Thursday, January 26, 2023
जावेद अख्तर के विचारों से साझा
प्रसिद्ध कवि गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर के विचारों से साझा हुए भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थी - - - -
कोलकाता लिटरेरी मीट 23 का आयोजन बिरला ललित अकादमी में हुआ जहां प्रसिद्ध कवि गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर और नसरीन मुन्नी कबीर ने अपने वक्तव्य रखे। इस कार्यक्रम का संचालन किया संगीता दत्त ने । 23.1.23 की शाम, छात्रों और शिक्षकों ने जावेद अख्तर के कविता और चर्चा के एक उदार सत्र में भाग लिया।
प्रसिद्ध कवि/गीतकार/पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने शबाना आजमी के साथ बिरला ललित कला अकादमी के लॉन में अपने ज्ञान, हास्य और जादुई शब्दों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।डॉ वसुंधरा मिश्र ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि जावेद जी और शबाना जी दोनों को भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज लोगो के साथ मोमेंटो भेंट किया गया।
बुक रिडिंग सेशन के छात्रों ने बड़े उत्साह के साथ बातचीत की और सेलिब्रिटी लेखक/कवि से लगभग 4-5 प्रश्न पूछे जिनका उत्तर जावेद जी ने दिया।
प्रोफेसर चंपा श्रीनिवासन, डॉ. वसुंधरा मिश्र के सहयोग से इस कार्यक्रम की पहल की गई । प्रो दिलीप शाह के मार्गदर्शन में डॉ वसुंधरा मिश्र और हर्षित चोखानी और सोलह विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
Tuesday, January 10, 2023
हिंदी की रेल चली विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर
हिंदी की रेल चली
हिंदी की रेल चली, हिंदी की रेल चली
हिंदुस्तान की सिरमौर रेख्ता, रेख्ती खड़ी बोली
आज हिंदी बन विकास की उच्च सीढ़ियों पर चढ़ती चली
इतराती इठलाती कई भाषाओं की सखी सहेली
हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली
देश विदेश की सरहदें पार कर दिलों में बसने लगी
अरबी-फ़ारसी उर्दू पुर्तगीज को गले लगा सबकी स्नेही बनी
पूर्व से पश्चिम उत्तर से मध्य भारत में हिंदी के रंग की बेल चढ़ती चली
हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली
होली दिवाली तीज-त्यौहार हिंदी के रंग में रंगे
विभिन्नता में एकता को मजबूत करती हिंदी की लहर हवाओं में घुली।
हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली
देश के पार विदेशों में हिंदी की सुरभि फलीफूली
मेरे और तुम्हारे बीच संपर्क सेतु बनी
हमजोली बनी हिंदी
हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली
नागपुर से भोपाल मॉरिशस युगांडा से फिजी फिर त्रिनिदाद गुयाना
दिल्ली की शान बनी हिंदी, राजभाषा बनी
निज भाषा की शान लगी हिंदी
हर दिल की आवाज़ बनी हिंदी
हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली
सरल सहज और गतिशील धारा में बहती रही
वेदों और संस्कृत से निःसृत गंगा सी फैलती रही
भारत की विशाल धरती पर
दूब बनी देवों के सिर पर चढ़ती रही
भागीरथी देव भाषा की प्रहरी बन
संस्कृति और संस्कार बन बहने लगी
हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली
डॉ वसुंधरा मिश्र, 19.8.21
Wednesday, January 4, 2023
भवानीपुर बीडीसी चैंपियनशिप 22 की रिपोर्ट
भारत सिर्फ़ जमीन का टुकड़ा नहीं, संस्कृति है :विश्वंभर नेवर भवानीपुर डांस चैंपियनशिप 22 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए - -
भवानीपुर एडूकेशन सोसायटी कॉलेज में भवानीपुर डांस चैंपियनशिप(बीडीसी) 2022 के उद्घाटन समारोह में कोलकाता के 15 से अधिक कॉलेज के प्रतिभागियों ने भाग लिया।हर वर्ष होने वाली इस प्रतियोगिता में शिक्षायतन कॉलेज, जेवियर्स युनिवर्सिटी, जे डी बिरला कॉलेज,भवानीपुर कॉलेज, आईआईएच एम, श्री शिक्षायतन, जेवियर्स युनिवर्सिटी आदि कॉलेजों से कॉलेज आए विद्यार्थियों ने इस लोकप्रिय प्रतिद्वंद्विता में भाग लिया। क्लासिकल, वेस्टर्न, ड्यूएट क्लासिकल, लोकनृत्य, स्ट्रीट बैटल, बैंड आदि विभिन्न नृत्य प्रतियोगिताएं शामिल रहीं। भवानीपुर कॉलेज के अत्याधुनिक जुबली में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया ताजा टीवी के डायरेक्टर और छपते छपते हिंदी दैनिक कोलकाता के वरिष्ठ संपादक विश्वंभर नेवर, डीन प्रो दिलीप शाह और प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, डॉ वसुंधरा मिश्र, भ्रामौरी रॉय, सोमा सुबेदी, देवमित्रा सेनगुप्ता, संचयिता मुंशी ने। साथ में सभी कॉलेजों से आए प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम के उद्धाटन समारोह में भाग लिया।प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना देवमित्रा सेनगुप्ता, भ्रामौरी रॉय, सोमा सुबेदी और पाश्चात्य नृत्य के विशिष्ट नर्तक पूजा काबरा, आयुषी सिंह, गौरव बिंद्रा आदि विशिष्ट नृत्य कलाकारों ने निर्णायकों के रूप में अपनी भूमिका निभाई।
श्री शिक्षायतन, दी हेरिटेज कॉलेज सेंट जेवियर्स विश्वविद्यालय , शिवनाथ शास्त्री कॉलेज, टेकनो कॉलेज,
कलकत्ता विश्वविद्यालय, टीएचके जैन कॉलेज, भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज , वोमेन्स क्रिश्चियन कॉलेज, हेरिटेज एकेडमी, आईआईएच एम आदि कॉलेजों ने बेहतरीन प्रस्तुति दी। सभी निर्णायकों ने भी अपनी नृत्य प्रस्तुति दी ।
लोकनृत्य में गुजराती, राजस्थानी , लावनी और मिश्रित लोकगीतों पर बहुत ही ऊर्जा से भरे नृत्य पेश किए । छात्र और छात्राओं से खचाखच भरे सभागार में नृत्य और संगीत का उत्सव मनाया गया और सभी ने आनंद लिया। अतिका खान और तुषिता चुगानी ने कार्यक्रम का संचालन किया। । बीडीसी की संयोजक प्रमुख प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिव्या उदेशी रहीं जिन्होंने बीडीसी के सभी प्रतिभागियों और वोलिंटियर्स का दिशानिर्देश किया। मैनेजमेंट की सदस्या नलिनी पारेख ने निर्णायकों को कॉलेज का मोमेंटो प्रदान कर उनका सम्मान किया। कलेक्टिव फ्लेम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम को आकार दिया । सेंट जेवियर्स विश्वविद्यालय, शिवनाथ शास्त्री कॉलेज, भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज आदि कॉलेजों के बेहतरीन प्रदर्शन रहे। प्रथम स्थान पर भवानीपुर कॉलेज का स्थान रहा। शिवनाथ शास्त्री कॉलेज द्वितीय रहा।
