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Friday, April 22, 2022

भवानीपुर कॉलेज में सरस्वती सम्मान 2022

भवानीपुर कॉलेज ने सरस्वती सम्मान समारोह में शिक्षक और शिक्षिकाओं को किया पुरस्कृत - - - भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज में सरस्वती पूजा उत्सव के दौरान लगभग 33 शिक्षकों को सरस्वती सम्मान 2022 से पुरस्कृत किया गया। हर वर्ष यह पुरस्कार उन शिक्षकों को दिया जाता है जिनकी पुस्तकों और आलेखों का प्रकाशन यूजीसी के तहत हुआ है। उन्हें शाल और धनराशि देकर पुरस्कृत किया गया ।इस वर्ष पी. एचडी प्राप्त शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। वालिया हॉल में स्थापित सरस्वती मूर्ति की पूजा का प्रांरभ मैनेजमेंट की वरिष्ठ अधिकारी नलिनी पारेख द्वारा की गई। विद्यार्थियों के साथ सभी शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने आरती कर माँ सरस्वती को पुष्पांजलि अर्पित की। बाद में, छात्र - छात्राओं ने शंख, रंगोली, थाली सज्जा और संस्कृत श्लोक की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। सभी कार्यक्रम कॉलेज के टर्फ पर संपन्न हुआ, शंख बजाने में शिक्षक और शिक्षिकाओं ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन दिप्ती पंचारिया और ओम पचीसिया ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रारंभ सरस्वती वंदन नृत्य, संगीत से हुआ। पारंपरिक वेशभूषा में छात्रों ने भी नृत्य किया। कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने उपस्थित बीस से अधिक शिक्षकों को सम्मानित किया, साथ ही कॉलेज की कोआर्डिनेटर प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय,, नलिनी पारेख, रेणुका भट्ट, प्रो दिव्या उदेशी, जितू भाई , उमेश ठक्कर, प्रो गार्गी, प्रो कृपा शाह , डॉ वसुंधरा मिश्र एवं सभी छात्र छात्राओं के प्रतिनिधियों ने अपना सक्रिय योगदान दिया। महाप्रसाद और पूजा-अर्चना की सभी तैयारियाँ गैर शैक्षणिक कर्मचारियों द्वारा की गई। इस अवसर पर कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज शाह ने अपने वक्तव्य में सभी शिक्षकों को सरस्वती सम्मान समारोह की शुभकामनाएँ दी। प्रतिभागी विद्यार्थियों में एलोरा चौधरी, सुजल शाॉ, मोहित गुप्ता शंख प्रतियोगिता में क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय रहे। श्लोक प्रतियोगिता में गौरव चौधरी, कशिश दोलानी और ओम पचिसिया क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय, आरती थाली सज्जा में निहारिका मूधडा़, कृपा सहल, एलोरा चौधरी क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय एवं रंगोली सज्जा में प्रथम अल्का सिंह, मौमिता राय, द्वितीय विनिता रे, श्रुति प्रधान और तृतीय स्थान पर रुकय्या कानपुरवाला और जाहरा कलकत्ता वाला रहे। इस अवसर पर शिक्षकों में प्रो चिरंजित, प्रो अरुंधति, प्रो सम्पा सिन्हा आदि शिक्षकों ने शंख वादन कर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। सभी विद्यार्थियों और शिक्षक गणों तथा गैर शैक्षणिक कर्मचारियों एवं सुरक्षा कर्मियों को सभी मौसमी फलों का प्रसाद, लड्डू और खिचड़ी, सब्जी, कूल चटनी, आदि का महाप्रसाद ग्रहण किया । कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ।

अर्चना संस्था ने ऋतुराज वसंत का किया स्वागत फरवरी 2022

अर्चना संस्था ने ऋतुराज वसंत का किया स्वागत - - - अर्चना संस्था की ओर से आयोजित स्वरचित गोष्ठी में संस्था के सदस्यों ने सर्वप्रथम सुरों की देवी भारत रत्न लता मंगेशकर जी को अपनी शब्दांजलि अर्पित की। 'सुर शब्द बन बदली सी विलीन हो गई शून्य आकाश में'कविता मृदुला कोठारी द्वारा और गीत 'स्वर देवी को स्वरों से देते हम स्वरांजलि' भारती मेहता और विद्या भंडारी ने 'गाँऊगी हर गीत में तुमको /हृदय में तुम्हें बसाऊँगी ', संगीता चौधरी ने 'तुम हो स्वर की मल्लिका' प्रस्तुत कर सुर साम्राज्ञी को श्रद्धांजलि अर्पित की। हिम्मत चोरड़़िया ने कुंडलिया-गागर में सागर भरूँ, देना ऐसा ज्ञान।दोहे-दुश्मन भ्रम मत पालना, ये वीरों का देश। समर भूमि में एक हैं, भले अलग परिवेश।।, सिमट अंधेरा अब गया, हुआ शिशिर का अंत।मृदुला कोठारी ने कू-कू कोयल बोलती,आया सुखद बसंत।।मन मंजीरा सुर वीणा के साथअधरों की बंसरी के संगछेड़ता जब अनहद मीठे राग विद्या भंडारी ने खुशबू मिट्टी की, संगीता चौधरी ने दोहे- कृपा करो मां शारदे और पतझड़ का ना जाने कैसा नाता है, क्यों मनाऊं मैं वैलेंटाइन डे, नोरतन मल भंडारी ने प्यार होता है/रेशमी धागों की गिरह की तरह/ हो जाये,/तो तोङना मुश्किल /जोङना मुश्किल। (2)खामोशी की भी होती है/ एक आवाज /कौन कहता है/उस तक नहीं/ पहुंच पाएगी / मेरी खामोशी।, हिम्मत चोरड़़िया ने मुक्तक विधाता छंद -हरा ये रंग कहता है, सदा खुशहाल बन रहना।, धनाक्षरी छंद-खेत अब लहराये, उपवन सरसाये,शशी कंकानी ने गीत -हर दिल में मस्ती छाने लगी/ये कैसा चढ़ने लगा खुमार/हौले से दस्तक किसने दी/कोई और नहीं ये है बसंत बहार,सुना कर कार्यक्रम का जोश बढ़ाया। वहीं मीना दूगड़ ने पूरे कार्यक्रम की रिपोर्ट अपनी कविता के द्वारा प्रस्तुत की - सुरीले मधुर दोहा गीत के साथ सजीला शुभारंभ और उतने ही सुरीले गीत के साथ आज की गोष्ठी की मनभावन संपन्नता। मध्य भाग सज उठा बसंत की बयार से, गुलाब की सौरभ से,लता जी के अमर स्मरण से, जीवन संगीत से, मिट्टी की खुशबू से, धरती आकाश के फासले में बसे ख्वाबों से, धनाक्षरी के हरे भरे लहलहाते खेतों से, प्यार के रेशमी धागों से, खामोशी की जुबां से,क्रोध की जहरीली गोली के दुष्प्रभाव से,मधुसिक्त मकरंद में डूबे श्रद्धा स्वरों से सभी सदस्यों की रचनाओं को शब्दों में पिरो कर रचनाओं की माला भेंट की। और अपनी कविता -कल रात सपने में गुलाब से मुलाकात हो गई / बगीचे में खिले खिले, सफेद गुलाबी लाल पीले-वैलेंटाइन डे की संस्कृति/मात्र सात दिनों पर टिकी प्यार की बंजर धरती सुनाया। सुशीला चनानी ने ऋतु बसन्त में ए सखी,धरा करे श्रृंगार। जैसे पिय घर पग धरे,दुल्हन पहली बार।, हाइकु-बासन्ती हवा/भरे मदिर भाव/धिरकें पाव/गीत-खोलो खोलो सखी मन के किंवाड,बसन्त ऋतु आयी है !, लता जी को समर्पित दोहा-सारा जीवन कर दिया,सात सुरों के नाम सांस सांस संगीत था,सप्तक ही था धाम।।, उषा सराफ ने धरती से आकाश तक का फ़ासला न होता, /तो ख्वाबों का कारवाँ कहाँ होता सुनाया। इंदू चांडक - आया आया जी बसंत ऋतुराज /मावड़ळी रै आंगणियै/बाज्या ढोल मंजीरा चंग सुरीला साज/मावड़ळी रै आंगणियै गीत से वसंत का स्वागत किया। व्यंग्य के वरिष्ठ कवि बनेचंद मालू नेे क्रोध किए गुण बहुत हैं,/क्रोध कीजिए रोज…….पैराशूट और दिमाग,/रह जाएँ अधखुले तो / हो जाए सत्यानाश…….सुनाया जो नया प्रयोग रहा। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कविता 'वसंत' नभ से उतरता वसंत /इतराता इठलाता /भर गया जब सूखी टहनियों पर /तभी तो उतर आता है जमीन पर /मदमस्त हो वसंत भी। और' रचना ' गर्भ के किस कोने में /तुम छिपी थी, सुनाया। कार्यक्रम का संचालन और तकनीकी सहयोग इंदु चांडक की काव्यात्मक अभिव्यक्ति से पूर्ण रहा।

छपते छपते हिंदी दैनिक की रविवारीय चिंतन राजनीति का अपराधीकरण पर टिप्पणी

राजनीति का अपराधीकरण - भारतीय लोकतंत्र का कैंसर लेख चुनाव के इस दौर में बहुत ही महत्वपूर्ण और समसामयिक है ।भारत में राजनीति के अर्थ बिल्कुल ही बदल गए हैं। यह गुंडों और अपराधियों के संस्थान हो गए हैं जो आने वाले समय के लिए गंभीर संकट के संकेत हैं। देश के महत्वपूर्ण स्थानों पर यदि बाहुबली किस्म के लोग रहेंगे तो शिक्षा, न्यायपालिका, व्यापार, उद्योग व जैसे बहुत से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नैतिक मूल्यों और जिम्मेदारियों की कमी होगी। सभी कार्य उन्हीं के हित के अनुरूप होगें जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को मटियामेट कर सकते हैं । फिल्मी दुनिया हो या धर्म हो या फिर पुलिस प्रशासन हो इन सबके लिए खतरा है। भारतीय मीडिया भी इस आपराधिक चंगुल से नहीं बच पा रहा है। कानून या विधि व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है। आपका लेख देशवासियों के लिए आँखें खोलने वाला है। बधाई और शुभकामनाएं - डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता 🙏

बप्पी लहरी के निधन पर विनम्र श्रद्धांजलि 2022

बप्पी लाहिड़ी भारतीय गायक और संगीतकार (1952-2022) याद आ रहा है तेरा प्यार: नहीं रहे बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार बप्पी लाहिड़ी , 69 साल की उम्र में ली अंतिम श्वास। उन्होंने चलते चलते, सुरक्षा और डिस्को डांसर जैसे हिंदी फिल्म के म्यूज‍िक में एक अलग ही कंटेपररी स्टाइल को इंट्रोड्यूस किया। बप्पी लाहिड़ी (जन्म; 27 नवम्बर 1952, मृत्यु 16 फरवरी 2022) हिन्दी फिल्मों के एक भारतीय प्रसिद्ध संगीतकार और गायक थे। सोने के गहनोँ से लदे बप्पी लाहिड़ी के संगीत में अगर डिस्को की चमक-दमक नज़र आती थी तो उनके कुछ गाने सादगी और गंभीरता से परिपूर्ण हैं। उनका असली नाम अलोकेश लाहिड़ी है। तीन साल की उम्र में उन्होंने तबला बजाना शुरू कर दिया था। जब वे 14 साल के हुए तो पहला संगीत दिया। इनका जन्म पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में हुआ था। इनके माता - पिता अपरेश लाहिड़ी और बांसुरी लाहिड़ी शास्त्रीय और श्यामा संगीत में बंगाली गायिका और संगीतकार दोनों थे। हिंदी फिल्मों के यूंँ तो कई ऐसे गीत हैं, जिन्हें सुनकर पैर थिरकने लगते हैं लेकिन जिन गीतों पर पैर थिरकने के साथ दिल भी झूम उठे, ऐसे कई गीत बप्पी लाहिड़ी ने ही दिए। बप्पी लाहिड़ी के निधन से फ़िल्म संगीत के 'पॉप-डिस्को संगीत' के एक युग का अंत हो गया।बड़ी बात यह है कि ये युग उन्होंने ही शुरू किया था। इसे संयोग कहें या कुछ और कि बप्पी लाहिड़ी सचिन देव बर्मन के दीवाने थे। उन्हीं की शास्त्रीय धुनों से प्रभावित होकर वह फ़िल्मों में आए लेकिन मायानगरी ने बप्पी दा की शास्त्रीय धुनों को दरकिनार कर उन्हें 'डिस्को किंग' बना दिया। बॉलीवुड में तीन साल में बना ली अपनी जगह कुछ बांग्ला फ़िल्मों के बाद हिंदी फ़िल्मों में बतौर संगीत निर्देशक बप्पी लाहिड़ी की शुरुआत 1973 की फ़िल्म 'नन्हा शिकारी' से हुई थी. उस समय लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल, कल्याणजी आनंद जी और आरडी बर्मन जैसे कई दिग्गज संगीतकारों की धूम थी। ये राजेश खन्ना, जितेंद्र, धर्मेन्द्र, सुनील दत्त, शशि कपूर और अमिताभ बच्चन जैसे नायकों का ज़माना था।लेकिन बप्पी लाहिड़ी ने दिग्गज संगीतकारों के बीच भी सिर्फ़ तीन साल में ऐसी जगह बना ली थी कि वह जल्द ही ज्यादातर नायकों की पहली पसंद बन गए। बप्पी लहरी के परिवार में उनकी पत्नी, बेटे बप्पा लाहिड़ी और बेटी रमा लाहिड़ी हैं।ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे। ओम् शांति 🙏

लता मंगेशकर स्वर साम्राज्ञी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई 2022

लता अनंत कार्यक्रम में स्वर साम्राज्ञी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई - - - भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने लता अनंत कार्यक्रम में स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर जी के निधन पर शोक व्यक्त किया और उनके गीतों को गाकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर कॉलेज के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने लता अनंत कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। लता अनंत के अंतर्गत कॉलेज के जुबली सभागार में मुक्त मंच के रूप में सभी को आमंत्रित किया गया था। सिनियर विद्यार्थियों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया। कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने अपने वक्तव्य में लता मंगेशकर जी के विविध पक्षों को रखते हुए उनकी संगीत की लंबी यात्रा पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र के छात्र छात्राओं ने गिटार, सिंथेसाइजर, तबले आदि वाद्ययंत्रों के साथ सभी गायक और गायिकाओं के गायन को संगीतमय बना दिया। नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा मेरी आवाज़ ही पहचान है, लग जा गले, अजीब दास्ताँ है, तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा, नहीं शिकवा नहीं, नैना बरसे रिमझिम रिमझिम आदि प्रसिद्ध गीतों की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर डीन प्रो दिलीप शाह, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी कोआर्डिनेटर, प्रो दिव्या उदेशी, प्रो कृपा शाह आदि शिक्षकों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज को मिला सर्वश्रेष्ठ कॉलेज मदर टेरेसा इंटरनेशनल अवार्ड 2022

भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज को मिला सर्वश्रेष्ठ कॉलेज मदर टेरेसा इंटरनेशनल अवार्ड 2022--- भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज को शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए बेस्ट कॉलेज अंतर्राष्ट्रीय मदर टेरेसा अवार्ड 2022 प्रदान किया गया। कोलकाता के आईसीसीआर सभागार में 24 फरवरी को कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह और विद्यार्थियों ने समवेत रूप से इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह अवार्ड मदर टेरेसा की स्मृति में 2001 से शुरू किया गया है। मदर टेरेसा इंटरनेशनल अवार्ड कमेटी के सात सदस्यों द्वारा यह अवार्ड प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को दिया जाता है जो शिक्षा, संस्कृति, संगीत, सामाजिक कार्य, खेल, उद्योग, मीडिया, मेडिसिन, सर्वश्रेष्ठ प्रिंसिपल, सर्वश्रेष्ठ स्कूल और कॉलेज और राजनीतिक क्षेत्रों में गत इक्कीस वर्षों से दिया जा रहा है। दो सौ से अधिक अपने-अपने क्षेत्र में विशिष्ट व्यक्तित्व और संस्थाओं को अवार्ड दिया जा चुका है। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज को शिक्षा के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ कॉलेज का मदर टेरेसा इंटरनेशनल अवार्ड देने के लिए चुना गया है। यह अवार्ड राष्ट्रीय अल्पसंख्यक और कमजोर वर्ग आयोग के अंतर्गत पंजीकृत है। जस्टिस श्यामल सेन(पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर, पूर्व न्यायाधीश कलकत्ता, चीफ़ पेट्रान हाईकोर्ट), एंथोनी अरुण बिश्वास (कमेटी चेयरमैन) द्वारा भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह को मदर टेरेसा अवार्ड 2022 प्रदान किया गया। इस अवसर पर पर कॉलेज के विद्यार्थियों ने उत्साहित होकर भाग लिया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

श्री शिक्षायतन स्कूल द्वारा आयोजित लिटरेरी फेस्ट 2022 में निर्णायक मंडल में डॉ वसुंधरा मिश्र

श्री शिक्षायतन स्कूल द्वारा आयोजित लिटरेरी फेस्ट 2022 द्वारा आयोजित सविशेष अंतर्विद्यालयी हिंदी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को उनकी रचनात्मकता को नमन करती हूँ। ये प्रतियोगिताएं बच्चों की प्रतिभा को निखारने और समृद्ध बनाने का कार्य करती हैं। श्री शिक्षायतन स्कूल की प्रिंसिपल, सचिव तथा हिंदी के शिक्षकगणों का परिश्रम फलदायी हुआ जिसके कारण अन्य विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी सीखने का अवसर मिला। निर्णायक के रूप में मुझे भी यह सुनहरा अवसर मिला जिसके लिए मैं विद्यालय की आभारी हूँ। सभी विद्यार्थियों और शिक्षक गणों को बधाई और शुभकामनाएँ । --डॉ वसुंधरा मिश्र, हिंदी अध्यापिका एवं मीडिया प्रभारी , भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज, कोलकाता

भवानीपुर कॉलेज ने मर्चेंट अॉफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के साथ किया एमओयू

भवानीपुर कॉलेज ने मर्चेंट अॉफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के साथ किया एमओयू - - शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को उत्कृष्ट योगदान और एकेडमी उद्योग के क्षेत्र में विशिष्टता प्राप्त करने के लिए भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज और प्रसिद्ध संस्था मर्चेंट अॉफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के साथ किया एमओयू । इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के सिनियर वाइस-चेयरमैन मिराज डी शाह और एसीसीआई के प्रेसीडेंट ऋषभ कोठारी ने एक साथ समझौता पत्र पर किया हस्ताक्षर ।इस समझौते से उद्योगों के साथ कौशल विकास के क्षेत्र में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण, युवाओं को उद्यम क्षमता बढ़ाने, उद्योग में सहभागिता, रोजगार सृजन आदि क्षेत्रों में सहभागिता रहेगी । कोठारी ने कहा कि इससे शिक्षा और उद्योग क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण कार्य किए जा सकेंगे। छात्र और छात्राएँ तथा शिक्षकों का चेंबर में सेमिनार, सत्र, कार्यशाला, वेबिनार आदि आयोजनों में शामिल हो सकेंगे।मिराज शाह ने कहा कि इससे विद्यार्थियों को उद्यम क्षमता बढ़ाने में व्यवहारिक ज्ञान की प्राप्ति होगी जो भविष्य में उनके लिए नई संभावनाओं और तैयारी करने में मदद करेगा । कॉलेज के जुबली सभागार में कॉमर्स के लगभग सौ से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति में यह एम ओ यू संपन्न हुआ। कॉलेज के डायरेक्टर जनरल डॉ सुमन मुखर्जी, डीन प्रो दिलीप शाह, टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, दिव्या उदेशी, कृपा शाह, नलिनी पारेख,रेणुका भट्ट, सोहिला भाटिया आदि के साथ ऋषभ कोठारी के साथ मर्चेंट चेंबर अॉ कॉमर्स के कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

नई पीढ़ी के नव निर्माण में शिक्षकों की भूमिका परिचर्चा वाजा इंडिया की ओर से 2022, 1 मार्च

शिक्षकों को समय के साथ अपडेट होना आवश्यक - डॉ सोमा बंदोपाध्याय - - भारतीय संस्कृति में शिक्षकों का दर्जा श्रेष्ठतम व अतुलनीय है और बात जब नई पीढ़ी के नव निर्माण की हो तो बिना शिक्षक के अधूरी है । इसी को मद्देनजर रखते हुए मंगलवार दिनांक 1 मार्च 2022 को नई पीढ़ी तथा राइटर्स एण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन ( वाजा इंडिया) कोलकाता इकाई द्वारा "नई पीढ़ी के नव निर्माण में शिक्षकों की भूमिका" नामक ई -परिचर्चा का आयोजन हुआ। उपरोक्त परिचर्चा का संचालन डॉ वसुंधरा मिश्रा, अध्यक्ष वाजा इंडिया महिला शाखा ,कोलकाता इकाई ने किया साथ ही स्वागत ज्ञापन शिवेंद्र प्रकाश द्विवेदी ,संस्थापक , 'नई पीढ़ी' तथा संस्थापक महासचिव, वाजा इंडिया द्वारा संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विषय प्रवेश देते हुए वाजा इंडिया, कोलकाता इकाई के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ पत्रकार विश्वंभर नेवर (निदेशक ताजा टी.वी. व छपते-छपते) ने कहा कि आजादी के बाद शिक्षा में आए उतार-चढ़ाव के बीच आज शिक्षा की खिचड़ी बन गई है । उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी और वाजा इंडिया द्वारा संपन्न हो रही है यह ई-परिचर्चा हमारा ध्यान एक गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करती है। मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद रही प्रोफेसर सोमा बंदोपाध्याय का कहना था कि यह विषय बहुत ही महत्वपूर्ण है, हमारे भारतीय परिवेश में माता-पिता के बाद शिक्षक व गुरु का ही महत्व होता है। मेरा मानना है कि शिक्षक को समय के साथ खुद को अपडेट रखना चाहिए और साथ ही यह एक गुरु का दायित्व है कि वह विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक दायित्व बोध के प्रति भी जागरूक करें । सुश्री सोमा ने आगे कहा कि आज नई पीढ़ी के पास ज्ञान व सूचना के साधन बड़ी आसानी से उपलब्ध हैं तो यहां शिक्षकों के सामने नई पीढ़ी की बढ़ती आकांक्षाओं की पूर्ति भी बड़ी चुनौती हो जाती है । इस मौके पर सोमा बंदोपाध्याय ने शिक्षकों से अनुरोध किया है कि वह मानव रोबोट ना तैयार कर विद्यार्थियों को व्यवहारिक शिक्षा प्रदान करें। आपको बता दें कि प्रोफेसर सोमा बंदोपाध्याय वर्तमान में पश्चिम बंगाल प्रशिक्षण शिक्षण योजना एवं प्रबंधन विश्वविद्यालय की साथ ही डायमंड हार्बर विश्वविद्यालय की कुलपति हैं तथा यह संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति भी रह चुकी हैं। आमंत्रित वक्ता के रूप में अपना वक्तव्य रखते हुए शिक्षा सदन फॉर गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल ,हावड़ा, कोलकाता की पूर्व प्रधानाचार्य दुर्गा व्यास ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षकों को विशेष सम्मान मिला है इसलिए एक शिक्षक का दायित्व है कि नई पीढ़ी का नव निर्माण करें । परिचर्चा के दौरान द बीएसएफ स्कूल कोलकाता की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रियंका मिश्रा ने कहा कि आज शिक्षा व शिक्षकों का व्यवसायीकरण हो रहा है । इसी तरह आमंत्रित वक्ता के तौर पर भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज पश्चिम बंगाल में कार्यरत डॉ.रेखा नारीवाल ने कहा कि आज हम वैल्यू और नैतिक मूल्यों पर समझौता कर रहे हैं। यह स्थिति घातक है । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कोलकाता के प्रतिष्ठित बिरला हाई स्कूल्स की डायरेक्टर मुक्ता नैन ने कहा कि पहले शिक्षक रोल मॉडल्स हुआ करते थे। पूर्व समय के शिक्षक स्कूल को एक जॉब नहीं बल्कि ज्ञान दान की भावना को अपना कर्तव्य समझते थे। कार्यक्रम की प्रायोजक बॉल पेन की निर्माता कंपनी ' Kolorite' रही जिसके डायरेक्टर अमित पॉल ने भी कार्यक्रम के अंत में अपने विचार व्यक्त किए। इस परिचर्चा में भारत के तमाम शहरों के शिक्षक ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। कोलकाता ईकाई में साहित्यकार रेणु गौरसरिया, साहित्य प्रेमी शशि कंकानी और बहुत संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। यह इ- परिचर्चा एक महत्वपूर्ण और गंभीर विषय को लेकर आयोजित हुई जिससे वर्तमान काल खंड में हमारा, देश, समाज व नई पीढ़ी उसमें अपना अक्स देख सके ।

भवानीपुर कॉलेज में मातृभाषा दिवस 2022

विविधता में एकता का प्रतीक है मातृभाषा - - भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के बांग्ला विभाग के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2022 उत्सव मनाया। अपनी भावनाओं और इच्छाओं को व्यक्त करने में हमारी मातृभाषा संवाद और कौशल की सूचक होती है। मातृभाषा हमारी पहचान है। मातृभाषा में बोलने पर गर्व का अनुभव होता है। इस अवसर पर कॉलेज ने अपने वीर महापुरुषों को नमन करते हुए उन्हें स्मरण किया।' अंतरजाति मातृभाषा दिबोश' दो दिवसीय19-21फरवरी के कार्यक्रम था जिसमें नाटक, बहुभाषी भाषणों का वितरण, एकल और बहुसांस्कृतिक नृत्य प्रदर्शन हुए ।19 फरवरी को, एक सनसनीखेज स्ट्रीट प्ले श्री सैकत घोष द्वारा निर्देशित 'रोक्तोसनातो भाषा' का प्रदर्शन रानूछाया के खुले मैदान में छात्रों द्वारा किया गया जिसने भाषा संघर्ष की याद दिलाई। 1952 में भाषा के लिए शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में प्रख्यात रंगमंच हस्ती मुख्य अतिथि श्री गौतम हलदरी की गरिमामयी उपस्थिति रही । कार्यक्रम के प्रतिभागियों में संस्थान के छात्रऔर प्रोफेसर भी शामिल हुए। इस यादगार दिन में रंगभवन में लगभग 150 लोगों की उपस्थिति रही। 21 फरवरी को कॉलेज के सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन करते हुए गीत प्रस्तुति दी गई। इसके बाद महत्वपूर्ण घोषणाएंँ, समृद्ध भाषण, और सांस्कृतिक कार्यक्रम जिसमें सस्वर पाठ, संगीत कार्यक्रम, ऑडियो शामिल थे। नाटक, बहुभाषी भाषण, एकल और बहुसांस्कृतिक नृत्य प्रदर्शनों की प्रस्तुति दी गई। बंगाली विभाग की डॉ. मिली समद्दर ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि मातृभाषा विविधता में एकता है। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज में रूस युक्रेन चल रहे युद्ध पर वेबिनार 2022

रूस यूक्रेन चल रहे युद्ध पर वेबिनार - -भवानीपुर कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा समसामयिक विषय रूस और युक्रेन युद्ध के संकट की विभीषिका पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया। जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ अनिंद्यो ज्योति मजूमदार अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग जादवपुर से विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किए गए।डॉ मजूमदार ने रूस और युक्रेन के बीच चलने वाले इस दुखदायी युद्ध के दौरान होने वाली वर्तमान क्राइसिस पर विस्तार से चर्चा की और विश्व में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिप्रेक्ष्य में पांच मार्च 2022 को होने वाला यह वेबिनार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही थी जिनमें विद्यार्थियों की बहुत बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। ऑडियंस के लिए भी एक बड़ी स्क्रीन की व्यवस्था कॉन्सेप्ट हॉल में की गई थी। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर लोपामुद्रा मजमूदार द्वारा किया गया और स्वागत भाषण देते हुए प्रोफेसर अमला ढांढनिया ने कहा कि पहले ही पूरा विश्व कोरोना से युद्ध लड़ रहा था और अब रूस और युक्रेन में चल रहे युद्ध ने दोनों देशों की आम जनता को पीड़ित कर दिया है यहाँ तक कि उसका असर सभी देशों को भुगतना पडेगा। डॉ मजूमदार ने अपने व्याख्यान को दो खंडों में विभाजित किया। पहले खंड में उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच वर्तमान संकट का एक व्यापक प्रक्षेपवक्र प्रस्तुत किया और विभिन्न कारकों की व्याख्या की जो इस घातक युद्ध के फैलने के लिए जिम्मेदार हैं। दूसरे खंड में उन्होंने इस युद्ध के संभावित प्रभाव का विश्लेषण प्रस्तुत किया। प्रमुख शक्तियों के बीच वैश्विक राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग पर भी विचार मंथन और परिचर्चा की डॉ मजूमदार ने। प्रश्नोत्तर सेशन में पूछे गए सभी प्रश्नों के उत्तर दिए। इस अवसर पर कॉलेज की हिंदी अध्यापिका डॉ वसुंधरा मिश्र द्वारा लिखी गई कविता 'युद्ध युद्ध युद्ध' सुनी गई जो समसामयिक और युद्ध के विविध रूपों को उजागर करती है। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन किया डॉ. देबांजना चक्रवर्ती ने और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर उत्सव समारोह 2022

