Friday, August 25, 2023
रिश्तों की दुनिया (संस्मरण)
रिश्तों की दुनिया - (संस्मरण) - डॉ वसुंधरा मिश्र, भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज, कोलकाता
कैब में बैठते ही कैब ड्राइवर ने खुश होते हुए कहा कि आज तो मेरा दिन बहुत अच्छा बीतेगा। लग रहा है कि देश के प्रति प्रेम और भक्ति अभी भी जिंदा है। जानती हैं मैडम सुबह से ही एक मायूसी लग रही थी। मैं रात भर गाड़ी चलाता हूँ। अलग अलग तरह के लोग मेरी गाड़ी में बैठते हैं। मैं पिछले सात वर्षों से गाड़ी चला रहा हूँ। स्वतंत्रता दिवस पर सुबह-सुबह आपको देख कर कुछ आशा जगी है कि देश से प्यार करने वाले लोगों की कमी नहीं है। मैं जुड़वा बच्चों का पिता हूँ। आशुतोष कॉलेज का विद्यार्थी रहा हूँ। मैंने माँ बाप के खिलाफ़ जाकर अपने से सात साल छोटी लड़की से शादी की और तभी से मेरे जीवन में संघर्ष शुरु हो गया।
मैं असमंजस में पड़ गई कि एक ड्राइवर से इतनी बातें करुं कि न करुं।वैसे मैं उसकी बातों में रुचि ले रही थी।
अच्छा! अच्छा! ओह!
कह रही थी।
उसकी बातें दिल से निकलती हुई लग रही थीं। अधिक जानने की इच्छा हो रही थी। उसके जीवन की कहानी क्या है? ऐसे किन संघर्षों का सामना करना पड़ा कि वह अंदर से टूट कर भी संवेदनशील है।
जानने की रुचि बढ़ रही थी। परंतु वह मुझे कुछ पूछने का मौका नहीं दे रहा था और अपनी कहानी को सहज रूप से सुनाता जा रहा था। मैंने उसे धैर्य से सुना। किसी व्यक्ति को टोकना भी ठीक नहीं लगता जब वह अपनी वेदना पीड़ा के भावों को सुनाने में अनवरत बहता जा रहा हो। ये भी एक नैतिकता का अंग ही है या यों कहें कि वह अपनी दबी हुई बातों को जल्दी जल्दी मुझसे बांट लेना चाहता था। टैक्सी आधे घंटे में मुझे कॉलेज पहुंचा देगी। फिर उसने इस बात को भी स्वीकार किया कि आजकल की पीढ़ी सिर्फ़ स्वार्थ और अर्थ को ही महत्वपूर्ण मानती है। मैं शिक्षा से जुड़ी हुई थी और मेरा धर्म भी था कि मैं उसकी बात को महत्व दूं। ड्राइवर को कई बार कमतर आंका जाता है। 15 अगस्त 2023 की सुबह संभवतः मेरे शिक्षकीय व्यक्तित्व से प्रभावित लगा होगा। अनुभव तो कहीं से भी मिल सकता है। सभी के जीवन की कहानी अवश्य होती है।
उसने मुझे सही श्रोता समझा । रिश्तों की ऐसी कहानी निकल कर आई कि सुनकर आंसू निकल आए।
उसकी माँ ने उस समय उसे घर से निकाल दिया जब उसकी पत्नी ने जुड़वा एक बेटा और एक बेटी को जन्म दिया था। जिस दिन अस्पताल से घर आने वाली थी उसी दिन उसकी माँ ने कहा अब मेरे घर का दरवाजा तेरे लिए बंद है। अपना इंतजाम कहीं और कर ले।
उसके ऊपर तो पहाड़ ही टूट पड़ा। मैडम आप सोचिए एक ओर भगवान ने मुझे दो बच्चे दिए और दूसरी ओर मुझे अपने ही घर से बेघर कर दिया। कुछ घंटों के लिए मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया।एक दोस्त ने मेरा साथ दिया। मेरी पत्नी बच्चे और मैं एक महीने उसके घर के बाहर बरामदे में बने एक स्टोर रूम में रहे। मैं जमीन पर सोता और पत्नी के लिए एक छोटी-सी खाट थी। रात भर दोनों बच्चों को देखना पड़ता एक जगता तो एक सोता। वे दिन और रात बड़ी मुश्किल से कटे। मैं बेरोजगार था। कहीं काम नहीं था। वैसे आपको जानकर अच्छा लगेगा कि मैं शादी के पहले एक बड़े आर्कियोलॉजिस्ट के अंडर में मुंबई में काम करता था। पैसे भी कमा रहा था। आप जानती हैं कि मुंबई में कई तरह के काम होते हैं जो आपको गलत राह पर चलने के लिए मजबूर भी कर देंगे। पर जिनके साथ मैं था वे मुझे बेटे की तरह मानते थे। वह काम मुझे पसंद भी था। अच्छे पैसे भी मिलते थे। पर वहीं से मेरे नसीब का बुरा मोड़ आया।मालिक पर ऊपर दुनिया भर का कर्ज था। उनको धमकियां मिलने लगी। कुछ दिनों में हार्ट फेल से उनकी मृत्यु हो गई। मैं अनाथ हो गया। फिर बंगाल चला आया।
बंगाल में आया तो पहली मुश्किल हुई रोजगार पाने की।
फिर एक जगह एकांउट्स का काम शुरू किया। मैंने पूछा, 'अच्छा आप एकांउट्स का काम भी किया करते थे।
तो आपने ड्राइवर का काम क्यों पकड़ लिया।' आशुतोष कॉलेज से बीकॉम के दौरान मैंने एक कपड़े की दुकान में भी काम किया था।
मैडम ईमानदारी से करता हूँ जो भी काम करता हूँ। यही कारण है कि आज मेरी इमेज अच्छी है। बाजार में दो आना इज्जत है।
मैंने पूछा आपकी माँ को ऐसे नहीं करना चाहिए। आपने उनके साथ जरूर कुछ गलत किया है। कोई भी माँ आप जैसे मेहनती और ईमानदार बेटे को ऐसे कैसे दूर कर सकती है।
जी मैडम! आपने ठीक ही पूछा मेरी शादी से वे बिलकुल ही खुश नहीं थीं। माँ को बिना बताए अचानक ही एक दिन मंदिर में जाकर शादी कर ली। लड़की भी गरीब परिवार से है, उसके भी पिता नहीं हैं।
मैंने पूछा उस लड़की में ऐसी कोई खास बात थी कि तुमने उससे बिना सोचे समझे शादी कर डाली। बहुत कामकाजी और दबंग है क्या?
