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Saturday, April 9, 2022

किसकी है वह कलम /दो पाटों में पिसती कलम

किसकी है वह कलम? खून रंगी दिवारों पर इश्तहार थे कहानी थीं, चित्र थे बच्चों के बुझे मासूम चेहरे थे औरतों का बलात्कार था, छीना झपटी थी तानाशाही कलम की मुस्कान थी मोर पंख की फड़फड़ाहट थी उस दवात में खून की स्याही लबालब थी सोने - चांँदी की परतों के बीच कितनी ही लाशें पटी थीं तुमने जब छलांग लगाई थी वह कुँआ पहले से ही भरा हुआ था वह कलम अभी भी चलती है सत्ता के गलियारों में वह कलम सबका पीछा करती है। युद्ध और शांति के पाटों में पिसती है कलम सिर पर चढ़े रावण का अट्टहास पर्वत, कंदराओं, नदियों और महासागर थरथराते और गर्जन करते सब तहस- नहस और विध्वंस जल - थल - वायु के हस्ताक्षर गाँव, शहर, देश बह जाते भूख, भूख और भूख कोई राम फिर आएगा बचाएगा धरती की कोमलता को विधाता की कलम फिर लिखेगी इतिहास फिर लौटेगा फिर कुछ लिखा जाएगा निर्माण जल कर राख होंगे राख फिर पुनर्निर्माण में आहूत होगी कलम फिर लिखेगी किसकी है वह कलम? किसकी है वह कलम? @वसुंधरा मिश्र, कोलकाता 20.3.2022 किसकी है वह कलम? खून रंगी दिवारों पर इश्तहार थे कहानी थीं, चित्र थे बच्चों के बुझे मासूम चेहरे थे औरतों का बलात्कार था, छीना झपटी थी तानाशाही कलम की मुस्कान थी मोर पंख की फड़फड़ाहट थी उस दवात में खून की स्याही लबालब थी सोने - चांँदी की परतों के बीच कितनी ही लाशें पटी थीं तुमने जब छलांग लगाई थी वह कुँआ पहले से ही भरा हुआ था वह कलम अभी भी चलती है सत्ता के गलियारों में वह कलम सबका पीछा करती है। युद्ध और शांति के पाटों में पिसती है कलम सिर पर चढ़े रावण का अट्टहास पर्वत, कंदराओं, नदियों और महासागर थरथराते और गर्जन करते सब तहस- नहस और विध्वंस जल - थल - वायु के हस्ताक्षर गाँव, शहर, देश बह जाते भूख, भूख और भूख कोई राम फिर आएगा बचाएगा धरती की कोमलता को विधाता की कलम फिर लिखेगी इतिहास फिर लौटेगा फिर कुछ लिखा जाएगा निर्माण जल कर राख होंगे राख फिर पुनर्निर्माण में आहूत होगी कलम फिर लिखेगी किसकी है वह कलम? किसकी है वह कलम? @वसुंधरा मिश्र, कोलकाता 20.3.2022

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