अंत में प्रो दिलीप शाह, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिव्या उदेशी, डॉ वसुंधरा मिश्र, भ्रामौरी राय ने सभी विजेताओं को मेडल और सर्टिफिकेट देकर पुरस्कृत किया । इस कार्यक्रम की जानकारी डॉ वसुंधरा मिश्र ने दी।
लेखिका ऋतु डागा की पुस्तक पर मेरा विचार
ऋतु डागा का रचनात्मक संसार हिंदी में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हर लेखक की सृजनात्मक रचना की विशिष्टता होती है। ऋतु डागा जिंदगी के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त करती रही हैं। समाचार पत्रों में बराबर आपका लेख प्रकाशित होना ही अपने आप में एक
प्रमाण है। जीवन के प्रति लेखिका की स्पष्ट दृष्टि है। वे अपनी कविता में कहती हैं कि पल दो पल का साथ /आया था मेरे हिस्से /वही है मेरा अब /कहने को मेरे हिस्से में (जिंदगी कविता से) ।वर्तमान को सकारात्मक रूप से देखती हुई लेखिका भाषा, साहित्य, संस्कृति, कला संगीत और राजनीति तथा विभिन्न पौराणिक कथाओं के आधार पर अपने विचार व्यक्त करती है। वस्तुतः वह देश के विकास और उन्नयन में अपना योगदान देती है। वह भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और आदर्शों को समाज की भावी विरासत मानती हैं। वह वास्तविक स्थितियों से परिचित है जहाँ हिंदी भाषा माँ है और अंग्रेजी को बीबी मानती है क्योंकि पत्नी के आने से माँ के घर में कई परिवर्तन होते हैं। परिवर्तन के प्रति भी लेखिका अपनी जिम्मेदारी समझती है। स्त्री के रूप में लेखिका जानती है कि खुशियाँ फिसल गई/ रेत की तरह /गम जम गया /काई की तरह ऐसे में अपनी लेखनी द्वारा लेखिका समाज को नई दिशा देने की ओर अग्रसर है। मैं लेखिका को पुस्तक के लिए बधाई और शुभकामनाएं देती हूँ।
-डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता
भवानीपुर नृत्य चैंपियनशिप 22
भवानीपुर नृत्य चैंपियनशिप
"महान नर्तक अपनी तकनीक के कारण महान नहीं होते, वे अपने जुनून के कारण महान होते हैं।" - मार्था ग्राहम भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज एक व्यापक रूप से प्रशंसित शैक्षणिक संस्थान है जो विभिन्न कला रूपों में उत्कृष्टता प्राप्त करने वाले छात्रों को महान मंच प्रदान करता रहा है। इस बार, भवानीपुर कॉलेज के फ्लेम्स सामूहिक ने शहर के विभिन्न कॉलेजों के सर्वश्रेष्ठ शौकिया और युवा नर्तकियों को एक ही छत के नीचे लाया था और 7 नवंबर 2022 को कॉलेज परिसर में ही "द भवानीपुर डांस चैंपियनशिप" का आयोजन किया था। कार्यक्रम को लगभग 9:00 बजे एक उत्सव उद्घाटन किया गया। छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह ने एक प्रेरक कविता के साथ नृत्य की लड़ाई का उद्घाटन किया। इस वर्ष बीडीसी के लिए कार्यक्रम का विषय "कॉसप्ले" (फिल्म, पुस्तक या वीडियो गेम से एक चरित्र के रूप में तैयार होने का अभ्यास) था। दिन के मुख्य अतिथि ताज़ा टीवी के श्री बिशम्बर नेवर रहे।भवानीपुर नृत्य चैम्पियनशिप एक इंटर कॉलेज नृत्य प्रतियोगिता है जिसका उद्देश्य शहर के प्रतिभाशाली युवाओं को एक पेशेवर मंच प्रदान करना है जहां वे अपने नृत्य के माध्यम से संगीत की ताल और ताल को प्रदर्शित और चुनौती दे सकते हैं। बीईएससी ने एक प्रयास किया है और सभी सांस्कृतिक नृत्य रूपों को सममूल्य पर लाया है। इसके पीछे उद्देश्य नृत्य संस्कृति को लोकप्रिय और सभी के लिए सुलभ बनाना था। बीडीसी ने आगे शहर के विभिन्न स्थापित और अनुभवी नर्तकियों और गुरुओं से जानकारी और अवसरों के साथ छात्रों को शिक्षित करने के लिए काम किया है। उनमें से कुछ ओडिसी नृत्य रूप, गरबा नृत्य रूप और कोरियोग्राफर हैं, जैसे सुश्री देबामित्र सेन गुप्ता, श्री धर्मेश भीमानी, श्रीगौरव बिंद्रा, सुश्री भ्रामोरी रॉय, सुश्री पूजा काबरा, सुश्री आयुषी सिंह, डॉ शैली पॉल और श्री संजू पासवान दिन के न्यायाधीशों के लिए कुछ थे। कार्यक्रम के प्रायोजक थे - खाद्य प्रायोजक: ओपनिंग बेल कैफे, साड्डा हक कैफे, परदेसी कैफे किचन, टायर पैटी, रोली की टोली, मेकअप और स्टाइलिंग पार्टनर: लैक्मे अकादमी कैमक स्ट्रीट, परिधान पार्टनर: स्कैटर्स वर्ल्ड क्लब, शेयर रिकवरी, मीडिया पार्टनर: एडूग्राफ अन्य प्रायोजक:एडू एम्स
पूर्वी युगल
इस आयोजन में प्रत्येक समूह में 2 प्रतिभागी थे, उन्होंने जोड़ियों में प्रदर्शन किया और उन्हें न्यायाधीशों के सामने पूर्वी संगीत में युगल नृत्य नृत्यकला प्रस्तुत करनी थी। प्रतिभागियों द्वारा
सुंदर डांस अच्छे प्रदर्शन किए गए और प्रत्येक ने जजों के लिए निर्णय लेना एक चुनौती बना दिया। बीईएससी कॉलेज ने पहला, शिवनाथ शास्त्री कॉलेज ने फर्स्ट रनरअप और सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी ने सेकेंड रनर अप हासिल किया।
पूर्वी समूह नृत्य
इस घटना में प्रत्येक कॉलेज को पूर्वी संगीत पर एक समूह नृत्य प्रदर्शन करना था, जहां उन्हें नृत्यकला, तुल्यकालन, नृत्य क्षमता, भाव और नृत्य के चित्रण के आधार पर आंका गया था। प्रत्येक समूह ने सुंदर नृत्य कोरियोग्राफी की थी। बीईएससी कॉलेज ने पहला, जादवपुर यूनिवर्सिटी ने फर्स्ट रनर अप और शिवनाथ शास्त्री कॉलेज ने सेकेंड रनर अप हासिल किया।बॉलीवुड जोड़ी / तिकड़ी
में प्रत्येक समूह में 2 या 3 प्रतिभागी थे, उन्हें युगल या तिकड़ी में कोरियोग्राफी करनी थी। समूहों ने सुंदर और ऊर्जावान बॉलीवुड डांस नंबर दिखाए, जिनमें से प्रत्येक ने जज के निर्णय को काफी कठिन बना दिया। बीईएससी कॉलेज ने पहला, शिवनाथ शास्त्री कॉलेज ने पहला और महिला क्रिश्चियन कॉलेज ने दूसरा स्थान हासिल किया।
बॉलीवुड ग्रुप डांस
में प्रत्येक कॉलेज को बॉलीवुड संगीत पर एक समूह नृत्य प्रदर्शन करना था जहां उन्हें नृत्यकला, तुल्यकालन, नृत्य क्षमता, भाव और नृत्य के चित्रण के आधार पर आंका गया था। बीईएससी कॉलेज ने पहला स्थान, श्री शिक्षायतन कॉलेज ने प्रथम उपविजेता और सेंट जेवियर्स कॉलेज ने दूसरा स्थान प्राप्त किया।