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर उत्सव समारोह - - भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के प्लेसमेंट हॉल में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का उत्सव मनाया गया। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस सर सी वी रमन के नाम पर मनाया जाता है जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण खोज की। कॉलेज के विज्ञान विभाग के सभी विद्यार्थियों और शिक्षक गणों द्वारा भव्य समारोह का आयोजन किया गया । 28 फरवरी, 2022 को विज्ञान अनुभाग से जुड़े छात्रों के बीच प्रश्नोत्तरी और पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता का आयोजन किया। कार्यक्रम टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय के स्वागत भाषण के साथ शुरू हुआ। .सुभब्रत गांगुली, उप-प्राचार्या डॉ पिंकी साहा सरदार ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर शिक्षकों, विद्यार्थियों और मैनेजमेंट के पदाधिकारियों के सहयोग की प्रशंसा की। डॉ. एस. के. दत्ता, विज्ञान के डीन; प्रो. समीर कुमार बंदोपाध्याय, अनुसंधान सलाहकार और प्रो. दिलीप शाह, कॉलेज के छात्र मामलों के डीन गणमान्य व्यक्तियों ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के महत्व को समझाया। डॉ. एस. के. दत्ता ने तकनीकी क्षेत्रों में करियर विकल्प के रूप में बुनियादी विज्ञान को चुनने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद अर्थशास्त्र के एक छात्र ने उद्घाटन गीत गाया। उनके प्रदर्शन के बाद, विज्ञान अनुभाग के छात्रों ने पोस्टर प्रस्तुत करना शुरू कर दिया। डॉ. एस. के. दत्ता, प्रो. समीर कुमार बंदोपाध्याय और डॉ. अनूप सिकदर इस सत्र के विशेषज्ञ थे। सेमेस्टर IV और VI में से प्रत्येक के 6 छात्रों ने कुल मिलाकर 12 छात्रों ने कई विषयों पर पोस्टर प्रस्तुत किए, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं: भारतीय विज्ञान का अतीत गौरव, भारतीय विज्ञान में महिलाएं, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका, कटिंग विज्ञान के किनारे नवाचार औरप्रौद्योगिकी।उत्सव मुखर्जी द्वारा आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता की गई जिसमें विज्ञान खंड के 6 विभागों के छात्रों ने भाग लिया। सत्र के तीन दौर के बाद, भौतिकी विभाग ने प्रतियोगिता जीती। भौतिकी विभाग ने पोस्टर प्रेजेंटेशन भी जीतकर चैंपियन की ट्रॉफी अपने नाम की। दिन भर चलने वाले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज ने मनाया वोमेन्स डे 2022

वोमेन्स सेल और आईक्यूएसी दोनों के सौजन्य से आयोजित वोमेन्स डे - - भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के वोमेन सेल और आईक्यूएसी ने मनाया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस। इस अवसर पर टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय ने प्रमुख अतिथिविद्यासागर विश्वविद्यालय की ऐसोसिएट प्रोफेसर डॉ भास्वती चटर्जी का स्वागत करते हुए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर शुभकामनाएं दीं। 'वोमेन एंड सोशयल रिफार्म्स' पर अपना शोध पेपर पढा़ । 19वीं शताब्दी भारत में स्त्रियों की स्थितियों पर विभिन्न एक्टों का पूर्ण विवेचन किया। विवाह, विधवा विवाह, स्त्री अधिकारों की चर्चा की। विवाह और संपत्ति अधिकार आदि सुधारों पर भी चर्चा की। 20वीं शताब्दी में होने वाले हिंदू और मुस्लिम स्त्रियों के अधिकारों पर भी चर्चा की। विवाह, तलाक बहुपत्नी विवाह की समाप्ति, संपत्ति अधिकार नये रिफार्म्स नियम आए। विवाह पर 28 बिल, तलाक पर 12 बिल, संपत्ति पर 19 बिल आए।स्त्री से संबंधित विवाह के कई बिलों के विषय पर अपना महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। पोलिटिकल विभाग के प्रो करन वोरा ने लिंग पर चर्चा करते हुए कई उदाहरणों से अपनी बात रखी। पुरुषों और स्त्रियों दोनों लिंग की असमानता जो समाज में परंपरागत रूप से चली आ रही है,उसमें समय, कार्य तथा परिवर्तन की आवश्यकता है। प्रो देवज्यानी गांगुली ने अध्यक्षता करते हुए दोनों अतिथि वक्ताओं को धन्यवाद दिया और कहा कि स्त्री की लड़ाई की कहानी यात्रा लंबी है लेकिन वर्तमान में बहुत हद तक कई क्षेत्रों में बदलाव आया है। पितृसत्तात्मक समाज, विवाह की उम्र, यूनीफॉर्म सिविल कोड, भारत की न्यायिक प्रणाली, एक्ट आदि की अनदेखी आदि कई विषयों पर प्रश्नोत्तर सेशन में शिक्षक और विद्यार्थियों ने प्रश्न किए। अंत में, सांस्कृतिक कार्यक्रम में अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर सौरजा टैगोर ने रवीन्द्र नाथ टैगोर के अनछुए गीतों पर भाव, लय, अभिनय और अभिव्यक्ति से पूर्ण नृत्य प्रस्तुति दी। उनमें वोमेन्स डे विषय को ध्यान में रखते हुए 'आमार मोतन के आछे'अर्थात् स्त्री जैसा कौन है, 'रवीन्द्र नाथ टैगोर के गीतों पर नायिका और सखी की कहानी, भानुसिंह पदावली, चंडालिका से नृत्य प्रस्तुति दी जो बहुत ही सराही गई।शांतिनिकेतन से आई श्रीमती मनीषा मुरली नायर साथ में तबला पर पं बिप्लव मंडल और श्रीमती अरुंधति राय रहे।सांस्कृतिक कार्यक्रम का संयोजन किया प्रो तथागत सेन ने।प्रो देवांजना चक्रवर्ती ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

अर्चना संस्था ने शब्दों से खेली होली मार्च 2022

अर्चना संस्था ने शब्दों से खेली होली - - - - अर्चना संस्था ने जूम अॉन-लाइन पर सदस्यों के साथ शब्दों की स्वरचित खेली होली। फागुनी बयार आई रंग भरा प्यार लाई। गुनगुनाती धूप आई किशमिश ठंड लाई। विद्या भंडारी, प्रसन्न चोपड़ा ने मुझ पर क्यों चिल्लाते पत्नी जोर से चिल्लाई, भारती मेहता - रंग तो बहुत रहे मेरे पास भरूँ किसमें, अनुकूल आकृति ही न मिली !, उषा श्राफ -रंगों का इन्द्र धनुष है होली, मृदुला कोठारी ने आओ भाईलिया धूम मचावा, सतरंगी फागणियो मनावा शशि कंकानी ने पीछे- पीछे गोप चलत हैं, आगे चले नन्द लाल।भरके हाथों में अबीर,गुलाल रे कि आयो होली रो त्यौहार। सुशीला चनानी ने होली की रंग-रंगीली गोष्ठी में खूब रंग बरसे!हम सब भीगे!आनन्द आ गया । सब टाइटिल की आस लगाये बैठे थे वो भी पूरी होगी छारण्डी के दिन !, इन्दु ने भी मीठे मीठे फूलों करंग बरसाये ।और अन्त में हिम्मत जी ने होली का खूब हुडदंग मचाया ! सांचो कहूँ सखी वृन्दावन को सो सो आनन्द भयो आज तो!, सुशीला चनानी ने होली आयी रस भरी,बरसे चहुँ दिशा रंग।पग थिरके पायल बिना,बाजे ढोल मृदंग।।राधा कृष्ण होरी-(मन हरण छन्द)भर पिचकारी कान्हा, राधिका को मारी, हिम्मत चोरड़़िया ने गीत -कुण्डलिया- सारे रंगो से सजा, होली का बाजार, जोगीरा-आओ मिलकर खेलें होली.., बनेचंद मालू की पंक्तियाँ जब आता है फागुन का महीना,छा जाता है कुछ नशा सा!/भीना भीना!.. इन्दु चाण्डक के संचालन में हुई गोष्ठी में विद्या भंडारी ,सुशीला चनानी,मृदुला कोठारी ,बने चन्द जी मालू,नवरतन भंडारी ,प्रसन्न चोपड़ा ,हिम्मत चोरड़िया,संगीता चौधरी ,शशि कंकाणी ,भारती मेहता ,ऊषा सराफ ने शिरकत की। होली के सतरंगी रगों में भीगी गोष्ठी में सभी रचनाकारों ने विभिन्न भाव शब्दो में भर कर पिचकारी चलायी ।बहुत ही आनन्द और उल्लास भरी गोष्ठी में सभी सदस्यों की सहभागिता रही। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कार्यक्रम की जानकारी दी ।

इंट्रा एथलेटिक कॉर्निवाल ऊर्जा 2022 मनाया भवानीपुर कॉलेज ने

इंट्रा एथलेटिक कॉरनिवाल ऊर्जा 2022 मनाया भवानीपुर कॉलेज ने - - गीतांजलि स्टेडियम में भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के छात्र- छात्राओं ने इंट्रा एथलेटिक कॉरनिवाल ऊर्जा 2022 के अंतर्गत स्पोर्ट्स और एथलीट्स के प्रदर्शन, कॉरनिवाल फेस्ट और फनफेयर रहा। कॉलेज के सभी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सौ , दो सौ और चार सौ रेस, डिस्कस थ्रो, शार्ट पुट, रिले आदि विभिन्न स्पोर्ट्स में कई बैचों में छात्र और छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। खाने, पीने और स्नेक्स आदि के 16-17 स्टॉल लगाए गए जो विद्यार्थियों ने लगाए।एनसीसी के कैडटों ने मार्चपास्ट किया। एनसीसी के विद्यार्थियों का स्टॉल लगाया गया।एनसीसी केडट राज तिवारी, शशांक शेखर तिवारी, अनन्या सिंह, विपुल सिंह आदि उपस्थित रहे।एनसीसी दानिश तारपोल ने बेहतर प्रदर्शन किया। लडकियों में यश्वी ने. गांधी ने बेहतर प्रदर्शन किया। ब्लड डोनेशन का भी आयोजन था जिसमें विद्यार्थियों ने ब्लड डोनेट किया। प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान पर आने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। शिक्षिकाओं ने लेमन रेस और नॉन टिचिंग स्टॉफ ने रेस में हिस्सा लिया। उद्घाटन समारोह में मशाल प्रज्वलित कर ऊर्जा 2022 का आह्वान किया गया जिसमें प्रो दिलीप शाह, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी और उमेद ठक्कर प्रमुख रहे।प्रो दिव्या उदेशी, प्रो विवेक पटवारी, प्रो दर्शना त्रिवेदी, प्रो चंदन झा, प्रो कृपा शाह, प्रो पूजा अग्रवाल, प्रो डालिया शर्मा,प्रो अंकित पटवारी, प्रो रेखा नारिवाल, प्रो प्रीति शाह,अरित्रिका दूबे, डॉ वसुंधरा मिश्र और अन्य शिक्षकों की उपस्थिति रही। स्पोर्ट्स के प्रमुख रूपेश गांधी का प्रमुख सहयोग रहा। कॉलेज के डायरेक्टर जनरल डॉ सुमन मुखर्जी और एयरफोर्स ग्रुप कमांडर विष्णु शर्मा ने सभी प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने कॉर्निवाल फेस्ट में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

पुस्तक मेले में कुसुम खेमानी के उपन्यास लावण्य देवी की बांग्ला अनुदित पुस्तक का लोकार्पण 2022

पुस्तक मेले में कुसुम खेमानी के उपन्यास 'लावण्यदेवी' की बांग्ला अनुदित पुस्तक का लोकार्पण-- कोलकाता पुस्तक मेले ( बोई प्रांगण मेला) के सौमित्र चटर्जी मुक्त मंच पर 12 मार्च को प्रख्यात लेखिका डॉ. कुसुम खेमानी के उपन्यास ‘लावण्यदेवी’ के बांग्ला अनुवाद के आवरण का लोकार्पण किया गया| यह उपन्यास ढाका (बांग्लादेश) के बेंगाल पब्लिकेशन्स ने छापा है| स्वागत वक्तव्य देते हुए परिषद के मंत्री डॉ. केयूर मजमुदार ने कहा कि जिस देश में भाषा को लेकर इतनी मुहिम रही, उसी देश में 'लावण्यदेवी' का बांग्ला अनुवाद किया गया जो भारतीय भाषा परिषद के लिए गौरव का विषय है।साहित्य टाइम्स के रोशन झा द्वारा इस कार्यक्रम का प्रसारण भी किया गया। उपन्यास की लेखिका डॉ कुसुम खेमानी ने अपने संदेश में कहा कि यह बहुत गर्व की बात है कि उनका उपन्यास बांग्लादेश से छप रहा है। इससे भारत और बांग्लादेश के साथ-साथ हिंदी-बांग्ला का एक मैत्री संबंध भी बनता है।बांग्ला देश साहित्यिक सर्कल् के बिमान गुहा ने विशेष सन्देश दिया। इस अवसर पर गिल्ड के अधिकारी योगेश तन्ना, परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ, परिषद के मंत्री डॉ. केयूर मजमुदार, प्रख्यात पूर्व फुटबॉलर सुबीर मुखर्जी, नीलकमल प्रकाशन, हैदराबाद के प्रमुख सुरेश चंद्र शर्मा, अल्पना सिंह, अमित मुंदड़ा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे| डॉ.कुसुम खेमानी के बांग्ला में अनूदित उपन्यास ‘लाबण्यदेबी’ का संक्षिप्त पाठ सुबीर मुखर्जी द्वारा किया गया| भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ.शंभुनाथ ने कहा कि लावण्यदेवी के बांग्ला में अनूदित उपन्यास बांग्ला भाषियों द्वारा काफी आदर के साथ पढ़ा जाएगा। नीलकमल प्रकाशन के सुरेश चंद्र शर्मा ने भी अपना वक्तव्य रखा। कवयित्री अल्पना सिंह ने अपनी कविता का पाठ किया। डिजिटल पटल पर भवानीपुर एजूकेशन सोसायटी के डीन दिलीप शाह और वसुंधरा मिश्र भी जुड़ी रहीं। इन्होंने डॉ कुसुम खेमानी को अपना बधाई संदेश भिजवाया। बेंगल पब्लिकेशन के अब्दुर रज्जाक ने अपने स्टाल से कुसुम खेमानी द्वारा हस्ताक्षरित पुस्तकों की बिक्री की। इस कार्यक्रम के साथ बांग्लादेश साहित्य सर्किल भी जुड़े रहे। इस अवसर पर मेले में मुस्तैद पुलिस कर्मियों एवं पुस्तक प्रेमियों के बीच भारतीय भाषा परिषद द्वारा सैनिटाइजर का वितरण किया गया। धन्यवाद ज्ञापन परिषद के सचिव डॉ.केयूर मजमुदार ने दिया| मंच संचालन किया सुशील कान्ति ने। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में मीनाक्षी दत्ता, अमृता चतुर्वेदी और एस पी श्रीवास्तव की प्रमुख भूमिका रही।कार्यक्रम का संयोजन किया डा वसुंधरा मिश्र, अमित मुंधड़ा, अल्पना सिंह और सुरेश चंद्र शर्मा ने।

