Thursday, February 23, 2023
कॉलेज पिकनिक 23 इबिजा
भवानीपुर कॉलेज ने पांच सौ विद्यार्थियों के साथ मनाई पिकनिक - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की ओर से पांच सौ विद्यार्थियों ने डायमंड हार्बर रोड पर स्थित ईबीजा रिसोर्ट में पिकनिक मनाई। दस ट्रैवलर बसों द्वारा विद्यार्थियों के लिए व्यवस्था की गई।प्रत्येक बस में लगभग 20 शिक्षक और शिक्षिकाओं की देख रेख में विद्यार्थियों को पिकनिक स्थान पर लाया गया।
विद्यार्थियों ने खेल, गीत, संगीत अन्त्याक्षरी, साइकिलिंग,जिप लाइन, बोटिंग, डिस्कोथेक, प्रकृति आदि विविध कार्यक्रमों में भाग लिया और आनंद उठाया। उद्यान में नाश्ता, लंच और हाई टी का भरपूर लुत्फ उठाया गया।
प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, डीन प्रो दिलीप शाह, प्रो दिव्या उदेशी, प्रो चंपा श्रीनिवासन, प्रो विवेक पटवारी, प्रो नितीन चतुर्वेदी, प्रो गोविंद दीवान, डॉ वसुंधरा मिश्र,प्रो हर्षित चोखानी, प्रो उजमा खान, प्रो गार्गी, प्रो चंदन कुमार झा, एनसीसी के कैडट अभिषेक कुमार सिंह, एलटी आदित्य राज और अॉफीसर कैडट अरित्रिका दूबे और गैर शैक्षणिक दिलीप दास ने पिकनिक को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।डीन प्रो दिलीप शाह ने जिप लाइन में भाग लेकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर सभी का समूह चित्र लिया गया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि इस पिकनिक में बीए बीकॉम प्रातःकालीन, मध्याह्न, सांध्य सभी विभागों के छात्र छात्राओं ने अपना नाम दर्ज कराया।
मातृभाषा दिवस बांग्ला रिपोर्ट
मेरा गौरव मेरी आशा बांग्ला भाषा पर विश्व मातृभाषा दिवस मनाया भवानीपुर कॉलेज ने - - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के बांग्ला विभाग की ओर से विश्व मातृभाषा दिवस पर साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विभागाध्यक्ष डॉ मिली समद्दार और शिक्षक गणों द्वारा आयोजित भाषा दिवस पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का आयोजन किया गया । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में बांग्ला मातृभाषा पर अपना विशेष कार्यक्रम मनाया। कॉलेज के बांग्ला विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ मिली समाद्दार द्वारा आयोजित मातृभाषा बांग्ला .भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 20 और 21 फरवरी को "अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा" दिवस धूमधाम से मनाया। प्रथम दिन हर क्षेत्र से प्रतिभा के प्रदर्शन और कॉलेज के फैकल्टी ने अपनी भाषा पर हृदय को छू लेने वाले ज्ञानवर्धक भाषण दिए । गीत संगीत, नृत्य से लेकर नाट्यकला और नाटक आदि की प्रस्तुति दी जिसका सभी विद्यार्थियों और शिक्षक गणों ने आनंद लिया ।डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि द्वितीय दिन, संस्थान के 4ए परिसर में बीईएससी एनैक्ट की टीम अंतरजाल द्वारा एक नुक्कड़ नाटक" एकत्तरेर दिनगुली "का प्रदर्शन किया गया, जिसने हर राहगीर का ध्यान आकर्षित किया। इसके द्वारा युवा थियेटर के कलाकारों ने एलगिन रोड की सड़क पर एकत्रित भीड़ के बहुत से लोगों को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के बारे में शिक्षित किया । रवीन्द्र सदन में मातृभाषा बांग्ला का नुक्कड़ नाटक और बांग्ला बैंड ने अपनी प्रस्तुति दी।
Monday, February 20, 2023
यूनियन बजट पर चर्चा 23
केंद्रीय बजट 2023-24 पर संगोष्ठी
भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के वाणिज्य विभाग (स्नातक अऔर स्नातकोत्तर दोनों) और व्यवसाय प्रशासन विभाग (बीबीए) ने छह फरवरी, 2023 को मुख्य परिसर के कॉन्सेप्ट हॉल में "केंद्रीय बजट 2023-24" पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई । कॉलेज के बीबीए, बीकॉम और एमकॉम जैसे विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में पंजीकरण कराया। पंजीकरण दोपहर से शुरू हुआ और आधे घंटे से भी कम समय में सभागार खचाखच भर गया।
संगोष्ठी की शुरुआत छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह ने औपचारिक रूप से सभा का स्वागत करते हुए किया । उन्होंने गणमान्य व्यक्तियों, मॉडरेटर और फैकल्टी का परिचय दिया और उन्हें दीप प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद उन्होंने वक्ताओं और मॉडरेटर को अपना आसन ग्रहण करने के लिए मंच पर बिठाया । तत्पश्चात प्रो. शाह ने आयोजन की कार्यवाही मॉडरेटर डॉ. सुमन कुमार मुखर्जी, महानिदेशक, बीईएससी को सौंपी।
डॉ. मुखर्जी ने अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वक्ताओं द्वारा कवर किए जाने वाले विषयों के बारे में बताया। उन्होंने बजट 2023-24 के प्रमुख बिंदुओं को साझा किया, जिसमें भारत ने सभी विकासशील देशों की तुलना में उच्चतम विकास दर हासिल की थी। उन्होंने कहा कि बजट वास्तव में अर्थव्यवस्था को एकीकृत करता है और इसमें आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख क्षेत्रों - ग्रामीण मोर्चे और एमएसएमई क्षेत्रों को जोड़ने की दृष्टि है। आदिवासी समूहों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्गों और अन्य पिछड़े वर्गों से संबंधित मुद्दों को भी संबोधित किया और इस तरह बजट एक "भारत जोड़ो" आर्थिक योजना है। उन्होंने दोहराया कि लोकप्रिय धारणा के विपरीत, भारतीय अर्थव्यवस्था वास्तव में कई अन्य विकासशील देशों की तुलना में विश्व स्तर पर काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है, जो आईआरजीडी (ब्याज दर-विकास) पर जोर देते हुए चक्रीय राजकोषीय नीति का मुकाबला करने के लिए लचीलेपन से पुनरुत्थान और राजकोषीय समेकन की ओर बढ़ रहे हैं।उन्होंने इसे एक ऐसे दस्तावेज के रूप में संदर्भित किया जो आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के राजस्व और व्यय को रेखांकित करते हुए, सामाजिक अतिरिक्त पूंजी के माध्यम से समावेशी आर्थिक विकास और विकास की दिशा निर्धारित करता है।
डॉ अशोक के लाहिरी (अर्थशास्त्री, 15वें वित्त आयोग के पूर्व मुख्य सलाहकार सदस्य) ने बजट पर जोर देने और प्राथमिक घाटे के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने विकास और स्थिरता, राजकोषीय विवेक और ऋण की स्थिरता के बारे में भी बात की। उन्होंने यह भी समझाया कि "सभी प्राप्तियां राजस्व नहीं हैं" और ब्याज भुगतान व्यय नहीं हैं।
इसके बाद, सीए लायन ए.पी. सिंह (चार्टर्ड एकाउंटेंट और लायंस क्लब इंटरनेशनल के उपाध्यक्ष) ने "अमृत काल" पर बात की, जो अगले 25 वर्षों से लेकर 2047 तक हैउन्होंने यह बजट क्या प्रदान करेगा और भारत में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवार कल्याण के विकास के महत्व पर बात की। उन्होंने राजकोषीय घाटे और इससे हमारी अर्थव्यवस्था को होने वाले खतरों के बारे में भी बात की। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि भविष्य युवाओं और तर्कसंगत निर्णय लेने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगा।