सांस्कृतिक समूह लोक नृत्य में प्रत्येक कॉलेज को लोक संगीत पर एक समूह नृत्य प्रदर्शन करना था, जहां उन्हें किसी भी सांस्कृतिक नृत्य का प्रदर्शन करना था और नृत्य रूप, नृत्यकला, सिंक्रनाइज़ेशन, नृत्य क्षमता, अभिव्यक्ति और चित्रण के बारे में जानकारी की सटीकता के आधार पर निर्णय लिया गया था। कीनृत्य।नाच अंगविक्षेप नाचमंडली नाच-रंग डांस कुदना नाचना नृत्य करना उछालना आनंद में कूदना कार्य करना। प्रत्येक समूह ने सुंदर नृत्य नृत्यकला तैयार की थी। बीईएससी कॉलेज की मुख्य टीम ने पहला स्थान हासिल किया, उसके बाद बीईएससी कॉलेज (ओटीएसई टीम) ने प्रथम उपविजेता और सेंट के रूप में स्थान हासिल किया। जेवियर्स विश्वविद्यालय द्वितीय उपविजेता रहा।
पश्चिमी समूह नृत्य में प्रत्येक कॉलेज को पश्चिमी संगीत पर एक समूह नृत्य प्रदर्शन करना था जहां उन्हें कोरियोग्राफी, सिंक्रोनाइज़ेशन, नृत्य क्षमता, भाव और उन्हें दी गई थीम के चित्रण के आधार पर आंका गया था। प्रत्येक समूह ने इस आयोजन को दूसरे स्तर पर ले जाने के लिए शक्ति संधि नृत्य प्रदर्शन किया था। बीईएससी कॉलेज ने पहला स्थान प्राप्त किया और उसके बाद सेंट। जेवियर्स विश्वविद्यालय प्रथम उपविजेता और आईआईएच एम कॉलेज द्वितीय उपविजेता रहा।सड़क नृत्य संग्राम में स्ट्रीट डांसर्स से उधार ली गई एक पूरी तरह से नई अवधारणा, इस कार्यक्रम में नर्तक प्रतिभाओं ने विभिन्न नृत्य रूपों को एक दूसरे के खिलाफ आमने-सामने थे। छात्रों द्वारा प्रदर्शित सड़कों से कच्चे नृत्य प्रदर्शन से भीड़ चकित थी। इस लड़ाई के विजेता श्यामा प्रसाद कॉलेज के ऋतिक रजवार थे।
.इसके बाद यह कार्यक्रम समापन समारोह के साथ दिन के अपने अंतिम अध्याय में पहुंच गया जहां दर्शकों ने अपनी कॉलेज टीमों के लिए उत्साहवर्धन किया। निर्णायकों के कुछ प्रेरक समापन भाषणों के बाद विजेता की घोषणा की गई। बीडीसी'22 के सभी विजेता भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज थे और प्रथम उपविजेता शिवनाथ शास्त्री कॉलेज थे
यह कार्यक्रम अभी भी समाप्त नहीं हुआ था क्योंकि इंतखाब द बैंड द्वारा एक सरप्राइज गेस्ट बैंड का प्रदर्शन किया गया था, जहां छात्रों ने बैंड द्वारा बजाए गए भावपूर्ण संगीत की धुन बजाई। बीडीसी कुल मिलाकर एक बड़ी सफलता और एक यादगार घटना थी। छात्रों को अगले साल बीडीसी के नए अध्याय का बेसब्री से इंतजार है।
रिपोर्टर- प्रेरणा गुप्ताफोटोग्राफर -सग्निक घोष, फकीर अहमद, सौरीश के.आर. देबअंकित माजी, शालिनी सरकार, उमंग लचिरामका का योगदान रहा। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
भवानीपुर कॉलेज के अध्यक्ष चंपक लाल दोशी जी का निधन
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के लोकप्रिय चंपक लाल ए दोशी जी का महाप्रयाण - -
14.11.2022 को प्रातः 8 बजे भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के लोकप्रिय अध्यक्ष चंपक लाल दोशी जी नहीं रहे। विद्यार्थियों और शिक्षक गणों तथा मैनेजमेंट के सभी पदाधिकारियों में गहरा शोक व्याप्त है। इस अवसर पर राज्य की मुख्यमंत्री माननीय ममता बनर्जी ने शोक पत्र द्वारा समाज सेवी चंपक लाल ए दोशी जी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। वहीं मेयर फिरहाद हकीम ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार के लोगों को सांत्वना प्रदान की। भवानीपुर कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह, डायरेक्टर जनरल डॉ सुमन मुखर्जी, डीन प्रो दिलीप शाह और टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय एवं सभी शिक्षक गणों ने चंपक लाल ए दोशी जी का जाना समाज शिक्षा के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति बताई। ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे एवं परिवार को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। ओम शांति ओम शांति ओम शांति।
अर्चना गोष्ठी 22
उत्सव बाहर नहीं अंदर मना रही हूँ, गीत बाहर नहीं अंदर गा रही हूँ :प्रसन्न चोपड़ा अर्चना संस्था की गोष्ठी में कविता करते हुए - - -
अर्चना संस्था की सदस्यों ने कविता उत्सव मनाया जिसमें स्वरचित रचनाएँ और गीत पढे़ गए। संगीता चौधरी ने
एक दिन मन की सुप्त कंदराओ में विचारों का भूचाल आया।कविता सुनाई, मृदुला कोठारी ने देह के सारे अंगों पर दोहे एवं मुक्तक कान कोयल के सुने सोन चिरैया की बोली सुनाकर सबका मन मोह लिया और गीत निस दिन वह अंधियारे को भगाने आता है। सूरज का एक दीप लिए जो भोर में गाता है सुनाया, सुशीला चनानी ने दोहा विधा में माँ की गोदी सी लगे,ममता भीगी रात।तन पाता है थपकियाँ ,मन सपने सौगात।।और कविता तन्हाई सुनाई जिसकी पंक्तियाँ भीड़ में तो इन्सान खो जाता है, बस तन्हाई के आलम में ,अपना सा हो जाता है।पसंद की गई। अहमदाबाद से भारती मेहता ने कविता एक स्थिति के बाद, कोई भी रिश्ता ओढ़ने से रुकती नहीं हैं ठंड! और जब वह बच्ची थीउसकी मुस्कान थी हल्की- फुलकी रंग बिरंगी तितली की तरह! सुनाकर नए बिंबों का प्रयोग किया। हिम्मत चोरड़़िया प्रज्ञा ने मनहरण घनाक्षरी-सारे जग से न्यारा, लगे हमें सदा प्यारा।पावन ये देवभूमि, हिन्दुस्तान है।। गीतिका-तारे तोड़ जमीं पर लाऊँ, कहता मेरा लाल।माँ मुझको बंदूक दिला दो, बदलूँगा मैं चाल।।, बनेचंद मालू ने कवि कुछ ऐसा गीत सुनाओ, मनका मीत मिल जाए ! और मैं ढूंँढन निकला आदमी सुना कर अपने अनुभवों को शब्दों द्वारा साझा किया।
