हुए भी मैंने उस स्थापना से अपनी असहमति का हमेशा संदर्भ लिया।
आपका बंटी में आया जीवन संदर्भ मोहन राकेश के दांपत्य से संबंधित था और मोहन राकेश के अपने उपन्यास में अंधेरे बंद कमरे में भी थोड़ी अमूर्तता के साथ भिन्न ढ़ंग के निलिशों में लिपटी स्त्री महत्वाकांक्षा को निशाने पर लेने वाली वह बात मौजूद है।ये दोनों किताबें मिला कर पढ़ी जाएं और टोह भी ली जाए तो कुछ विमर्शों को आसानी मिल सके शायद मगर इसके बावज़ूद मुझे मन्नू भंडारी की कथा कला ने बहुत प्रभावित किया। मेरे लिए भी उन्हें समझने का एकमात्र संदर्भ ' आपका बंटी' तो हुआ नहीं । हमारी पढ़ने लिखने की दुनिया की वह बेहद प्रिय लेखिका थीं जिनकी किताबों को शेल्फ में देखते ही हम खींच लेते थे। एक और चीज़ जो मुझे मन्नू भंडारी के संदर्भ से याद आ रही है वह यह है कि शायद ही कभी राजेंद्र यादव के लेखकीय तरीक़े से मिला कर एक तुलनात्मक आयाम लेकर मैंने उन्हें पढ़ा हो। उन्हें पढ़ते हुए राजेंद्र यादव के पैटर्न कथा को निर्मम बेलाग अलिप्तता में रचने वाले कभी याद नहीं आए।वे एक भिन्न आस्वाद के प्रस्ताव में थे। बल्कि अपनी तिकड़ी में ऐसी सायास लगती अतिरिक्त सी विदेशी किस्म की बौद्धिकता में सबसे ज़्यादा थे। पाठक की आसानियां उनके यहां सबसे कम थीं।
न चाहते हुए भी यहां एक तुलना जैसा कुछ हो ही गया मगर मैं शायद यह कहना चाहती हूं कि मन्नू भंडारी ने अपने लेखक पति के अत्याधुनिक पैटर्न वाले ढ़ंग से अप्रभावित रहते हुए अपना एक आत्मीय संलग्नता वाला शिल्प विकसित किया । यही नहीं बल्कि अपने लिखे में राजेंद्र जी के हस्तक्षेप के लिए कोई फांक नहीं छोड़ी।
'एक कहानी यह भी ' में कई संदर्भ हैं जो उनकी रचनात्मक बुनियाद और प्रवृत्ति के बारे में बताते हैं। जैसे उन्होंने वहीं थोड़ी तल्खी के साथ खुद के लेखन के लिए शरच्चंद्रीय भावुकतामय कहे जाने का जवाब सा दिया है । ऐसे ही आवेग में कहा है कि ' अब कोई चाहे तो मेरे इस बांधने डुबाने को औरताना भावुकता के खाने में डाल कर खारिज कर सकता है'
ऐसा लगता है कि उनके लेखन की आलोचना का यह भी एक परिप्रेक्ष्य था जो उन्हें आहत करता था। वे बौद्धिक निस्संगता की उस बुनावट में नहीं हो सकती थीं जो निर्मम भी हो जाती है। उन्हें मर्म प्रभावित भर नहीं करते थे बल्कि उनकी आंतरिकता का हिस्सा हो जाते थे। संभवतः इसीलिए वे इंटेंस जीवनानुभव लिख पाईं।ऐसे कि जिन्होंने पाठकों की स्मृति में घर भर नहीं बनाया बल्कि जीवन के विस्तृत आयामों के प्रति संवेदनशीलता का निर्माण किया। मार्मिकता और एक मनुष्य की पीड़ा के प्रति सचेत जवाबदेही का पक्ष मन्नू भंडारी के लिए ज़रुरी हुआ है।यह उनकी मूल्यचेतना का बड़ा स्पष्ट आधार है। अपनी कहानियों और उपन्यासों में सामाजिक विसंगतियों से अधिक वे विडंबनाओं के भीतर प्रवेश करती हैं और एक गहन आंतरिक संसार रचती हैं जिससे सामाजिक टकराहट के अर्थ गहरी निबद्धता में ज़ाहिर होते हैं। एक व्यक्त संसार है यह।अमूर्तन नहीं है। मध्यवर्गीय जीवन की नब्ज़ रही है लेखिका की पकड़ में। प्रायः यही है और उसमें बसी हुई संवेदनहीनता पाखंड व्यक्तित्व विभाजन और अलगाव को भी वह बौद्धिक रवायतों में नहीं उभारतीं। इसलिए वे इतनी बेधक हैं कि वह पूरा प्रदर्शन दो टूक ढ़ंग से सामने आ जाता है।बल्कि कहें कि उघड़ जाता है।
मुझे उनकी ' त्रिशंकु ' शीर्षक कहानी ने बड़े अलग ढ़ंग से प्रभावित किया था। बल्कि वह अनायास मेरे निजी बोध से जाकर जुड़ गया था। मैं कुछ सालों तक विश्वविद्यालय में महिला छात्रावास के प्रशासन से भी जुड़ी थी।उन दिनों मुझे एक बड़ा ही अजीब अनुभव हुआ था। विश्वविद्यालय में बनारस के आसपास के दूर दराज के भी गांवों से छात्र छात्राएं पढ़ने आते हैं। गांवों से आई लड़कियां आरंभ में अपने रहन सहन में गंवई सादगी में बड़ी अचकचाई संभ्रमित सी दिखती हैं।उन दिनों रैगिंग ऐसी छिपी हुई कार्रवाई होती कि उस पर रोक लगाने के लिए हमें बड़े पापड़ बेलने पड़ते। ख़ासकर इन छात्राओं की रक्षा टेढ़ा मामला हुआ करता।
कुछ दिन बीतते न बीतते वे छात्राएं अपनी नितांत फैशनेबल धज में रुपांतरित मिलतीं।सब कुछ तेज़ी से बदलता था।हम इसे कौतुक की तरह देखते। किसी को क्या आपत्ति होनी थी।
उनके घर वालों के लिए भी यह रुपांतरण प्रीतिकर ही था। उन्हें यह आधुनिक होना लगता था।