सीए हरीश अग्रवाल (मैनेजिंग पार्टनर, ईवाई, और ईवाई इंडिया की कंसल्टिंग सर्विस लाइन के सीओओ) इस बात को लेकर आशावादी थे कि हम भारत को अगले 25 वर्षों में कहांँ होने की उम्मीद कर सकते हैं। उन्होंने विदेशी निवेश की पेचीदगियों और संशोधित व्यक्तिगत आयकर व्यवस्था के तहत ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने महिलाओं की भागीदारी दर बढ़ाने की आवश्यकता और भारतीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की बात की, न कि केवल घरेलू मुद्दों पर ध्यान देने की।
इसके बाद, सीए दिनेश अग्रवाल, (पार्टनर ईवाई, इंडिया) ने देश में प्रत्यक्ष करों के प्रभाव और उपायों के युक्तिकरण के बारे में संक्षेप में बात की। उन्होंने पुरानी और नई व्यक्तिगत आयकर व्यवस्था के बीच के अंतर और इसके पीछे के तर्क को समझाया।
सीए अभिषेक जायसवाल, (पार्टनर ईवाई, इंडिया) ने अप्रत्यक्ष करों की अवधारणाओं पर बात की। उन्होंने अप्रत्यक्ष कर, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क में योगदान के रूप में जीएसटी के महत्व का उल्लेख किया जो अभी तक प्रचलित हैं। यह समय की बात है जब सभी अप्रत्यक्ष करों को एक ही मद में एकीकृत किया जाता है।
सीए अरुण अग्रवाल (चार्टर्ड एकाउंटेंट और पार्टनर, के एन जैन) ने बजट के संकेतों और जोर पर बात की। सर्विस टैक्स के विशेषज्ञ होने के नाते उन्होंने मौजूदा बजट में इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।
सभी पैनलिस्टों द्वारा अपनी प्रस्तुतियाँ देने के बाद, मॉडरेटर ने मनरेगा के खर्च में कमी, ग्रामीण विकास महत्वपूर्ण होने पर कृषि बिलों की प्रासंगिकता और स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर उनसे पूछताछ की। इसके बाद, दर्शकों से कुछ प्रश्न आमंत्रित किए गए और छात्र छात्राओं और शिक्षकों ने कई प्रासंगिक प्रश्न पूछे और वक्ताओं ने बड़ी ही दिलचस्पी और उत्साह के साथ सवालों के जवाब दिए।
सत्र के अंतिम भाग के दौरान, मॉडरेटर ने कुछ रोचक जानकारियों के माध्यम से कार्यवाही को संक्षेप में प्रस्तुत किया। तत्पश्चात, वाणिज्य और प्रबंधन दोनों विभागों के नामित प्रमुखों द्वारा पैनलिस्टों का अभिनंदन किया गया।
बीईएससी के प्रभारी शिक्षक डॉ. सुभब्रत गांगुली द्वारा दिए गए धन्यवाद प्रस्ताव के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। उन्होंने पैनल चर्चा के सफल संचालन के लिए वाणिज्य विभाग (यूजी और पीजी) और प्रबंधन को बधाई दी। डॉ. त्रिदीब सेनगुप्ता और प्रो सस्पो चक्रवर्ती कार्यक्रम के क्रमशः संयोजक और संयुक्त संयोजक रहे । उन्होंने कार्यक्रम समन्वयकों सुश्री परिधि अग्रवाल और सुश्री अरुंधति मजुमदार को उनकी नेटवर्किंग और कार्यक्रम के सफलतापूर्वक आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।
डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि वाणिज्य और प्रबंधन दोनों विभागों के संकाय सदस्यों ने इस आयोजन को यादगार बनाने के लिए मिलकर काम किया। छात्र स्वयंसेवी टीम ने भी ऑडिटोरियम को क्षमता से भरने और अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने में मदद की।
160 एनसीसी कैडट लड़कियों ने मनाया राष्ट्रीय महिला दिवस 23
160 एनसीसी महिला कैडटो ने मनाया राष्ट्रीय महिला दिवस
भारत की कोकिला सरोजनी नायडू की जयंती के उपलक्ष्य में 2 बंगाल गर्ल्स बीएन एनसीसी, एनसीसी जीपी मुख्यालय कोल 'बी' द्वारा आयोजि2 बंगाल गर्ल्स बीएन एनसीसी, न्यू अलीपुर और एनसीसी जीपी मुख्यालय कोल 'बी' की विभिन्न इकाइयों के कैडेटों ने आज 13 फरवरी को भारत की कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती मनाने के लिए राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया। । सरोजनी नायडू महिला सशक्तिकरण के लिए खड़ी थीं और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। वह देशभक्ति और अन्य साहित्यिक कार्यों पर अपनी कविताओं के लिए लोकप्रिय हैं। इस वर्ष के समारोह 'महिला सशक्तिकरण' विषय के तहत आयोजित किए गए थे।
एनसीसी ग्रुप मुख्यालय कोलकाता 'बी' ग्रुप सीडीआर ब्रिगेडियर राजा चक्रवर्ती, कर्नल सुनीत सिंह, एससी, कमांडिंग ऑफिसर, 2 बंगाल गर्ल्स बटालियन एनसीसी, एडमिन ऑफिसर मेजर रश्मी रॉय चौधरी और यूनिट के कर्मचारियों की ओर से इस अवसर पर कैडेटों को संगठित और प्रेरित किया। कार्यक्रम का आयोजन एनसीसी क्लब हाउस मैदान में किया गया। इसका उद्देश्य जनता को समाज में महिलाओं के महत्व को शिक्षित करना था।समारोह में 'महिला सशक्तिकरण' विषय पर पोस्टर बनाने की प्रतियोगिता, महिलाओं की समस्याओं से संबंधित विषयों पर नुक्कड़ नाटक और सम्मानित अतिथि लेफ्टिनेंट कर्नल स्निग्धा शर्मा, प्रशासनिक अधिकारी 31 बंगाल बटालियन एनसीसी, लगभग उपस्थित थे। 160 कैडेट और कर्मचारी। कार्यक्रम का समापन पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता के परिणाम की घोषणा और योग्य विजेताओं को पुरस्कार वितरण के साथ हुआ। यह जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
स्पीक फॉर इंडिया फेडरल बैंक द्वारा आयोजित वादविवाद 23
भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने फेडरल बैंक द्वारा आयोजित स्पीक फॉर इंडिया ने भाग लिया - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने स्पीक फॉर इंडिया वादविवाद प्रतियोगिता में भाग लिया। कॉलेज के डायरेक्टर जनरल डॉ सुमन मुखर्जी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया । प्रत्येक वर्ष फेडरल बैंक द्वारा आयोजित स्पीक फॉर इंडिया वाद विवाद प्रतियोगिता में देश भर के विद्यार्थी भाग लेते हैं। डॉ सुमन मुखर्जी ने बताया कि यह अमीरी गरीबी जाति धर्म से परे युवाओं का ऐसा मंच।है जो विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति के साथ साथ विचार विमर्श को स्थान देता है। पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध एक्टर और डायरेक्टर अरिंदम सील ने कहा कि यह सही है कि आज के युग में मोबाइल की आवश्यकता है लेकिन ऊर्जा और सृजनात्मकता के लिए युवाओं को मोबाइल से दूर रहकर अपनी शक्ति को केंदित करना होगा ।
कार्यक्रम का आरंभ फेडरल बैंक के प्रमुख संतोष कुमार वीसी ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। बाद में जोनल प्रमुख साबू आर एस ने अध्यक्षीय वक्तव्य में वाद विवाद प्रतियोगिता के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताओं से युवाओं में आत्मविश्वास, ज्ञान और विचारों का मंथन होता है। वहीं ऐई समय बांग्ला समाचार पत्र के प्रमुख संपादक हीरक बंदोपाध्याय ने भी अपने बहुमूल्य विचार रखे। इस कार्यक्रम के पार्टनर टाइम्स ऑफ इंडिया रहा। प्रणय किशोर नायक की गरिमामयी उपस्थिति रही। कई कॉलेज के विद्यार्थियों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया। भवानीपुर कॉलेज की छात्रा नम्रता चौधरी का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा। इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि प्रतिभागियों को विषय वहीं पर दिए गए जिसमें पक्ष और विपक्ष में अपने विचार साझा किए। पुरस्कार और सर्टिफिकेट देकर पुरस्कृत युवा प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