उसने कहा नहीं, मैडम! वह बहुत सुंदर है। बंगाली है। और मैं पंजाबी हूँ इसलिए माँ को अच्छी नहीं लगती। आज सात साल हो गये मैं ही घर में बच्चों को देखता हूं और खाना भी बना देता हूं। वह बाहर नहीं निकलती। बाहर निकलती है तो रास्ते भी भूल जाती है। मुझे फोन करके बुलाती है कि अमुक जगह आ जाओ। एक साथ दो बच्चों को लेकर तो जाना संभव ही नहीं है। एक छोटे से कमरे में रहते हैं। किराए के पैसे बच्चों का दूध खाना-पीना और पूरे घर की जिम्मेदारी निभाने के लिए रात में गाड़ी चलाता हूँ। अब पहले जितनी परेशानी नहीं है। पर जब बच्चों का जन्म हुआ था तो ऐसा लगा था कि सड़क पर मेरे बच्चे भी भीख मांगेंगे। सपने भी वैसे ही आते थे।
माँ ने कहा था कि तूने मुझे दुख दिया है। मेरा दुख तो जिंदगी भर का हो ही गया है पर तू भी कभी सुख से नहीं सो सकेगा।
सच में, मैडम जी! मैं रात में खाना नहीं खाता हूँ और दिन में दो ही घंटे सो पाता हूँ। माँ का अभिशाप लग गया है। माँ खुद भी दुखी होगी। वह मेरे बड़े भाई के परिवार के साथ रहती है।
मैडम जी रिश्ते क्या होते हैं? किन भावों के बंधे होते हैं? माँ, घर वाले, रिश्तेदार सभी छूट जाते हैं। मेरी पत्नी भी शादी करके अपने को कोसती है और मैं उसे खुश रखने के लिए सब कुछ न्यौछावर करता हूँ। मेरी माँ मुझसे रूठ गई।
मैं मन ही मन अपनी कविता रिश्ते की पंक्तियाँ दोहरा रही थी
'रिश्ते ग्लेशियर से पिघलता जल है
जिस ओर बह जाए उधर के ही हो जाते हैं'
मेरा कॉलेज आ ही गया था। मैंने कहा हर व्यक्ति की कोई न कोई कहानी होती है। कोई भी व्यक्ति रिश्तों की दुनिया में सुखी नहीं है। माँ की ममता ने भी उसे ठुकरा दिया। जिंदगी में मिला यह घाव साधारण नहीं है कि समय का मलहम उसे ठीक कर देगा। ऐसे रिश्तों की टीस मरते दम तक रहती है।
Sunday, August 20, 2023
अहिंसा और आज का समय विषय पर गोष्ठी
भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता ने अहिंसा और वर्तमान समय पर किया कार्यक्रम - -
भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता ने अहिंसा और वर्तमान समय विषय पर अपना विशेष कार्यक्रम किया। प्रमुख अतिथि कोलकाता कमीश्नर विनीत गोयल ने अपने वक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय में अपराध और हिंसा के रूप में भी परिवर्तन हुआ है। अब साइबर क्राइम बहुत फैल गया है। पहले बैंक डकैती होती थी परंतु अब डिजिटल तकनीक से आपके एकांउट्स से रूपये चले जाते हैं। कोलकाता पुलिस ने बंधु एप शुरू किया है जिसमें तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा बच्चों, महिलाओं और वृद्धों तथा समाज के लोगों की मदद करने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। विभिन्न एप पर इजीडी करा सकते हैं। छपते छपते हिंदी दैनिक कोलकाता और ताजा टीवी के डायरेक्टर वरिष्ठ संपादक विश्वंभर नेवर ने कहा कि अहिंसा का सिद्धांत मरना है मारना नहीं। मानवता के लिए आप अपनी सेवाएं दें वही सबसे बड़ी सेवा है। वैसे जीवन में संघर्ष का होना जरूरी है। और कल्याण की भावना रखनी होगी तभी हिंसा कम हो सकती है। वहीं पूर्व सचिव वित्त विभाग पश्चिम बंगाल के सी एम बचछावत ने महावीर स्वामी के पंचशील सत्य अहिंसा अपरिग्रह अनेकांतवाद स्यादवाद आदि सिद्धांतों के विषय में विस्तार से जानकारी दी और परिवार समाज और देश के हित में गांधी जी की अहिंसा पर बात की।
डॉ वसुंधरा मिश्र ने अपने वक्तव्य में कहा कि अहिंसा का संबंध धर्म, संस्कृति जाति, नस्ल, भाषा, रंग आदि सभी से है। नैतिकता के अभाव के कारण आज के समय में अत्याचार, बलात्कार और कई घिनौने कृत्य हो रहे हैं।गीता के श्लोक के साथ डॉ मिश्र ने कहा कि अहिंसा को लाने के लिए परिवार से शुरुआत करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता की अध्यक्ष चंदा गोलछा ने राजस्थान ब्राह्मण संघ की अध्यक्ष दुर्गा व्यास, साहित्यिकी संस्था की अध्यक्ष विद्या भंडारी,राजस्थान महिला मंडल की किरन गुप्ता, पुष्पा गोयनका एवं लॉयन क्लब रोशनी की अध्यक्ष सरोज नरसरिया का उत्तरीय और मोमेंटो देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं से पधारे विशिष्ट व्यक्तियों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के आरंभ में नैतिकता और इंसान के मूल्यों और आदर्शों पर आधारित गीत प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम का संचालन और संयोजन भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता की पूर्व अध्यक्ष सरोज भंसाली और पूर्व उपाध्यक्ष और सलाहकार अंजू सेठिया के द्वारा आयोजित किया गया। धन्यवाद दिया सरोज भंसाली ने। कार्यक्रम भारतीय भाषा परिषद के सभागार में आयोजित किया गया और चाय नाश्ते का इंतजाम किया गया।
Wednesday, August 16, 2023
आओ देश से माफ़ी मांगें
आओ देश
से माफ़ी मांगें
भारत माता के सपूत हैं
हमें माफ कर देना
वेद, पुराण और संस्कृति को
मन से कभी न माना
आंख कान को बंद कर सबने
बरसों व्यर्थ गंवाया
भाषा के भावों को छोड़ा
सरहद पार पहुंचाया
आचार विचारों की सभ्यता का
हर युग में मजाक उड़ाया
शिक्षा की गुणवत्ता को
हर युग में तोड़ा मोड़ा
आजाद हुए इस भारत को
फिर से गुलाम बनवाया
करते हैं हम तो बस नाटक
तिरंगे को एक दिन फहराने का
फिर पूरे वर्ष भूल भारत को
धर्म जाति भाषा में बंटकर
मर्यादा को रखकर ताक पर
अपने -अपने ही गीत अलापे
किसको पढ़ना किसे पढ़ाना
सब कुछ है बाहर से लाना
घर के लोग तो रहे पराए
आधुनिक बन चादर ओढ़े
कल कारखाने और उद्योगों से
बढ़ते हुए प्रदूषण में
लगे पनपने तरह-तरह के
किटाणु - विषाणु
प्रकृति की हरियाली को
ढांक दिया ईंटों से
जंगल के जंगल ही काटे
माना पर्यावरण को दुश्मन
बन बैठे दावेदार प्रकृति के
हा मनुज धिक्कार रहा
जन्म लेना इस देश में
बचा न सके संपदा अपनी
और अपनी संस्कृति को
खान पान वेशभूषा भी
श्रेष्ठ और उत्तम है
विश्व गुरु कहलाते थे
सोने की चिड़िया थी
भूल सुधार अभी भी कर लें
देश माफ कर देगा
आओ देश से माफी मांगें
देश प्रेम की अलख जगा लें
अपनी संस्कृति की रक्षा कर
भारत को भारत दिखलाएं
आओ गीता मानस में रमकर
अपनी सोच से आगे बढ़ जाएं। @वसुंधरा मिश्र
कविता एक भारत श्रेष्ठ भारत
एक भारत श्रेष्ठ भारत
हम एक हैं तो भारत है
अलग अलग भाषाएँ हैं
अलग अलग बोलीं भी हैं
फिर भी हम सब एक हैं
रंग धर्म जाति संस्कृति
रीति रिवाज और परंपरा
सभी अलग दिखते हैं
पर सोच हमारी भारत है
शान हमारा भारत है
श्रेष्ठ रहा सदैव ही भारत
विश्व गुरु का मान मिला
ज्ञान विज्ञान और शिक्षा में
तिरंगे का ही मान रहा
बुद्ध महावीर और गांधी
लक्ष्मीबाई प्रताप शिवाजी
विवेकानंद परमहंस
की उर्वर धरती को है
शत शत नमन
हिंदु मुस्लिम सिख ईसाई
सभी भाई हैं भारत के
भिन्नता में भी है एकता
यही श्रेष्ठता है भारत की
हिमालय खड़ा रक्षक बन
हम भारत की हैं संतान
रंग रूप वेष भाषा में
मिलकर गीत गाते हम
हम भारत के प्यारे बच्चे
भारत सबसे श्रेष्ठ हमारा।
@डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता
01.07.2022
Wednesday, August 9, 2023
कविता मोर याद आते हैं
मोर याद आते हैं - - -