छपते छपते हिंदी दैनिक कोलकाता में संपादकीय देश का राजनीतिक संकट बनाम कांग्रेस का भविष्य

देश का वर्तमान राजनीतिक संकट बनाम कांग्रेस का भविष्य विषय पर रविवारीय चिंतन बहुत ही महत्वपूर्ण और समसामयिक है ।स्वाधीन भारत के समय से चली आ रही मजबूत कांग्रेस पार्टी की स्थिति वर्तमान में अपनी भूमिका खो चुकी । नेतृत्व और जमीन से जुड़े नेताओं का अकाल पड़ गया है। आपने सही लिखा है कि कांग्रेस का रूदाली काल है। बीजेपी यदि सत्ता में है तो एक नयी राजनीतिक यात्रा की ओर है भारत। इसका हमें स्वागत करना चाहिए। हर युग में राजनीतिक संकट आता रहा है जिसके साक्षी आम लोग ही रहे हैं। आपका लेख निष्पक्ष और सटीक राजनीतिक चित्र को दर्शाता है। - डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता 🙏

भारतीय भाषा परिषद और भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के सहयोग से विद्यार्थियों द्वारा पुस्तकों पर चर्चा

भारतीय भाषा परिषद और भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के सहयोग से विद्यार्थियों द्वारा पुस्तकों पर चर्चा - - भारतीय भाषा परिषद और भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने तीन पुस्तकों को पढ़ा और उनकी समीक्षा की। भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ कुसुम खेमानी ने अपने संदेश में कहा कि पुस्तकें हाथ में लेकर पढ़ने से एक अलग ही अनुभूति होती है। संदेश पढा़ परिषद के मंत्री डॉ केयुर मजमूदार ने ।ए पी जे अब्दुल कलाम की पुस्तक 'विंग्स अॉफ फॉयर' पर बीए अंग्रेजी की छात्रा नम्रता चौधरी ने बताया कि कितने संघर्षों के बाद एक अब्दुल कलाम पैदा होता है। मिसाइल मैन और भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति होने के साथ-साथ वे एक प्रेरक व्यक्तित्व रहे हैं। असफलताओं को पार करके ही व्यक्ति अपने जीवन में सफल होता है, हार भी जीत में बदल जाती है। विंग्स अॉफ फॉयर' के दो महत्वपूर्ण पृष्ठों को भी पढ़ा। वहीं बीकॉम के छात्र फजल मोहम्मद ने लेखक एलिफ शफक के उपन्यास 'फोर्टी रूल्स अॉफ लव' पर चर्चा करते हुए उपन्यास की नायिका ऐला जो जूनियर एडिटर होती है लेकिन उसके जीवन में सब कुछ रहते हुए भी वह बहुत अकेली और प्रेमविहीन थी और एक पुस्तक ने उसके जीवन को कैसे बदल डाला, इसी को केंद्र में रखकर पुस्तक लिखी गई है।पुस्तक पढकर उसे प्रेम का अहसास होता है ।भारतीय भाषा परिषद से आई साहित्य मर्मज्ञ डॉ अल्पना सिंह ने डॉ कुसुम खेमानी के उपन्यास पर चर्चा करते हुए कहा कि डॉ कुसुम खेमानी का उपन्यास 'लावण्यदेवी' एक ऐसा उपन्यास है जिसमें एक कुटुम्ब की पांच पीढ़ियों की गाथा समाहित है।प्रमुख नायिका चरित्र लावण्य देवी है जिनका जीवन कर्मशील है और उनके सारे फैसले जनहित में किए जाते हैं। कार्यक्रम के आरंभ में कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने कहा कि पुस्तक पढ़ते समय विभिन्न विचारों, दर्शन और संस्कृति का ज्ञान होता है। अपने वक्तव्य में एपीजे अब्दुल कलाम से संबंधित अपना एक संस्मरण भी सुनाया। चर्चिल, गांधी के वैचारिक मतभेद और अन्य पठनीय पुस्तकों के विषय में बात की। भारतीय भाषा परिषद के मंत्री डॉ केयुर मजमूदार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया ।परिषद के कार्यकारिणी सदस्य अमित मूंधड़ा की उपस्थिति रही। अमित मूंधड़ा ने कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल डॉ पिंकी साहा सरदार को पुस्तक गुच्छ देकर सम्मानित किया। कॉलेज की ओर से डॉ अल्पना सिंह और डॉ केयुर मजमूदार को मोमेंटो प्रदान किया गया। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की लाइब्रेरी में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन डॉ वसुंधरा मिश्र ने किया ।पचास से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति रही।

भवानीपुर कॉलेज ने इंसटाग्राम के माध्यम से व्यक्तिगत ब्रांडिंग पर कार्यशाला

Instagram के माध्यम से व्यक्तिगत ब्रांडिंग - - सोशल मीडिया आज हमारे जीवन का एक सहज हिस्सा है। हमारा जीवन इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि के इर्द-गिर्द घूमता है। हम जितना समय ऑनलाइन बिताते हैं, वह निश्चित रूप से जितना हम सोचते हैं उससे कहीं अधिक है। शोध के अनुसार, एक औसत सोशल मीडिया उपयोगकर्ता रोजाना लगभग ढाई घंटे सोशल मीडिया पर बिताता है। यह आंकड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के महत्व को समझने और उन पर सक्रिय उपस्थिति रखने में मदद करने के लिए पर्याप्त है। भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 15 मार्च, 2022 को 'इंस्टाग्राम के माध्यम से व्यक्तिगत ब्रांडिंग' पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस आयोजन के वक्ता श्री दीपक पारीक थे- व्यक्तिगत विकास पर एक सोशल मीडिया प्रभावित और 5 बार TEDx के गर्वित अध्यक्ष। वह करियर कीड़ा के सह-संस्थापक भी हैं। कार्यक्रम के संचालक प्रो. मोहित शॉ थे। इवेंट का मकसद लोगों को Instagram पर एक मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति बनाने में मदद करना और उन्हें Instagram पर व्यक्तिगत ब्रांडिंग के महत्व को पहचानने में मदद करना था। श्री। दीपक पारीक ने इंस्टाग्राम मार्केटिंग में क्या करें और क्या न करें के बारे में बताया। रील, पोस्ट, हैशटैग और इंस्टाग्राम एल्गोरिथम जैसे विभिन्न रणनीतिक कारकों पर चर्चा की गई। फिर उन्होंने ब्रांड सहयोग और इससे पैसे कमाने के बारे में बात की। उन्होंने विशेष रूप से 'सामग्री अनुनाद', 'एक विशेष जगह से चिपके रहना' और 'उद्देश्य के साथ सामग्री का निर्माण' जैसी अवधारणाओं का उल्लेख किया, ताकि व्यक्तियों को उनके खातों के उत्थान में मदद मिल सके। यह विशेष सत्र एक बड़ी सफलता थी क्योंकि इसमें व्यक्तिगत ब्रांडिंग के मामले में बहुत कुछ था जो आज समय की आवश्यकता है। छात्रों ने इसे वास्तव में मददगार और अभिनव पाया क्योंकि इसने उनके लिए सभी बॉक्स चेक किए। रिपोर्ट बाय- अक्षिता सूरी..

भवानीपुर कॉलेज में वार्षिक इंटर कॉलेज मैनेजमेंट फेस्ट बॉनफायर 22 का उद्घाटन समारोह

भवानीपुर कॉलेज में वार्षिक इंटर कॉलेज प्रबंधन उत्सव बॉनफायर 22 - - - शिक्षा तथ्यों की सीख नहीं है, बल्कि दिमाग द्वारा सोचने का प्रशिक्षण है। इस उक्ति को ध्यान में रखते हुए, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग ने छात्रों को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए, जिओआ द्वारा प्रायोजित अपने वार्षिक इंटर-कॉलेज प्रबंधन उत्सव, 'बोनफायर' की मेजबानी की। बॉनफायर 22की परिकल्पना होलिका दहन में बुराइयों के विनाश के आधार पर की गई है। बॉनफायर बॉन्डिंग-ऑर्गनाइजिंग-नेगोशिएशन-फोकस-इंट्यूशन-रिस्पॉन्सिबिलिटी और एंटरप्राइज का संक्षिप्त रूप है। तीन दिवसीय उत्सव का उद्घाटन समारोह ललित ग्रेट इस्टर्न में आयोजित किया गया जिसका उद्देश्य छात्रों की प्रतिस्पर्धात्मक भावना को बाहर लाना और उन्हें परखना है।उद्घाटन समारोह 24 मार्च, 2022 को द ललित ग्रेट ईस्टर्न में आयोजित किया गया था। कॉलेज के डायरेक्टर जनरल डॉ सुमन मुखर्जी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया ।साथ में, प्रमुख अतिथियों में रजवाड़ा समूह के प्रवीण अग्रवाल, वुडलैंड्स मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल लिमिटेड की निदेशक डॉ रूपाली बसु और ईज़ी नोट्स स्टेशनरी प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक शालिनी एस विश्वास रहीं। उद्घाटन समारोह की शुरुआत भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज, देवज्योति बनर्जी और माधव मोहता के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के छात्र अध्यक्षों के परिचय भाषण के साथ हुई। एम्सीस अदा बक्स और अनुषा अकबर द्वारा एक उद्घाटन भाषण दिया गया जिसमें उन्होंने सभी कॉलेजों का स्वागत किया और कॉर्पोरेट संस्कृतियों के सभी आयामों से होने वाले तीस से अधिक होने वाले आयोजनों के बारे में चर्चा की। गणमान्य अतिथियों का परिचय कराया गया और उन्हें गिफ्ट हैम्पर्स देकर सम्मानित किया गया। भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के महानिदेशक प्रो. डॉ. सुमन कुमार मुखर्जी ने उद्घाटन भाषण देते हुए उन्होंने "बोनफायर" नाम के महत्व पर प्रकाश डाला और कॉलेज की ओर से कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए छात्रों की सराहना की। प्रमुख अतिथियों में रजवाड़ा समूह के युवा उद्यमी प्रवीण अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में उद्यमशीलता की दुनिया में अपने जीवन के अनुभवों के बारे में और रियल एस्टेट की दुनिया को धन्यवाद संभालने में किन- किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, बातें विद्यार्थियों से साझा की । उन्होंने महत्वाकांक्षी युवा उद्यमियों के लिए आज की दुनिया में मौजूद प्रतियोगिताओं के साथ-साथ व्यवसाय को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए अपने नेतृत्व कौशल को सही जगहों पर कैसे इस्तेमाल किया जाए, इस पर भी चर्चा की। वुडलैंड्स मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल लिमिटेड की निदेशक और सीईओ डॉ रूपाली बसु ने देश के चिकित्सा मुद्दों पर चर्चा करते हुए अपने भाषण की शुरुआत की और वर्तमान समय में अपने अनुभवों और संघर्षों की चर्चा की उन्होंने इस बात पर भी चर्चा की कि वे कठिन समय में अपने रोगियों के साथ कैसे व्यवहार करते हैं और समय के साथ कैसे एक व्यवसाय का संचालन और संगठन सुचारू रूप से करते हैं। शिक्षा ग्रहण करने के बाद आपको कर्म क्षेत्र में अलग ही चुनौतियाँ आती हैं, कॉर्पोरेट जगत तो बिल्कुल ही भिन्न हैं। ईज़ी नोट्स स्टेशनरी प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक शालिनी एस विश्वास व्यापारिक जगत में एक किंवदंती की तरह हैं और भारत के सबसे सफल उद्यमियों में से एक है। उनका संबोधन व्यवसाय और स्टार्ट-अप के क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की चर्चा के साथ शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि महामारी कोरोना के दौरान अपने व्यवसाय को बनाए रखने के लिए हाउसिंग सोसाइटियों में स्टेशनरी कैंप लगाए। अपनी प्रबंधन टीम को समझाया कि किसी व्यवसाय या संगठन के लिए अतिरिक्त विचारों को प्रबंधित करना और उसको कार्य में परिणत करवाना महत्वपूर्ण होता है। भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बीबीए विभाग के समन्वयक डॉ त्रिदीब सेनगुप्ता ने निम्नलिखित जुनून के बारे में अपने बहुमूल्य विचार सामने रखे और गणमान्य अतिथियों का परिचय दिया और बताया कि उनकी भूमिका छात्र जीवन में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कॉलेज के महानिदेशक प्रो डॉ. सुमन कुमार मुखर्जी द्वारा पूर्व अध्यक्ष दीक्षा झा और खिजिर जाफरी का अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर सभी के लिए जलपान की व्यवस्था थी। बोनफायर'22 का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम 'फैशन शो' ने धमाकेदार शुरुआत की और प्रतियोगियों और दर्शकों दोनों को उत्साहित किया। फैशन शो के प्रतिभागियों में द हेरिटेज एकेडमी, सिस्टर निवेदिता यूनिवर्सिटी, लोरेटो कॉलेज, द एडमास यूनिवर्सिटी और लैक्मे अकादमी के मेकअप कलाकारों द्वारा सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी को खूबसूरत दिन में तब्दील कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने अपने मॉडलिंग कौशल का प्रदर्शन रैंप शो द्वारा किया। समारोह के इवेंट मैनेजमेंट टीचर कोऑर्डिनेटर प्रो. कौशिक बनर्जी और प्रशासन का पूरा संयोजन रहा। स्वयंसेवकों, कॉलेज के प्रतिनिधियों और इवेंट मैनेजमेंट टीम का सहयोग रहा। ज्ञान को व्यावहारिक उपयोग में लाने के बाद ही ज्ञान बनता है।भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय इंटर-कॉलेज मैनेजमेंट फेस्ट - बोनफायर'22 कोलकाता के आसपास के विभिन्न कॉलेजों ने भाग लिया। फेस्ट के सभी आयोजनों में मार्केटिंग, मानव संसाधन प्रबंधन से लेकर वित्त तक की प्रतिभाओं के सभी आयामों को शामिल किया गया। सभी छात्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और स्वयं को जीतने की भावना के साथ प्रस्तुति दी। बोनफायर'22 का समापन समारोह जुबली हॉल में आयोजित किया गया था। समारोह की शुरुआत छात्र अध्यक्ष माधव मोहता और देवज्योति बनर्जी ने छात्रों और पूरी इवेंट मैनेजमेंट टीम के साथ-साथ इवेंट मैनेजमेंट टीचर - कोऑर्डिनेटर, प्रो कौशिक बनर्जी को धन्यवाद दिया। वैभव शर्मा और दिशा रूपानी ने छात्रों के लिए एक खेल का आयोजन किया जिसमें बोर्ड की बैठक, वाद-विवाद और एआईपीपीएम जैसे प्रमुख सार्वजनिक कार्यक्रमों से लेकर खजाने की खोज जैसे मनोरंजक कार्यक्रमों थे जिसमें प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसके बाद विजेताओं को प्रमाण पत्र देकर भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह अपने वक्तव्य में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में बोलना बहुत ही महत्वपूर्ण है और छात्रों भागीदारी के लिए प्रेरित किया जो उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है सभी विजेताओं को प्रो. दिलीप शाह द्वारा ट्राफियाँ प्रदान की गईं। फेस्ट में तृतीय स्थान जेडी बिड़ला इंस्टीट्यूट, द्वितीय स्थान सेंट जेवियर्स विश्वविद्यालय और प्रथम स्थान भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग को प्राप्त हुआ जिसने सभी आयोजनों में बेहतर प्रदर्शन और समन्वय किया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