फूलों की खुशबू में खोजा था प्रेम
फूलों की खुशबू में खोजा था प्रेम
इत्र की खूशबू बिखरती गई
महकता प्रेम हवा के रुख से फुदकता रहा
धरती पर लोग प्रेम ढूंँढते रहे
आज भी प्रेम गुफाओं में गुप्त है
@वसुंधरा मिश्र, 14.2.23
कामदेव का प्रतीक अशोक फूल - विश्वमित्र दैनिक कोलकाता में प्रकाशित 18.2.23
कामदेव का प्रतीक अशोक का फूल रवीन्द्र संगीत के परिप्रेक्ष्य में - - डॉ वसुंधरा मिश्र, भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज, कोलकाता
रवीन्द्र संगीत में प्रयुक्त उद्भिद और फूल के अंतर्गत आइए जानते हैं कि रवीन्द्र के गीतों में ऐसा क्या है कि वह विश्व प्रसिद्ध है।
कविवर रवीन्द्र नाथ टैगोर के गीतों में मनुष्य के सुख- दुःख, व्यथा- वेदना, आशा - निराशा, आनंद- विषाद, अनुभूति- उपलब्धि आदि नाना प्रकार के भाव मिलते हैं। रवीन्द्र संगीत में भाषा, भाव, स्वर और छंद का मनोरम सम्मिलन कला, रूप और रस की आनंद धारा है। । कवि गुरु के गीत मनुष्य को एक अतिन्द्रिय उपलब्धि की ओर ले जाता है। उनकी यह असाधारण प्रतिभा केवल बंगाल के संगीत को ही एक नया युग प्रदान नहीं करती है अपितु इन गीतों के शब्द, स्वर माधुर्य भाव गांभीर्य और भाषा का प्रयोग समग्र भारतीय भाषा भाषी लोगों के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। आइए अशोक या बंजुल फूल के विषय में जानते हैं - - -
कामदेव के पंचशरों में से एक अशोक का फूल है। वसंत के आगमन के साथ ही इसमें नए किसलयों का आगमन होता है। ताम्र वर्णीय होने के कारण इसे ताम्रवर्णी भी कहते हैं। वसंतागमन के साथ ही फूल खिलते हैं और ग्रीष्मकाल तक रहते हैं। प्रारम्भिक अवस्था में संतरी आभा से युक्त लाल या पीले रंग के अशोक के फूल धीरे-धीरे सिंदूरी या गाढ़े रक्त वर्ण में परिवर्तित हो जाते हैं। अशोक के फूलों के रंग में एक उन्माद एवं उच्छलता भरे भाव होते हैं जिसका वर्णन अनेक गीतों में हुआ है। फूलों में स्थित पुंककेशरों में पतले धागों की तरह कई पुंदंड होते हैं। उनके शीर्ष भाग में परागधानी या पराग रेणु का कक्ष होता है। इन केशरों का जड़ भाग नारंगी और शीर्ष भाग लाल रंग का होता है। फूलों के रंग में परिवर्तन का यही छंद चलता रहता है। परागधानी से लाल परागरेणु खिलकर धरती पर फैल जाते हैं।रवीन्द्र नाथ ने प्रकृति पर्याय के एक गीत 230 में इसका वर्णन आया है। मंजरीबद्ध यह फूल प्रचुर परिमाण में प्रस्फुटित होते हैं, साथ ही पंक्तियाँ भी असंख्य मात्रा में रहती हैं। कई बार सुंदर अशोक मंजूरियाँ खिलकर वलय शोभित भुजाओं के समान शाखाओं को घेर लेती हैं। जिसका उल्लेख कवि ने इस पंक्ति में किया है - - 'अशोकेर शाखा घेरि वल्लरी बंधन' अर्थात् अशोक की शाखाओं को घेरकर प्रस्फुटित मंजरियाँ लताओं सी उसे अपने बंधन में बाँधे हुए हैं। यह चित्रांगदा के षष्ठ दृश्य में आया है। सूर्य के प्रकाश में फूलों का रंग अधिक स्पष्ट हो जाता है और दिन के ढलने के साथ ही पत्तियों की छाया में फूलों की स्पष्टता विलीन होती चली जाती है। तभी तो कवि अशोक के फूल को लक्ष्य कर उसे 'आलोकपियासी '(गीत प्रेम 215) अर्थात् आलोक पिपासु कहता है। इसकी शाखाओं की प्रकृति हल्की, पत्तियाँ बड़ी बड़ी शाखाएँ फूल पत्तियाँ हवा के स्पर्शमात्र से ही आंदोलित हो उठती हैं। क्षणभंगुर इसके फूल दिन ढलने के पश्चात परागरेणु के साथ पेड़ से झड़़कर धरती पर बिखर जाते हैं। अशोक के फूलों से बने सुंदर आभूषण युवतियों के सिर , कानों एवं गले में सुशोभित होते हैं। गीत - प्रेम 224 में आया है। चंडालिका में फूल बेचने वाली मालिन अशोक के फूलों के अलंकार बेचती हुई दिखाई देती हैं।
प्रकृति जिस प्रकार वसंत में पत्र पुष्प गंध से परिपूर्ण अशोक वृक्ष पर बार बार गर्वित होती है, उसी प्रकार मानव जीवन के वसंत से भी अशोक वृक्ष का युगों से अटूट संबंध जुड़ा हुआ है। अशोक वृक्ष प्रेमोद्दीपक और कामोद्दीपक भी है। इसकी मृदु गंध के मनमोहक रूप एवं मादक स्पर्श के असंख्य वर्णन रवींद्र संगीत में मिलते हैं।
रावण ने सीता को अशोक वाटिका में ही क्यों रखा? राजनर्तकी श्यामा वज्रसेन के प्रेम को प्राप्त करने के लिए राजमहल का त्याग करती है। उस समय कोटाल (कोतवाल) चिल्लाते हुए कहता है - - 'वन हते केन गेल अशोक मंजरी फाल्गुनेर अंगन शून्य करि' राजनर्तकी श्यामा अशोक फूल के ही समान एक रूपायित कामना है जो राजमहल रूपी उद्यान से चली गई है। उसका चले जाना फागुन में अशोक मंजरी का वन से लुप्त होने का अर्थ है कि वातावरण में शून्यता छा गई है। रवीन्द्र संगीत में अशोक का बहुत प्रयोग हुआ है - - -रांगा हासि राशि राशि अशोके पलाशे, विगत वसंतेर अशोक रक्तरागे, आन माधवी मालती अशोकमंजरी आदि बहुत से गीतों में रवीन्द्रनाथ ने अशोक का प्रयोग किया है। रवीन्द्र संगीत में प्रयुक्त उद्भिद और फूल, बांग्ला मूल लेखक डॉ देबी प्रसाद मुखोपाध्याय, बाउलमन प्रकाशन, कोलकाता, हिंदी अनुवाद, डॉ वसुंधरा मिश्र द्वारा संपादित।
Sunday, February 12, 2023
वक्त (कविता) क्षणिकाएं
वफ़ा
वफ़ा हम करते नहीं
बेवफ़ा की तरफदारी करते हैं
मन की तासीर न जाने कैसी होगी
मिजाज़े - ए - इश्क़ का मतलब ही नहीं जानते
ख़्वाब
ख़्वाब बड़े ही खूबसूरत होते हैं
पर वे सामने नहीं होते
कशिश
कशिश थी तुम्हें पाने की
लफ्ज़ खुलते ही ना थे
आंखें झुक जाती थीं
मानो तुम सिर्फ मेरी इबादत की मूरत हो
आँखें
ये अंधेरे मुझे घेर लेते थे
तुमने छुपाए यह रिश्ते थे
मेरी आँखों के झरोखों में
इन बंद पलकों में भी
जब खोज लिया था मैंने
वक्त
रेत की तरह फिसलता रहा वक्त
और मैं आईना देखने में ही रही व्यस्त
ऐ मन! निकल कर बाहर भी देख ले
कुछ कर जाने की तमन्ना भी रख
शाम
झील सी गहरी शामों में
तेरी यादों की चादर ओढ़ लेती हूँ
करवटें लेती ये रातें
दिन में भी मदहोश कर देती हैं
खुशबू
पहचान लेती हूँ तेरे जिस्म की खुशबू
क्या इसी भूल की सजा थी मेरी
दूर हो गए किसी और की चाहत में
दीवाने हो गए किसी और की खुशबू के
ज़िंदगी
माफ नहीं करती ये ज़िंदगी
ग़र कद्र न करते तुम वक्त की
मलाल रह जाएगा
खुशनसीब बनने का
जोश
एक बड़े मुक़ाम पर पहुंँचना
किसी खरीददार की नहीं ताकत
वह तो है जोश - ए-दरिया
समंदर में डूबने तक का
यकीन
यूंँ तो बहुत से मौसम आए और चले गए
देखा जो आंँखों की गहराई में
हाथों को छू हाथों से
आ गया य़की कि तुम मेरे वही मीत हो
याद
याद आती थी वह मोहल्ले की गलियांँ
जहांँ हर छत छत से जुड़ी थी
अब बस उन यादों के रास्ते भी
खो गए से लगते हैं
@वसुंधरा मिश्र 5.1.2023
लिट्टी चोखा (कविता)
लिट्टी चोखा का साथ बरसों-बरस का है
चावल दाल रोटी सब्जी का साथ भी
आलू पालक बैंगन सुआ का मेल
गुड़ बाजरे की रोटी
मकई की रोटी सरसों का साग
बाजरे की खिचड़ी राबड़ी
दाल मीठा दलिया सूखे आलू
दाल बाटी चूरमा
लहसून काचरी की चटनी
आंवले की चटनी
छोंकी मिर्ची
नींबू की बूंदें काले नमक में अदरख
फिर गाजर का हलवा और मेथी गोंद के लड्डू
और फिर मेथी मूली गोफी पनीर पराठें
मटर निमोना
चटनी अचार
पापड़ के साथ
ये सब अब रोज नहीं बनते
पहले मन से खाते खिलाते थे
अब तो मैगी चाट मसाला
चट पट बन जाते
बच्चे भी खूब मजे से खाते
कैसे बदलें ज़ायका?
