Friday, April 22, 2022
साहित्यिकी संस्था द्वारा मन्नू भंडारी एक परिचर्चा पर गोष्ठी
साहित्यिकी संस्था द्वारा' मन्नू भंडारी :एक परिचर्चा' विषय पर गोष्ठी - -
प्रेमचंद की तरह ही मन्नू भंडारी की कहानियाँ भी पाठकों में बेहद लोकप्रिय हैं - - अतिथि वक्ता लेखिका सुधा अरोड़ा ने साहित्यिकी संस्था की ओर से आयोजित मन्नू भंडारी एक परिचर्चा गोष्ठी में कही। इस अवसर पर मन्नू भंडारी की कहानी सयानी बुआ का पाठ किया। वक्ता रेणु गौरिसरिया ने मन्नू बहनजी की बतौर शिष्या उनके साथ बिताये कक्षा के व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया। वहीं साहित्यिक यात्रा और उनके व्यक्तित्व के महत्वपूर्ण संस्मरण सुनाए। कार्यक्रम का आरंभ करते हुए संस्था की सचिव डॉ मंजु गुप्ता ने अतिथि वक्ता सुधा अरोड़ा, साहित्यकार वक्ता रेणु गौरिसरिया और पूनम पाठक का स्वागत किया। मन्नू भंडारी पर परिचर्चा का संयोजन और संचालन किया डॉ गीता दूबे ने ।
सातवें दशक की महत्वपूर्ण लेखिका डॉ सुधा अरोड़ा ने मन्नू भंडारी के साथ अपने अंतरंग परिचय को उनकी कहानियों और उपन्यासों से जोड़ते हुए उनकी लोकप्रियता पर चर्चा की। महत्वपूर्ण यह था कि वे दिल्ली में स्थित मन्नू भंडारी के घर से उनकी साड़ी पहन कर और उनकी कुर्सी पर बैठ कर यह अनुभव साझा कर रही थीं जो सभी के लिए एक अद्भुत अनुभव रहा। जूम और फेसबुक पर सभी दर्शकों ने उनके पुरस्कारों, हंस पत्रिका का प्रचलित आवरण फोटो, घर की दिवारें और पुस्तक शेल्फ आदि का कैमरे से अवलोकन करवाया जिसने सभी सदस्याओं को रोमांचित किया। मन्नू भंडारी की पहली कहानी' मैं हार गई', 'स्त्री सुबोधिनी' , 'नई नौकरी' , 'दो कलाकार' , 'खोटे सिक्के' , 'सयानी भुआ' और' महाभोज' और 'आपका बंटी' आदि लेखन पर महत्वपूर्ण चर्चा की। वहीं मन्नू भंडारी की कहानी दो कलाकार पर बनाई फिल्म की चर्चा की जिसकी पटकथा उन्होंने लिखी। जिसका निर्देशन प्रभु जोशी ने किया।इस फिल्म को दूरदर्शन अवार्ड भी मिला। मन्नू भंडारी की कहानियों पर नाटकों का मंचन भी बहुत हुआ है। समाज में कई टूटते घरों को जोड़ने में मन्नू भंडारी की कहानी आपका बंटी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ममता कालिया द्वारा लिया गया मन्नू भंडारी का साक्षात्कार भी पढकर सुनाया जो अपने समय से बहुत आगे की सोच थी। कालजयी लेखिका ने अपने जीवन में कई उतार चढाव का सामना किया। मन्नू भंडारी की आने वाली दो पुस्तकों की चर्चा भी सुधा अरोड़ा ने की। रेणु गौरिसरिया ने कहा कि कक्षा में पढा़ई के साथ मन्नू बहन जी के कारण हमलोगों ने बहुत सी किताबें पढी़। उन्होंने हमें साहित्य से जोड़ा और वे बराबर हमलोगों से संपर्क रखती थीं। हमारी समस्यायों को सुलझाने में भी हमारा साथ देती थीं। पूनम पाठक ने मन्नू भंडारी की सशक्त कहानी सयानी भुआ का वाचन कर बहुत ही सुंदर ढंग से किया। सयानी भुआ कहानी की विवेचना भी की गयी।
पूर्व अध्यक्ष कुसुम जैन, गीता दूबे, रेवा जाजोदिया, वाणी मुरारका ने मन्नू भंडारी की कहानियों पर प्रश्न किए। स्त्री विमर्श पर भी विचार विमर्श किया गया। नुपूर अशोक ने तकनीकी व्यवस्था में सहयोग दिया। संस्था की अध्यक्ष विद्या भंडारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर दुर्गा व्यास,वसुंधरा मिश्र,रचना पांडेय , बबिता मांधडा़,संजना गुप्ता तिवारी, डॉ सुषमा हंस आदि उपस्थित रहीं।
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