वारिश की झमाझम बूंदों के बीच मोर याद आते हैं
गाँव की पगडंडियों पर मोर पंख बुहारते - नाचते रहते
नीम का पेड़ और नीचे गिरी निमोली भी मीठी मीठी
कीकर के कांटों पे रेत के टीले पार करते मोर याद आते हैं
बजरंगबली के मंदिर के पास ऊंचे चबूतरे पर
पंखों को खोल मोहक ओढनी में सजे मोर याद आते हैं
बरगद और पीपल की गलबहियाँ से सजी डालों पर एक दूसरे से सटकर बैठे मोर याद आते हैं
रेत की अनगढ़ सड़कों पर एक दूसरे के पीछे दौड़ते भागते याद आते हैं
नोहरे की दहलीज पर उसका सतरंगी पंखों का खिलखिलाना याद आता है
एक थाली में रोटी के टुकड़े पर हक़ जताना याद आता है
पीपल के पेड़ की हर शाखाओं से उस खुशबू हवा का सरसराना याद आता है
सांँझ के धुँधलके में मोरों का सिमट जाना याद आता है
कुंँए के गहरे पानी में छपाक की आवाज
उभर कर आई थी नई घाघरा चुनड़ी की छाप
साक्ष्य बने थे मोर उस काली रात के
पीऊ पीऊ से गूंँज उठा था सन्नाटे से भरा गाँव
हाथों के कंगन और चुडियों की खनखन हो गई थीं मौन
आज भी याद आते हैं वे कंगूरे जो सोने से मढे़ थे
हवेलियों की दिवारों में चुनी आत्माओं की चीखें खामोश थीं
गाँव की पगडंडियों पर मोर दम तोड़ रहे थे
गेहूंँ और बाजरे के लहलहाते खेतों का सोंधापन मरने लगा था
पैरों के नीचे से रेत के टीले धंसने लगे थे
समय की आँधी में मोर के पंख मुरझाने लगे थे
पीपल की कई डालें सूखने लगी थीं
पीऊ की ध्वनि कम होती जा रही है
गाँव शहरों की चकाचौंध में खोते जा रहे हैं
रेत के टीलों पर पत्थरों के मकान खड़े हो गए हैं
ऊपरी धरती ऊर्जा से भरी दिखती है
अंदर के खोखलेपन में हर आदमी धंसा जा रहा है
मोर पंख के नकली कारखाने असली लगने लगे हैं
मोर मरने लगे हैं आदमी भी मरने लगा है
कभी-कभी मोर याद आते हैं
वे भाव कभी-कभी जीवित हो उठते हैं
आशा के बीज उगते हैं मर नहीं सकते मोर
मोर हमेशा हमारे भीतर जीवित है
Sunday, August 6, 2023
रिपोर्ट सीएम आर आई में
भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने किया सीएमआरआई अस्पताल का शैक्षिक दौरा---
भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने शैक्षणिक दौरे के तहत सीएमआरआई (कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट) अस्पताल ले जाया गया। दो संकाय सदस्यों, श्री सुभाशीष दासगुप्ता और श्री सौविक मजूमदार के साथ लगभग तीस विद्यार्थियों ने अस्पताल का दौरा किया।6 जुलाई को सभी विद्यार्थी कॉलेज से सुबह लगभग 9:30 बजे बस द्वारा 10:30 बजे तक अस्पताल पहुँच गए ।
अस्पताल के सदस्यों ने सभी का स्वागत किया और सभागार में प्रवेश करने से पहले अपना पंजीकरण करवाया । सभागार में प्रवेश करते ही उन्हें एक मैनुअल सौंपा गया। डॉ. देबाराती एवं डॉ. सुमोना द्वारा एक संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण दिखाया गया। डॉ। देबारती ने सभी आगंतुकों का अभिवादन किया और छात्रों से कुछ प्रश्न पूछकर प्रस्तुति शुरू की। उन्होंने उनसे पूछा कि क्या वे पहले कभी किसी कारण से अस्पताल गए थे और छात्रों ने अपने पिछले अनुभव साझा किए। डॉ. सुमोना ने सीएमआरआई अस्पताल के बारे में संक्षिप्त परिचय दिया और बताया कि कैसे इसने खुद को शहर के सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों में से एक के रूप में स्थापित किया। प्रेजेंटेशन में अस्पताल की विभिन्न शाखाओं को दिखाया गया और इस बात पर जोर दिया गया कि सीएमआरआई अस्पताल आपातकालीन सेवाएं प्रदान करने के लिए जाना जाता है।
प्रेजेंटेशन समाप्त होने के बाद, डॉ देबाराती छात्र छात्राओं के साथ अस्पताल का दौरा करने के लिए समय और पहल करने के लिए हमारे संकाय, श्री सुभाशीष दासगुप्ता और श्री सौविक मजूमदार को धन्यवाद दिया। प्रस्तुति समाप्त होने के बाद, छात्रों को पंद्रह के समूहों में विभाजित किया गया और उन्हें चौथी मंजिल पर ले जाया गया जहां उन्हें डॉ. राजा ढोर ने संबोधित किया जो कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट में पल्मोनोलॉजी विभाग के निदेशक और एचओडी हैं। उन्होंने छात्रों से अस्पताल से उनकी अपेक्षाओं के बारे में पूछा और चार से पांच छात्रों ने सवाल पूछे और बड़े पैमाने पर अस्पतालों में स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के कम वेतन के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की।
इसके बाद डॉ. राजा धर ने स्वास्थ्य देखभाल के महत्व के बारे में बात की और धूम्रपान के हानिकारक प्रभावों के बारे में सभी को आगाह किया। उन्होंने फिट रहने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए सभी को संतुलित आहार लेने और नियमित व्यायाम करने की सलाह दी। संक्षिप्त चर्चा के बाद छात्रों के दो समूहों को अस्पताल के चारों ओर भ्रमण के लिए ले जाया गया।स्टाफ सदस्यों में से एक ने छात्रों का मार्गदर्शन किया और उन्हें अस्पताल के विभिन्न विभागों जैसे गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग, ईएनटी विभाग, प्लास्टिक, हाथ और त्वचाविज्ञान, हड्डी रोग, जीआई और एचपीबी सर्जरी विभाग, रेडियोलॉजी और इमेजिंग विभाग, मैमोग्राफी और एक्स-रे विभाग दिखाया। ,वृक्क विज्ञान विभाग और डायलिसिस इकाई।छात्रों को एक खाली रोगी शौचालय में भी ले जाया गया जिससे उन्हें उपचार के दौरान रोगियों को उपलब्ध सुविधाओं को समझने में मदद मिली। अस्पताल के स्टाफ द्वारा विद्यार्थियों को सामान्य वार्ड और आईसीयू वार्ड के बीच का अंतर समझाया गया।
छात्रों को भर्ती मरीजों के परिवारों के लिए नर्सिंग स्टेशन और वेटिंग रूम भी दिखाया गया। छात्र अस्पताल के अंदर एक फूड वेंडिंग मशीन देखकर मंत्रमुग्ध हो गए जो अस्पताल के सभी कामकाजी कर्मचारियों के लिए स्थापित की गई थी। अस्पताल के आसपास के क्षेत्र और पार्किंग स्थल सूची में आखिरी स्थान पर थे। पूरे अस्पताल का रख-रखाव बहुत अच्छे से किया गया था और छात्रों को अस्पताल का माहौल बहुत पसंद आया। दौरा पूरा होने के बाद, आगंतुकों को एक भोजन पैकेज दिया गया जो अस्पताल द्वारा प्रदान किया गया था। सीएमआरआई अस्पताल का यह शैक्षणिक दौरा भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के छात्रों के लिए एक समृद्ध अनुभव था।रिपोर्टर कासिस शॉ रहीं और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
कविता संदेश पंक्तियाँ
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं
अल्लामा इक़बालहम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं
जिगर मुरादाबादीजहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा
किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होताधूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
निदा फ़ाज़ली“मेरे लिए, सिर्फ दो तरह के लोग होते हैं ~ जवान और अनुभवी लोग।” — A.P.J Abdul एक अच्छी किताब सौ अच्छे दोस्तों के बराबर होती है, लेकिन एक अच्छा दोस्त पूरे पुस्तकालय के बराबर होता है।” — A.P “आकाश की तरफ देखिए, हम अकेले नहीं हैं, सारा ब्रह्माण्ड हमारे लिए अनुकूल है और जो सपने देखते हैं और मेहनत करते हैं उन्हें प्रतिफल देने की साजिश करता है।” — A.P.J Abdul Kalamसपने वो नहीं जो आप सोते समय देखते हैं, बल्कि सपने वो हैं जो आपको सोने नहीं देते।” — A.P.J Abdul Kalam