विदेशी से फिर देसी का
रेस्तरां से फिर घर की रसोई का
अपने-अपने स्वाद हैं
बनाने के अपने मजे हैं
लिट्टी बाटी चोखा
जो बना कर थक जाए
खानेवाला खा खा कर थक जाए
@वसुंधरा मिश्र, 7.1.23
विवेकानंद जयंती पर बेलूर मठ का अवलोकन
भवानीपुर कॉलेज के शिक्षकों ने मत्स्य कन्या वेसल द्वारा किया विवेकानंद जयंती पर बेलूर मठ का अवलोकन - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के शिक्षक और शिक्षिकाओं ने विवेकानंद जयंती पर बेलूर मठ का अवलोकन किया। मिलेनियम पार्क से एम वी मत्स्य कन्या वेसल द्वारा भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के प्रातःकालीन सत्र के शिक्षक गणों ने जल मार्ग द्वारा बेलूर मठ तक की यात्रा की। विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। हर साल भारत सरकार की ओर से सन् 1984 से ही राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। कॉलेज ने भी युवा दिवस मनाया जिसमें विद्यार्थियों को योग अभ्यास करवाया गया।
बेलूर मठ में रामकृष्ण मिशन द्वारा आयोजित विवेकानंद जयंती पर स्थानीय स्कूल की छात्राओं द्वारा कई कार्यक्रमों को देखने तथा स्वामी विवेकानंद के मार्ग का अनुशरण करने वाले स्वामी जी के चरित्र निर्माण के निमित्त वक्तव्य सुनने के अवसर मिले ।स्वामी विवेकानंद एक सच्चे राष्ट्रभक्त थे।उनका देशप्रेम किसी से छिपा नहीं है। वह लोगों की मदद करने से कभी भी पीछे नहीं हटते थे, बल्कि लोगों की सेवा करने को वह ईश्वर की पूजा करने के बराबर मानते थे।स्वामी विवेकानंद आज भी करोड़ों युवाओं को प्रेरणा देते हैं।
डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि हुगली नदी के दोनों तटों के मध्य से गुजरते हुए लगभग 36 शिक्षकों ने क्रूज़ पर सुबह का नाश्ता किया और गेम खेले। मत्स्य कन्या क्रूज़ ने सभी को आकर्षित किया। हावड़ा स्टेशन, नया शिव मंदिर, भूतनाथ मंदिर आदि विभिन्न स्थानों को दूर से देखते हुए हावड़ा ब्रिज के नीचे से गुजरते हुए सभी ने जल मार्ग का आनंद लिया। इस यात्रा का संयोजन किया डीन प्रो दिलीप शाह, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिव्या उदेशी, समीक्षा खंडूरी ने । शिक्षक और शिक्षिकाओं ने विवेकानंद जयंती पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
टिप्पणी श्रद्धेय राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी जी के निधन पर
लाट साहब की कोठी में बहाई प्रेम रस की काव्य गंगा- बंगाल के भूतपूर्व राज्यपाल श्रद्धेय केशरी नाथ त्रिपाठी जी राजनीति और समाज के लिए एक अभिभावक और अच्छे नेतृत्व से युक्त राजनीतिज्ञ सेतु थे। बनारस उनका ससुराल था। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के दीक्षांत समारोह के लिए मैं अपने कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह और मैनेजमेंट के पदाधिकारियों के साथ जब उन्हें आमंत्रित करने गई तो लगा ही नहीं कि वे इतने सहज और सहृदय होगें। हिंदी भाषी होने के साथ-साथ मेरा पीहर बनारस है। फिर तो बहुत सी बातें होने लगी। त्रिपाठी जी के साथ बनारस के विश्वेश्वर गंज में बनने वाली देसी घी की कचौडी सब्जी और वहाँ की संस्कृति पर ढेर सारी बातें हुईं। इलाहाबाद और बनारस की विभिन्न जानकारियों का आदान-प्रदान हुआ। आदरणीय त्रिपाठी जी ने दीक्षांत समारोह में अपना वक्तव्य दिया जो मैंने भवानीपुर कॉलेज के विषय में लिख कर दी थी जिसकी प्रशंसा भी की। उसके पश्चात कलामंदिर के मंच से संचालन करते हुए ही मैंने उनसे आग्रह किया कि वे अपने कविता संग्रह "संचयिता" से कविता भी सुनाएँ जो उनके प्रोटोकॉल में नहीं था लेकिन उन्होंने स्वीकृति दी और कविता सुनाई। एक साथ साहित्यकार, विचारक, कवि और राजनीतिज्ञ का दायित्व कुशलतापूर्वक निभाया और सबसे बड़ी बात बिना किसी दाग के। सभी के लोकप्रिय नेता और राष्ट्र प्रेम में समर्पित रहे। सामंजस्य और सद्भावना से उन्होंने अपने जीवन को सफल बनाया जो अनुकरणीय है। आपका यह लेख आदरणीय त्रिपाठी जी के लिए सच्ची श्रद्धांजलि है। शत शत नमन। 🙏 🙏 🙏 डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता
एन एस एस की कोऑर्डिनेटर प्रो गार्गी द्वारा आश्रम में सहयोग
आशानयन डॉनबास्को के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन - - भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की एनएसएस इकाई ने छात्र सप्ताह 2023 के अंतर्गत आशा नयन, डॉन बॉस्को के बच्चों के लिए एन एस एस की कोऑर्डिनेटर प्रो गार्गी ने एक मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया। आशा नयन कोलकाता में सड़क पर रहने वाले बच्चों के उत्थान के लिए समर्पित संस्था है । लिंग, जाति और धर्म से परे आशानयन संस्था स्ट्रीट चिल्ड्रेन को शिक्षा या व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करती है ताकि वे एक सार्थक जीवन जी सकें और अपने भविष्य का निर्माण कर सकें।
प्राथमिक उपचार केंद्र के डॉ. अनूप संतरा ने आशा नयन के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। शिविर का उद्देश्य आहार, व्यायाम और वजन नियंत्रण के संबंध में जानकारी प्रदान करना था। बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े जुटाए गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि लोगों को सही समय पर स्वास्थ्य सेवा मिलना और एक छोटी सी स्वास्थ्य समस्या गंभीर होने से पहले ही डॉक्टर को दिखाना है । बच्चों को स्वस्थ्य आदतों की जानकारी दी गई। डॉक्टर द्वारा छात्रों की मनोवैज्ञानिक स्थिति देखी गई है। दंत स्वच्छता पर भी ध्यान दिया गया और उचित ब्रशिंग तकनीकों की सलाह दी गई और गंभीर मामलों में दंत चिकित्सक से परामर्श करने के लिए कहा गया। इन छात्रों के बीच एनीमिया खून से की कमी सबसे प्रमुख समस्या थी जिसके लिए उचित आहार की सलाह दी गई और गंभीर मामलों में आयरन सप्लीमेंट की भी सलाह दी गई ।
डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि भवानीपुर कॉलेज की एन एस एस की शाखा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक स्तर पर बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। इस प्रकार के सामाजिक कार्यों के लिए भवानीपुर कॉलेज प्रशासन, प्रो. दिलीप शाह, और प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी का प्रमुख रूप से सहयोग रहा। इस परियोजना को सुचारू रूप से चलाने में उनकी अटूट सहायता के लिए एन एस एस की कोऑर्डिनेटर प्रो गार्गी ने आभार व्यक्त किया ।
