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Sunday, February 12, 2023

टिप्पणी रविवार चिंतन

रविवारीय चिंतन मारवाड़ी सम्मेलन का चुनाव - अश्वमेध के काले घोड़े को कौन रोकेगा? संपादकीय समसामयिक विषय पर है जो मारवाड़ी समाज की संस्कृति और संस्कारों को अक्षुण रखने का कार्य करती आ रही है। 88 वर्ष पूर्व स्थापित यह संस्था सम्मेलन निश्चित ही प्राचीन है।समय के बड़े अंतरालों को पार करते हुए आज इक्कीसवीं सदी में है। डेढ़ सौ साल पहले राजस्थान की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण और आजीविका के लिए मारवाड़ी राजस्थान से कोलकाता आए थे और अपनी संस्कृति को भी साथ लाए। आज प्रवासी राजस्थानी यहाँ की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है जिसका पश्चिम बंगाल के औद्योगिक विकास में महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। इस दृष्टि से मारवाड़ी सम्मेलन का चुनाव महत्वपूर्ण है। व्यक्ति जो चयनित होते हैं उनकी जिम्मेदारी अपनी जाति, धर्म और कर्म के प्रति बढ़ जाती है। आपका लेख विचारणीय है। वर्तमान परिस्थितियों में बहुत बदलाव आया है। नई सोच और विचार विमर्श होना चाहिए। जातीय क्षेत्रों के कार्य भविष्य के आधार होते हैं। आशा है कि और भी विकास के कार्य किए जाएंगे। शुभकामनायें 🙏🙏डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता

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