रिपोर्ट गुरु शिष्य नृत्य
भारतीय संस्कृति गुरु - शिष्य परंपरा पर आधारित दिव्य नृत्य संध्या का आयोजन - - -
प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। 15 जून, 2023 को कोलकाता के दर्शकों ने ज्ञान मंच सभागार में नृत्य माध्यम से एक दिव्य आध्यात्मिक शाम का आयोजन हुआ।
आचार्य अनुसूया घोष बनर्जी ने अपनी शिष्या श्रीमती संचयिता मुंशी साहा के साथ "एकात्म-सर्वोच्च आनंद की ओर एक यात्रा" शीर्षक से युगल नृत्य प्रस्तुति दी जो आज के युग में एक मिसाल है ।
कार्यक्रम के आरंभ में आदि शंकराचार्य द्वारा रचित काशी काल भैरव अष्टकम पर आधारित नृत्य से हुआ , इसके पश्चात प्रसिद्ध मराठी अभंग "मन मंदिरा" में साधक और साधना की भूमिका को दर्शाया गया। अगले श्रृंखला का नृत्य वर्णम चारुकेसी राग पर आधारित रहा जो जीवात्मा की परमात्मा के साथ विसर्जन की निरंतर भूमिका का वर्णन करता है। गुरु और शिष्य दोनों ने ही मंच पर अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन किया। इसके बाद त्यागराज कृति "नीदु चरणमुले" ने आचार्य अनुसूया घोष बनर्जी द्वारा आध्यात्मिक गहराई और दिव्यता के साथ सबरी की कहानी सुनाई। इस मनोहर संध्या की अंतिम प्रस्तुति पलानी थिलाना और टैगोर की "आनंद धारा" थी जो जीवन के शाश्वत प्रवाह को आगे बढ़ाती है।
इस नृत्य प्रस्तुति में श्री सुकुमार जी कुट्टी (गायन), मलय डे (मृदंगम), शाहरुख अहमद (तबला), विशाल जी (वायलिन), शेखर दा (बांसुरी), राजीव खान (नट्टुवंगम), देबज्योति (रवींद्र संगीत) ने संगीतमय सहयोग दिया। यह आयोजन नृत्यक्षेत्र एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स द्वारा नृत्यभाष एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट के सहयोग से किया गया था। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
कविता बावरा हुआ ये मन
बावरा हुआ ये मन
देखे ज्यूं चातक बन
बूंदों की चाहत में
ढूँढता कुछ और ही मन
बादलों के बीच कोई घर
खिड़की दरवाजे सा लगा
पानी बिजली से लैस
नए नए आकार बनते
नीचे से ऊपर सीढ़ी सी
आर पार करते-करते
आंखें थक जाती
रास्ते खो जाते
मायावी और रहस्यमयी सी
बादलों के बीच कोई घर
भला कोई कब टिक सका
एक ऐसा रास्ता भी बना
बड़े बड़े पर्वत और कंदराओं के झुंड
स्वर्ग द्वार हो जैसा
जंगल के जंगल
पशु जानवर एक डोर में बंधें
नदियों के लाखों किनारे
वृक्षों पर झूलते अनगिनत बादलों के सजे टुकड़े
धूप से चमकते क्रिस्टल
रंग बिरंगी इंद्रधनुषी समां
न जाने किस कवि की कल्पना
किताबों के पन्ने ही पन्ने
खुलते चले गए
अप्सराओं से भरी इंद्र सभा के मोहक दृश्य
हल्के हल्के बादलों के बीच
रूई के फाहे सी हवा उड़ती लगी
अरे! सब कहाँ उड़ गए धीरे धीरे
एक के बाद एक
बने बनाए घरों की दिवारें गायब होने लगीं
ढहने लगा था सपनों का यह आलीशान शहर
समझता ही नहीं
मन बड़ा ही बावरा हुआ जाता है
उड़ने लगा फिर किसी मायावी बादलों की तलाश में
कविता होंगे हजारों सितारे
होंगे हजारों सितारे तुम्हारे आस्मां में
जमीं पे भी नहीं हैं कम चमकते सितारे
चांद की चांदनी में चेहरा धुंधला सा लगा
उषा की बिखरी-बिखरी लाली
बालों में छिपे अलग से लगे
हवा के रुख में बहती जा रहीं ये नदियां
बंधनों से मुक्त होने की चाहत में भागती-दौड़ती
जल के भीतर ही भीतर जल में ढूंढती रास्ते
पर्वतों की बनावट को भी काटती
कुछ और ही आकार में ढालती रहती
झरने झील और नालों को गढ़ती लगीं
हम कितने अंजान रहे प्रकृति के रहस्यों से
सभी अपनी जीविका में जीवित लगे
मस्तिष्क की अंधेरी गुफाओं में जाल बुनने लगे
प्रकृति की आँखों में धूल झोंकते रहे
प्रेम और करुणा को नकारते हुए
रहस्यमयी को नजरअंदाज करते रहे
नफरत और क्रोध को हवा देते रहे
डॉ वसुंधरा मिश्र
12 जुलाई 2023
रिपोर्ट स्वामीनारायण मंदिर
स्वामीनारायण मंदिर जोका में गुरु पूर्णिमा के दिन भव्य समारोह - - -
गुरुपूर्णिमा के अवसर पर जोका रोड पर स्थित स्वामीनारायण मंदिर में भव्य समारोह का आयोजन एक जुलाई 2023 किया गया। स्वामीनारायण मंदिर के भूतल मंदिर में स्थापित स्वामीनारायण की स्वर्ण मूर्ति की पूजा अर्चना आरती की गई। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि यह आयोजन मंदिर के प्रमुख पदाधिकारियों द्वारा किया गया। स्वामीनारायण के पदचिन्हों पर चलकर गुरु की कृपा से विश्व में 1200 से अधिक मंदिर हैं । सबसे बड़ी बात है कि 1100 से अधिक ज्ञानी संतों का निर्माण किया गया है। इस अवसर पर मंच पर उपस्थित सभी समकालीन संतों ने अपने वक्तव्य रखे। गुरु स्वामीनारायण और उनकी परंपरा के संतों के विडियो भी दिखाए गए और भजन द्वारा गुरु स्तुति की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों की उपस्थिति रही। सच्चे संतो के लक्षण और उनसे संबधित विभिन्न कथाएं सुनाई गई । हावड़ा, टॉलीगंज, कोलकाता,गुजरात और देश के विभिन्न स्थानों से आए लोगों ने गुरु की वंदन अर्चना की। वेद व्यास की स्मृति में यह पूर्व पूर्णिमा आयोजन है। प्रमुख साईं महाराज सच्चे संत थे इसी कारण भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी उनके सानिध्य में रहे। स्वामीनारायण मंदिर के हरि भक्त राम मोहन लाखोटिया सपत्नीक ने इस भव्य समारोह में सक्रिय रूप से योगदान दिया। इस अवसर पर भारतीय भाषा परिषद के डायरेक्टर प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ शंभूनाथ सपत्नीक , भवानीपुर कॉलेज की प्राध्यापिका डॉ वसुंधरा मिश्र, भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता की प्रमुख प्रतिनिधि अंजू सेठिया और सदस्य रूमा दास ने गुरु पूजा में भाग लिया। अंत में, सभी श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया।
हिंदी कार्यशाला 23 शिक्षा नीति
कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज में नई शिक्षा नीति के तहत हिंदी पठन-पाठन एवं पाठ्यक्रम पर भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी के हिंदी विभाग ने कार्यशाला में भाग लिया
हिंदी विभाग एवं आई क्यू ए सी, कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज तथा हिंदी विभाग स्नातक अध्ययन बोर्ड, कलकत्ता विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला 13 जुलाई 2023 में हिंदी के सभी प्रोफेसर और हिंदी के शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर दीप प्रज्वलित कर कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्रिन्सिपल डॉ सत्या उपाध्याय, देवाशीष विश्वास, मैत्रीय भट्टाचार्य डॉ राज्यश्री शुक्ला और गणमान्य प्रमुख ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। डॉ राज्यश्री शुक्ला, यूजी बोर्ड के इंस्पेक्टर अॉफ कॉलेज देवाशीष विश्वास और गवर्निंग बॉडी की सदस्या मैत्रीय भट्टाचार्य ने भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की ओर से डॉ वसुंधरा मिश्र और विभागाध्यक्ष डॉ कविता महलोत्रा ने भाग लिया। नई शिक्षा नीति में हिंदी पठन-पाठन एवं पाठ्यक्रम पर अपने महत्वपूर्ण विचारों को व्यक्त किया गया।कलकत्ता विश्वविद्यालय हिंदी विभाग डॉ राज्यश्री शुक्ला, सेंट पाल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ कमलेश पांडेय ने अपने वक्तव्य रखे। हिंदी कार्यशाला में हिंदी के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे गए। भोजनावकाश के पश्चात के सत्र में सभी शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने प्रश्नों और पेपर बनाने पर सुझाव आए हैं जिन्हें लिखित रूप में हिंदी विभाग स्नातक अध्ययन बोर्ड को दिया जाएगा। इस अवसर पर शिक्षायतन कॉलेज, स्कॉटिश चर्चकॉलेज, खिदिरपुर कॉलेज, विद्यासागर कॉलेज, गोखल मेमोरियल कॉलेज, जयपुरिया कॉलेज,लाल बाबा कॉलेज, रानी बिरला गर्ल्स कॉलेज आदि बत्तीस कॉलेजों के हिंदी अध्यापक और अध्यापिकाओं की उपस्थिति रही। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