अलका सिंह, हर्षित मोदी, अंशु अग्रवाल, शश्रीक सेन, श्याम सराफ, श्रुतिनंदा बोस जैसे स्वयंसेवकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। वास्तव में ऐसे लोग ही दुनिया को बदलते हैं। थॉमस कार्लाइल ने कहा है, “जिसके पास स्वास्थ्य है उसके पास आशा है; और जिसके पास आशा है, उसके पास सब कुछ है।”
स्वास्थ्य जांच से बच्चों में आशावाद, आत्म-नियंत्रण, आत्मविश्वास जैसी मनोवैज्ञानिक विशेषताओं से स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है और जीवन भर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।इस अवसर पर भाग लेने वाले छात्रों की संख्या पांच , शिक्षकों की संख्या एक रही। आशानयन चौंसठ के , लिंटन सेंट, बेनियापुकुर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल में स्थित है।
एसोचैम द्वारा उत्कृष्ट शिक्षा और कौशल उद्यम में पुरस्कृत किया गया प्रो दिलीप शाह को
एसोचैम द्वारा प्रो दिलीप शाह को द एडू मीट एंड एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड्स 23 दिया गया - - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह को द एडू मीट एंड एडूकेशन एक्सीलेंस अवार्ड्स 23 प्रदान किया गया जो कॉलेज के लिए गौरव की बात है। 2023एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने अट्ठारह जनवरी को कोलकाता के होटल हिंदुस्तान इंटरनेशनल के फीनिक्स हॉल में द एडू मीट एंड एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड्स 2023 के अपने छठवें संस्करण का आयोजन किया। यह कार्यक्रम औपचारिक रूप से सुबह साढ़े दस बजे से आरंभ हुआ जिसमें मुख्य अतिथि, डॉ. राजकुमार रंजन सिंह, माननीय शिक्षा और विदेश राज्य मंत्री, भारत सरकार के वक्तव्य द्वारा हुआ , जिन्होंने अपने विचारोत्तेजक भाषण में गोद लेने की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला। शिक्षा में प्रौद्योगिकी पर भी विचार व्यक्त किया।
एडू मीट की शुरुआत माननीय मंत्री द्वारा की गई, जिन्होंने मंच पर सभी गणमान्य व्यक्तियों की साझा उपस्थिति में दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। स्वागत भाषण के बाद उद्घाटन समारोह में भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह ने अपने संबोधन में कॉलेज का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें उन तरीकों पर प्रकाश डाला गया, जिसमें हम (भवानीपुर कॉलेज) उद्योग शिक्षा लिंकेज के साथ आगे बढ़े हैं, जिससे उच्च शिक्षा अधिक प्रासंगिक है और इस प्रकार वर्तमान समय में अधिक प्रभावी है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.भारत सरकार के राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच के अध्यक्ष अनिल सहस्रबुद्धे ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में पहल करने के लिए सरकार द्वारा किए गए गंभीर प्रयासों के बारे में बात की। अपने संबोधन के बाद अतिथि ने एसोचैम नॉलेज रिपोर्ट का विमोचन किया, जो "आगे का रास्ता - शिक्षा क्षेत्र की बदलती गतिशीलता" की बात करती है। इसके बाद मुख्य अतिथि डाॅ राजकुमार रंजन सिंह ने जहांँ द भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज, जिसका प्रतिनिधित्व प्रो दिलीप शाह, डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स द्वारा किया जा रहा था, को 'बेस्ट इंस्टीट्यूट फॉर प्रमोशन इंडस्ट्री एकेडेमिया लिंकेज' की ट्रॉफी से सम्मानित किया गया।इस कार्यक्रम में गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया और 3 तकनीकी सत्रों में भाग लिया, जिसमें प्लेनरी के तहत प्रो शाह ने 'भारत में उच्च शिक्षा प्रणाली: वैश्विक प्रतिस्पर्धा की ओर बढ़ते हुए, विश्वविद्यालयों में प्रौद्योगिकी नवाचार हब, अकादमिक भागीदारी' पर सत्र का संचालन किया, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के वक्ताओं की मेजबानी देखी गई, जिनमें प्रो. बिस्वजीत घोष, वीसी, द नियोटिया विश्वविद्यालय के डॉ दीपंकर भट्टाचार्य, प्रो-वाइस चांसलर (रिसर्च एंड इनोवेशन), आडमस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर (डॉ) सत्यजीत चक्रवर्ती, चांसलर, इंजीनियरिंग और प्रबंधन विश्वविद्यालय और श्री रणबीर रे, ग्रुप असिस्टेंट निदेशक, एनआईपीएस हॉस्पिटैलिटी ग्रुप की उपस्थिति रही । डॉ वसुंधरा मिश्र ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए तीसरे पूर्ण सत्र के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ। एसोचैम पुरस्कार समारोह प्रो. (डॉ.) सहस्रबुद्धे की उपस्थिति में हुआ जिन्होंने एडू मीट शहर के विभिन्न शिक्षाविदों की उपस्थिति में एसोचैम द्वारा किया। कार्यक्रम का समापन औपचारिक धन्यवाद के साथ संपन्न हुआ।
प्रसिद्ध कवि गीतकार जावेद अख्तर को सुनना
प्रसिद्ध कवि गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर के विचारों से साझा हुए भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थी - - - -
कोलकाता लिटरेरी मीट 23 का आयोजन बिरला ललित अकादमी में हुआ जहां प्रसिद्ध कवि गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर और नसरीन मुन्नी कबीर ने अपने वक्तव्य रखे। इस कार्यक्रम का संचालन किया संगीता दत्त ने । 23.1.23 की शाम, छात्रों और शिक्षकों ने जावेद अख्तर के कविता और चर्चा के एक उदार सत्र में भाग लिया।
प्रसिद्ध कवि/गीतकार/पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने शबाना आजमी के साथ बिरला ललित कला अकादमी के लॉन में अपने ज्ञान, हास्य और जादुई शब्दों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।डॉ वसुंधरा मिश्र ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि जावेद जी और शबाना जी दोनों को भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज लोगो के साथ मोमेंटो भेंट किया गया।
बुक रिडिंग सेशन के छात्रों ने बड़े उत्साह के साथ बातचीत की और सेलिब्रिटी लेखक/कवि से लगभग 4-5 प्रश्न पूछे जिनका उत्तर जावेद जी ने दिया।
प्रोफेसर चंपा श्रीनिवासन, डॉ. वसुंधरा मिश्र के सहयोग से इस कार्यक्रम की पहल की गई । प्रो दिलीप शाह के मार्गदर्शन में डॉ वसुंधरा मिश्र और हर्षित चोखानी और सोलह विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
भवानीपुर कॉलेज ने गणतंत्र दिवस 23