प्रसन्न चोपड़ा ने उत्सव बाहर नहीं अंदर मना रही हूँ । गीत बाहर नहीं अंदर गा रही रही हूँ सुनाया जिसमें छिपे विषाद के भाव ने सबको भावुक कर दिया । उषा श्राफ ने ये शाम के धुंधलके, साए थे गहरे हल्के सुना कर अपनी रोमांटिक भावनाओं को व्यक्त किया।वसुंधरा मिश्र ने कविता सूरज ग्रहण पस्त सुनाई जिसकी पंक्तियाँ सूर्य को जन्म देना नहीं है आसान, यश, तेज, ओज यूँ ही नहीं मिल जाते। जैसी पंक्तियाँ कर्म के प्रति प्रोत्साहित करने वाली रहीं। संचालक और संयोजन करते हुए इंदु चांडक ने कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से की और कविता शब्द व्यष्टि हैं समष्टि दृश्य हैं दृष्टि हैं ब्रह्म हैं सृष्टि हैं और मुश्किलों बन संगिनी तुम साथ मेरे चलती जाओ सुनाई। धन्यवाद ज्ञापन किया बनेचंद मालू नेे ।जूम पर यह कार्यक्रम अर्चना संस्था की मासिक गोष्ठी के अंतर्गत किया गया।
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मधु कांकरिया की पुस्तक ढलती सांझ का सूरज की चर्चा
साहित्यिकी संस्था ने प्रसिद्ध हिंदी उपन्यासकार मधु कांकरिया के उपन्यास" ढलती सांझ का सूरज" पर की चर्चा - - मधु कांकरिया हिंदी उपन्यासकारों में शोधपरक उपन्यासों के लिए जानी जाती हैं। साहित्यिकी संस्था ने "ढलती सांझ का सूरज" चर्चा करवाई जिससे सभी लाभान्वित हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ मंजु रानी गुप्ता ने मंच पर आमंत्रित प्रसिद्ध उपन्यासकार मधु कांकरिया, कलकत्ता विश्वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष साहित्यकार डॉ राज्यश्री शुक्ला (भारतीय भाषा परिषद की सचिव) और वक्ता कथाकार और साहित्यकार डॉ शुभ्रा उपाध्याय कार्यक्रम की अध्यक्ष दुर्गा व्यास (प्रसिद्ध समाज सेवी और साहित्यकार, राजस्थान ब्राह्मण संघ की अध्यक्ष ) सभी विदूषियों ने अपने वक्तव्य रखे।
रेवा जाजोदिया ने संचालन करते हुए उपन्यासकार मधु कांकरिया का परिचय दिया।
ढलती सांझ का सूरज उपन्यास पर डॉ राज्यश्री शुक्ला ने अपने महत्वपूर्ण विचारों को व्यक्त करते हुए उपन्यास के कथानक और उसके नए शिल्प पर चर्चा की। बताया कि यह उपन्यास वस्तुतः स्त्री केंद्रित उपन्यास है जिसमें एक माँ पूरे देश अर्थात भारत माँ के रुप में विस्तार पाती है। भौतिकवाद के इस दौर में किसानों की आत्महत्याओं की समस्या विशेषकर महाराष्ट्र के विदर्भ की समस्याएं, बच्चों का विदेश भेजना, भौतिक सुख सुविधाओं के घेरे में पड़कर उपन्यास के पात्र अविनाश का अपनी माँ से मिलने की चाह होते हुए भी बीस वर्ष स्विट्जरलैंड में रह जाना । सफलता के साथ जीवन को सार्थक कैसे बनाएं जैसे अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं पर डॉ शुक्ला ने अपने विचार रखे।
डॉ राज्यश्री शुक्ला ने कहा कि उपन्यास की घटनाएँ बहुत ही रोचक हैं जो पाठक को बांधे रखती हैं। - स्त्रियों की स्थिति और स्त्री विमर्श पर चर्चा करते हुए स्त्री के सामाजिक विकासक्रम पर भी विचार व्यक्त किया ,लेखिका के उपन्यास 'पत्ता खोर' का भी जिक्र किया । किसानों की आत्महत्या, केंद्र में स्त्री, किसान जीवन के अतिरिक्त उपन्यास में सभ्यता संस्कृति और समाज की चर्चा है।
जीवन की सफलता के क्या मायने हैं बच्चे कैसे सफल होगें। इस भूमंडलीकरण के दौर में सुख- सुविधाओं के पीछे भागते बच्चों को माँ के दिए संस्कार काम आते हैं और वे देश के लिए अपने उत्तरदायित्व को समझते हैं। माँ देश में रहकर अकेले हताश नहीं होती बल्कि वह एक तार टूटता है तो दूसरे तारों को जोड़ने का कार्य करती है। यही कारण है कि बीस साल बाद भी उसका बेटा अविनाश पूरे महाराष्ट्र के विदर्भ के किसानों के साथ साथ पूरे भारत की चिंता करता है।
जननी जन्मभूमि माँ से जुड़ी है भारत की प्राण नाड़ी को समझना है। उपन्यास में बड़ी सीमा के दर्शन होते हैं। पूरे देश से जुड़ कर उसकी माँ किसानों के परिवार से जुड़ती है। अपने दायरे को बढ़ायी है । जिंदगी के तार टूट जाय तो क्या दूसरे तार नहीं है। नया शिल्प है। सफल सार्थक उपन्यास है जो समाधान की दिशा में ले जाता है।
वक्ता डॉ शुभ्रा उपाध्याय ने उपन्यास के मूल में राष्ट्रीय भावना को महत्वपूर्ण बिंदु माना है। विदेश में
बेटा अविनाश माँ को याद करता है लेकिन फिर भी उसकी आत्मा भारत माँ से ही जुड़ी हुई है। विदेश स्विट्जरलैंड से बीस साल बाद भारत आता है माँ से मिलने लेकिन अविनाश को मांँ का कंकाल मिलता है। वस्तुतः
अविनाश के चरित्र में मूलरूप में माँ के दिए संस्कारँ है। बीस वर्षों के बाद भारत की बदलती स्थिति और समसामयिक समस्याओं पर लिखा उपन्यास दो खंडों में है । किसान की समस्या 5 वें अंक से शुरू होती और दूसरे खंड में भारत माँ की अवधारणा है।इसमें राष्ट्रीय चेतना की भावना जबरदस्त है। उपन्यास का शिल्प नया है।सफलता स्वयं तलाशनी पड़ती है। तभी जीवन की सार्थकता है। बारह अंक में माँ नहीं है बल्कि माँ की मांग है। भारत आकर 28वें अंक में अविनाश बहुत कुछ करता है।वह विदर्भ के किसान के क्षेत्र को चुनता है जहाँ किसानों ने बड़ी संख्या में आत्महत्या की है । समस्या का समाधान भी सोचना, प्रेमचंद के बाद किसानों को संबोधित करते हुए उनकी समस्याओं को जमीनी हकीकत पर लिखा यह पहला उपन्यास है। self help की बात आती है अविनाश किसानों के गांव की सड्कों को हाइ वे से जोड़ता है। हमें सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं रहकर स्वयं सहयोग देने से किसानों की बहुत सी समस्याएं हल हो सकती हैं। एनजीओ और कई लोग व्यक्तिगत रूप से सहयोग देने के लिए आगे आ जाते हैं। उपन्यास की पंक्तियाँ हमें किसान के विस्तार के साथ हमारे भीतर के किसान का भी विस्तार करने के लिए प्रेरित करता है ।
रेवा जाजोदिया ने अपने सफल संचालन में उपन्यास को सफल और सार्थक बताते हुए कहा कि माँ ने फलक का विस्तार किया वहीं बेटे को पत्र द्वारा विरासत में भारत प्रेम को विस्तार दिया है । ढलती सांझ का सूरज शोधपरक उपन्यास है।
मधु कांकरिया ने सात उपन्यास, 70-75 कहानी लिखी है और कई साहित्यिक पुरस्कार से सम्मानित हुईं हैं। वे जमीनी स्तर की सिपाही हैं । इच वन टीच वन एनजीओ से जुड़ी हैं। अनाथ बच्चों को साक्षर करने का बीड़ा उठाया ।भारतीय भाषा परिषद द्वारा पुरस्कृत और उदयपुर से दिए
भीखारी सम्मान मिला।
मधु कांकरिया का लेखन भावना दर्शन परक है। वे मानती हैं कि आज भौतिकतावाद चरम पर हैऔर सांस्कृतिक जीवन मूल्यों का रह्रा हुए। जरुरत से ज्यादा सुविधाएं है