मंडाला आर्ट कलाकार सीमा चतुर्वेदी के निधन पर

कला कभी नहीं मरती :सीमा चतुर्वेदी के निधन पर--- कलाकार के मरने के बाद भी उसकी कला कभी नहीं मरती। सीमा चतुर्वेदी एक ऐसी ही कलाकार थीं जो अपने असाध्य रोग कैंसर से लड़ती हुए मृत्यु को प्राप्त हुईं। मंडाला चित्रों के लिए जानी जाने वाली सीमा चतुर्वेदी विगत कई वर्षों से पेंटिंग में कॉफी काम कर रही थीं। आईसीसीआर में अवनिंद्रनाथ टैगोर गैलरी में डायमंड फोर के तत्वावधान में लगी एक प्रदर्शनी में उनसे मिलने का अवसर मिला।प्रदर्शनी का उद्घाटन रामानंद बंदोपाध्याय ने किया था। कला के विविध रूपों जैसे वाटर कलर, अॉयल पैंटिग के लगभग साठ चित्रों की प्रदर्शनी लगी थी जिसमें कृष्ण और गणेश के कई प्रतीकात्मक और परंपराओं से युक्त चित्र थे जो उनकी कल्पना के विस्तार को दर्शाते थे। सीमा ने बीमारी को कभी भी अपने मन पर हावी नहीं होने दिया और सदैव ही उनके होठों पर सकारात्मक मुस्कान लिए रहतीं थीं। तीस मार्च बाईस उनके जीवन का आखिरी दिन था। अपने अंतिम समय में अपोलो अस्पताल में भर्ती रहीं हैं जहां उन्होंने दुनिया से विदा लिया। अपने घर परिवार को संभालती हुई कैंसर से लड़ती हुई रंगों में जीवन को खोजती सीमा जीवन के रंग बिखेरती दिखाई देती है। लोक वेशभूषा में दो राजस्थानी स्त्रियों की पेंटिंग, समूह नृत्य चित्र, झील में खिला कमल, बुद्ध की विभिन्न भंगिमाओं के चित्र तो कला की विशिष्टता लिए हुए हैं। साथ ही मंडाला प्रिंट वाले कॉफी मग तो बहुत ही मनोरम हैं जब भी कोई कॉफी मग देखेगा उसे कलाकार की सकारात्मकता का एहसास होगा।कलाकार मर जाता है लेकिन उसकी कला जिंदा रहती है।सीमा की अंतिम इच्छा थी कि फलों के पेड़ लगवाने की जिसे पूरा किया उनके पति बेटा और बेटी दामाद और बच्चों ने । न्यू टाउन के स्मृति वन में अमरूद, आम, चीकू, अमलतास, बरगद आदि के पेड़ सीमा की अंत्येष्टि अवशेष के साथ लगाए गए। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी (सीमा की जेठानी) ने बताया कि वह इंटिरियर्स डिजाइनर भी थीं और उनको रंगों का बहुत ज्ञान था।इस अवसर पर डॉ वसुंधरा मिश्र ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

अम्बेडकर जयंती 14 अप्रैल, 2022

129 वीं अम्बेडकर जयन्ती पर नमन - - डाॅ. भीमराव आम्बेडकर जिन्हें डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म दिन 14 अप्रैल को पर्व के रूप में भारत समेत पूरे विश्व में मनाया जाता है।इस दिन को 'समानता दिवस' और 'ज्ञान दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंंकि जीवन भर समानता के लिए संघर्ष करने वाले अम्बेडकर को समानता और ज्ञान के प्रतीक माना जाता है। अम्बेडकर को विश्व भर में उनके मानवाधिकार आंदोलन संविधान निर्माता और उनकी प्रकांड विद्वता के लिए जाने जाते हैं और यह दिवस उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। अम्बेडकर की पहली जयंती 14 अप्रैल 1928 में पुणे नगर में मनाई थी। अम्बेडकर के जन्मदिन पर हर साल उनके करोड़ों अनुयायी उनके जन्मस्थल भीम जन्मभूमि महू (मध्य प्रदेश), बौद्ध धम्म दीक्षास्थल दीक्षाभूमि, नागपुर, उनका समाधी स्थल चैत्य भूमि, मुंबई जैसे कई स्थानिय जगहों पर उन्हें अभिवादन करने लिए इकट्टा होते है। विश्व के 100 से अधिक देशों में अम्बेडकर जयन्ती मनाई जाती है। संयुक्त राष्ट्र नेे भीमराव आंबेडकर को "विश्व का प्रणेता" कहकर उनका गौरव किया। संयुक्त राष्ट्र के ७० वर्ष के इतिहास में वहांँ पहली बार किसी भारतीय व्यक्ति का जन्मदिवस मनाया गया था। उनके अलावा विश्व में केवल दो ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी जयंती संयुक्त राष्ट्र ने मनाई हैं – मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला। आंबेडकर, किंग और मंडेला ये तीनों व्यक्ति अपने अपने देश में मानवाधिकार संघर्ष के सबसे बडे नेता के रूप में जाने जाते हैं। डॉ भीमराव अम्बेडकर को बाबा साहेब नाम से भी जाना जाता है। अम्बेडकर जी उनमें से एक है जिन्होंने भारत के संविधान को बनाने में अपना अहम योगदान दिया था पूरे भारत भर में गाँव, नगर तथा छोटे-बड़े शहरों में जुनून के साथ आंबेडकर जयन्ती मनायी जाती है। महाराष्ट्र में आंबेडकर जयन्ती बडे पैमाने पर मनाई जाती है। अधिकांश रूप से आंबेडकर जयंती भारत में मनाई जाती है, भारत के हर राज्य में, राज्य के प्रत्येक जनपद में और जनपद के लाखों गाँवों में मनाई जाती हैं। भारतीय समाज, लोकतन्त्र, राजनीति एवं संस्कृती पर आंबेडकर का गहरा प्रभाव पड़ा हैं। सौ से अधिक देशों में हर वर्ष डॉ॰ आंबेडकर जी की जयन्ती मनाई जाती हैं।

भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने किया व्यापार मेला उत्पाद लांच रिवील 2022

भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने किया व्यापार मेला उत्पाद लांच रिवील 2022 - - - - भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने अपने उत्पादों को रिवेल 2022 के तहत लांच किया। यह विद्यार्थियों को रचनात्मक शोध करने और सीखने की आंतरिक प्रेरणा को बल देने के लिए महत्त्वपूर्ण मंच है। एक रचनात्मक लक्ष्य बना कर जब छात्र केंद्रित होकर किसी उत्पाद की खोज करते हैं तो वे सीखने में अधिक लीन हो जाते हैं और उसकी प्राप्ति के लिए अधिक प्रेरित होते हैं जिसके लिए विद्यार्थियों को व्यवसायिक कौशल की आवश्यकता होती है। जैसा कि कहा जाता है, "रचनात्मकता मस्ती करने वाली बुद्ध अलग ही होती है" हम अक्सर कई मज़ेदार मेलों को देखते हैं जहाँ विचारों को अनुप्रयुक्त रूप में प्रस्तुत किया जाता है। व्यापारिक मेला भी एक ऐसा ही स्थान है जहाँ लोग अपना प्रदर्शन अपनी चतुर बुद्धि और कॉर्पोरेट तकनीकों के संकेत द्वारा कर सकते हैं अपने छात्रों की रचनात्मकता की जांँच करने और बढ़ाने के लिए, व्यवसाय प्रशासन विभाग बी बी ए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने एक दिवसीय उत्पाद लॉन्च कार्यक्रम का उद्घाटन तेरह अप्रैल 2022 को सुबह नौ बजे से कॉलेज के वालिया सभागार में किया गया। ' रिवील' एक संक्षिप्त शब्द है जिसके अर्थ में रीच-एनर्जाइज़-वायरल सस्ता-एक्सकेवेट-अचीव एंड लॉन्च अर्थात "खुलासा" जैसे अर्थ छिपे हैं । इस कार्यक्रम का उद्देश्य था व्यवसायिक -दिमाग वाले छात्रों को अपना प्रदर्शन करने के लिए एक मंच प्रदान करना और एक गैर-मौजूदा उत्पाद के रूप में विद्यार्थियों के विचार को लॉन्च करने के लिए तैयार करना। उत्पाद लॉन्च कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति में कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया जाह्नवी खंडाड़िया व धैर्य वोरा ने सभी सम्मानित अतिथियों व्यक्तियों को मंच पर आमंत्रित कर दीप प्रज्ज्वलित के साथ समारोह की शुरुआत हुई । इस अवसर पर व्यवसाय प्रशासन विभाग की छात्राओं ने शास्त्रीय नृत्य किया। भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी के महानिदेशक प्रो. डॉ. सुमन मुखर्जी ने अपने वक्तव्य में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए व्यापार के मूल मंत्रों पर प्रकाश डाला और कहा कि यह मंच विद्यार्थियों को भविष्य में अपने व्यवसाय को करने और वर्तमान में काम आने वाले उत्पाद और उनकी मार्केटिंग के विषय में सीखने के लिए है। इंटर कॉलेज के सभी प्रतिभागियों ने अपने वास्तविक दुनिया के सफल व्यावसायिक उदाहरणों को समझते हुए बताया कि कैसे कंपनियांँ रचनात्मक व्यवसाय योजनाओं के साथ छात्रों से संपर्क करें और उन्हें अपनाएंँ। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कारवान बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। एक व्यवसायिक योजना बनाने और अपने विचारों को दुनिया के बाकी हिस्सों के साथ संवाद करना साथ में ज्ञान और अनुभव को बढ़ावा देना है। छात्र मामलों के डीन प्रो. दिलीप शाह ने 'रिवील' 2022 को विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को एक्सपो जैसे व्यावसायिक मेलों का अवलोकन करना चाहिए जहांँ उन्हें बहुत से नए नए आइडिया मिलते हैं, जहांँ लगभग पांच सौ कंपनियां अपने उत्पादों का प्रदर्शन करती हैं, सीखने की प्रक्रिया में सहायक होती हैं। साथ ही प्रो दिलीप शाह ने कॉलेज में एक व्यापार मेला आयोजित करने की भी बात कही। कोआर्डिनेटर डॉ त्रिदीब सेनगुप्ता ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और कोलकाता के प्रसिद्ध कॉलेजों से आए विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट बाजार व्यवहार और उत्पाद निर्माण और प्रदर्शनी से संबंधित कार्यक्रम के लिए प्रेरक वक्तव्य दिया। रिवील प्रदर्शनी का उद्घाटन रिबन काट कर किया मैनेजमेंट की वरिष्ठ सदस्या नलिनी पारेख ने। छात्रों के अध्यक्ष देवज्योति बनर्जी और माधव मोहता ने उत्पाद प्रदर्शनी खोलने की घोषणा की । प्रदर्शनी में आठ स्टाल लगाए गए थे और प्रत्येक स्टाल में छह से सात प्रतिभागी थे। सभी टीमों को दिया गया अपने उत्पादों को तैयार करने और उनका विज्ञापन करने के लिए पर्याप्त मात्रा में समय दिया गया ताकि वे वोट इकट्ठा कर सकें। प्रतिभागियों द्वारा बनाए गए सभी उत्पाद न केवल अभिनव थे, बल्कि प्रतिभागियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी भीड़ को आकर्षित करने के लिए एक अनोखे तरीके से अपने उत्पादों का विज्ञापन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कोई भी उत्पाद तभी सफल होता है जब वह बाजार में मांग पैदा कर सके। प्रत्येक स्टॉल में अलग-अलग आकर्षण थे, जैसे जलपान और उत्पाद का लाइव प्रदर्शन, यह दर्शकों के लिए रोमांचक था कि उत्पाद कितना व्यवहार्य है। स्टालों को सजाया गया । पोस्टर और बैनर के साथ और कुछ छात्रों ने अपने स्टालों को अपशिष्ट उत्पादों से भी सजाया । इस आयोजन ने प्रतिभागियों को लोगों के साथ व्यवहार करने और उन्हें बनाने का प्रत्यक्ष अनुभव दिया। उत्पाद में रुचि जगाने के साथ प्रतिभागियों ने यूएसपी और उत्पादों के उपयोग के बारे में भी बताया। भीड़ को यह समझाने के लिए बनाया गया और बाजार में लॉन्च होने पर उत्पाद के विषय में किस प्रकार उनके उत्पाद का आंकलन होगा जैसे अनुभवों का लाभ सीखने को मिला । सभी स्टालों के बीच आमने-सामने की प्रतियोगिता थी, जिसमें दर्शकों के वोट आ रहे थे संकाय सदस्यों सहित सभी शिक्षकों ने आठ स्टालों पर आकर्षक उत्पाद देखे जिनमें स्वस्थ खाद्य उत्पादों और एनर्जी बार के साथ एक स्टॉल 'ENERBRE' ने भीड़ का ध्यान खींचा क्योंकि सस्ती कीमत पर यह उत्पाद स्वास्थ्य और स्वाद में भी अच्छी रही । जेडी बिड़ला संस्थान, सेंट जेवियर्स कॉलेज, आशुतोष सहित कई संस्थानों के दर्शक कॉलेज, और श्री शिक्षायतन कॉलेज ने उत्पाद प्रदर्शनी में भाग लिया और मूल्यवान ज्ञान अर्जित किया। किसी उत्पाद की व्यवसाय योजना को क्रियान्वित करते हुए ज्ञान होता है । दर्शक लगातार अपने पसंदीदा स्टॉल के लिए वोट कर रहे थे। एक घंटे के अंतराल में लोग लगातार मतदान कर रहे थे। कार्यक्रम की समाप्ति पर हो सभी मतों की गिनती के बाद परिणामों की घोषणा की गई। सभी विजेताओं को प्रभारी शिक्षक डॉ सुभब्रत गांगुली ने सम्मानित किया। श्लोक राय, ईशा दासगुप्ता, साची दुगर, माधव नंद गर्ग और राघव अग्रवाल के साथ टीम 7 आयोजक उर्वी बाजोरिया को उनके उल्लेखनीय विचार 'कैश द ट्रैश' तृतीय स्थान मिला। उन्होंने एक एटीएम बॉक्स बनाया था जहांँ एक उपभोक्ता डिब्बे में कचरा डालेगा और बदले में नकद या कूपन प्राप्त करेगा। इस नये विचार ने युवाओं में उत्पाद में रुचि दिखाई और साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रोत्साहित भी किया। अदा बक्स, अनुषा अकबर, ईशा जेन गोम्स, इशिता देबनाथ, सरबोनी के साथ टीम 1आयोजक महक के साथ चंदा और ऋचा पोद्दार ने अपनी रचनात्मक उत्पाद के लिए द्वितीय स्थान हासिल किया। 'दिलुवा', जिसमें महिलाओं और पुरुषों के कपड़ों पर लगे लिए दाग-धब्बों को आसानी से हटाए जाने वाला उत्पाद का प्रदर्शन किया गया। इससे उत्पाद की वास्तविकता और लागत प्रभावी लगी। अंत में, प्रियंका डेज, आयुषी बिलाखिया, नंदिनी के साथ टीम 6 ने पहला स्थान हासिल किया । चौधरी, विश्वेश सिंह, अमन झा आयोजक अंकिता चक्रवर्ती के साथ उनके अभूतपूर्व उत्पाद का प्रदर्शन किया जिसमें बेकार प्लास्टिक से ईंधन पेट्रोल बनाने का काम था और इसकी संरचना ने सभी को चकित कर दिया। इस प्रदर्शनी में आने वाले में दर्शकों की बहुत बड़ी भूमिका रही क्योंकि उन्होंने प्रत्येक उत्पाद का विश्लेषण किया और फिर मतदान किया गया। यह व्यापार मेला बाजार के रूप में पेश किया गया जिसने दर्शकों को बहुत ही प्रभावित किया। उन्होंने अपने स्टाल को इस तरह सजाया कि यह उनके उत्पाद के बारे में बात करे और उनकी स्थापना की उपस्थिति सफलतापूर्वक की जिसने भीड़ को आकर्षित किया। इवेंट मैनेजमेंट द्वारा किए गए अथक प्रयासों के कारण आयोजन सफल रहा। शिक्षक समन्वयक प्रो कौशिक बनर्जी और छात्र अध्यक्ष देवज्योति बनर्जी और माधव मोहता रहे । इस आयोजन को सफल बनाने में इवेंट मैनेजमेंट सोसायटी का भी योगदान रहा। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भगवान महावीर