एन एस एस की रिपोर्ट 23
भवानीपुर कॉलेज की एनएसएस ईकाई ने शिक्षा के क्षेत्र में कनेक्टिंग डॉट्स 2.0 का आरंभ किया - - -
शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं। नेल्सन मंडेला के कथन पर अमल करते हुए भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की एनएसएस टीम ने केओरातला बसनबाला गर्ल्स हाई स्कूल में अपने 3 महीने से चल रहे प्रोजेक्ट 'कनेक्टिंग डॉट्स 2.0' की शुरुआत की।
शिक्षा एक बच्चे के जीवन में एक आवश्यक घटक है क्योंकि यह उनके कौशल, व्यक्तित्व और दृष्टिकोण को बढ़ाती है। यह वह नींव है जिस पर उनका भविष्य निर्मित होता है क्योंकि बच्चे हमारे राष्ट्र का भविष्य हैं। इस विश्वास के साथ भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की एनएसएस इकाई द्वारा 4 जुलाई 2023 को केओरातला बसनबाला गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ाने की व्यवस्था की गई है।
इस परियोजना का लक्ष्य संवादी अंग्रेजी और सामान्य ज्ञान विषयों को बेहतर बनाना है जो उन्हें स्पोकन इंग्लिश सीखने में मदद करेगा और उनके सामान्य ज्ञान में सुधार करेगा और उन्हें आत्मविश्वासी बनाएगा साथ ही उन्हें बाहरी दुनिया के लोगों से जुड़ने के लिए मंच प्रदान करेगा। उनके पास स्पोकन इंग्लिश और सामान्य ज्ञान दोनों के लिए सप्ताह में एक कक्षा होगी जिसे रिकॉर्ड किया जाएगा। अंत में, एक मूल्यांकन परीक्षा ली जाएगी और उसके आधार पर छात्रों को एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
एन एस एस की प्रमुख प्रो गार्गी, स्वप्ना बेन पटेल (स्कूल की ट्रस्टी) कॉलेज के 3 छात्रों के साथ ऑनलाइन कक्षाओं के सुचारू प्रवाह के लिए उपकरण स्थापित करने में स्कूल प्रबंधन की मदद करने के लिए 4 घंटे की ड्राइव करके स्कूल गईं। एनएसएस के अन्य 2 स्वयंसेवकों ने पहले सप्ताह के लिए ऑनलाइन कक्षाएं ली। कुल मिलाकर 14 स्वयंसेवक इन 3 महीने की परियोजना में भाग ले रहे हैं।एन एस एस की पूरी टीम ने इसके लिए छात्र मामलों के डीन प्रोफेसर दिलीप शाह, छात्र , प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी और कॉलेज के पूरे प्रबंधन को पूरे आयोजन में उनके अपार समर्थन के लिए धन्यवाद दिया ।कृपा सहल द्वारा इस कार्यक्रम की रिपोर्ट दी गई और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
उमा झुनझुनवाला एकल नाटक कोई और रास्ता देखते हुए
'कोई और रास्ता' नाटक में उमा झुनझुनवाला के एकल अभिनय ने साबित कर दिया कि एक स्त्री जितनी संवेदनशील और भावनाओं में बहने वाली हो सकती है वह उतनी ही कठोरतम स्थिति में भावनाओं पर काबू पाकर नए रास्ते तलाशने का वजूद भी रख सकती है। यह नाटक एक ऐसी ही आधुनिक स्त्री की कहानी है जिसकी आवाज में जादू है लेकिन देखने में बहुत सुंदर नहीं है, उसे भी अपने जीवन में प्यार करने का अधिकार है किसी लड़के पर मर मिटने का साहस है। वह किसी भी प्रकार से समाज में अपने को कमतर नहीं समझती है। लेकिन आधुनिकतम विचारों वाली लड़की कितनी कमजोर साबित होती है जब वह किसी लड़के के प्रति सच्चे प्यार में पड़ती है।यह इस नाटक का केंद्र बिंदु विषय है।
रिसेपनिषट इंदु (अभिनेत्री उमा झुनझुनवाला) को उसी के अॉफिस में इंटरव्यू देने वाले लड़के को प्रथम बार देखते ही उसके प्रेम में पड़ जाती है और वह इंटरव्यू में चुन लिया जाय इसके लिए ईश्वर से प्रार्थना भी करने लगती है।वह लड़का चुन लिया जाता है और वह उसे अब रोज अपने अॉफिस में देख सकती थी। उसका इकतरफ़ा प्रेम अपने परवान चढ़ चुका था और वह किसी भी प्रकार से उसे पाना चाहती है। यह काम उस लड़के के मित्र ने आसान किया और वह लड़का धीरे-धीरे इंदु से प्रेम करने लगा। माँ के मना करने पर भी इंदु ने बात नहीं मानी और उससे शादी कर लेती है। उसका छोटा - सा घर और बहुत सारे भाई- बहनों की जिम्मेदारी निभाती हुई इंदु का प्यार धराशायी हो जाता है। वह अपने इस जिस्मानी प्रेम से तंग आ चुकी थी और उससे छुटकारा पाने के लिए तलाक भी लेती है। लेकिन समाज के लोग और आस पास के लोग कहते हैं कि उसे दूसरी शादी कर लेनी चाहिए। उसकी माँ भी चाहती थी कि वह अपना जीवन फिर से शुरू करे। तलाकशुदा इंदु ने अपनी टूटी-फूटी जिंदगी और पहले पति की यादों को नकारते हुए दूसरे रास्ते को चुनती है और वह अपने दूसरे पति के साथ खुशी से रह रही है। पहले जो गल्ती की थी उसका एहसास ही इस नाटक की नायिका
यह नाटक समाज की दकियानूसी विचारधाराओं को नकारते हुए एक बोल्ड स्टेप उठाने का संदेश देता है जो वर्तमान में नौकरी-पेशे से जुड़ी स्त्रियों की आम परेशानी है। बहुत ही मजबूत ताने-बाने में बंधी स्क्रिप्ट राइटर प्रताप सहगल जी और निर्देशक के जबर्दस्त संवाद संयोजन के कारण 'कोई और रास्ता' एक कसा हुआ नाटक है जिसका एकल अभिनय उमा झुनझुनवाला ने बखूबी निभाया। उमा झुनझुनवाला स्वयं एक नाटककार, कवयित्री और अभिनय कला में मंजी हुई कलाकार हैं। मंच सज्जा में माँ और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए तीन-चार लोगों की संख्या थी जो मूक अभिनय से दर्शकों को बांधे हुए थे।रंगमंचीय दृष्टि से लाइट, ध्वनि और रंग संयोजन बहुत ही सधा हुआ रहा। त्वरित गति से मंच पर घर, अॉफिस, भावों का अभिनय, अंतर्द्वंद्व और अंतर्दशा के भावों की अभिव्यक्ति, संवेगात्मक अत्याचार, पीड़ा वेदना की जीवंतता को उमा झुनझुनवाला ने बखूबी निभाने में अपनी जी जान लगा दी है और कहीं से भी अभिनय में स्खलन का आभास नहीं हुआ। संवाद और भाषा भी सशक्त रही। ट्रेन के प्लेटफार्म पर सभी यात्री होते हैं। एक ट्रेन छूट जाती है तो दूसरी पकड़ लेते हैं। समाज में रहने वाले विभिन्न लोगों की विभिन्न समस्याओं को हल किया जा सकता है और वह स्वयं उमा झुनझुनवाला ने इस नाटक में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन द्वारा साबित किया।
ज्ञान मंच सभागार में होने वाले इस नाटक को देखने वाले दर्शक मूक और स्तब्ध होकर अभिनय कला से जुड़े रहे। मेरे विचार से वही नाटक सार्थक होता है जिससे दर्शक अंत तक जुड़े रहें। कोलकाता की बहुचर्चित एवं लोकप्रिय नाट्य संस्था-" लिटिल थेस्पियन " द्वारा आयोजित एवं विख्यात नाट्यकार श्री प्रताप सहगल द्वारा रचित एवं लब्धप्रतिष्ठित निर्देशक श्री निलय राय द्वारा निर्देशित एकल नाटक -