हुआ क्या कि उन्ही के बीच की एक लड़की ने कविताओं के पोस्टर बना कर मुख्य फाटक के निकट चिपकाने शुरु किए जिन पर प्रशासन का ध्यान जाने लगा।वह छात्रा विश्वविद्यालय में आंदोलन परक गतिविधियों में सक्रिय थी और अकेली नहीं थी। उसके साथ ऐसी चेतना से लैस कई छात्राएं थीं। हॉस्टल में नए तरीके की गतिविधियां जारी हो गईं और कई गोष्ठियां हुआ करतीं। विश्वविद्यालय के अन्य विभागों से संवाद बहस के लिए विद्वान आमंत्रित होते और यह छात्रावास प्रशासन के संज्ञान में ही होता था। सांस्कृतिक गतिविधियां भी थीं।
धीरे धीरे उन्हें कुछ और भनक लगी।
मुझसे कहा गया कि उन्हें वैसे पोस्टर लगाने से रोका जाए और न माने तो उनके अभिभावकों को बुलाया जाए।
मुझे लगा कि छात्राओं के अतिरिक्त फैशन और भिन्न अराजकता में मुब्तिला होने से बहुत सारे संकट आने के बावजूद उसकी नोटिस कभी नहीं ली गई मगर जब वे अपने स्वतंत्र जागरुक प्रतिरोध को सामने लाना चाहती हैं जो शिक्षा का एक बड़ा उद्देश्य है तब उन पर रोक लगाने की बात आ रही है।
मैंने त्रिशंकु रचने वाले सामाजिक विधान को बड़े तीखेपन के साथ अनुभव किया था और मन्नू भंडारी नज़दीक आ गईं थीं। वे आयरनी को रचती हुई किसी अतिरिक्त दार्शनिकता में कभी नहीं गईं। यह उनका पथ नहीं था।
वे अपने पाठकों तक सीधे आत्मीय रास्ते से पहुंची हैं।
कला में मर्म की इंटेंसिटी रचने के विधान को रोमेंटिक पिछड़ा हुआ मूल्य मान लिया गया था।
अपने साहित्य के लिए ऐसे तमाम जजमेंट का आभास था मन्नू जी को। अपने आत्मकथ्थ में कहीं कहीं वे इसका सामना करती दिखाई देती हैं।
मन्नू भंडारी के लिए सामाजिक यथार्थ और उसका वृहत्तर ऐतिहासिक संदर्भ अनुपस्थित नहीं था।महाभोज जैसा उपन्यास लिखते हुए उन्होंने सत्ता की आपराधिक जटिलताओं को जैसे उधेड़ा है वह अद्भुत है। मैंने इस उपन्यास पर लिखा भी। मुझे उनकी ऐसी नवैयत ने बहुत चकित किया था।लेखन की यह नई ज़मीन ही नहीं थी बल्कि यह तो एक बीहड़ भी था। और उसके भीतर इस सारे क्षरण को पहचानती हुई बेधक दृष्टि जिसे वहां उस अर्थ को मार्मिकता में रचना याद रहा था। बड़ी बेचैन कर देने वाली कथा है वह।
मन्नू भंडारी ने रचनाशीलता को मानवीय सरोकारों से जोड़ने बांधने का कोई सायास उपक्रम नहीं किया है बल्कि यह उनके व्यक्तित्व से अविभाज्य एक गुण है। विडंबना है कि इसने ही उन्हें बड़ी ही कठिन पीड़ा भी दी है।
'एक कहानी यह भी' पर लिखते हुए मैं आलोचनात्मक भी हुई थी क्यों कि मैं भी अपनी तटस्थ अन्तर्भेदी दृष्टि के लिए संघर्ष में थी और एक सामान्य स्त्री की तरह पति पुरुष से अपेक्षा का पहलू मुझे कमज़ोर लगा था मगर मानती हूं कि यह मेरा अर्थ को आधा देखना था और स्त्री विमर्श के सूखे हिस्सों की चपेट में होना था।
मन्नू भंडारी देश के उस दौर की सचेत निर्मित थीं जिसके लिए आदर्श किताबी नहीं थे। अपने जीवन में बहुत दूर तक उसे घुला कर चलीं वे।अभी जो स्मृति चित्र उनके निधन के उपरांत पढ़ने को मिल रहे हैं , गरिमा श्रीवास्तव का लिखा , कविता का लिखा और सुधा अरोरा जी का लिखा भी जिसे मिला कर पढ़ने का मन कर रहा है। उसमें एक कठिन दुख से हारते चले जाने वाले मन और शरीर का पता है ।
गरिमा जी ने अपनी जिस आख़िरी मुलाक़ात का ज़िक्र किया है जिसमें वे कहती हैं मुझे लिखना सिखा दो। उनकी पीड़ा में सबसे गहरे न लिख पाने की पीड़ा है। गरिमा ने जैसे उस छटपटाते स्पर्श को अपनी हथेली में बसा लिया है और स्नायु रोग के साथ जड़ी पीड़ाओं का जो पहाड़ है उसका अनलिखा भी सब , उसे जानने के बाद कैसे उस असर से बचा जाए।
स्त्री की स्वाधीन ख़ुद मुख़्तार शख्सियत रोबोट नहीं हो सकती।हर तरह का समाज स्त्री की संवेदनशीलता के छोर से उसके भावनात्मक दोहन में प्रवृत्त होता है।
अगले किन्हीं ज़मानों में शायद कुछ उलट पुलट हो। जब तक नहीं है तब तक तो यह हाकिम बड़ा कड़ा है और हज़ार मुहों से बोलता है। मज़ेदार है कि एक मुंह बड़ा लोकतांत्रिक भी है जिसके पास यथार्थवादिता का निष्करुण दावा है।
मन्नू भंडारी ने कहीं अपना सुख संतोष लिखा है, वह है निर्कुंठ सहज मैत्री और सच्चा संग साथ। विश्वास को उन्होंने अपरिहार्य जीवन-मूल्य माना और विश्वासघात को सबसे बड़ा अपराध। अपनी पीड़ा को उन्होंने खंडित विश्वासों की व्यथा कहा है। उससे विलग होकर जीने की आत्मपर्याप्तता थी उनके आत्मसंघर्ष में।वे जीवनी शक्ति पर भरोसा भी करती थीं। जुड़े हुए सुंदर मैत्री पूर्ण संसार में जब तक संज्ञानता रही रच बस कर रहीं।
हम तक वह सुंदरता आती रहेगी।
चंद्रकला त्रिपाठी
टिप्पणी वाद संवाद संमार्ग हिंदी दैनिक