बुद्ध और गीता का ह्रास हुआ है , जीवन की समस्याओं को दूर किया जा सकता है।आज बच्चों का बचपना कम हो गया है और आत्महत्या बढ़ रही है। हम अच्छा इंसान नहीं बना रहे हैं। जीवन सार्थक हो तो सफल हो सकता है।
शर्मिला वोहरा ने - उपन्यास की शीर्ष लाइन समर्थ सफलता के आधार पर उपन्यास के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला जिसकी सूत्रधार स्वंय लेखिका है।
अध्यक्षीय वक्तव्य में दुर्गा व्यास ने सभी वक्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि उपन्यास बहुत ही महत्वपूर्ण और समसामयिक है ।अविनाश जाता है तो खरा सोना था लेकिन लौटा तो विचलित होकर। स्वनिर्भर हो जाएं तो समस्याएं खत्म हो जाती है। अम्मा के चरित्र का विस्तार होता है। लेखिका ने महाराष्ट्र की पूरी चित्रात्मक यात्रा उपन्यास में करवाई है जो विशिष्टता है। सार्थक लेखन, दार्शनिकता नैनसी को लिखे पत्रों में दिखाई पड़ती है ।
आशा जायसवाल ने धन्यवाद ज्ञापन दिया
कोरोना के बाद 16.11.2022 सायं 4.30 पर साहित्यिकी संस्था का प्रथम अॉफ लाइन कार्यक्रम भारतीय भाषा परिषद के छोटे सभागार में हुआ। वाणीश्री बाजोरिया और डॉ मंजू रानी गुप्ता ने सक्रिय योगदान दिया। अंत में नाश्ता और चाय की व्यवस्था रही।
बेक टू शामली की संगीतमय नाट्य प्रस्तुति
भवानीपुर कॉलेज सभागार में रस्किन बांड की कहानियों और पात्रों के चरित्र पर आधारित "बेक टू शामली" की संगीतमय नाट्य प्रस्तुति - - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के कॉन्सेप्ट सभागार में रस्किन बांड की कहानियों और पात्रों के चरित्र पर आधारित बेक टू शामली नाटक की संगीतमय प्रस्तुति संपन्न हुई। तीन दिनों तक सभागार में खचाखच भरे दर्शकों ने हर दृश्य के पश्चात तालियों की गड़गड़ाहट से अपनी पसंद को दर्शाया। "बेक टू शामली" का स्क्रिप्ट लेखन चुप्पी की चीख रित्विका चौधरी और प्राचीन पांडेय द्वारा लिखी गयी , निर्देशक रित्विका चौधरी, प्रोड्यूसर सुपप्रवो टैगोर द्वारा भवानीपुर कॉलेज के थियेटर इन एक्ट के विद्यार्थियों द्वारा का नया थियेटर प्रोडक्शन किया गया जिसके मेजबान रहे कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ।भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ स्कॉटिश चर्चकॉलेज और शिक्षायतन कॉलेज की छात्राओं ने भी अभिनय में भाग लिया ।
"बैक टू शामली" रस्किन के पात्रों और कहानियों से प्रेरित एक संगीतमय नाटक है जिसमें संगीत और नृत्य का अद्भुत संयोजन देखने को मिला
। यह नाटक अतीत की यादों की यात्रा है जो वर्तमान समय में युवा पीढ़ी के मित्रों ने दर्शकों के साथ साझा किया है। इस कहानी का
लॉकडाउन और कोविड -19 महामारी के वर्ष से गहरा संबंध है जो दुनिया के लिए एक भयावह सपना था। यह वह भयानक समय था जब लोग
घरों में कैद थे और बाहरी दुनिया से उनका शारीरिक रूप से संपर्क टूट गया था।
कुछ के रोजगार चले गए, कुछ लोगों को काम छोड़कर अपने
पैतृक घर वापस जाना पड़ा जहां वे लंबे समय तक रहे।
बाहर की तेज-तर्रार दुनिया से दूर घर वापसी काफी थी
, कई लोगों के लिए स्मरण और चिंतन की अवधि भी रही ।
इस नाटक की कहानी एक ऐसे ही काल्पनिक शहर शामली की है जो , शिवालिक की तलहटी में बसा है, जहाँ हर व्यक्ति एक साधारण जीवन जीते हुए भी
हर कोई काफी शानदार ढंग से जीवन बिता रहा था । बचपन के दोस्त रणजी, कोकी, भीम, सुमित और सोनिक
अपने प्रिय शहर शामली वापस आ गए हैं। लगभग एक दशक के बाद वे एक बार मिलते हैं और
अपने जीवन को विराम देते हैं और अपनी स्मृति के माध्यम से उसी मस्ती भरे दिनों में वापस लौट आते हैं।
सभी दोस्त चहल-पहल वाले शहर के इकलौते बाजार शामली चौक पर मिलते हैं।
मास्टरजी की दर्जी की दुकान, बृजेश की किताबों की दुकान और मंजू की साड़ी की दुकान के साथ अन्य
आसपास के स्ट्रीट वेंडर। छोटी लेकिन घरेलू सड़कें उन्हें ऐसा महसूस कराती हैं कि उनका
गृहनगर भी व्यस्त था (वास्तव में वे नहीं हैं)।
पांचों दोस्त रात को अपने 'हैंगआउट ज़ोन' में बोलते हुए बिताते हैं जो वे
चैटिंग, बात करने और शराब पीने वाले किशोरों के रूप में बनाया गया। जैसे-जैसे रात बढ़ती है, और अधिक
कहानियां और यादें चमक में उनके पास वापस आ जाती हैं। वे सुंदर काका को याद करते हैं,
स्थानीय ट्रेन सुरंग सुरक्षा और ड्रैगन और तेंदुए, उनके बेटे की उनकी कहानियां
जिन्होंने स्थानीय रेलवे स्टेशन पर टीटीई बनने के अपने सपने को पूरा किया। लडकिया
लड़कों को याद दिलाती हैं कि कैसे पूरे शहर ने लड़कियों के लिए खुशी मनाई उन्होंने
लड़कों के खिलाफ 'पिट्टू' मैच में जीत हासिल की थी और पूरे शहर ने लड़कियों की जीत पर खुशियां मनाई थी।
खोई हुई भावनाएँ फिर से प्रज्वलित होती हैं, अनुत्तरित प्रश्नों का उत्तर दिया जाता है और मित्रों की
जो दुर्भाग्य से टूट गए थे फिर से जुड़े हुए हैं। वे सभी के साथ फिर से जुड़ते हैं
अपने बचपन से स्थानीय लोग और अपने प्यार और सम्मान के मूल्य को समझते हैं, जड़ें इसलिए जरूरी है क्योंकि आप वहीं से हैं।श्रीक अॉफ सायलेंस बहुभाषी थियेटर संस्थान है जिसकी स्थापना 2012 में हुई है। संस्था ने पचहत्तर से अधिक नाटकों का मंचन, नुक्कड़ नाटक, डिनर थियेटर और इंटिमेट नाटक करके सृजनात्मक भूमिका निभा रहा है
अंग्रेजी और हिंदी में हुए इस नाटक की अवधि
90 मिनट की है।
, 90 के दशक की पुरानी यादें
, शामली ये है शामली
, ड्रैगन और तेंदुआ नृत्य (वाद्य)
, संगीत लोक धुनों के साथ 90 के दशक के बॉलीवुड संगीत का मिश्रण बहुत ही रोचक रहा जो दर्शकों को अंत तक बांधे रहा ।
55 कलाकारों ,
15 चालक दल के सदस्यों ने बहुत ही सफलतापूर्वक अभिनय किया। कॉन्सेप्ट हॉल में आयोजित इस नाटक को दर्शकों द्वारा वाहवाही मिली। मैनेजमेंट के पदाधिकारियों में उपाध्यक्ष मिराज डी शाह ने रित्विका चौधरी और सुपप्रवो टैगोर की टीम को शुभकामनाएँ दीं और विशेष रूप से प्रो दिलीप शाह को धन्यवाद दिया जिन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया और कॉलेज की ओर से सुविधाएं उपलब्ध कराई। नलिनी पारेख ने कॉलेज का मोमेंटो प्रदान कर उनका सम्मान किया।इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने
चैंपियनशिप तुर्की 22 के विजेता
भवानीपुर कॉलेज के खिलाड़ियों ने चैंपियनशिप तुर्की 2022 में रजत और कांस्य पदक विजेता बने - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने छाऊ विश्व स्तर पर तुर्की में हुए कई खेलों में अपना बेहतरीन प्रदर्शन दिया। कॉलेज के 3 खिलाड़ी
आशुतोष कुमार झा ने 90 किग्रा में कांस्य पदक, खुशी लकड़ा- 70 किग्रा में रजत पदक और चेसबॉक्सिंग फिट श्रेणी में कांस्य पदक जीते। ऋतिक प्रसाद- चेसबॉक्सिंग फिट श्रेणी में 60 किग्रा कांस्य पदक और कांस्य पदक जीते
हमारे देश भारत के लिए चौथी विश्व शतरंज बॉक्सिंग चैंपियनशिप तुर्की 🇹🇷 2022 में भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के खिलाड़ियों ने कुल 5 पदक जीते।इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के मैनेजमेंट पदाधिकारियों, डीन प्रो दिलीप शाह और शिक्षकगणों ने शुभकामनाएं दीं। भवानीपुर कॉलेज के स्पोर्ट्स एरिना के प्रमुख रूपेश गांधी ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया और गौरव का भाव व्यक्त किया। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
हम समर्थन के लिए अपने कॉलेज के आभारी हैं 🙏
ब्लड डोनेशन कार्निवाल 22
भवानीपुर कॉलेज ब्लड डोनेशन कार्निवाल 22 का उद्घाटन किया अध्यक्ष रजनी भाई दानी ने - - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने ब्लड डोनेशन कार्निवाल 2022 का उद्घाटन समारोह उत्सव के रूप में मनाया। विद्यार्थियों की बड़ी संख्या ने रक्त देकर पुण्य कार्य में अपना योगदान दिया। कॉलेज के अध्यक्ष रजनीकांत भाई दानी ने ब्लड डोनेशन कार्निवाल का उद्घाटन प्रमुख कार्यकर्ता को बैच पहनाकर कार्निवाल का आरंभ किया।प्रो दिलीप शाह ने सभी नये विद्यार्थियों का स्वागत किया ।वालिया हॉल में रक्तदान के लिए आए सभी छात्र छात्राओं का रक्त देने के पूर्व डॉक्टर द्वारा चेकप किया गया जिसकी पूर्ण व्यवस्था की गई । हर बेड के पास वोलिंटियर्स और हेल्थकेयर के कम्पाऊंडर मौजूद रहे।दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया कॉलेज के अध्यक्ष रजनीकांत भाई दानी ने ।साथ में संयोजक डीन प्रो दिलीप शाह, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिव्या उदेशी, प्रो गार्गी,लक्ष्मी, धानीश, नागेश पटेल और बड़ी संख्या में पदाधिकारियों की उपस्थिति रही। प्रदीप सेठ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए रक्तदान का महत्व बताया। अध्यक्ष रजनीकांत भाई दानी ने भी कॉलेज से जुड़े अपने अनुभवों को बताया।
भवानीपुर एडूकेशन सोसायटी कॉलेज में ब्लड डोनेशन कार्निवाल में 755यूनिट रक्त दान हुआ।
भवानीपुर एडूकेशन सोसायटी कॉलेज में ब्लड डोनेशन कार्निवाल में विद्यार्थियों ने बहुत अधिक संख्या में भाग लिया। लगभग 905 छात्र छात्राओं ने रजिस्ट्रेशन कराया।
जिसमें से 151 विद्यार्थी अनफिट रहे। रक्त दान में प्रोजेक्ट लाइफ फोर्स का योगदान रहा।सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि 603 विद्यार्थियों ने प्रथम बार रक्तदान किया। उपाध्यक्ष श्री मिराज डी शाह ने ब्लड डोनेशन के लिए विद्यार्थियों को विभिन्न सुविधाएं देकर उत्साहित किया। विद्यार्थियों के लिए नाश्ता, जूस, ग्लूकोज़ और रक्तदान के बाद भोजन की व्यवस्था की गई। संगीत और नुक्कड़ नाटक के द्वारा विद्यार्थियों ने रक्तदान उत्सव मनाया ।एनसीसी के कैडट और कैप्टन आदित्य राज ने व्यवस्था में अपना योगदान दिया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कार्यक्रम की जानकारी दी।
वाजा लेडिज विंग कोलकाता के पदाधिकारियों का चयन रिपोर्ट
वाजा द्वारा महिला पदाधिकारियों का मनोनयन - -
राइटर्स और जर्नलिस्ट एसोसिएशन कोलकाता इकाई के अध्यक्ष छपते छपते हिंदी दैनिक और ताजा टीवी के डायरेक्टर वरिष्ठ संपादक विश्वंभर नेवर के सानिध्य में ताजा टीवी के सभाकक्ष में वाजा लेडिज विंग कोलकाता के पदाधिकारियों की बैठक हुई। राइटर्स और जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव एवं संस्थापक शिवेंद्र प्रकाश द्विवेदी की उपस्थिति में इस बैठक को आयोजित किया गया। शिवेंद्र प्रकाश द्विवेदी ने साहित्य और पत्रकारिता को एक सिक्के के दो पहलू बताया और वाजा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय एकीकरण और सभी भारतीय भाषाओं पर चर्चा करते हुए भारत में वाजा की सोलह इकाइयों की चर्चा की।
विश्वंभर नेवर ने वर्तमान में बदलते हुए मीडिया पर प्रकाश डालते हुए हिंदी फिल्मों और नए बन रहे लोकप्रिय वेब सीरीज पर अपने विचार व्यक्त किए जो हिंदी में लिखे जा रहे हैं। महिला इकाई की महासचिव दी वेक की वरिष्ठ संपादक शकुन त्रिवेद ने कहा कि यह महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है जो साहित्य के माध्यम से एक अच्छा कार्य कर सकता है। कोलकाता के प्रतिष्ठित टीवी चैनल ताजा टीवी के कार्यालय में वरिष्ठ पत्रकार तथा राइटर्स एंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन इंडिया, कोलकाता इकाई के अध्यक्ष विशंभर नेवर द्वारा राइटर्स एंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन महिला इकाई कोलकाता के
नवनियुक्त पदाधिकारियों को जिनमें डॉ सुषमा हंस, पूनम त्रिपाठी, कविता कोठारी, सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया, उषा श्राफ को मनोनयन पत्र सौंपा गया, इस अवसर पर उपरोक्त एसोसिएशन की महिला शाखा की कोलकाता अध्यक्ष डॉ. वसुंधरा मिश्रा व अन्य तमाम पदाधिकारी मौजूद रहे।
वर्जिनिया वूल्फ के उपन्यास पर चर्चा (बुक रिडिंग सेशन में)
वर्जिनिया वूल्फ के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की लाइब्रेरी नोलेज रिसोर्स में बुक रिडिंग सेशन में बीसवीं सदी की प्रमुख अंग्रेजी लेखिका वर्जिनिया वूल्फ के दो उपन्यासों टू दि लाइट हाउस और श्रीमती डलोवे पर चर्चा की गई। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कहा कि वर्जिनिया वूल्फ के उपन्यास पाठकों की भावनाओं को बहुत गहराई तक खोदता है और कई भावनाओं को बाहर लाता है जो सभी को छूता है। सबके भीतर की इन आंतरिक अनुभूतियों को वह अद्भुत ढंग से यथार्थ से जोड़ता है। यह वास्तव में पाठक को कथानक के भीतर डुबो देता है, जो समुद्र की लहरों की तरह तीव्र भावनाओं से दूर हो जाता है