" कोई और रास्ता " का प्रथम सफल प्रदर्शन देखकर अभिभूत हो गई है जिसमें एकल अभिनय में संस्था की संस्थापिका स्वयं श्रीमती उमा झुनझुनवाला ने अपने अद्भुत, अप्रतिम अभिनय से दर्शकों का हृदय जीत लिया।
उमा झुनझुनवाला जी को बधाई और शुभकामनाएँ।
-डॉ वसुंधरा मिश्र, हिंदी प्राध्यापिका, भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज, कोलकाता
Saturday, August 5, 2023
फुटसल 23 रिपोर्ट
भवानीपुर फुटसल 2023
"हम एक साथ खड़े हैं, हारें या जीतें - हम एक टीम हैं।" ये ऐसे शब्द हैं जो फुटबॉल जैसे खेल से पूरी तरह मेल खाते हैं। एक सार्वभौमिक प्रशंसक आधार के साथ, यह खेल दुनिया भर में छोटे और बड़े सभी रूपों में खेला जाता है। 'फुटसल' एक फीफा-मान्यता प्राप्त छोटे-पक्षीय इनडोर फुटबॉल खेल है जिसमें फुटबॉल के प्रकार के विपरीत प्रत्येक पक्ष में केवल 5 खिलाड़ियों की आवश्यकता होती है जिसमें 11 लोगों की आवश्यकता होती है। छात्रों को जीवंत और सक्रिय रखने के लिए, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने भवानीपुर फुटसल 2023 का आयोजन किया, जो इस खेल में रुचि रखने वाले कई छात्रों के लिए एक शानदार अवसर था।
कैंपस टर्फ इस तरह के आयोजन की मेजबानी के लिए एक उपयुक्त स्थान था क्योंकि खिलाड़ी अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता से प्रदर्शन कर सकते थे जबकि दर्शक अपना उत्साह बनाए रखने के लिए उत्साहित रहते थे। कुल 56 टीमों ने भाग लिया, यह आयोजन 11, 12 और 13 जुलाई 2023 को हुआ।पहले दिन, यानी 11 जुलाई को, राउंड 1 के लिए 28 मैच निर्धारित थे जो कि क्वालीफाइंग राउंड था। मैच सुबह 8:30 बजे शुरू हुए और बीच में आधे घंटे के ब्रेक के साथ शाम 5:30 बजे तक चला। पहले दिन के अंत में, 28 टीमें बची थीं। दूसरा दिन सुबह 9:00 बजे शुरू हुआ और इसमें क्रमशः 14 और 7 मैच खेले जाने वाले राउंड 2 और 3 शामिल थे। दूसरे दिन का खेल ख़त्म होने तक 14 टीमें खेल में बची थीं। अंतिम लेकिन महत्वपूर्ण बात, तीसरा दिन वह था जब विजेता सामने आएगा और अपनी सही स्थिति का दावा करेगा। तीसरे दिन चौथा राउंड या क्वार्टर-फ़ाइनल, सेमी-फ़ाइनल और फ़ाइनल सुबह 10:00 बजे से होंगे। जब तीसरा दिन समाप्त हुआ, तो टीम 'अंकारा मेस्सी' विजयी रही, टीम 'वीकेंड वॉरियर्स' प्रथम उपविजेता रही और टीम '6 सुपर स्ट्राइकर्स' क्रमशः द्वितीय उपविजेता रही।
यह स्पष्ट था कि छात्र खेल के प्रति जुनूनी थे क्योंकि वे चिलचिलाती धूप में खेलते थे और भारी बारिश होने पर भी नहीं रुके। जब दोनों टीमों ने अपने मैचों के अंत में हाथ मिलाया तो सभी खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल भावना का परिचय दिया। कई टीमें अपने मैच से पहले और बाद में रणनीतियों का विश्लेषण करने और दूसरों को प्रोत्साहित करने के लिए टर्फ के बाहर अतिरिक्त समय बिताती थीं। 13 जुलाई को समापन समारोह में विजेता तीनों टीमों को हमारे डीन सर प्रो. दिलीप शाह द्वारा मेडल एवं प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया। दिलीप शाह ने कहा कि यह आयोजन एक सफल पहल था और कॉलेज अपने छात्रों को अपने कौशल दिखाने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए खेल से संबंधित अन्य कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।
कुल मिलाकर 58 टीमें थीं। इस प्रकार लगभग 360 छात्रों ने खिलाड़ियों और स्वयंसेवकों के रूप में टूर्नामेंट में भाग लिया। वहाँ दो पेशेवर रेफरी थे जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि निष्पक्ष खेल हो। अंततः खेल स्वयं विजेता रहा क्योंकि दीवार पर लिखा था धूप हो या बारिश, मज़ा हो या दर्द, हानि हो या लाभ, हम सभी ने अपने खेल के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। रिपोर्ट किया अनिकेत दासगुप्ता ने और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
अर्चना सावन मैं बूंँद हूँ विराट बनने चली हूँ रिपोर्ट
मैं बूंँद हूँ विराट बनने चली हूँ वर्षा का स्वागत किया अर्चना ने - - - वर्षा के आगमन के साथ ही बाल- वृद्ध, युवक-युवतियों के साथ ताल- तलईया, नदी-नाले, गंगा- यमुना, धरती- आकाश, पेड़ - पौधे सब मदमस्त हो जाते हैं तो भला सृजनशील कवि कवयित्री पीछे क्यों रहे। आषाढ़ की प्रथम गड़गड़ाहट के साथ ही मन के भावों का उद्दीपन होने लग जाता है। अर्चना संस्था के सदस्यों ने वर्षा ऋतु का स्वागत करते हुए सर्वप्रथम संयोजक और संचालन करते हुए इंदु चांडक ने सरस्वती वंदना या कुंदेदु तुषार हार धवला से आरंभ किया। खिड़की से हाथ पसार कर छूती हूं आकाश के बादलों कोमैं हूं बूंद विराट बनने चली हूं कविता और राजस्थानी गीत /काला धोला बादल आया/म्हारे छोटे गांव में मृदुला कोठारी ने सुना कर सबका मन मोह लिया। हिम्मत चोरड़िया प्रज्ञा ने गीत और कुण्डलिया-हलधर खेतों में चले,आया सावन देख।/काम करेगें रात दिन, बदलेंगे अब रेख।। गीत-पड़े ये रिमझिम आज फुहार।धरा ने किया गजब शृंगार।।संगीता चौधरी ने धरती के श्रृंगार पर अपनी रचना
हरियाली कण-कण बसे,बहे नदी में धार ।/सावन आने से हुआ, धरती का श्रृंगार ।।सुनाया और निशा कोठारी ने बाल गीत- ये बूँदों की टप-टप /ये पैरों की छप-छप, गीत-
सावन तुझसे बस इतनी सी विनती है मेरी सुनाया। विद्या भंडारी ने समाज की समसामयिक समस्याओं को देखते हुए गीत सुनाया ना झूला है /ना कजरी ना बलमा है /ना सजनी
ये कैसा सावन /हरियाला ना अंगना और ना बदरी सुनाया। नौरतनमल भंडारी ने पहले के समय को याद करते हुए अपनी रचनाएं प्रेम यात्रा- पहले जब कभी हम मिलते/
तो कहाॅ पता चलता/कब दिन ढला/कब रात हुई।और एहसास - मैं बोलना चाहता हूॅ/क्योकि मेरे पास शब्द है
कल्पना है/स्वप्न है/अभिव्यक्ति है।प्रसन्न चोपड़ा ने अपनी रचनात्मक भावों में अपने अस्तित्व को रेखांकित किया जिसमें वे कहती हैं कि सागर नहीं, दो बूंद पानी तो हूँ तन मन दोनों भी खो गई, यह सावन की बौछार / हरियाली है चारों ओर, प्रकृति ने किया सिंगार। वहीं सुशीला चनानी ने मनहरण और सरसी छंदों में महत्वपूर्ण गीत प्रस्तुति दी जो महत्वपूर्ण रहे - भीगा भीगा मौसम है /आयी बरखा रानी है । /सावन और विरहणी। नई सदस्य चंद्र कांता सुराणा ने छम छम करता आया सावन/अनंत अनंत कर्मों का क्षय करती है तपस्या/रचना सुनाई। इंदु चांडक का गीत कारे कारे बदरा नील गगन में/उमड़ घुमड़ कर आये ने सबको सावन की वारिश में भिगो दिया।
डॉ वसुंधरा मिश्र ने मन का सावन सुनाई जिसमें वर्षा के कई आयामों पर प्रकाश डाला। उनकी ये पंक्तियाँ बहुत पसंद की गईं - कृषि के साथ कृष्ण बांसुरी बजाएं तो सावन हैं /क्रोधित वर्षा के नैनों की धारा जब बुझ जाएं तो सावन है
बाढ़ के खतरे न आएं पशु-पक्षी और मानव के जीवन सुरक्षित हों तो सावन है।धन्यवाद ज्ञापन किया सुशीला चनानी ने और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
वाह मणिपुर! धिक्कार कविता
वाह मणिपुर! धिक्कार
कौन सी दुनिया में जी रहे हो मणिपुर!