भवानीपुर कॉलेज ने सौ स्वतंत्रता सेनानियों को दी सलामी - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने सरस्वती पूजा के साथ साथ गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व उल्लास और उमंग के साथ मनाया। कॉलेज के अध्यक्ष रजनीकांत दानी ने इस अवसर पर अपनी शुभकामनाएं दीं।आजादी के 74वें अमृत महोत्सव पर सौ स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया गया। कॉलेज मैनेजमेंट के पदाधिकारियों में प्रदीप सेठ, जितेंद्र भाई शाह, योगेश भाई दोशी, पंकज भाई शाह, उमेश भाई ठक्कर, जोगेश भाई शाह, मिथेश भाई मेहता, भवानीपुर डिजाइन अकादमी की रेणुका भट्ट और भवानीपुर गुजराती स्कूल के हेडमास्टर ब्रजभूषण सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। झंडे को फहराया अध्यक्ष रजनीकांत दानी ने और सभी विद्यार्थियों और शिक्षक गणों ने राष्ट्रीय गीत को एक साथ गाया। इस अवसर पर भवानीपुर स्कूल और कॉलेज की एनसीसी कैडेटों ने मार्चपास्ट करते हुए झंडे को सलामी दी। बाद में लोकतांत्रिक भारत देश के संविधान की प्रस्तावना को पढ़ा कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने जिसको सभी ने एकसाथ दोहराया।
सभी विद्यार्थियों और शिक्षक गणों ने सरस्वती पूजा और आरती की। इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के उन्तिस शिक्षक शिक्षिकाओं को यूजीसी द्वारा स्वीकृत जर्नल में प्रकाशित आलेखों, पुस्तकों और पीएचडी पर सरस्वती सम्मान 2023 प्रदान किया गया। प्रत्येक वर्ष सरस्वती पूजा पर यह सम्मान दिया जाता है जिसमें उत्तरीय, उपहार और धनराशि दी जाती है।
डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि एनसीसी केडट सेरेमनी के अंतर्गत महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने वाले कैडेटों को आर्मी के अतिथि प्रमुख ने सम्मानित किया और प्रो दिलीप शाह को कैप से नवाजा।
वर दे वीणावादिनी पर कॉलेज के फ्लेम कलेक्टिव ने नृत्य प्रस्तुति दी ।भवानीपुर स्कूल के आईसीएसई और आईसीएस के विद्यार्थियों ने देश गीतों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कॉलेज की ओर से सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा के उपहार छात्रा अंजली कृपलानी और छात्र समर्थ कुमार को दी गई वहीं हेडमास्टर ब्रजभूषण सिंह और शिक्षिका अरविंदर कौर को दिया गया। निर्णायक मंडल में रेणुका भट्ट और डॉ वसुंधरा मिश्र रहे। इस अवसर पर गैर शैक्षणिक कर्मचारियों ने सरस्वती पूजा का प्रसाद फल और लड्डू दिए गए और महाप्रसाद में शिक्षकों को खिचड़ी पूडी सब्जी बैंगुनी चटनी पापड़ और गुलाब जामुन दिए गए वहीं सभी विद्यार्थियों को सैंडविच ढोकले चिप्स और मीठे के डिब्बे दिए गए। अंत में, सभी विद्यार्थियों ने नृत्य करते हुए कॉलेज की टर्फ पर एक साथ डीजे के साथ संगीत गीत का आनंद लिया। कार्यक्रम का संचालन किया समीक्षा खंडूरी, तुषिता चुगानी ने और संयोजन किया डीन प्रो दिलीप शाह ने ।
टिप्पणी रविवार चिंतन
रविवारीय चिंतन
मारवाड़ी सम्मेलन का चुनाव - अश्वमेध के काले घोड़े को कौन रोकेगा? संपादकीय समसामयिक विषय पर है जो मारवाड़ी समाज की संस्कृति और संस्कारों को अक्षुण रखने का कार्य करती आ रही है। 88 वर्ष पूर्व स्थापित यह संस्था सम्मेलन निश्चित ही प्राचीन है।समय के बड़े अंतरालों को पार करते हुए आज इक्कीसवीं सदी में है। डेढ़ सौ साल पहले राजस्थान की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण और आजीविका के लिए मारवाड़ी राजस्थान से कोलकाता आए थे और अपनी संस्कृति को भी साथ लाए। आज प्रवासी राजस्थानी यहाँ की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है जिसका पश्चिम बंगाल के औद्योगिक विकास में महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। इस दृष्टि से मारवाड़ी सम्मेलन का चुनाव महत्वपूर्ण है। व्यक्ति जो चयनित होते हैं उनकी जिम्मेदारी अपनी जाति, धर्म और कर्म के प्रति बढ़ जाती है। आपका लेख विचारणीय है। वर्तमान परिस्थितियों में बहुत बदलाव आया है। नई सोच और विचार विमर्श होना चाहिए। जातीय क्षेत्रों के कार्य भविष्य के आधार होते हैं।
आशा है कि और भी विकास के कार्य किए जाएंगे।
शुभकामनायें 🙏🙏डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता
भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता में महिला सम्मान 23
भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता शाखा ने किया महिला सम्मान - -
भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता शाखा ने समाज के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया। भारतीय भाषा परिषद कोलकाता के सभागार में होने वाले महिला सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। विशिष्ट अतिथि डॉ वसुंधरा मिश्र ने अपने वक्तव्य में कहा कि किसी भी संस्था का कार्य उस संस्था के सदस्यों या सदस्याओं की एकता पर निर्भर करती है। वर्तमान में, महिलाएंँ घर और बाहर दोनों को बखूबी निभा रही हैं। डॉ मिश्र ने इस अवसर पर अपनी कविता स्त्री को स्वर दो, स्त्री को आकाश दो - पंक्तियों के द्वारा महिलाओं का उत्साहवर्धन किया। भारत जैन महामंडल लेडिज विंग ने मंडल में सहयोग करने वाली सदस्याओं को डॉ मिश्र ने सुमित्रा सेठिया, चंदा गोलछा, शकुन्तला नाहटा, सुप्यार पुगलिया,उषा मालू,रेशम दुगड़ को भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता शाखा का मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया। भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता शाखा ने इस वर्ष संस्था की अध्यक्ष पद के लिए श्रीमती चंदा गोलछा को नियुक्त किया गया। पूर्व अध्यक्ष सरोज भंसाली और उपाध्यक्ष अंजू सेठिया विशेष सलाहकार के पद पर मंडल में सेवा देंगी । इन दोनों के नेतृत्व में दो साल पूर्व कोलकाता में इस शाखा आरंभ की गई थी। बहुत ही कम समय में संस्था ने अपने कार्यों द्वारा एक महत्वपूर्ण स्थान और पहचान बनाई है।
नई चयनित अध्यक्ष चंदा गोलछा ने डॉ वसुंधरा मिश्र, पूर्व अध्यक्ष सरोज भंसाली और उपाध्यक्ष अंजू सेठिया को शॉल उढ़ाकर और मंडल का मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
डॉ वसुंधरा मिश्र ने नई अध्यक्ष को शॉल उढा़कर स्वागत किया। इस अवसर पर मंडल की दो साल की गतिविधियों पर प्रकाश डाला।दो वर्ष पूर्व भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष और साहित्यकार डॉ कुसुम खेमानी ने दो साल पहले मंडल का उद्घाटन किया था, छपते छपते हिंदी दैनिक और ताजा टीवी के डायरेक्टर वरिष्ठ संपादक विश्वंभर नेवर और लेखिका और साहित्यकार डॉ वसुंधरा मिश्र जी का साथ सदैव बना रहा, पथ प्रदर्शक के रूप में समय-समय पर मार्गदर्शन मिलता रहा।इस अवसर पर मंडल के कार्य पर कांता चौरडिया कंचन वैद शशि सेठिया सुषमा छाजड इंदिरा बागरेचा नेहा रामपुरिया स्नेह बागरेचा सरिता वैद सदस्याओं ने अपने वक्तव्य रखे ।उषा मालू और नेहा रामपुरिया ने अंजू सेठिया को विदाई उपहार प्रदान किए।