कम्युनिकेशन और सॉफ्ट स्किल ट्रेनर समीक्षा खंडूरी ने बताया कि वर्जीनिया वूल्फ के उपन्यास में एक तरह से कथा के माध्यम से क्या और कैसे को परिभाषित किया गया है।सतही समानता से अधिक उपन्यास उसकी वास्तविक जीवन की कहानी को दर्शाता है, व्याख्यात्मक आधारों का संदर्भ देता है , अवचेतन चिंतन जो कथानक को आगे बढ़ाता है कार्यक्रम के प्रारंभ में डीन प्रो दिलीप शाह ने कहा कि लेखक द्वारा रचित पात्रों का चित्रण ही जीवंत होता है तभी लेखिका या लेखक प्रसिद्धि प्राप्त करता है। समीक्षा ने मिसेज़ डलोवे उपन्यास के पात्रों की चर्चा करते हुए कहा कि उपन्यास में लेखिका एक नैरेटर की तरह है। दोनों उपन्यास के कुछ अंशों को विद्यार्थियों ने बहुत ही प्रभावशाली ढंग से पढ़ा। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि दुनिया की सभी भाषाओं में लिखे श्रेष्ठ साहित्य और लेखक के व्यक्तित्व को हमें जानना चाहिए तभी विचार समृद्ध होते हैं। फज़ल करीम ने बुक रिडिंग का महत्व बताया। उज्जवल करमचंदानी ने उपन्यास की महत्वपूर्ण उक्तियों को पढ़ा जो जीवन की महत्वाकांक्षा, सफलता और असफलता को दर्शाता है। नम्रता चौधरी ने उपन्यास के आधार पर जीवन में बदलते हुए संबंधों पर आज के संदर्भ में अपनी बात कही जो प्रासंगिक है। आदित्य मुखर्जी, कशिश शॉ, अनिकेत दास गुप्ता, रूपेश कुमार झा, शेख मोहम्मद जहिरुददीन, यश सिन्हा का सक्रिय योगदान रहा। संयोजक डॉ वसुंधरा मिश्र और समीक्षा ने डीन प्रो दिलीप शाह और पुस्तकालय के अधिकारियों को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस कार्यक्रम के लिए सुविधा उपलब्ध कराई।
साहित्यिकी संस्था मधुपुर आबाद रहे - जलते दीप जोधपुर एडिशन में फिर रिपोर्ट लिखी
साहित्यिकी संस्था ने काव्य संग्रह 'मधुपुर आबाद रहे' पर चर्चा - -
कोलकाता की प्रसिद्ध संस्था साहित्यिकी ने लेखिका और साहित्यकार डॉ गीता दूबे के प्रथम काव्य संग्रह 'मधुपुर आबाद रहे' पर चर्चा रखी। इस कार्यक्रम में कोलकाता के विशिष्ट साहित्यकारों, कवि और आलोचकों ने अपने वक्तव्य रखे। इसका आयोजन जनसंसार सभागार में किया गया ।परिचर्चा आरंभ होने के पूर्व जनसंसार के संस्थापक तथा दिवंगत लेखक पत्रकार गीतेश शर्मा को बड़ी शिद्दत से याद किया गया जिनके सानिध्य में नियमित विचार गोष्ठियों हुआ करती थीं।
साहित्यिकी की सचिव डॉ मंजू रानी गुप्ता ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए गीता दूबे की कविताओं में बहुआयामी परिदृश्य का जिक्र किया और शुभकामनाएँ दी। बबिता मांधडा़ ने मधुपुर आबाद रहे संग्रह की कुछ कविताओं का पाठ किया।
परिचर्चा में भाग लेते हुए मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित प्रख्यात आलोचक डॉ अरुण होता ने काव्य संग्रह पर अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि इस संग्रह की कविताएँ स्व से ऊपर उठ कर पर की संवेदना को मुखरित करते हुए अपने समय की बड़ी चिंताओं और समस्याओं को विभिन्न बिंबों और भाव बोध के साथ व्यक्त करती हैं। स्त्री संवेदना, प्रेम, पर्यावरण, भूमंडलीकरण, प्रकृति- सौंदर्य, विवाह, कोरोना काल आदि कविताएँ शिल्प और विषय के स्तर पर विविधता लिए हैं।
जानी मानी समीक्षक और शिक्षाविद् डॉ इतु सिंह ने गीता दूबे की कविताओं की समीक्षा करते हुए कहा कि इस संग्रह में नारी जीवन के संघर्ष और अनुभव के अलावा जिस तत्व ने मुझे सबसे ज़्यादा आकर्षित किया,वह प्रेम है। परंतु उस पर कहीं पर्दा पड़ा है, उन कविताओं का दरवाज़ा जाने कब खुलेगा। डॉ गीता की कविताएँ अंतर्जगत की अपेक्षा बहिर्जगत के आवेग ज़्यादा हैं, जो उन्हें व्यथित करती हैं। कवयित्री की छोटी कविताएँ अल्प शब्दों में ही बहुत कुछ कह जाती हैं। देर तक पाठक को स्पंदित करती रहती हैं। यह उनकी छोटी कविताओं का जादू है।
वरिष्ठ कवि पत्रकार रावेल पुष्प ने कहा कि गीता की अधिकतर कविताएँ नारी मन की व्यथा का इज़हार करती हैं और वे रूमानियत के प्रतीक चांद की चाहत नहीं करतीं बल्कि तपते हुए सूरज को मांगती हैं जिसकी तेज रोशनी में वे तपकर निखर सकें।
बाबूलाल शर्मा,शंभुनाथ, आशुतोष सिंह, विजय गौड़ ने भी गीता दुबे के काव्य संकलन की कविताओं की विविधता के साथ उनके विभिन्न साहित्यिक पहलुओं पर प्रकाश डाला ।
कवयित्री गीता दूबे ने अपनी सृजनात्मक यात्रा के विभिन्न पड़ावों का जिक्र करते हुए कहा कि कविताएँ उनकी सखी की तरह हैं जिनसे वे अपने मन की बातें दिल खोलकर बखूबी कर सकती हैं।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में वरिष्ठ लेखिका रेणु गौरीसरिया ने पुनरावृत्ति से बचते हुए कहा कि गीता की कविताओं में प्रेम का शाश्वत अद्भुत राग सर्वत्र बिखरा हुआ है। धर्म, राजनीति और समाज में व्याप्त विद्रूपताएँ और विसंगतियों से उपजी कचोट उनकी कविताओं में स्पष्ट झलकती है।
इस परिचर्चा में कोलकाता के साहित्य, समाज और संस्कृति क्षेत्र के प्रमुख विद्वानों की उपस्थिति उपस्थिति रही। श्री शैलेन्द्र,शर्मिला बोहरा जालान, उमा झुनझुनवाला, प्रेम कपूर, सुषमा हंस, सुषमा त्रिपाठी, सूफ़िया यास्मीन, दुर्गा व्यास, अनिता ठाकुर, प्रमिला धूपिया, नमिता जायसवाल, सरिता बेंगानी, चंदा सिंह, कविता कोठारी, अल्पना नायक, रचना पांडेय, प्रीति सिंघी, लिली शाह, सत्य प्रकाश तिवारी, रोहित राम, विशाल सिंह, पूर्ति खंडूरी, महेन्द्र नारायण पंकज, शाहिद फरोगी, सेराज खान बातिश, प्रभाकर चतुर्वेदी आदि ने सक्रिय भाग लिया।
काव्य संग्रह मधुपुर आबाद रहे की परिचर्चा के बहाने तथा अच्छी उपस्थिति से जन संसार सभागार एक बार फिर गुलजार हो गया।यह जानकारी वरिष्ठ पत्रकार रावेल पुष्प ने दी ।
संलग्न चित्र: मधुपुर आबाद रहे पर हुई परिचर्चा में शामिल लेखक तथा विशिष्ट श्रोता.
