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Saturday, August 5, 2023

हर दिन नया विचार मीना राय

हर दिन नया काव्य संग्रह को पढ़ते हुए - - - डॉ वसुंधरा मिश्र के काव्य संग्रह 'हर दिन नया' की कविताओं को पढ़कर मेरा हृदय साहित्य के गुण और आंतरिक परतों से आंदोलित हो उठा। आपकी लेखनी ने कविता के हर एक शब्द में मोती पिरोए हैं । हर एक कविता अपने समाज में घटित होने वाली यथार्थ संवेदना को समेटे हुए है। कृत्रिमता का थोड़ा भी भाव लक्षित नहीं है। अगर आपकी तुलना सुभद्रा कुमारी चौहान से की जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। बहुत सारी विभूतियां समाज में उतनी प्रकाशित नहीं हो पाती जितना अपने अंतः स्थल में ज्ञान को समेटे हुई रहती हैं। भविष्य में ,आप हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक दैदीप्यमान सितारा बनें ,यही मेरी आपके प्रति शुभकामना है। 'हर दिन नया' कविता संग्रह में कविता 'अप्राप्य' बहुत ही अच्छी लगी। यह कविता हर इंसान के जीवन की वास्तविकता से ओत-प्रोत है। हर मनुष्य अपने जीवन में परिपूर्णता पाने के लिए अपने रिश्तों में पूर्णता प्रदान करने के लिए भरपूर कोशिश करता है, किंतु कहीं- ना - कहीं वह पूर्णता पूर्ण होते हुए भी अपूर्ण रह जाती है ।यह शीर्षक अपने आप में अर्थ समेटे हुए हैं।शुभकामनाओं सहित। --- मीना राय, एम ए, हिंदी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, वरिष्ठ हिंदी अध्यापिका, कोलकाता

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