भगवान महावीर जैन धर्म के चौंबीसवें तीर्थंकर थे। भगवान महावीर का जन्म करीब ढाई हजार वर्ष पहले (ईसा से 599 वर्ष पूर्व), वैशाली गणराज्य के कुण्डग्राम में अयोध्या इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार हुआ था। तीस वर्ष की आयु में महावीर ने संसार से विरक्त होकर राज वैभव त्याग दिया और संन्यास धारण कर आत्मकल्याण के पथ पर निकल गये। 12 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद उन्हें कैवल्य ज्ञान प्राप्त हुआ जिसके पश्चात् उन्होंने समवशरण में ज्ञान प्रसारित किया। 72 वर्ष की आयु में उन्हें पावापुरी से मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस दौरान महावीर स्वामी के कई अनुयायी बने जिसमें उस समय के प्रमुख राजा बिम्बिसार, कुणिक और चेटक भी शामिल थे। जैन समाज द्वारा महावीर स्वामी के जन्मदिवस को महावीर-जयंती तथा उनके मोक्ष दिवस को दीपावली के रूप में धूम धाम से मनाया जाता है। जैन ग्रन्थों के अनुसार समय समय पर धर्म तीर्थ के प्रवर्तन के लिए तीर्थंकरों का जन्म होता है, जो सभी जीवों को आत्मिक सुख प्राप्ति का उपाय बताते है। तीर्थंकरों की संख्या चौबीस ही कही गयी है। भगवान महावीर वर्तमान अवसर्पिणी काल की चौबीसी के अंतिम तीर्थंकर थे और ऋषभदेव पहले। हिंसा, पशुबलि, जात-पात का भेद-भाव जिस युग में बढ़ गया, उसी युग में भगवान महावीर का जन्म हुआ। उन्होंने दुनिया को सत्य, अहिंसा का पाठ पढ़ाया। तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अहिंसा को सबसे उच्चतम नैतिक गुण बताया। उन्होंने दुनिया को जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए, जो हैं – अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य (अस्तेय) ,ब्रह्मचर्य। उन्होंने अनेकांतवाद, स्यादवाद और अपरिग्रह जैसे अद्भुत सिद्धान्त दिए। महावीर के सर्वोदयी तीर्थों में क्षेत्र, काल, समय या जाति की सीमाएँ नहीं थीं। भगवान महावीर का आत्म धर्म जगत की प्रत्येक आत्मा के लिए समान था। दुनिया की सभी आत्मा एक-सी हैं इसलिए हम दूसरों के प्रति वही विचार एवं व्यवहार रखें जो हमें स्वयं को पसन्द हो। यही महावीर का 'जियो और जीने दो' का सिद्धान्त है। भगवन महावीर का जन्म ईसा से 599 वर्ष पहले वैशाली गणतंत्र के कुण्डग्राम में इक्ष्वाकु वंश के क्षत्रिय राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के यहाँ चैत्र शुक्ल तेरस को हुआ था। ग्रंथों के अनुसार उनके जन्म के बाद राज्य में उन्नति होने से उनका नाम वर्धमान रखा गया था। जैन ग्रंथ उत्तरपुराण में वर्धमान, वीर, अतिवीर, महावीर और सन्मति ऐसे पांच नामों का उल्लेख है। इन सब नामों के साथ कोई कथा जुडी है। जैन ग्रंथों के अनुसार, २३वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी के निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त करने के 188 वर्ष बाद इनका जन्म हुआ था। दिगम्बर परम्परा के अनुसार महावीर बाल ब्रह्मचारी थे। भगवान महावीर शादी नहीं करना चाहते थे क्योंकि ब्रह्मचर्य उनका प्रिय विषय था। भोगों में उनकी रुचि नहीं थी। परन्तु इनके माता-पिता शादी करवाना चाहते थे। दिगम्बर परम्परा के अनुसार उन्होंने विवाह के लिए मना कर दिया था। श्वेतांबर परम्परा के अनुसार भगवान महावीर का विवाह यशोदा नामक सुकन्या के साथ सम्पन्न हुआ था और कालांतर में प्रियदर्शिनी नाम की कन्या उत्पन्न हुई जिसका युवा होने पर राजकुमार जमाली के साथ विवाह हुआ। भगवान महावीर का साधना काल १२ वर्ष का था। दीक्षा लेने के उपरान्त भगवान महावीर ने दिगम्बर साधु की कठिन चर्या को अंगीकार किया और निर्वस्त्र रहे। श्वेतांबर सम्प्रदाय जिसमें साधु श्वेत वस्त्र धारण करते है के अनुसार भी महावीर दीक्षा उपरान्त कुछ समय छोड़कर निर्वस्त्र रहे और उन्होंने केवल ज्ञान की प्राप्ति भी दिगम्बर अवस्था में ही की। अपने पूरे साधना काल के दौरान महावीर ने कठिन तपस्या की और मौन रहे। इन वर्षों में उन पर कई ऊपसर्ग भी हुए जिनका उल्लेख कई प्राचीन जैन ग्रंथों में मिलता है। महावीर के पाँच व्रत इस प्रकार हैं - - सत्य ― सत्य के बारे में भगवान महावीर स्वामी कहते हैं, हे पुरुष! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ। जो बुद्धिमान सत्य की ही आज्ञा में रहता है, वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है। अहिंसा – इस लोक में जितने भी त्रस जीव (एक, दो, तीन, चार और पाँच इंद्रीयों वाले जीव) है उनकी हिंसा मत कर, उनको उनके पथ पर जाने से न रोको। उनके प्रति अपने मन में दया का भाव रखो। उनकी रक्षा करो। यही अहिंसा का संदेश भगवान महावीर अपने उपदेशों से हमें देते हैं। अचौर्य - दूसरे के वस्तु बिना उसके दिए हुआ ग्रहण करना जैन ग्रंथों में चोरी कहा गया है। अपरिग्रह – परिग्रह पर भगवान महावीर कहते हैं जो आदमी खुद सजीव या निर्जीव चीजों का संग्रह करता है, दूसरों से ऐसा संग्रह कराता है या दूसरों को ऐसा संग्रह करने की सम्मति देता है, उसको दुःखों से कभी छुटकारा नहीं मिल सकता। यही संदेश अपरिग्रह का माध्यम से भगवान महावीर दुनिया को देना चाहते हैं। ब्रह्मचर्य- महावीर स्वामी ब्रह्मचर्य के बारे में अपने बहुत ही अमूल्य उपदेश देते हैं कि ब्रह्मचर्य उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चारित्र, संयम और विनय की जड़ है। तपस्या में ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ तपस्या है। जो पुरुष स्त्रियों से संबंध नहीं रखते, वे मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हैं। जैन मुनि, आर्यिका इन्हें पूर्ण रूप से पालन करते है, इसलिए उनके महाव्रत होते है और श्रावक, श्राविका इनका एक देश पालन करते है, इसलिए उनके अणुव्रत कहे जाते है। जैन ग्रंथों में दस धर्म का वर्णन है। पर्युषण पर्व, जिन्हें दस लक्षण भी कहते है के दौरान दस दिन इन दस धर्मों का चिंतन किया जाता है। क्षमा के बारे में भगवान महावीर कहते हैं- 'मैं सब जीवों से क्षमा चाहता हूँ। जगत के सभी जीवों के प्रति मेरा मैत्रीभाव है। मेरा किसी से वैर नहीं है। मैं सच्चे हृदय से धर्म में स्थिर हुआ हूँ। सब जीवों से मैं सारे अपराधों की क्षमा माँगता हूँ। सब जीवों ने मेरे प्रति जो अपराध किए हैं, उन्हें मैं क्षमा करता हूँ।' वे यह भी कहते हैं 'मैंने अपने मन में जिन-जिन पाप की वृत्तियों का संकल्प किया हो, वचन से जो-जो पाप वृत्तियाँ प्रकट की हों और शरीर से जो-जो पापवृत्तियाँ की हों, मेरी वे सभी पापवृत्तियाँ विफल हों। मेरे वे सारे पाप मिथ्या हों।' धर्म सबसे उत्तम मंगल है। अहिंसा, संयम और तप ही धर्म है। महावीरजी कहते हैं जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं। भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया। त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था। पाँच व्रत सत्य ― सत्य के बारे में भगवान महावीर स्वामी कहते हैं, हे पुरुष! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ। जो बुद्धिमान सत्य की ही आज्ञा में रहता है, वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है। अहिंसा – इस लोक में जितने भी त्रस जीव (एक, दो, तीन, चार और पाँच इंद्रीयों वाले जीव) है उनकी हिंसा मत कर, उनको उनके पथ पर जाने से न रोको। उनके प्रति अपने मन में दया का भाव रखो। उनकी रक्षा करो। यही अहिंसा का संदेश भगवान महावीर अपने उपदेशों से हमें देते हैं। अचौर्य - दुसरे के वस्तु बिना उसके दिए हुआ ग्रहण करना जैन ग्रंथों में चोरी कहा गया है। अपरिग्रह – परिग्रह पर भगवान महावीर कहते हैं जो आदमी खुद सजीव या निर्जीव चीजों का संग्रह करता है, दूसरों से ऐसा संग्रह कराता है या दूसरों को ऐसा संग्रह करने की सम्मति देता है, उसको दुःखों से कभी छुटकारा नहीं मिल सकता। यही संदेश अपरिग्रह का माध्यम से भगवान महावीर दुनिया को देना चाहते हैं। ब्रह्मचर्य- महावीर स्वामी ब्रह्मचर्य के बारे में अपने बहुत ही अमूल्य उपदेश देते हैं कि ब्रह्मचर्य उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चारित्र, संयम और विनय की जड़ है। तपस्या में ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ तपस्या है। जो पुरुष स्त्रियों से संबंध नहीं रखते, वे मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हैं। जैन मुनि, आर्यिका इन्हें पूर्ण रूप से पालन करते है, इसलिए उनके महाव्रत होते है और श्रावक, श्राविका इनका एक देश पालन करते है, इसलिए उनके अणुव्रत कहे जाते है। दस धर्म जैन ग्रंथों में दस धर्म का वर्णन है। पर्युषण पर्व, जिन्हें दस लक्षण भी कहते है के दौरान दस दिन इन दस धर्मों का चिंतन किया जाता है। क्षमा क्षमा के बारे में भगवान महावीर कहते हैं- 'मैं सब जीवों से क्षमा चाहता हूँ। जगत के सभी जीवों के प्रति मेरा मैत्रीभाव है। मेरा किसी से वैर नहीं है। मैं सच्चे हृदय से धर्म में स्थिर हुआ हूँ। सब जीवों से मैं सारे अपराधों की क्षमा माँगता हूँ। सब जीवों ने मेरे प्रति जो अपराध किए हैं, उन्हें मैं क्षमा करता हूँ।' वे यह भी कहते हैं 'मैंने अपने मन में जिन-जिन पाप की वृत्तियों का संकल्प किया हो, वचन से जो-जो पाप वृत्तियाँ प्रकट की हों और शरीर से जो-जो पापवृत्तियाँ की हों, मेरी वे सभी पापवृत्तियाँ विफल हों। मेरे वे सारे पाप मिथ्या हों।' धर्म धर्म सबसे उत्तम मंगल है। अहिंसा, संयम और तप ही धर्म है। महावीरजी कहते हैं जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं। भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया। त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था। दूसरी सदी के प्रभावशाली दिगम्बर मुनि, आचार्य समन्तभद्र ने तीर्थंकर महावीर के तीर्थ को सर्वोदय की संज्ञा दी थी। वर्तमान अशांत, आतंकी, भ्रष्ट और हिंसक वातावरण में महावीर की अहिंसा ही शांति प्रदान कर सकती है। महावीर की अहिंसा केवल सीधे वध को ही हिंसा नहीं मानती है, अपितु मन में किसी के प्रति बुरा विचार भी हिंसा है। वर्तमान युग में प्रचलित नारा 'समाजवाद' तब तक सार्थक नहीं होगा जब तक आर्थिक विषमता रहेगी। एक ओर अथाह पैसा, दूसरी ओर अभाव। इस असमानता की खाई को केवल भगवान महावीर का 'अपरिग्रह' का सिद्धांत ही भर सकता है। अपरिग्रह का सिद्धांत कम साधनों में अधिक संतुष्टिपर बल देता है। यह आवश्यकता से ज्यादा रखने की सहमति नहीं देता है। इसलिए सबको मिलेगा और भरपूर मिलेगा। जब अचौर्य की भावना का प्रचार-प्रसार और पालन होगा तो चोरी, लूटमार का भय ही नहीं होगा। सारे जगत में मानसिक और आर्थिक शांति स्थापित होगी। चरित्र और संस्कार के अभाव में सरल, सादगीपूर्ण एवं गरिमामय जीवन जीना दूभर होगा। भगवान महावीर ने हमें अमृत कलश ही नहीं, उसके रसपान का मार्ग भी बताया है। इतने वर्षों के बाद भी भगवान महावीर का नाम स्मरण उसी श्रद्धा और भक्ति से लिया जाता है, इसका मूल कारण यह है कि महावीर ने इस जगत को न केवल मुक्ति का संदेश दिया, अपितु मुक्ति की सरल और सच्ची राह भी बताई। भगवान महावीर ने आत्मिक और शाश्वत सुख की प्राप्ति हेतु अहिंसा धर्म का उपदेश दिया।काव्यात्मक आचार्य समन्तभद्र विरचित “स्वयंभूस्तोत्र” चौबीस तीर्थंकर भगवानों की स्तुति है। इसके आठ श्लोक भगवान महावीर को समर्पित है। आचार्य समन्तभद्र विरचित युक्तानुशासन एक काव्य रचना है जिसके ६४ श्लोकों में तीर्थंकर महावीर की स्तुति की गयी है। वर्धमान स्तोत्र- ६४ श्लोक में महावीर स्वामी की स्तुती की गयी है। इसकी रचना मुनि प्रणम्यसागर ने की है। मुनि प्रणम्यसागर ने वीरष्टकम भी लिखा है। महाकवि पदम कृत महावीर रास - इसका रचना काल वि•स• की 18वीं सदी का मध्यकाल है। इसका प्रथम बार हिंदी अनुवाद और संपादन डॉ. विद्यावती जैन जी द्वारा किया गया था। यह 1994 में प्राच्य श्रमण भारती द्वारा प्रकाशित किया गया था।