सन्मार्ग हिंदी दैनिक कोलकाता द्वारा आयोजित वाद संवाद प्रतियोगिता बहुत ही महत्वपूर्ण रही । वर्तमान समय में हमारे समाज में विभिन्न ज्वलंत मुद्दे हैं जिनके प्रति युवाओं को जागरूक होने की आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति की जड़ें बहुत मजबूत रही हैं लेकिन क्या आधुनिक समाज में वृद्धा आश्रम, लिव इन रिलेशन जैसे परिवर्तन समाज के लिए ठीक है या फिर इतिहास के पुनर्लेखन पर विचार करने की आवश्यकता है क्या सही है? या हम अपने अतीत को तोड़- मडो़ड़ कर प्रस्तुत करें। सोशल मीडिया वरदान है या अभिशाप इस पर भी युवाओं के विचार जानने की आवश्यकता है।हमारे युवा या समाज डिजिटल युग में आगे बढ़ रहा है या उसके दुष्परिणाम झेल रहा है आदि पर पक्ष विपक्ष विषयों पर चर्चा की गई। सन्मार्ग द्वारा वाद संवाद की गई यह पहल काबिलेतारीफ है।
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज इस प्रकार के हिंदी संवाद वाद विवाद को प्रोत्साहित करता रहा है। हमारे विद्यार्थियों ने इस वाद विवाद में हिस्सा लिया है। भाषा कोई भी हो सकती है, अपनी राय देना हमारा अधिकार है।उज्जवल करमचंदानी श्रेयांस और यश को शुभकामनाएँ।
टिप्पणी छपते छपते हिंदी दैनिक
बड़ाबाजार का तेजी से बदलता सामाजिक परिवेश
दुष्चिन्ताओं से परेशान हैं कुछ लोग
बड़ा बाजार का इतिहास मारवाड़ी समाज द्वारा ही शुरु किया गया था। राजस्थान से आकर लोगों ने कलकत्ता के बड़े बाजार को केंद्र बनाकर व्यवसायिक क्षेत्र में विशिष्टता प्राप्त की और पूरे देश में अपनी जाति, धर्म और संस्कृति को बढ़ावा दिया। साथ ही अपनी दूरदर्शिता और विस्तृत मानसिकता से पश्चिम बंगाल की आर्थिक वृद्धि में उन्नति की। मारवाड़ी जाति ने सदैव समरसता में विश्वास किया।जनसाधारण के लिए शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों का निर्माण, जल व्यवस्था, हवेलियों और मकानों के निर्माण आदि के साथ समाज की लड़कियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए मारवाडियों के योगदान को सदियों तक याद किया जाएगा।
परिवर्तन हमेशा नये प्रयोग करता रहा है। यह साइकिल के पहिये की तरह है। मुस्लिम समुदाय की लड़कियां भी अब हिंदी स्कूलों अस्पतालों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हिस्सा बन चुकी हैं और बहुत अच्छे कार्य कर रही हैं। कोलकाता का बाजार बहुत तेजी से उनके हाथों में भी जा रहा है। वे व्यवसाय में अधिक आ गए हैं।
यही वैचारिक उन्नति है।कहा जाता है कि समय की मांग के अनुसार ही समाज चले तो विकास होता है।
आपका रविवारीय चिंतन बहुत ही महत्वपूर्ण और समसामयिक है ।सभी का स्वागत किया जाना ही भारत की शोभा है। पश्चिम बंगाल कोलकाता में सर्वधर्मसमभाव की भावना रही है।
-डॉ वसुंधरा मिश्र
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज
कोलकाता
26.11.2023
सन्मार्ग द्वारा आयोजित वाद संवाद में भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों को मिला टॉप टेन में स्थान---
सन्मार्ग द्वारा आयोजित वाद संवाद अॉडिशन में भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों का टॉप टेन में स्थान--
सन्मार्ग द्वारा आयोजित वाद संवाद के पांचवें संस्करण में भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया ।इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के 15 कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और सन्मार्ग की टीम ने अलग-अलग जाकर उनका चुनाव किया। सन्मार्ग की टीम ने बताया गया कि यह बहु प्रतिक्षित वाद संवाद का पांचवा संस्करण 1 दिसंबर यानी शुक्रवार को बड़े पैमाने पर आयोजित होने जा रहा है ।जिसका विषय है क्या स्मार्टफोन हमारे रिश्तों को अन स्मार्ट बना रहा है, इसमें भाग लेंगे शिवम पांडे।
भवानीपुर कॉलेज में आयोजित इस कार्यक्रम में युवा पैनलिस्ट को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। कार्यक्रम के विजेता को वाद संवाद के प्रतिष्ठित पैनल में जगह मिलने पर गोवा की यात्रा का उपहार भी दिया जाएगा। शुक्रवार को हुए इस कार्यक्रम में पूरे बंगाल के 15 कॉलेजों ने ऑडिशन राउंड में भाग लिया और पूजा छुट्टियों के बावजूद 10 दिनों में लगभग 80 प्रविष्टियां प्राप्त हुई ।इसमें शेष 10 शॉर्ट लिस्ट किए गए उम्मीदवारों के साथ एक अंतिम राउंड आयोजित किया गया। कार्यक्रम के जज के तौर पर कुशल भारत ग्रुप के अध्यक्ष नरेश अग्रवाल, मोटिवेशनल स्पीकर नैना मोर, नेसेसिटी की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्वाति गौतम और ईस्ट इंडिया दास्तान गोल्स के सह संस्थापक पलाश चतुर्वेदी, शिव जायसवाल, दिनेश चंद्र बडेरा मौजूद थे।