अध्यक्ष चंदा गोलछा ने मंडल में सेवा देने का संकल्प लिया और सबको धन्यवाद दिया। आशा है मंडल चंदा गोलछा के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा और ऊंँचाइयों को छुएगा। महावीर के सिद्धांतों को जन - जन तक पहुँचाएगा।इस सम्मान समारोह में भारत जैन महामंडल ने स्वादिष्ट नाश्ते के डिब्बे और राजस्थानी केसरिया चाय की व्यवस्था की। भारत जैन महामंडल 122 वर्ष सबसे प्राचीन संस्था है जिसकी देश- विदेश मे इनकी शाखाएँ काम कर रही हैं। यह जानकारी समाजसेवी अंजू सेठिया ने दी।अंत में, नई अध्यक्ष चंदा गोलछा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
बाधाओं के बावजूद व्यापार के सूत्र
बाधाओं के बावजूद व्यवसाय में सफलता प्राप्त करने के सूत्र दिए प्रो दिलीप शाह ने - -
एसपी जैन स्कूल ऑफ ग्लोबल मैनेजमेंट के प्रो परिमल मर्चेंट को 'बिजनेस में सफलता' पर एक सत्र के लिए 31 जनवरी 2023 को आमंत्रित किया गया था। लेकिन अप्रत्याशित प्रतिबद्धताओं के कारण, डॉ मर्चेंट को अपनी बात रद्द करनी पड़ी, जिसका उन्हें गहरा अफसोस रहा । इस संकट का सर्वोत्तम तरीके से प्रबंधन करते हुए छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह ने 'व्यवसाय में सफलता' पर एक आकर्षक सत्र लिया। सत्र की शुरुआत सुबह 11.00 बजे प्रो. विवेक पटवारी द्वारा प्रो. शाह का परिचय कराने और मंच पर उनका स्वागत करने के साथ हुई। प्रोफेसर शाह ने अपने वक्तव्य में कहा कि कैसे किसी भी शैक्षणिक संस्थान का साथ एक दी गई स्थिति से एक सबक प्राप्त करना है, ताकि सीखने-सिखाने की प्रक्रिया बाधाओं के बावजूद जारी रहे।
प्रो. शाह ने छात्रों के साथ 'व्यवसाय में सफलता' पाने के वास्तविक अर्थ पर आमने-सामने चर्चा की। छात्रों द्वारा पूछे गए प्रश्नों में से एक प्रश्न जो सबसे अलग था वह था "निरंतर कैसे रहें?" चर्चा की शुरुआत इस बात से हुई कि हम जिस भी संकट का सामना कर रहे हैं उसका समाधान होना चाहिए। सफलता का मूल सफल होने में नहीं बल्कि समस्या से बाहर निकलने का रास्ता खोजने में सुसंगत होने में निहित है।डॉ वसुंधरा मिश्र ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रो शाह ने वास्तव में सत्र में अपनी उपस्थिति से इसे साबित कर दिया क्योंकि उन्होंने सत्र को बंद करने के बजाय छात्रों के साथ बातचीत की।
प्रो शाह के दर्शन का मूल है "रास्ते में आने वाली बाधाओं के बावजूद, अपने दिन को रचनात्मक रूप से कैसे शामिल किया जाए।" छात्रों के लिए केवल 'व्यवसाय में सफलता' नहीं थी, बल्कि 'जीवन में सफलता' खोजना था, जो अपने आप में एक उत्पादक सबक बन गया।
भवानीपुर कॉलेज में यूनीयन बजट 23
भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में
केंद्रीय बजट 2023 पर पैनल चर्चा का आयोजन - - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने प्रेस रिलीज कर बताया कि केंद्रीय बजट 2023 पर एक पैनल चर्चा का आयोजन 6 फरवरी को किया गया जिसमें पश्चिम बंगाल के विशिष्ट अर्थ शास्त्री अपने-अपने विचार रखेगें।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वर्ष के केंद्रीय बजट में राजकोषीय समेकन की दिशा में सरकार की यात्रा पर जोर दिया।राजकोषीय समेकन अंतर्निहित राजकोषीय घाटे में कमी है। राजकोषीय समेकन सरकारों (राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर) द्वारा अपने घाटे और ऋण स्टॉक के संचय को कम करने के लिए की गई नीतियों को संदर्भित करता है।हालांकि पिछले वर्ष ने रूढ़िवादी अनुमानों को वित्तीय निर्णयों के पीछे अंकगणित के अंतर्धारा के रूप में दिखाया, इस वर्ष गणित अधिक तर्कसंगत लगता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, 5जी लैब, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए रिकॉर्ड आवंटन ने टाइम्स ऑफ इंडिया को 'पार्टी ऑन, भारत इज अॉन द मैप' शीर्षक से एक लेख जारी करने के लिए प्रेरित किया है। यह शायद जी 20 शिखर सम्मेलन से पहले भारत की वैश्विक प्रोफ़ाइल को बढ़ाने के विचार के अनुरूप है।
इस साल का बजट अडिगों के लिए राहत लेकर आया है। बस जब जनसांख्यिकी का एक बड़ा हिस्सा थोड़ा बीमार महसूस कर रहा था, बजट एक राहत के रूप में आता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए निवेश की बढ़ी हुई सीमा, उच्च आईटी छूट, एकता मॉल, पर्यटन को बढ़ावा देना, नए महिला निवेश उपकरण, रोजगार बढ़ाने के उपाय, ये सभी वादों के हिस्से हैं।
जबकि #अमृतकाल बजट ट्रेंड कर रहा है, बजट को "बेहूदा" कहने वाले बयान भी इंटरनेट पर कम ही आ रहे हैं। इसलिए, जैसा कि पुरानी कहावत है, 'हलवा का प्रमाण इसके खाने में है', अर्थशास्त्री बजट के वास्तविक समय के निहितार्थ क्या होंगे, इस पर अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए गहराई से विचार कर रहे हैं।
इसलिए भवानीपुर ने इस साल उद्योग के दिग्गजों के लिए एक गहन पैनल चर्चा की सुविधा के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। बजट को सभी संभावित कोणों से देखने और विभिन्न क्षेत्रों पर इसके प्रभाव को समझने का प्रयास है। विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए, कार्यक्रम को बजट के विभिन्न पहलुओं पर शिक्षार्थियों को प्रबुद्ध करने के लिए इस चर्चा को आयोजित किया गया है।डॉ वसुंधरा मिश्र ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रमुख अतिथि वक्ताओं में
डॉ. अशोक के. लाहिड़ी: केंद्रीय बजट विश्लेषण
अर्थशास्त्री, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार, 15वें वित्त आयोग के सदस्य, पश्चिम बंगाल विधान सभा के सदस्य
सीए हरीश अग्रवाल: कॉर्पोरेट परिप्रेक्ष्य
ऑफिस मैनेजिंग पार्टनर और सीओओ इंडिया कंसल्टिंग, ईवाई, इंडियासीए लायन ए.पी. सिंह:बजटप्रभावविश्लेषणउपाध्यक्ष, लायंस क्लब इंटरनेशनलसीए दिनेश अग्रवाल: प्रत्यक्ष कर
पार्टनर, ईवाई, इंडिया, सीए अरुण अग्रवाल: सर्विस टैक्स
पार्टनर, के एन जैन एंड कंपनीसीए अविशेख जायसवाल: अप्रत्यक्ष करपार्टनर, ईवाई, इंडियामध्यस्थडॉ. सुमन के. मुखर्जी डीजी, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज
पूर्व निदेशक, ईवाई, भारत भाग ले रहे हैं।यह कार्यक्रम भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के कॉन्सेप्ट हॉल में संपन्न हुआ।
केन्द्रित बजट2023
केंद्रीय बजट 2023-24 पर संगोष्ठी
भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के वाणिज्य विभाग (स्नातक अऔर स्नातकोत्तर दोनों) और व्यवसाय प्रशासन विभाग (बीबीए) ने छह फरवरी, 2023 को मुख्य परिसर के कॉन्सेप्ट हॉल में "केंद्रीय बजट 2023-24" पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई । कॉलेज के बीबीए, बीकॉम और एमकॉम जैसे विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में पंजीकरण कराया। पंजीकरण दोपहर से शुरू हुआ और आधे घंटे से भी कम समय में सभागार खचाखच भर गया।
संगोष्ठी की शुरुआत छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह ने औपचारिक रूप से सभा का स्वागत करते हुए किया । उन्होंने गणमान्य व्यक्तियों, मॉडरेटर और फैकल्टी का परिचय दिया और उन्हें दीप प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद उन्होंने वक्ताओं और मॉडरेटर को अपना आसन ग्रहण करने के लिए मंच पर बिठाया । तत्पश्चात प्रो. शाह ने आयोजन की कार्यवाही मॉडरेटर डॉ. सुमन कुमार मुखर्जी, महानिदेशक, बीईएससी को सौंपी।
डॉ. मुखर्जी ने अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वक्ताओं द्वारा कवर किए जाने वाले विषयों के बारे में बताया। उन्होंने बजट 2023-24 के प्रमुख बिंदुओं को साझा किया, जिसमें भारत ने सभी विकासशील देशों की तुलना में उच्चतम विकास दर हासिल की थी। उन्होंने कहा कि बजट वास्तव में अर्थव्यवस्था को एकीकृत करता है और इसमें आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख क्षेत्रों - ग्रामीण मोर्चे और एमएसएमई क्षेत्रों को जोड़ने की दृष्टि है। आदिवासी समूहों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्गों और अन्य पिछड़े वर्गों से संबंधित मुद्दों को भी संबोधित किया और इस तरह बजट एक "भारत जोड़ो" आर्थिक योजना है। उन्होंने दोहराया कि लोकप्रिय धारणा के विपरीत, भारतीय अर्थव्यवस्था वास्तव में कई अन्य विकासशील देशों की तुलना में विश्व स्तर पर काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है, जो आईआरजीडी (ब्याज दर-विकास) पर जोर देते हुए चक्रीय राजकोषीय नीति का मुकाबला करने के लिए लचीलेपन से पुनरुत्थान और राजकोषीय समेकन की ओर बढ़ रहे हैं।उन्होंने इसे एक ऐसे दस्तावेज के रूप में संदर्भित किया जो आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के राजस्व और व्यय को रेखांकित करते हुए, सामाजिक अतिरिक्त पूंजी के माध्यम से समावेशी आर्थिक विकास और विकास की दिशा निर्धारित करता है।
डॉ अशोक के लाहिरी (अर्थशास्त्री, 15वें वित्त आयोग के पूर्व मुख्य सलाहकार सदस्य) ने बजट पर जोर देने और प्राथमिक घाटे के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने विकास और स्थिरता, राजकोषीय विवेक और ऋण की स्थिरता के बारे में भी बात की। उन्होंने यह भी समझाया कि "सभी प्राप्तियां राजस्व नहीं हैं" और ब्याज भुगतान व्यय नहीं हैं।
इसके बाद, सीए लायन ए.पी. सिंह (चार्टर्ड एकाउंटेंट और लायंस क्लब इंटरनेशनल के उपाध्यक्ष) ने "अमृत काल" पर बात की, जो अगले 25 वर्षों से लेकर 2047 तक हैउन्होंने यह बजट क्या प्रदान करेगा और भारत में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवार कल्याण के विकास के महत्व पर बात की। उन्होंने राजकोषीय घाटे और इससे हमारी अर्थव्यवस्था को होने वाले खतरों के बारे में भी बात की। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि भविष्य युवाओं और तर्कसंगत निर्णय लेने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगा।
सीए हरीश अग्रवाल (मैनेजिंग पार्टनर, ईवाई, और ईवाई इंडिया की कंसल्टिंग सर्विस लाइन के सीओओ) इस बात को लेकर आशावादी थे कि हम भारत को अगले 25 वर्षों में कहांँ होने की उम्मीद कर सकते हैं। उन्होंने विदेशी निवेश की पेचीदगियों और संशोधित व्यक्तिगत आयकर व्यवस्था के तहत ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने महिलाओं की भागीदारी दर बढ़ाने की आवश्यकता और भारतीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की बात की, न कि केवल घरेलू मुद्दों पर ध्यान देने की।
इसके बाद, सीए दिनेश अग्रवाल, (पार्टनर ईवाई, इंडिया) ने देश में प्रत्यक्ष करों के प्रभाव और उपायों के युक्तिकरण के बारे में संक्षेप में बात की। उन्होंने पुरानी और नई व्यक्तिगत आयकर व्यवस्था के बीच के अंतर और इसके पीछे के तर्क को समझाया।
सीए अभिषेक जायसवाल, (पार्टनर ईवाई, इंडिया) ने अप्रत्यक्ष करों की अवधारणाओं पर बात की। उन्होंने अप्रत्यक्ष कर, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क में योगदान के रूप में जीएसटी के महत्व का उल्लेख किया जो अभी तक प्रचलित हैं। यह समय की बात है जब सभी अप्रत्यक्ष करों को एक ही मद में एकीकृत किया जाता है।
सीए अरुण अग्रवाल (चार्टर्ड एकाउंटेंट और पार्टनर, के एन जैन) ने बजट के संकेतों और जोर पर बात की। सर्विस टैक्स के विशेषज्ञ होने के नाते उन्होंने मौजूदा बजट में इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।
सभी पैनलिस्टों द्वारा अपनी प्रस्तुतियाँ देने के बाद, मॉडरेटर ने मनरेगा के खर्च में कमी, ग्रामीण विकास महत्वपूर्ण होने पर कृषि बिलों की प्रासंगिकता और स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर उनसे पूछताछ की। इसके बाद, दर्शकों से कुछ प्रश्न आमंत्रित किए गए और छात्र छात्राओं और शिक्षकों ने कई प्रासंगिक प्रश्न पूछे और वक्ताओं ने बड़ी ही दिलचस्पी और उत्साह के साथ सवालों के जवाब दिए।
सत्र के अंतिम भाग के दौरान, मॉडरेटर ने कुछ रोचक जानकारियों के माध्यम से कार्यवाही को संक्षेप में प्रस्तुत किया। तत्पश्चात, वाणिज्य और प्रबंधन दोनों विभागों के नामित प्रमुखों द्वारा पैनलिस्टों का अभिनंदन किया गया।
बीईएससी के प्रभारी शिक्षक डॉ. सुभब्रत गांगुली द्वारा दिए गए धन्यवाद प्रस्ताव के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। उन्होंने पैनल चर्चा के सफल संचालन के लिए वाणिज्य विभाग (यूजी और पीजी) और प्रबंधन को बधाई दी। डॉ. त्रिदीब सेनगुप्ता और प्रो सस्पो चक्रवर्ती कार्यक्रम के क्रमशः संयोजक और संयुक्त संयोजक रहे । उन्होंने कार्यक्रम समन्वयकों सुश्री परिधि अग्रवाल और सुश्री अरुंधति मजुमदार को उनकी नेटवर्किंग और कार्यक्रम के सफलतापूर्वक आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।
डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि वाणिज्य और प्रबंधन दोनों विभागों के संकाय सदस्यों ने इस आयोजन को यादगार बनाने के लिए मिलकर काम किया। छात्र स्वयंसेवी टीम ने भी ऑडिटोरियम को क्षमता से भरने और अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने में मदद की।
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