अर्चना संस्था की स्वरचित कविता गोष्ठी अप्रैल 2022

अर्चना संस्था की स्वरचित कविता गोष्ठी संपन्न - - - अर्चना संस्था की ओर से आयोजित गोष्ठी में सदस्यों ने अपनी स्वरचित कविताएँ सुनाई। दोहा, कुंडलियां, हाइकू गीत, कविता आदि विभिन्न विधाओं पर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया। संगीता चौधरी ने हाइकु -चैत्र मास में/ नीम की निबोरी/ अमृत तुल्य रसना सुख/ अकारण उदर/ भोगता दुख और दोहे सुनाए। विद्या भंडारी ने लोग क्या कहेंगे,इसी धुन में बिता दी सारी उम्र और क्या सुनाई देगी लुप्त हुई लोरियाँ, हिम्मत चोरडिया ने कुण्डलिया -आओ अब अवतार लो एवं गीतिका- वीर का कर लें हम गुणगान। नौरतन भंडारी ने हे धीर-वीर,हे महावीर /हे जन नायक जन लोक पीर शत-शत मेरा प्रणाम, सुशीला चनानी ने नवरात्रि के अवसर पर माँ दुर्गा की स्तुति में कुछ दोहे जैसे--देवी पूजा में करूँ माँगू ये वरदान।अपनी रक्षा कर सकूंँ शक्ति रूप प्रतिमान।और रामनवमी पर सीता की पीडा उकेरी एवं समाज की विसंगतियों पर कविता पढ़ी। इंदू चांडक ने कुंडलिया-जीवन की कठिनाइयां,सिखलाती संघर्ष, गीत- मुश्किलों तुम संगिनी बन साथ मेरे चलती जाओ सुनाई, मृदुला कोठारी ने फिर से वीर एक बार आइए/हिंसा हो रही है बचाइए /होता हाहाकार है /छाया अंधकार है /दीपशिखा कोई तो जलाइये गीत गाते हुए भगवान महावीर की जयंती पर गीत प्रस्तुति दी। डॉ वसुंधरा मिश्र ने आओ बैठो बात करें गीत सुनाया जिसे सभी ने पसंद किया। इंदू चांडक के संयोजन में संचालन डॉ वसुंधरा मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन दिया सुशीला चनानी ने ।कार्यक्रम जूम पर आयोजित किया गया।

छपते छपते हिंदी दैनिक कोलकाता के रविवारीय चिंतन पर टिप्पणी

आए दिन होते हैं मंदिर मस्जिद में झगड़े। आज इस बात को लेकर हम रामनवमी को रावणनवमी तक कहने के लिए मजबूर हो गए हैं। बहुत ही महत्वपूर्ण और समसामयिक विषय हो गया है राम का नाम।भारतीय संस्कृति में कहीं भी धर्म जाति और रंग को लेकर कोई मतभेद नहीं किया गया था बाद में राजनीतिक रंग ने इन सभी मुद्दों पर अपनी-अपनी स्वार्थपरता के कारण तलवारें चलाई। अब भगवान के नाम राम को माध्यम बना कर नृशंसता का खेल चलाया जा रहा है। बुराई पर अच्छाई की जीत नहीं बुराई से अच्छे बनने की परंपरा चलाई जा रही है जो भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है। आपने निष्पक्ष विचार दिया है। हरिवंश राय बच्चन जी ने मधुशाला में स्पष्ट रूप से कहा है - - बजी न मंदिर में घड़ियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्ज़िन देकर मस्जिद में ताला, लुटे ख़जाने नरपितयों के गिरीं गढ़ों की दीवारें, रहें मुबारक पीनेवाले, खुली रहे यह मधुशाला।। बस यूंँ धर्म के नाम पर राम के नाम पर राजनीतिक कुर्सी के लिए अपनी-अपनी रोटी सेकने का काम कर रहे हैं। आम आदमी का कर्तव्य है कि वह अपनी आँखों पर पट्टी न बांधे। धन्यवाद - डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता

साहित्यिकी संस्था द्वारा मन्नू भंडारी एक परिचर्चा पर गोष्ठी

साहित्यिकी संस्था द्वारा' मन्नू भंडारी :एक परिचर्चा' विषय पर गोष्ठी - - प्रेमचंद की तरह ही मन्नू भंडारी की कहानियाँ भी पाठकों में बेहद लोकप्रिय हैं - - अतिथि वक्ता लेखिका सुधा अरोड़ा ने साहित्यिकी संस्था की ओर से आयोजित मन्नू भंडारी एक परिचर्चा गोष्ठी में कही। इस अवसर पर मन्नू भंडारी की कहानी सयानी बुआ का पाठ किया। वक्ता रेणु गौरिसरिया ने मन्नू बहनजी की बतौर शिष्या उनके साथ बिताये कक्षा के व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया। वहीं साहित्यिक यात्रा और उनके व्यक्तित्व के महत्वपूर्ण संस्मरण सुनाए। कार्यक्रम का आरंभ करते हुए संस्था की सचिव डॉ मंजु गुप्ता ने अतिथि वक्ता सुधा अरोड़ा, साहित्यकार वक्ता रेणु गौरिसरिया और पूनम पाठक का स्वागत किया। मन्नू भंडारी पर परिचर्चा का संयोजन और संचालन किया डॉ गीता दूबे ने । सातवें दशक की महत्वपूर्ण लेखिका डॉ सुधा अरोड़ा ने मन्नू भंडारी के साथ अपने अंतरंग परिचय को उनकी कहानियों और उपन्यासों से जोड़ते हुए उनकी लोकप्रियता पर चर्चा की। महत्वपूर्ण यह था कि वे दिल्ली में स्थित मन्नू भंडारी के घर से उनकी साड़ी पहन कर और उनकी कुर्सी पर बैठ कर यह अनुभव साझा कर रही थीं जो सभी के लिए एक अद्भुत अनुभव रहा। जूम और फेसबुक पर सभी दर्शकों ने उनके पुरस्कारों, हंस पत्रिका का प्रचलित आवरण फोटो, घर की दिवारें और पुस्तक शेल्फ आदि का कैमरे से अवलोकन करवाया जिसने सभी सदस्याओं को रोमांचित किया। मन्नू भंडारी की पहली कहानी' मैं हार गई', 'स्त्री सुबोधिनी' , 'नई नौकरी' , 'दो कलाकार' , 'खोटे सिक्के' , 'सयानी भुआ' और' महाभोज' और 'आपका बंटी' आदि लेखन पर महत्वपूर्ण चर्चा की। वहीं मन्नू भंडारी की कहानी दो कलाकार पर बनाई फिल्म की चर्चा की जिसकी पटकथा उन्होंने लिखी। जिसका निर्देशन प्रभु जोशी ने किया।इस फिल्म को दूरदर्शन अवार्ड भी मिला। मन्नू भंडारी की कहानियों पर नाटकों का मंचन भी बहुत हुआ है। समाज में कई टूटते घरों को जोड़ने में मन्नू भंडारी की कहानी आपका बंटी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ममता कालिया द्वारा लिया गया मन्नू भंडारी का साक्षात्कार भी पढकर सुनाया जो अपने समय से बहुत आगे की सोच थी। कालजयी लेखिका ने अपने जीवन में कई उतार चढाव का सामना किया। मन्नू भंडारी की आने वाली दो पुस्तकों की चर्चा भी सुधा अरोड़ा ने की। रेणु गौरिसरिया ने कहा कि कक्षा में पढा़ई के साथ मन्नू बहन जी के कारण हमलोगों ने बहुत सी किताबें पढी़। उन्होंने हमें साहित्य से जोड़ा और वे बराबर हमलोगों से संपर्क रखती थीं। हमारी समस्यायों को सुलझाने में भी हमारा साथ देती थीं। पूनम पाठक ने मन्नू भंडारी की सशक्त कहानी सयानी भुआ का वाचन कर बहुत ही सुंदर ढंग से किया। सयानी भुआ कहानी की विवेचना भी की गयी। पूर्व अध्यक्ष कुसुम जैन, गीता दूबे, रेवा जाजोदिया, वाणी मुरारका ने मन्नू भंडारी की कहानियों पर प्रश्न किए। स्त्री विमर्श पर भी विचार विमर्श किया गया। नुपूर अशोक ने तकनीकी व्यवस्था में सहयोग दिया। संस्था की अध्यक्ष विद्या भंडारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर दुर्गा व्यास,वसुंधरा मिश्र,रचना पांडेय , बबिता मांधडा़,संजना गुप्ता तिवारी, डॉ सुषमा हंस आदि उपस्थित रहीं।