टॉप टेन छात्रों में भवानीपुर कॉलेज के श्रेयांश कुमार, उज्जवल करमचंदानी,यश पटनी रहे। अन्य कॉलेज के विद्यार्थियों में शिवम पांडे, प्रेम दीप झा,ओम्कार बनर्जी, किरण दीप कौर, अमृत ढाढरिया ,श्वेता कुमारी और गुंजा गुप्ता रहे। सन्मार्ग अपने मंच वाद संवाद के माध्यम से सामाजिक रूप से प्रासंगिक विषयों पर हिंदी में सार्थक संवाद और चर्चा के लिए एक मंच बनाने के लिए लगातार प्रयासरत रहा है। युवा और उनके दृष्टिकोण अभिन्न हैं और हमारे समाज की बदलती दिशा को दर्शाते हैं ।इसलिए उनकी राय को विकसित करना आवश्यक है। इसमें भवानीपुर कॉलेज का सदैव सहयोग रहा है ।भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज कोलकाता के वाइस चेयरमैन मिराज डी शाह ने विजेता शिवम पांडे और किरण दीप कौर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कॉलेज हमेशा हिंदी को प्रोत्साहित करता रहा है। हमारे विद्यार्थियों ने वाद-संवाद के हिस्सा लिया और टॉप 10 में स्थान प्राप्त किया जो महत्वपूर्ण है। सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दी। इस कार्यक्रम मे डॉक्टर आभा झा, डॉक्टर सम्पा सिन्हा,डॉक्टर वसुंधरा मिश्र, प्रोफेसर समीक्षा खंडूरी,प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉक्टर वसुंधरा मिश्र ने।
रिपोर्ट भवानीपुर अंतर कॉलेज नृत्य चैम्पियनशिप 2023 संपन्न
भवानीपुर अंतर कॉलेज नृत्य चैम्पियनशिप 2023 संपन्न - -
भवानीपुर डांस चैंपियनशिप' 2023 या बीडीसी नामक सबसे बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। कोलकाता में सबसे बड़ी और एकमात्र अंतर-कॉलेज नृत्य प्रतियोगिता होने के नाते, बीडीसी ने इस वर्ष अपने 8वें संस्करण की मेजबानी की और प्रतियोगिता की थीम को 'कार्निवल ऑफ क्यूरियोसिटीज़' कहा गया।इस वर्ष भवानीपुर नृत्य चैम्पियनशिप में सात कार्यक्रम थे, जिनमें से प्रत्येक को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन लाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। उद्घाटन समारोह कॉलेज के जुबली सभागार में सुबह 10 बजे से शुरू हुआ। इसमें एनेक्ट कलेक्टिव का प्रदर्शन हुआ, जिसमें फ्लेम्स का हिस्सा होने का क्या मतलब है, इसका एक मजेदार अभिनय दिखाया गया। इस एक्ट ने लोगों के चेहरों पर खुशी और हंसी ला दी।
उद्घाटन समारोह का समापन फ्लेम्स द्वारा नृत्य की शक्ति पर बनाई गई एक लघु फिल्म के साथ हुआ, जिससे चैंपियनशिप के उद्घाटन कार्यक्रम की शुरुआत हुई।अलग अलग नृत्य हुए जिसके विषय भी अलग अलग रखे गए। बॉलीवुड डुओ/ट्रायो: इसकी थीम 'समय यात्रा' है - इसी खास थीम को ध्यान में रखते हुए पांच कॉलेजों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया।विजेता स्थान टीएचके जैन कॉलेज ने हासिल किया, जबकि प्रथम रनर-अप स्थान भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (मुख्य टीम) ने हासिल किया, और टेक्नो इंडिया ने दूसरा रनर-अप स्थान हासिल किया।
बॉलीवुड समूह नृत्य: बॉलीवुड समूह नृत्य का विषय "रहस्यमय फुसफुसाहट" था। प्रत्येक महाविद्यालय से पाँच टीमों ने भाग लिया; प्रत्येक कॉलेज ने 5+3 मिनट से कम समय में थीम को अपने अनूठे तरीके और शैली में दर्शाया। इसमें भवानीपुर कॉलेज विजेता रहा। सेंट जेवियर्स कॉलेज ने प्रथम रनर-अप स्थान प्राप्त किया और शिवनाथ शास्त्री कॉलेज ने द्वितीय रनर-अप स्थान प्राप्त किया। विशिष्ट प्रस्तुति के लिए बीईएससी की हंसिका चांडक को स्थान प्रदान किया गया। समूह लोक नृत्य का विषय 'लोकगीत' था और इसमें भाग लेने वाली 9 टीमों को पारंपरिक पोशाक और सहायक उपकरण पहनाए गए थे जो उस संस्कृति का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व करेंगे जो वे चित्रित कर रहे थे। टीमों को 4+1 मिनट से कम समय में प्रस्तुति करने के लिए कहा गया था। इस श्रेणी में प्रॉप्स का उपयोग स्पष्ट था क्योंकि इसमें डांडिया स्टिक और अन्य प्रकार के प्रॉप्स थे जो नृत्य की दिनचर्या को बढ़ाते थे। इस आयोजन के निर्णायक श्री धर्मेश बिमानी और डॉ.शेली पॉल थे। विजयी टीम भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (ओटीएसई टीम), प्रथम रनर-अप का स्थान भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (मुख्य टीम) ने हासिल किया, जबकि दूसरा रनर-अप स्थान सेठ आनंदराम जयपुरिया कॉलेज ने हासिल किया।