धिक्कार तुम्हारा यह सुंदर नाम
राजघराने - सा नाम और अत्याचारियों - सा काम
दो स्त्रियों को नंगा कर अश्लीलता को भी किया शर्मसार
देश और विदेश के संस्कार भी आज हुए बेहाल
माँ बहन बेटी भाभी चाची मामी नानी दादी की देह से पोषित पुरुष का अंत समय आता दिखता है
कौन सी दुनिया में जी रहे हो मणिपुर! धिक्कार है
समय के साथ लगता है भुला दी गई वह द्रोपदी
जिसने उखाड़ फेंके थे पुरुषों की कामुकता भरी कड़ी को
आत्मसम्मान और शील के समक्ष नहीं टेके थे घुटने
धृतराष्ट्र, दुर्योधन और कौरव समूह को चटा दिया था धूल
स्त्री जाति की मर्यादा को स्थापित कर अस्तित्व की लडी़ लड़ाई थी
कौन सी दुनिया में जी रहे हो मणिपुर! धिक्कार है
युगों युगों से देख रही है स्त्री अपनी कहानी
फिर कही न कहीं सुलग रही है फिर वही कहानी
कथाएँ झूठ नहीं बोलती हैं कल्पना में नहीं जीती हैं
वे मूर्त रूप लेकर समय-समय पर पाठ पढ़ाने आती हैं
कौन सी दुनिया में जी रहे हो मणिपुर! धिक्कार है
स्त्री को हर बार मोहरा बनाया गया है
घर बाहर दोनों ही जगह प्रताड़ित की जाती रही हैं
कामुक लोभी पुरुषों के विनाश का युग
वह दिन अब ज्यादा दिन दूर नहीं है
समय माफ नहीं करता है पहिया चलता रहता है
कौन सी दुनिया में जी रहे हो मणिपुर! धिक्कार है
अब दुर्गा लाने का समय आ गया है
धर्म की हानि होने पर देवी अवतार लेने वाली हैं
कलियुगी महिषासुरों का विनाश कर अब सुधार लाना है
ऐसे कृतघ्न पुरुषों से धरती खाली हो जाएगी
आने वाले युग में स्त्री के शासन में
स्त्री-पुरुष दोनों की ही सत्ता
फिर से एक सुंदर और सफल राज बनाएगी।
21.7.23, डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता
हर दिन नया विचार मीना राय
हर दिन नया काव्य संग्रह को पढ़ते हुए - - - डॉ वसुंधरा मिश्र के काव्य संग्रह 'हर दिन नया' की कविताओं को पढ़कर मेरा हृदय साहित्य के गुण और आंतरिक परतों से आंदोलित हो उठा। आपकी लेखनी ने कविता के हर एक शब्द में मोती पिरोए हैं
। हर एक कविता अपने समाज में घटित होने वाली यथार्थ संवेदना को समेटे हुए है। कृत्रिमता का थोड़ा भी भाव लक्षित नहीं है। अगर आपकी तुलना सुभद्रा कुमारी चौहान से की जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। बहुत सारी विभूतियां समाज में उतनी प्रकाशित नहीं हो पाती जितना अपने अंतः स्थल में ज्ञान को समेटे हुई रहती हैं। भविष्य में ,आप हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक दैदीप्यमान सितारा बनें ,यही मेरी आपके प्रति शुभकामना है।
'हर दिन नया' कविता संग्रह में कविता 'अप्राप्य' बहुत ही अच्छी लगी। यह कविता हर इंसान के जीवन की वास्तविकता से ओत-प्रोत है। हर मनुष्य अपने जीवन में परिपूर्णता पाने के लिए अपने रिश्तों में पूर्णता प्रदान करने के लिए भरपूर कोशिश करता है, किंतु कहीं- ना - कहीं वह पूर्णता पूर्ण होते हुए भी अपूर्ण रह जाती है ।यह शीर्षक अपने आप में अर्थ समेटे हुए हैं।शुभकामनाओं सहित।
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मीना राय, एम ए, हिंदी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, वरिष्ठ हिंदी अध्यापिका, कोलकाता
दो दिवसीय कारगिल विजय दिवस 23
भवानीपुर कॉलेज ने मनाया दो दिवसीय कारगिल विजय दिवस - 2023
जब वीरता और प्रतिबद्धता वाले लोग हमारे देश की सीमाओं को सुरक्षित करते हैं,हम शांति से सोते हैं। 1999 की गर्मियों में, कारगिल की सबसे ठंडी चोटियों पर, देश के वीर सपूतों ने पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ कड़ी लड़ाई लड़ते हुए अपने देश की अखंडता की रक्षा के लिए लगातार लड़ाई लड़ी। इस यात्रा में कई शहीद हुए, कई घायल हुए लेकिन किसी ने हार नहीं मानी।इन बहादुरों को सम्मानित करने के लिए, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में एनसीसी कलेक्टिव ने दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया। 26 जुलाई 2023 को, कैडेटों ने देशभक्ति गीत और एक स्व-रचित कविता के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद हमारे वरिष्ठ कैडेटों और डीन सर प्रो दिलीप शाह के नेतृत्व में पुष्पांजलि समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद अंतर-विंग वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई। ईगल स्क्वाड्रन का प्रतिनिधित्व एयर विंग कैडेटों द्वारा किया गया और चीता स्क्वाड्रन का प्रतिनिधित्व आर्मी विंग कैडेटों द्वारा किया गया, जिसका मूल्यांकन छात्र मामलों के डीन प्रो. दिलीप शाह और एनसीसी अधिकारी सुश्री अरित्रिका दूबे ने किया, सर्वश्रेष्ठ वक्ता, प्रथम और द्वितीय उपविजेता को चुना गया । बहस के बाद एक खुली प्रश्नोत्तरी हुई जिसमें एनसीसी कैडेटों ने दर्शकों के सामने प्रश्न पूछे गए। सही उत्तर दिए गए। प्रश्नों की संख्या के अनुसार प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को पुरस्कृत किए जाने के साथ दिन के कार्यक्रम संपन्न हुए।
28 जुलाई 2023 को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद कारगिल युद्ध के दिग्गजों के साथ इंटरैक्टिव सत्र निर्धारित किया गया था।इस अवसर पर सम्माननीय अतिथि, कारगिल युद्ध के दिग्गज कैप्टन अखिलेश सक्सेना और कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कैप्टन अखिलेश की पत्नी लेखिका, इंस्पायरिंग मंत्रा की संस्थापक और सीईओ शिखा अखिलेश सक्सेना शामिल हुईं। कमांडिंग ऑफिसर नंबर 1 बंगाल एयर स्क्वाड्रन एनसीसी, विंग कमांडर एस. सेल्वा कुमार और बीईएससी एनसीसी से जुड़ी सेना और नौसेना इकाइयों के कर्मचारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत प्रोफेसर दिलीप शाह के उद्घाटन भाषण से हुई, जिन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान सैनिकों के साहस के बारे में बात की, जिसके बाद दीप प्रज्ज्वलन किया गया। मुख्य अतिथियों को कारगिल में उनकी जीवन-घातक लड़ाई के दौरान कैप्टन अखिलेश सक्सेना के संघर्ष पर एक परिचयात्मक वीडियो के साथ पेश किया गया, जिसके बाद मुख्य अतिथियों ने स्वयं अपनी कहानियाँ साझा कीं। जैसा कि कैप्टन अखिलेश सक्सेना ने बताया कि कैसे युद्ध में उन पर हमला किया गया था, उन्होंने प्रबंधन क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपनी योजना के बाद अपनी तत्काल प्रतिक्रिया पर भी चर्चा की। हमने