Monday, April 18, 2022

निधि एक अधूरी सी प्रेम कथा

निधि एक अधूरी सी प्रेम कथा को पढ़ते हुए - - - डॉ वसुंधरा मिश्र कोलकाता कथा या कहानी आपको यदि बार-बार पढ़ने के लिए उकसाए और बार-बार मन में अटकी सी रह जाए तो समझ लीजिए कि उसमें कहानी के महत्वपूर्ण गुण छिपे हैं । हर बार के पाठ में उसके नए अर्थ और संदर्भ खुलें, हर बार यह लगे कि कुछ कहने समझने को बचा रह गया।अब सवाल उठता है कि कोई किसी से कुछ ऐसे ही तो नहीं कह देता।बिना किसी भरोसे के, रिश्ते और संबंध के ऐसी बात कहाँ होती है भला।जी हाँ मैं बात कर रही हूँ निधि एक अधूरी सी प्रेम कथा की। प्रेम, कर्तव्य और देशप्रेम इन तीन मूल उद्देश्यों को लेकर 'निधि एक अधूरी- सी प्रेम कथा' उपन्यास अपना विषय तलाशती है, कहीं भी अपने विषय से न भटकते हुए, न इधर-उधर होते हुए।शाब्दिक विवरणों से ज्यादा मनोविज्ञान को पढ़ते, पकड़ने और उसके चित्रण में रमती हुई कथा मूल में प्रेम के साथ कर्तव्य को प्रतिष्ठित करती है। कर्तव्य भी तो प्रेम का ही एक रूप होता है और देशप्रेम तो बड़े और वृहद् अर्थों में प्रेम है। इसलिए यह कहानी हर अर्थ में प्रेम कहानी है। निश्छल प्रेमिका नायिका निधि की छवि आधुनिक जीवन के मानवीय भावना से भरी स्त्री की है। कहानी की भाषा बिलकुल बोलचाल की भाषा है जो वातावरण को सजीवता प्रदान करती है। नेपाली परिवार के बेटे मेजर राहुल से प्रेम करने के कारण नेपाली भाषा के भी वाक्य मिलते हैं। दो भाषाओं का मेल काफी प्रयोगशील और प्रगतिशील है जो उपन्यास की प्रयोगधर्मिता का परिचय देता है। प्रेम में भाषा समस्या नहीं बनती है। एक प्रेम-कहानी की रचना जिस आत्मीयता और लगाव से लेखिका ने रचा है वह काबिले तारीफ है। ' निधि एक अधूरी - सी कहानी' लेखिका पूनम त्रिपाठी का प्रथम लघु उपन्यास है । उन्होंने स्वयं स्वीकार किया है कि वे सेना का अंग बनना चाहती थीं लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें वह अवसर नहीं दिया। संभवतः उनकी दबी हुई इसी भावना ने इस प्रेम कथा को जन्म दिया जो देश के प्रति समर्पित सैनिक को केंद्र में रखकर लिखी गई है। सैनिक से प्रेम करने वाली युवती भी विशेष होती है क्योंकि प्रेम करना और उसे निभाना खांडे की धार पर चलना है। एक आम स्त्री और पुरुष की तरह उसका जीवन सरल और सहज नहीं होता। कबीर ने भी कहा है - प्रेम की गली अति सांकरी जा में दो न समाए। प्रेम न बाड़ी ऊपजे, प्रेम न हाट बिकाय ' भले ही यह प्रेम अन्य संदर्भ में कहा गया हो लेकिन विशुद्ध प्रेम त्याग और बलिदान की ही मांग करता है। वह चाहे देश प्रेम हो या युवक-युवतियों का लौकिक प्रेम हो। यह उपन्यास एक आर्मी मेजर थापा और एक एनसीसी कैडट निधि की प्रेम कथा है। युवती निधि प्रेम के साथ सैनिक की बुलंद आवाज और उसके वजूद को जिंदा रखने का 'स्ट्रांग' कदम उठाती है। निधि समाज से लड़ती है, सैनिक सरहद पर लड़ता है। निधि जिंदा रहकर सरहद पर जाने वाले प्रेमी की मृत्यु और जीवन की आशंकाओं से घिरी हुई रोज अपने आप से लड़ती है। दोनों पक्षों की ओर से ही जीवन जीने की अलग - अलग चुनौतियाँ आती हैं जिनका सामना निधि करती है। यह उपन्यास स्त्री की आंतरिक मानवीय भावनाओं के द्वंद्व और पीड़ा का उद्घाटन है। 'निधि एक अधूरी सी प्रेम कथा' शीर्षक में ही प्रेम कथा के अधूरेपन को समझा जा सकता है जो अपने समय में पूरा आकार नहीं लेती है। यह प्रेम कथा कब पूर्णता लेती है? और क्या मेजर थापा सरहद से वापस आते हैं? क्या निधि को दोनों परिवारों का सहारा मिलता है?विवाह के पहले गर्भ में आए बच्चे को जन्म क्यों देती है?ऐसा क्या होता है कि निधि के सारे सपने चकनाचूर हो जाते हैं? इस तरह के बहुत से प्रश्नों के उत्तर इस उपन्यास में मिलते हैं। निधि की होने वाली सास की कहानी भी प्रेम विवाह से शुरू होती है जहाँ उसे अपनी सास से 'डायन' की संज्ञा मिलती है। सास नेपाली लामा परिवार की हैं और उनके पति कर्नल थापा परिवार से लेकिन वहाँ भी जाति को लेकर उनके विवाह में बहुत अड़चनें आईं। नेपाली में भी जाति - पांति का विरोध है। निधि की होने वाली सास को तो उसके परिवार ने नकारते हुए उसका दाह-संस्कार तक करा डाला।फौजी ससुराल होने के बावजूद उसकी सास से उसे 'डायन' सुनने को मिला और साथ में पीठ पर गर्म पानी तक उढे़ला गया। परंतु निधि के विवाह में ऐसी अड़चन या प्रतारणा नहीं आती है । भुक्तभोगी सास ने निधि को पूरे मन से अपनाया और उसको सम्मान दिया क्योंकि वह समाज के इस प्रतारणा से गुजर चुकी है। वह कहती है कि कास्ट, रिलीजन और मनी ये ऐसी चीजें हैं जो एक दूसरे को अलग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पति का साथ और प्रेम मिला जो सास का जीवन प्रेम से भरा रहा। और वह अपनी पुत्रवधु को किसी भी प्रकार की तकलीफ़ नहीं देना चाहती थी। तभी तो निधि के हर फैसले में ससुर कर्नल थापा ने अपनी बेटी की तरह उसका हर कदम पर साथ दिया । समाज का विरोध अवश्य रहा लेकिन बहू निधि के दृढ़ संकल्प के आगे किसी की नहीं चली। बिना किसी विरोध के दोनों परिवारों ने इस विवाह के लिए स्वीकृति भी दे दी। मेजर राहुल थापा के साथ हुई रिंग सेरेमनी के समय आए 'रिश्तेदारों में खुसुर-पुसुर हो रही थी पर प्रकट कोई नहीं कर रहा था। ये समाज का अघोषित नियम है कि सिर्फ खाना-पीना और नुक्स निकालना है। आपकी जरूरत में बहुत कम लोग साथ देगें लेकिन आलोचना करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझेंगे।' (पृष्ठ 63)लेखिका ने उपन्यास में समाज की नब्ज़ को बहुत गहराई से महसूस किया है। इस पुस्तक की महत्वपूर्ण पंक्तियाँ हैं - - 'झूठी शान, झूठा रुतबा, बड़ी जाति का घमंड, ये सब एक दीमक की तरह हैं जो इंसान और उसकी इंसानियत को खोखला बना देते हैं।' (पृष्ठ 75)इंसानियत को जिंदा रखने का भरपूर प्रयास इस उपन्यास की विशेषता है। सैनिक का जीवन कठिनाइयों और चुनौतियों से भरा होता है जिसे कोई भी सामान्य व्यक्ति नहीं बचा सकता है।सबसे पहले, वे अपने प्रियजनों से दूर बहुत समय बिताते हैं। यह उन्हें भावनात्मक रूप से परेशान करता है और वे राष्ट्र की सुरक्षा में व्यस्त रहते हैं, वे राष्ट्र के संरक्षक हैं और अपने नागरिकों की हर कीमत पर रक्षा करते हैं। इसके अलावा, वे बहुत निस्वार्थ हैं जो देश के हित को अपने निजी हित से ऊपर रखते हैं। विवाह के एक दिन पहले मेजर राहुल को सरहद पर जाना पड़ता है। वह अपने माता-पिता और सास - ससुर दोनों के साथ साथ अपनी प्रिया निधि को भावनात्मक सहयोग देने की कोशिश करता है। निधि दो दिन बाद ही मिसेज थापा बन जाती लेकिन जीवन में आई इस अप्रत्याशित घटना ने उसके और मेजर के सुंदर सपने को पलभर में चकनाचूर कर दिया। वह अपनी मित्र चंदना से कहती है - 'एक पल में चंदना, बस एक पल में, मेरी तो दुनिया ही बदल गई। सपने चकनाचूर हो गए।चंदू मैंने अकेले रहने का सपना नहीं देखा था। उनके साथ (जुड़वा बच्चों का सपना) विहान और यामिनी के परवरिश का सपना देखा था' (उन्माद, एक प्रेम कथा, पृष्ठ 71) कठिनाइयों के बावजूद उनका जीवन एक सीमा के अंदर बंध जाता है। एक सैनिक के लिए सबसे पहले उसका देश होता है,जो लोग इस नौकरी में आने का फैसला करते है वे इस तथ्य से वाकिफ होते है कि उन्हें अपना सम्पूर्ण जीवन देश के प्रति न्योछावर करना होगा,अपने परिवार से लंबे समय तक दूर रहना होगा,और अपने जीवन के सारे सुख ऐश्वर्य का त्याग करना होगा। ये सारी बातें उन्हें दुखी अवश्य करती है पर उनके मन को निराश नहीं करती, वे पूरी लगन के साथ देश सेवा करने को तैयार रहते हैं ।अनुशासन, साहस,संकल्प, मानसिक स्थिरता,मजबूत काया,देशवासियों से प्यार ये सारे गुण एक सोल्जर में विद्यमान होते है। उन्हें अपने देश से बहुत प्यार होता है और उनका देश के प्रति यह लगाव उन्हें और अधिक प्रोत्साहित करता है। अमेरिका के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक मैकडुगल ने मूल प्रवृत्ति को परिभाषित करते हुए अपनी पुस्तक "ऐन आउटलाइन ऑफ सायकोलाजी" में लिखा है कि- मूलप्रवृत्ति (instinct) एक ऐसी मनोदैहिक प्रवृत्ति है जिससे प्रभावित होकर व्यक्ति किसी उत्तेजक विशेष की ओर ही अपना ध्यान केन्द्रित करता है व किसी विशेष प्रकार के संवेग या आवेग का ही अनुभव करता है और उस उत्तेजक विशेष के प्रति किसी विशेष प्रकार की ही प्रतिक्रिया प्रकट करता है। विवाह के एक दिन पहले जब मेजर अपने सास ससुर को बताते हैं कि वे कल दोपहर की ट्रेन से जम्मू जा रहे हैं और फिर बॉर्डर पर। (पृष्ठ 84) देश में इस प्रकार हालात हो जाएंगे यह किसे पता था। वह भी तो शादी करना चाह रहे थे। आफ्टर आल आई एम ए सोल्जर आई हैव टू गो अपने देश के लिए लड़ना ही होगा। (पृष्ठ 84) 'कर्तव्य सबसे बड़ा होता है।' ( पृष्ठ 85) निधि 'स्ट्रांग' होने और हमेशा उसी की रहेगी यह वादा करती है। हावड़ा स्टेशन भी छोड़ने जाती है। तीन महीने में आने का वादा किया था लेकिन मेजर के सभी साथी आ गए लेकिन मेजर नहीं आए। उपन्यास यहीं से नया मोड़ लेता है। अविवाहित निधि मेजर के बेटे विहान को जन्म देती है और निधि अपनी प्रेम परीक्षा की कसौटी पर खरी उतरती है। वहीं देश प्रेम के लिए भी उसकी भावना ईमानदारी का परिचय देती है। विवाह से पूर्व गर्भवती बहू और बेटी को परिवार के परस्पर सहयोग ने टूटने से बचाया जो उपन्यास की एक और महत्वपूर्ण बात है। इस उपन्यास को पढ़ते हुए एक और फौजी का स्मरण हो आया। परमवीर चक्र विजेता कर्नल विक्रम बत्रा की मंगेतर डिम्पल चीमा को भी भुलाया नहीं जा सकता जो उनके शहीद हो जाने पर आजीवन विवाह न करने का फैसला करती है। एक परिवार के बेटे का चला जाना बहुत ही दुखदायी घड़ी होती है।वे उसके आने की राह तकते रहते हैं। उपन्यास नायिका केंद्रित है जहां कहानी स्मृतियों के साथ आरंभ होती है। शुरुआत ही निधि की प्रसव पीड़ा से होती है और वह पीड़ा सुख - दुख के पर्दे के पीछे से प्रेम की झीनी झीनी किरणों का प्रकाश आने वाली सुबह को आनंद से पल भर में भर देता है, पता ही नहीं चलता। माँ नेपाली में कहती है 'निधि होशमा आऊ। - - - भगवान ले हाम्रो प्रार्थना सुन्नु भए को छा। निधि को पता था कि कान्हा इतना निष्ठुर नहीं हो सकता। 100 पृष्ठों का लघु उपन्यास बारह शीर्षकों विहान, मातृत्व, आकर्षण, खूबसूरत, सफर, वापसी, प्रथम परिचय, अनकही, रहस्योद्घाटन, प्रेम बंधन, उन्माद, पीड़ा, विछोह में विभाजित किया गया है जहां संक्षेप में कहानी के सूत्रों को पिरोया गया है। इसे वृहद रूप भी दिया जा सकता है। लेखिका का प्रयास सराहनीय है। ग्रिफिन पब्लिकेशन से प्रकाशित 2021 में प्रथम संस्करण और मूल्य 230 रुपए हैं। शुभकामनाएं।

Saturday, April 9, 2022

किसकी है वह कलम /दो पाटों में पिसती कलम

किसकी है वह कलम? खून रंगी दिवारों पर इश्तहार थे कहानी थीं, चित्र थे बच्चों के बुझे मासूम चेहरे थे औरतों का बलात्कार था, छीना झपटी थी तानाशाही कलम की मुस्कान थी मोर पंख की फड़फड़ाहट थी उस दवात में खून की स्याही लबालब थी सोने - चांँदी की परतों के बीच कितनी ही लाशें पटी थीं तुमने जब छलांग लगाई थी वह कुँआ पहले से ही भरा हुआ था वह कलम अभी भी चलती है सत्ता के गलियारों में वह कलम सबका पीछा करती है। युद्ध और शांति के पाटों में पिसती है कलम सिर पर चढ़े रावण का अट्टहास पर्वत, कंदराओं, नदियों और महासागर थरथराते और गर्जन करते सब तहस- नहस और विध्वंस जल - थल - वायु के हस्ताक्षर गाँव, शहर, देश बह जाते भूख, भूख और भूख कोई राम फिर आएगा बचाएगा धरती की कोमलता को विधाता की कलम फिर लिखेगी इतिहास फिर लौटेगा फिर कुछ लिखा जाएगा निर्माण जल कर राख होंगे राख फिर पुनर्निर्माण में आहूत होगी कलम फिर लिखेगी किसकी है वह कलम? किसकी है वह कलम? @वसुंधरा मिश्र, कोलकाता 20.3.2022 किसकी है वह कलम? खून रंगी दिवारों पर इश्तहार थे कहानी थीं, चित्र थे बच्चों के बुझे मासूम चेहरे थे औरतों का बलात्कार था, छीना झपटी थी तानाशाही कलम की मुस्कान थी मोर पंख की फड़फड़ाहट थी उस दवात में खून की स्याही लबालब थी सोने - चांँदी की परतों के बीच कितनी ही लाशें पटी थीं तुमने जब छलांग लगाई थी वह कुँआ पहले से ही भरा हुआ था वह कलम अभी भी चलती है सत्ता के गलियारों में वह कलम सबका पीछा करती है। युद्ध और शांति के पाटों में पिसती है कलम सिर पर चढ़े रावण का अट्टहास पर्वत, कंदराओं, नदियों और महासागर थरथराते और गर्जन करते सब तहस- नहस और विध्वंस जल - थल - वायु के हस्ताक्षर गाँव, शहर, देश बह जाते भूख, भूख और भूख कोई राम फिर आएगा बचाएगा धरती की कोमलता को विधाता की कलम फिर लिखेगी इतिहास फिर लौटेगा फिर कुछ लिखा जाएगा निर्माण जल कर राख होंगे राख फिर पुनर्निर्माण में आहूत होगी कलम फिर लिखेगी किसकी है वह कलम? किसकी है वह कलम? @वसुंधरा मिश्र, कोलकाता 20.3.2022