पश्चिमी समूह नृत्य में "अव्यवस्था" विषय रखा गया था और भाग लेने वाली 5 टीमों द्वारा किया गया। प्रदर्शन इसी तरह की अराजकता की भावना से भरा हुआ था। प्रत्येक टीम को प्रदर्शन के लिए 5+3 मिनट का समय मिला। इस कार्यक्रम के निर्णायक संचारी चक्रवर्ती और रीशव धानुक रहे । सभी टीमों ने एक ही प्रस्तुति में अलग-अलग कहानियाँ सुनाकर अपने समय का सदुपयोग किया। अंत में, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (वेस्टर्न मेन टीम) ने विजेता पुरस्कार जीता, जबकि जादवपुर विश्वविद्यालय ने प्रथम रनर-अप स्थान हासिल किया और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (IIHM) को दूसरा रनर-अप स्थान दिया गया। सर्वश्रेष्ठ कलाकार का पुरस्कार बीईएससी (वेस्टर्न मेन टीम) के आशुतोष सिंह को दिया गया था।
ईस्टर्न ग्रुप डांस: "कार्निवल ऑफ शैडोज़" थीम के तहत इस श्रेणी में 8 कॉलेजों ने भाग लिया। 6+1 मिनट के साथ, टीमों ने बाल शोषण और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों को सबसे विस्मयकारी तरीके से चित्रित किया। इस श्रेणी में बहुत सारे प्रॉप्स भी थे जिनमें पर्दे शामिल थे जिनका उपयोग छाया की भावना पैदा करने के लिए किया जाता था। कार्यक्रम की निर्णायक रीना जाना और देबमित्रा सेनगुप्ता थीं। अंत में, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (पूर्वी मुख्य टीम) विजेता रही, शिवनाथ शास्त्री कॉलेज प्रथम उपविजेता और सेठ आनंदराम जयपुरिया कॉलेज द्वितीय उपविजेता रहा।
स्ट्रीट बैटल दो घंटे तक चला जिसमें एक बड़ी भीड़ एक घेरे में इकट्ठा हुई और इसके भीतर कलाकारों के लिए केंद्र मंच था। हिप हॉप संगीत और पॉप संस्कृति का उपयोग अधिक था क्योंकि थीम ही 'डाउनटाउन डांस ऑफ' थी। कार्यक्रम का प्रारूप 1vs1 फेसऑफ़ था। संगीत और राउंड का निर्णय शुभम सिंह उर्फ एंडलेस, रीशव धानुक और सैकत दास (डीजे)द्वारा किया गया । नर्तकों ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त हासिल करने के लिए पॉपिंग और लॉकिंग जैसी नृत्य की पश्चिमी तकनीकों का इस्तेमाल किया। इस आयोजन में दस महाविद्यालयों ने भाग लिया। अंत में, इवेंट के विजेता बंगाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पॉल थे और प्रथम रनर-अप इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (आईआईएचएम) के ऋषभ थे।
सभी विजेताओं को कॉलेज प्रबंधन की ओर से नलिनी पारेख द्वारा उनके संबंधित पुरस्कार दिए गए। सभी घटनाओं के निर्णायकों में प्रो बी.कॉम (मॉर्निंग) की समन्वयक मीनाक्षी चतुर्वेदी, ब्लैक टाइगर इवेंट्स से गौरव बाजोरिया, डीन कार्यालय से प्रो दिव्या उद्देशी और प्रो समीक्षा खंडूरी रहे । समापन के बाद स्वयंसेवकों और प्रतिभागियों को बीडीसी 2023 की सफलता और नृत्य के प्रति जुनून का जश्न मनाने के लिए जुबली हॉल में बजाए गए संगीत पर नृत्य करने के लिए एक खुला मंच दिया गया। रिपोर्टर टीम में - पूजा डबराई और अनिकेत दासगुप्ता और फोटोग्राफर पारस गुप्ता, प्रियांशु चटर्जी, निश्चय आलोकित लाकड़ा, अंकित माझी, अग्रग घोष रहे। डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी ।
रिपोर्ट भवानीपुर कॉलेज और आईएमएस के मुख्य संरक्षक देबदीप चक्रवर्ती ने बताया गणित का जादू
भवानीपुर कॉलेज और आईएमएस के मुख्य संरक्षक देबदीप चक्रवर्ती ने बताया गणित का जादू---
अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा कि शुद्ध गणित तार्किक विचारों की कविता है।भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 25 नवंबर, 2023 को श्री देबदीप चक्रवर्ती के साथ मैथ्स मैजिक पर एक मजेदार सत्र इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया। सोफिया परवीन ने वक्ता देबदीप चक्रवर्ती का परिचय दिया। तकनीकी कौशल और प्रबंधकीय कौशल के जानकार इंजीनियरिंग में स्नातक और प्रतिष्ठित बी-स्कूल, टीएपीएमआई से एमबीए में 99.8 प्रतिशत से शिक्षा प्राप्त की । प्रो. पिंकी साहा सरदार ने अतिथि वक्ता का अभिनंदन और प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी, समन्वयक बी.कॉम (मॉर्निंग) ने गर्मजोशी भरे वक्तव्य से स्वागत किया। चक्रवर्ती ने बताया कि वर्तमान में वे आईएमएस कोलकाता में मुख्य संरक्षक के रूप में कार्यरत हैं।