श्रीमती शिखा की भावनात्मक दुर्दशा भी देखी। शिखा अखिलेश सक्सेना ने घर पर अपनी लड़ाई खुद लड़ने और अपने पति के लौटने का इंतजार करने की बात कही। इस भावनात्मक सत्र के बाद डीन सर प्रो दिलीप शाह ने शिखा सक्सेना द्वारा लिखी पुस्तक 'नेशन फर्स्ट का अनावरण किया गया, इस पुस्तक में कारगिल युद्ध'99 का विस्तृत विवरण है और एक सैनिक और उसके परिवार को दूर रहते हुए युद्ध करते समय जो गर्व और दर्द का अनुभव होता है, उसका वर्णन है। युद्ध क्षेत्र, इस बात से अनभिज्ञ कि भविष्य उसका क्या इंतजार कर रहा है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत एसजीटी गैब्रिएला आर्य गुप्ता के नेतृत्व में एक उद्घाटन नृत्य के साथ हुई, जिसमें एक सैनिक की कहानी को जीवंत किया गया, यह प्रदर्शन उन लोगों को समर्पित था जो कभी घर वापस नहीं आए। कैडट प्रिंस मिश्रा और सीपीएल पी द्वारा एक देशभक्ति युगलपवित्रा ने शुरुआती प्रदर्शन के बाद दिन का माहौल तैयार किया। युद्ध के दौरान पाकिस्तान पर किए गए भारतीय सशस्त्र बलों - ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन सफीद सागर, ऑपरेशन तलवार के हमलों का विवरण देने वाली एक बहुत ही जानकारीपूर्ण वृत्तचित्र आगे प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद सीडीटी अलीश तमांग, सीपीएल पी. पवित्रा और एसजीटी संघमित्रा बनर्जी द्वारा समूह गीत के साथ एक और मधुर प्रस्तुति दी गई, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और सीडीटी सृजन पायने ने माउथ ऑर्गन बजाया, जिन्होंने अपने प्रदर्शन की विशिष्टता के लिए प्रशंसा प्राप्त की। नर्तकों ने भारत की अदम्य भावना को प्रदर्शित करते हुए एक ऊर्जावान प्रदर्शन के साथ फिर से मंच को प्रोत्साहन से भर दिया। अंत में, सीडीटी प्रिंस मिश्रा ने "दर्द और गौरव" पर एक स्व-रचित कविता के माध्यम से अपने दिल की बात कही। डीन सर प्रो शाह संबोधित किया और उन्हें पृथ्वी को बचाने के लिए पेड़ लगाने का मिशन दिया, एक पहल जिसने वास्तव में संस्थान के आदर्शों को चित्रित किया।
यह आयोजन 26 जुलाई 2023 के सम्मान समारोह के साथ समाप्त हुआ। सीडीटी/एसजीटी अदिति ए संजय को बहस के लिए सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार दिया गया, उनके बाद सीडीटी ट्विंकल जैन और सीडीटी संयम अग्रवाल क्रमशः प्रथम और द्वितीय उपविजेता रहे। एलसीपीएल आदित्य सिंह को क्विज़ प्रतियोगिता के लिए विजेता के रूप में सम्मानित किया गया, उनके बाद क्रमशः प्रथम और द्वितीय उपविजेता के रूप में सीडीटी आरव तुलस्यान और सीडीटी स्नेहा पांडे रहे। सभी विजेताओं को पदक और प्रमाण पत्र के साथ लेखिका श्रीमती शिखा अखिलेश सक्सेना द्वारा सौंपी गई नेशन फर्स्ट की हस्ताक्षरित प्रतियाँ देकर सम्मानित किया गया।
प्रत्येक सहभागी ने जोश से भरकर राष्ट्र के तिरंगे को सदैव ऊंचा रखने का संकल्प लिया। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
नव्या नवेली नंदा ने स्त्री सशक्तीकरण का आह्वान किया (रिपोर्ट)
भवानीपुर कॉलेज में नव्या नवेली नंदा द्वारा युवा स्त्री सशक्तीकरण का आह्वान - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के जुबली सभागार में आयोजित कार्यक्रम'यू ग्रो गर्ल अ युवा रोड शो' विषय पर फिल्म इंडस्ट्री के प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन की दोहित्री नव्या नवेली नंदा नवेली ने युवा वर्ग की लड़कियों और लड़कों के साथ अपनी कंपनी के उद्देश्यों और सुरक्षा पर अपनी बातें साझा की।'युवा' से जुड़े निखिल तनेजा और यश पिसा नव्या नंदा के साथ युवा पीढ़ी के सभी विद्यार्थियों के साथ इसमें शामिल हुए और बहुत सी रोज घटने वाली समस्याओं पर बातचीत की।
इस अवसर पर 'मै हूँ युवा' लघु वृत्त चित्र भी दिखाया गया जो विशेष रूप से लड़कियों को परेशान करना, उनको बस में, ट्रेन में गलत तरीके से तंग करना आदि पर था साथ ही किस प्रकार देखने और सुनने वाले लोग उन्हें बचा सकते हैं इस पर भी फिल्म द्वारा दिखाया गया। यश पिसा ने बताया कि यह 25वां रोडशो है जिसे भवानीपुर कॉलेज में किया गया है। इसके पूर्व अभी तक 150 कॉलेज में युवा स्त्री सशक्तीकरण के लिए नवेली की पहुंच रही।
नव्या नवेली ने बताया कि कंपनी बनाने का काम कोरोना काल में हुआ तब वह भी 21 वर्ष की युवती थी। इसके द्वारा हम युवाओं की वास्तविक स्टोरीज को लेते हैं उनकी समस्याओं और समाधान का प्रयास करते हैं। नव्या ने अपने अनुभवों को सुनाया और छात्र- छात्राओं के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। निखिल तनेजा ने पॉडकास्ट की भी चर्चा की जिस पर युवा वर्ग की विभिन्न कहानियां प्रसारित हो रही हैं।
असफलता जीवन में कई प्रकार से आ सकती है लेकिन हम उससे कैसे उबरें इसे सकारात्मक ढंग से सोचना चाहिए। मेंटल हैल्थ, शिक्षा आदि क्षेत्रों में यह कंपनी युवाओं के साथ जुड़ी हुई है। इस अवसर पर लॉरियर पेरिस की ओर से ओपन माइक में छात्र छात्राओं ने अपनी अपनी स्टोरी को साझा किया जिसका चुनाव कर इंस्टाग्राम पर दिया जाएगा। यह कार्यक्रम डीन अॉफिस द्वारा संपन्न हुआ। संयोजन प्रातःकालीन सत्र कॉमर्स की कोआर्डिनेटर प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिव्या उदेशी और प्रो समीक्षा खंडूरी ने किया ।डीन प्रो दिलीप शाह ने इस कार्यक्रम को संभव बनाया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी ।
निगाहें उठीं तो (उर्दू कविता)
निगाहें उठीं तो हया ने पलकों को थाम लिया
वो तो तुम थे, नहीं तो तूफ़ान- ए- मंजर संभलते न संभलता
यादों की जिल्द के बीच फड़फड़ाते पन्नों में तेरा अश्क
खींचने लगा था वीरान रेगिस्तान के नख़लिस्तानों में
अभी भी तुम्हारे पैरों के निशां मेरे आगोश में बंधे लगे
चेहरे पर मुस्कान थी आँखों के किनारे लबालब भरे थे
दूर बहती हवाओं ने आकर कानों में कुछ फुसफुसा दिया
हथेलियों की गर्मी से पिघलने लगा था वह दुर्गम पहाड़ भी
दूर से आती खारे समुद्र की बलखाती लहरें मचलती - सी
मन में उतरने लगीं।
कैसा था वह सैलाब जो एक साथ ही बहा ले गया सब कुछ
आने वाली आहट ही काफ़ी थी सब कुछ खो गया
अब सिर्फ उस वीराने में बचे हैं वे दरख्त और उसके निशां
-डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता 5.8.23
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