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Sunday, February 12, 2023

टिप्पणी श्रद्धेय राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी जी के निधन पर

लाट साहब की कोठी में बहाई प्रेम रस की काव्य गंगा- बंगाल के भूतपूर्व राज्यपाल श्रद्धेय केशरी नाथ त्रिपाठी जी राजनीति और समाज के लिए एक अभिभावक और अच्छे नेतृत्व से युक्त राजनीतिज्ञ सेतु थे। बनारस उनका ससुराल था। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के दीक्षांत समारोह के लिए मैं अपने कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह और मैनेजमेंट के पदाधिकारियों के साथ जब उन्हें आमंत्रित करने गई तो लगा ही नहीं कि वे इतने सहज और सहृदय होगें। हिंदी भाषी होने के साथ-साथ मेरा पीहर बनारस है। फिर तो बहुत सी बातें होने लगी। त्रिपाठी जी के साथ बनारस के विश्वेश्वर गंज में बनने वाली देसी घी की कचौडी सब्जी और वहाँ की संस्कृति पर ढेर सारी बातें हुईं। इलाहाबाद और बनारस की विभिन्न जानकारियों का आदान-प्रदान हुआ। आदरणीय त्रिपाठी जी ने दीक्षांत समारोह में अपना वक्तव्य दिया जो मैंने भवानीपुर कॉलेज के विषय में लिख कर दी थी जिसकी प्रशंसा भी की। उसके पश्चात कलामंदिर के मंच से संचालन करते हुए ही मैंने उनसे आग्रह किया कि वे अपने कविता संग्रह "संचयिता" से कविता भी सुनाएँ जो उनके प्रोटोकॉल में नहीं था लेकिन उन्होंने स्वीकृति दी और कविता सुनाई। एक साथ साहित्यकार, विचारक, कवि और राजनीतिज्ञ का दायित्व कुशलतापूर्वक निभाया और सबसे बड़ी बात बिना किसी दाग के। सभी के लोकप्रिय नेता और राष्ट्र प्रेम में समर्पित रहे। सामंजस्य और सद्भावना से उन्होंने अपने जीवन को सफल बनाया जो अनुकरणीय है। आपका यह लेख आदरणीय त्रिपाठी जी के लिए सच्ची श्रद्धांजलि है। शत शत नमन। 🙏 🙏 🙏 डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता

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