अपने वक्तव्य में कहा कि उनकी प्रतिबद्धता प्रतिभा का पोषण करने और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की है। उनका अटूट समर्पण और विशेषज्ञता उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में एक अमूल्य संपत्ति बनाती है। उन्होंने कई छात्रों को प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने में मदद की है और उन्हें जादुई गणित के गुर सिखाए हैं। सत्र में लगभग 100 उत्साही छात्र भाग ले रहे थे। उन्होंने वैदिक गणित की विभिन्न युक्तियों को प्रदर्शित करते हुए एक पावरप्वाइंट प्रस्तुति प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को गणितीय समस्याओं को हल करने के लिए दिलचस्प और आसान तकनीक सिखाना और उन्हें विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में बैठने के लिए तैयार करना था। चक्रवर्ती ने छात्रों से पूछा कि किसी भी क्षेत्र में जीवित रहने के लिए वे कौन से दो विषयों को आवश्यक और महत्वपूर्ण मानते हैं। छात्रों ने कोरस में गणित और अंग्रेजी के लिए जोर से बात की जो सही उत्तर था। उन्होंने छात्रों को समझाया कि कर गणना और ऋण गणना, धन प्रबंधन और व्यय प्रबंधन के लिए गणित आवश्यक है।
चक्रवर्ती द्वारा दिखाए गए पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन से छात्रों को वैदिक गणित के गुर सिखने में मदद मिली। उन्होंने आधार विधि सिखाई, जो हमें बड़ी गुणन समस्याओं को कुछ ही सेकंड में हल करने में मदद करती है। उन्होंने परिचारकों को एक रैखिक विधि सिखाकर भी प्रबुद्ध किया और उस विधि का उपयोग करके कुछ गणितीय समस्याओं को हल किया। सत्र के अंत में एक प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई जिसमें 1 से 5 अंकों के प्रश्न शामिल थे। सभी प्रश्न तीस सेकेंड के निर्धारित समय में हल करने थे। यह मनोरंजक था कि छात्र सक्रिय रूप से भाग ले रहे थे और समस्या समाधान में संलग्न होते हैं और मज़ेदार तरीके से गणित सीखने का आनंद लेते हैं। सभी समस्याओं और उत्तरों पर छात्रों और चक्रवर्ती द्वारा चर्चा की गई। इस सत्र ने छात्रों पर यह प्रभाव डाला कि गणित कठिन नहीं है, यह दिलचस्प है। हमें बस सबसे कठिन समस्याओं को हल करने के सरल तरीके जानने की जरूरत है। कुल मिलाकर यह कॉलेज के छात्रों के लिए मज़ेदार और सीखने का एक समृद्ध अनुभव था।रिपोर्ट कासिस शॉ और फोटोग्राफी पपन दास ने किया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
रिपोर्ट भवानीपुर कॉलेज की एन एस एस ने मनाया विश्व एड्स दिवस
भवानीपुर कॉलेज की एन एस एस ने मनाया विश्व एड्स दिवस
एलिजाबेथ टेलर ने कहा कि यह बहुत ही बुरा है कि लोग 'एड्स' से मर रहे हैं लेकिन किसी को भी अज्ञानता से नहीं मरना चाहिए। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की एनएसएस इकाई ने 1 दिसंबर, 2023 को विश्व एड्स दिवस के अवसर पर रवीन्द्र सदन मेट्रो स्टेशन गेट नंबर पर एड्स जागरूकता कार्ड और लाल रिबन के वितरण के माध्यम से 'रेड रिबन अभियान' का आयोजन किया। एस्प्लेनेड मेट्रोस्टेशन गेट नंबर एक पर अभियान सुबह 9:00 बजे शुरू हुआ और दोनों टीमें अपने-अपने स्थानों पर गईं और विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को कार्ड वितरित किए।
अभियान का उद्देश्य मृतकों को श्रद्धांजलि देना, एचआईवी/एड्स से जूझ रहे लोगों को सहायता प्रदान करना और आज कलंक को मिटाने के हमारे दृढ़ संकल्प को दोहराना है क्योंकि एचआईवी/एड्स के खिलाफ लड़ाई में भेदभाव और कलंक का कोई स्थान नहीं है। यह करुणा, समझ और समर्थन दिखाने का समय है।
कुल 18 विद्यार्थियों ने 500 कार्ड और एड्स का लोगो लाल रिबन वितरित किये। सभी ने इसे अच्छी तरह से नहीं लिया, लेकिन कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने वास्तव में इस पहल की सराहना की और यहां तक कि छात्र स्वयंसेवकों के साथ अपना दृष्टिकोण भी साझा किया। कार्ड वितरित करते समय टीम में से एक ने 'इश्क फाउंडेशन' के स्वयंसेवकों से भी मुलाकात की जो इसके लिए जागरूकता फैला रहे थे। स्वयंसेवकों ने दिन भर के अपने अनुभवों का आनंद लिया। रेक्टर और डीन प्रोफेसर दिलीप शाह, रेक्टर और छात्र मामलों के डीन, बीकॉम (मॉर्निंग) की समन्वयक मीनाक्षी चतुर्वेदी और कॉलेज के पूरे प्रबंधन को पूरे आयोजन में उनके अपार समर्थन के लिए धन्यवाद। कृपा सहल ने रिपोर्ट की और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
रिपोर्ट भवानीपुर कॉलेज ने मानवाधिकार पर दो दिवसीय कार्यशाला की
भवानीपुर कॉलेज ने मानवाधिकार पर दो दिवसीय कार्यशाला की - - -
शांति केवल वहीं रह सकती है जहां मानवाधिकारों का सम्मान किया जाता है, जहां लोगों को खाना खिलाया जाता है, और जहां व्यक्ति और राष्ट्र स्वतंत्र हैं। यह बात 14वें दलाई लामा द्वारा कही गई है। इन्हीं को मद्देनजर रखते हुए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने मानवाधिकार शिक्षा पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। यह 29 नवंबर, 2023 और 30 नवंबर, 2023 को सुबह 10:00 बजे से कॉलेज परिसर के सोसाइटी हॉल में शालीन दास द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला थी। शालीन दास भारत के यूथ फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल वाशिंगटन डीसी की ब्रांड एंबेसडर हैं। पेशे से वह कॉलेजों में अतिथि व्याख्याता, महत्वाकांक्षी एयरलाइन केबिन क्रू के लिए शिष्टाचार प्रशिक्षक और पुरुषों के अधिकार में विशेषज्ञ हैं। इसके अतिरिक्त, वह 2 दिसंबर 2023 को यूएसए से मानवाधिकार में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करेंगी।
कार्यक्रम की शुरुआत शपथ के साथ हुई जहां शालीन दास के साथ छात्रों ने अपने साथियों के प्रति विनम्र और सम्मानजनक होने की शपथ ली। इसके बाद दास ने बीईएससी में पहली बार मानवाधिकार कार्यशाला को संभव बनाने के लिए बीईएससी के रेक्टर और छात्र मामलों के डीन प्रोफेसर दिलीप शाह को धन्यवाद दिया। प्रो शाह ने अपने ज्ञान की बातें साझा करते हुए कहा कि हमें हमेशा अपनी भावना ऊंची रखनी चाहिए और सीखते रहना चाहिए। उन्होंने शालीन दास का अभिनंदन किया।
सुश्री दास द्वारा छात्रों को मानवाधिकारों के बारे में जानकारी देने के साथ कार्यक्रम जारी रखा । उनके अनुसार, हम शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न विषयों का अध्ययन करते हैं, लेकिन मानवाधिकार का नहीं, इसलिए अब समय आ गया है कि हमें मानवाधिकारों के बारे में सीखना चाहिए, जागरूकता फैलानी चाहिए और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाना चाहिए। सुश्री दास ने अपने व्याख्यान की शुरुआत छात्रों को मानवाधिकार की कहानी पर एक वीडियो क्लिप दिखाकर की। वीडियो में एक सवाल उठाया गया है जिसमें कहा गया है, "अगर लोगों को भोजन और आश्रय का अधिकार है, तो हर दिन 16,000 बच्चे भूख से क्यों मर रहे हैं - हर पांच सेकंड में एक?" उन्होंने हमें यूथ फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल क्लब के बारे में बताया जो 190 देशों में मौजूद है, जिसका एकमात्र उद्देश्य आज के युवाओं को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करना है। मैडम ने विद्यार्थियों को पुस्तिकाएँ वितरित कीं। पुस्तिकाओं का नाम "मानव अधिकार क्या हैं" था, जिसमें मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा (यूडीएचआर) के तहत सभी 30 अधिकारों की व्याख्या की गई है ।
पहले दिन सुश्री दास ने मानवाधिकारों की आवश्यकता को समझाया और यूडीएचआर के तहत पहले 13 मानवाधिकारों पर चर्चा की। उनके अनुसार, मानवाधिकार हमें बेहतर इंसान बनने के लिए संशोधित करता है और उन्होंने कहा कि मानवाधिकार को समझना मानवता को समझना है। सत्र इंटरैक्टिव बन गया क्योंकि उन्होंने छात्रों से मानवाधिकारों पर अपने विचार साझा करने के लिए कहा। पहला दिन सकारात्मक नोट पर समाप्त हुआ।
दूसरा दिन भी जानकारीपूर्ण और इंटरैक्टिव था। दिन की शुरुआत शपथ के साथ हुई, जिसके बाद सुश्री दास ने कुछ वीडियो क्लिप की मदद से यूडीएचआर के तहत शेष अधिकारों के बारे में बताया। इसके बाद विभिन्न अधिकारों पर चर्चा हुई, जहां छात्रों को समूहों में विभाजित किया गया और प्रत्येक समूह को पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन की मदद से बोलने के लिए अलग-अलग अधिकार दिए गए। अंत में, एक पेंटिंग खंड था जहां प्रत्येक टीम ने एक पेड़ को चित्रित किया, और पेड़ की प्रत्येक शाखा ने एक अधिकार का प्रदर्शन किया। शानदार चर्चाओं, समूह प्रस्तुतियों और टीम प्रयासों के साथ, दो दिवसीय ज्ञान से भरपूर था और सभी के लिए मानवाधिकार के नोट पर मनोरंजन के साथ समाप्त हुआ।रिपोर्ट की मौबानी मैती और फोटोग्राफी आलोकित लाकड़ा ने की। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
रिपोर्ट भवानीपुर कॉलेज द्वारा द बिग फैट इंडियन वेडिंग 2023 का दीप प्रज्वलन समारोह संपन्न
भवानीपुर कॉलेज द्वारा द बिग फैट इंडियन वेडिंग 2023 का दीप प्रज्वलन समारोह संपन्न - -
दीप प्रज्ज्वलन समारोह में द बिग फैट इंडियन वेडिंग बीएसईएम, भवानीपुर स्कूल ऑफ इवेंट मैनेजमेंट द्वारा 20 नवंबर 2023 को कॉलेज में आयोजित अपनी तरह का एक अनूठा कार्यक्रम था। बीएसईएम की डीन सुश्री प्रेरणा खुल्लर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने चारों ओर जीवंत रंग बिखेर दिए। लगभग 150 उपस्थित लोगों के मंत्रमुग्ध होने के साथ, यह कार्यक्रम भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के कॉन्सेप्ट हॉल में आयोजित किया गया था जिसे फूलों, रोशनी और सजावट से भरे शादी के घर की तरह खूबसूरती से सजाया गया था। सुबह 11:00 बजे से उद्घाटन समारोह के साथ आरंभ यह दो घंटे का कार्यक्रम नृत्य, मनोरंजन, गाने और शिक्षा से भरपूर था।
संगीत समूह क्रिसेंडो द्वारा मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति के साथ शुरुआत हुई, इसके बाद शादी का माहौल तैयार करने के लिए राजदी एंड ग्रुप द्वारा एक नृत्य प्रस्तुति दी गई। यह एक भारतीय शादी की संगीत रात की याद दिला रहा था। रेक्टर डीन, प्रो. दिलीप शाह ने स्वागत भाषण दिया। इसके बाद, बीएसईएम की डीन प्रेरणा खुल्लर ने इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का अभिनंदन किया। इसके बाद विवाह योजना व्यवसाय में प्रसिद्ध इवेंट मैनेजमेंट बिरादरी के नामों को मंच पर बुलाया गया, जिसकी शुरुआत मुख्य वक्ता वेडिंगसूत्र के मालिक श्री पार्थिप थग्यराजन के साथ हुई , जहां से सभी के लिए विवाह खरीदारी का एक स्थान है, डॉली जैन, सेलिब्रिटी पेशेवर साड़ी ड्रेपर , सूरज जुनेजा, संस्थापक फ्री फ्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, कुमार शोभम, जीएम हयात रीजेंसी, संदीप व्यास, भवानीपुर के पूर्व छात्र और एक कलाकार, गायन और मनोरंजन के लिए , सौरभ रूंगटा, पुरस्कार विजेता डेस्टिनेशन वेडिंग फोटोग्राफर , पूनम खंडेलवाल, संस्थापक, डिज़ाइन और पार्टनर और एंथोनी डेसूज़ा, द फ्लोरल बकेट के मालिक और बंटी सिन्हा, प्रोडक्शन की रीढ़, री गियर टेक्निकल्स। कॉलेज से हमारे साथ प्रबंधन के सदस्य, उत्सव पारेख, मिराज डी शाह, उपाध्यक्ष और प्रोफेसर दिलीप शाह थे। अभिनंदन समारोह के बाद दीप प्रज्ज्वलन समारोह हुआ और मंच पर सम्मानित अतिथि श्री पार्थिप थग्यराजन ने वेडिंगसूत्र के संस्थापक के रूप में इवेंट मैनेजमेंट और वेडिंग प्लानिंग व्यवसाय पर अपनी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
इसके बाद मंच को उपस्थित लोगों के लिए प्रश्नोत्तरी दौर के लिए खोल दिया गया, जिससे यह भारतीय विवाह समारोहों की जानकारी के बारे में जानने के लिए एक इंटरैक्टिव सेमिनार बन गया। अंत में, उपस्थित लोगों को 'बिग फैट इंडियन वेडिंग' में होने वाली खूबसूरत व्यवस्थाओं की स्क्रीनिंग देखने को मिली। कार्यक्रम बीएसईएम के पहले बैच के लिए धन्यवाद प्रस्ताव और तालियों के साथ समाप्त हुआ। कार्यक्रम का समापन कॉन्सेप्ट हॉल में गणमान्य व्यक्तियों के लिए दोपहर के भोजन के साथ हुआ।रिपोर्टर सृष्टि झुनझुनवाला और फ़ोटोग्राफ़र साग्निक घोष रहे। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
वह बिंदी कविता
वह बिंदी
उस बिंदिया से नज़र हटती ही न थी
बड़ी बड़ी गोल उषा की लाली सा रंग
बिखरी नहीं स्थिर गोल सुडोल
चेहरे की पहचान उस कविता की बड़ी बिंदी
नाद स्वर संगीत और नृत्य लय से पूर्ण
बिंदी उस आकर का प्रवेशद्वार लगा
लगा पूरी किताब पढ़ लो
अंनत संभावनाओं, आशाओं से भरी
सकारात्मक विचारों को व्यक्त करती
ध्यान में जाने लगी
अंतर्जाल की रेखाएं घेरने लगी
तंत्र मंत्र जप और तप की सीख देती वो बिंदी
प्रखर प्रचंड किरणों से अठखेलियाँ खेलती रही
कई कुंडलियों को धारण करती
कई चक्रों की घुमावदार सीढ़ियों पर चढ़ती
इड़ा पिंगला सुषमन-तार में फंसती रही
श्वास-प्रश्वास सावधान प्रहरी- सा
न जाने कहाँ खो गई थी
कविता ने अचानक मुझे
झकझोरते हुए कहा कहाँ खो गईं
मानो नींद से जगा दिया हो
खामोशी में भी कुछ अनकहा सा रह गया
उसकी बिंदी मुस्कुराती सी लगी
कविता की बिंदी का तेज उसकी आंखों में उतर आया था
वो कविता थी वो कविता थी
ध्यान अभी-अभी उस शीर्ष पर पहुंच गया था
जहां से सृष्टि का जन्म हुआ
न जाने कितनी ही गोलाकार रेखाओं से गुजरती रही
उनसे होकर अस्तित्व को ढूंँढती लगी
बिंदी सच में बिंदिया नहीं
स्वयं को पहचानने का एक मजबूत मार्ग है
@वसुंधरा मिश्र, 11.12.2023 (कविता की बिंदी)
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