प्रेषक: रावेल पुष्प वरिष्ठ पत्रकार कोलकाता 94341 98898
साहित्यिकी संस्था में मधु कांकरिया
हम अच्छा इंसान नहीं बना रहे हैं : मधु कांकरिया
प्रसिद्ध साहित्यकार मधु कांकरिया हिंदी उपन्यासकारों में शोधपरक उपन्यासों के लिए जानी जाती हैं। साहित्यिकी संस्था ने "ढलती सांझ का सूरज" चर्चा करवाई जिससे सभी लाभान्वित हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ मंजु रानी गुप्ता ने मंच पर आमंत्रित प्रसिद्ध उपन्यासकार मधु कांकरिया, कलकत्ता विश्वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष साहित्यकार डॉ राज्यश्री शुक्ला (भारतीय भाषा परिषद की सचिव) और वक्ता कथाकार और साहित्यकार डॉ शुभ्रा उपाध्याय कार्यक्रम की अध्यक्ष दुर्गा व्यास (प्रसिद्ध समाज सेवी और साहित्यकार, राजस्थान ब्राह्मण संघ की अध्यक्ष ) सभी विदूषियों ने अपने वक्तव्य रखे।
रेवा जाजोदिया ने संचालन करते हुए उपन्यासकार मधु कांकरिया का परिचय दिया।
ढलती सांझ का सूरज उपन्यास पर डॉ राज्यश्री शुक्ला ने । बताया कि यह उपन्यास वस्तुतः स्त्री केंद्रित उपन्यास है जिसमें एक माँ पूरे देश अर्थात भारत माँ के रुप में विस्तार पाती है। भौतिकवाद के इस दौर में किसानों की आत्महत्याओं की समस्या विशेषकर महाराष्ट्र के विदर्भ की समस्याएं, बच्चों का विदेश भेजना, भौतिक सुख सुविधाओं के घेरे में पड़कर उपन्यास के पात्र अविनाश का अपनी माँ से मिलने की चाह होते हुए भी बीस वर्ष स्विट्जरलैंड में रह जाना । सफलता के साथ जीवन को सार्थक कैसे बनाएं जैसे अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं पर डॉ शुक्ला ने अपने विचार रखे।किसानों की आत्महत्या, केंद्र में स्त्री, किसान जीवन के अतिरिक्त उपन्यास में सभ्यता संस्कृति और समाज की चर्चा है। जीवन की सफलता के क्या मायने हैं बच्चे कैसे सफल होगें। इस भूमंडलीकरण के दौर में सुख- सुविधाओं के पीछे भागते बच्चों को माँ के दिए संस्कार काम आते हैं और वे देश के लिए अपने उत्तरदायित्व को समझते हैं। माँ देश में रहकर अकेले हताश नहीं होती बल्कि वह एक तार टूटता है तो दूसरे तारों को जोड़ने का कार्य करती है। यही कारण है कि बीस साल बाद भी उसका बेटा अविनाश पूरे महाराष्ट्र के विदर्भ के किसानों के साथ साथ पूरे भारत की चिंता करता है। जननी जन्मभूमि माँ से जुड़ी है भारत की प्राण नाड़ी को समझना है। उपन्यास में बड़ी सीमा के दर्शन होते हैं। सफल सार्थक उपन्यास है जो समाधान की दिशा में ले जाता है।
वक्ता डॉ शुभ्रा उपाध्याय ने उपन्यास के मूल में राष्ट्रीय भावना को महत्वपूर्ण बिंदु माना है। विदेश में
बेटा अविनाश माँ को याद करता है लेकिन फिर भी उसकी आत्मा भारत माँ से ही जुड़ी हुई है। वस्तुतः पात्र
अविनाश के चरित्र में मूलरूप में माँ के दिए संस्कारँ है। बीस वर्षों के बाद भारत की बदलती स्थिति और समसामयिक समस्याओं पर लिखा उपन्यास दो खंडों में है । ।इसमें राष्ट्रीय चेतना की भावना जबरदस्त है। उपन्यास का शिल्प नया है।सफलता स्वयं तलाशनी पड़ती है। यह पहला उपन्यास है जहाँ स्वसहायता की बात आती है अविनाश किसानों के गांव की सड्कों को हाइ वे से जोड़ता है। हमें सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं रहकर स्वयं सहयोग देने से किसानों की बहुत सी समस्याएं हल हो सकती हैं। एनजीओ और कई लोग व्यक्तिगत रूप से सहयोग देने के लिए आगे आ जाते हैं। उपन्यास की पंक्तियाँ हमें किसान के विस्तार के साथ हमारे भीतर के किसान का भी विस्तार करने के लिए प्रेरित करता है ।
रेवा जाजोदिया ने अपने सफल संचालन में उपन्यास को सफल और सार्थक बताते हुए कहा कि माँ ने फलक का विस्तार किया वहीं बेटे को पत्र द्वारा विरासत में भारत प्रेम को विस्तार दिया है । ढलती सांझ का सूरज शोधपरक उपन्यास है।
मधु कांकरिया ने सात उपन्यास, 70-75 कहानी लिखी है और कई साहित्यिक पुरस्कार से सम्मानित हुईं हैं। वे जमीनी स्तर की सिपाही हैं । वे इच वन टीच वन एनजीओ से जुड़ी हैं। अनाथ बच्चों को साक्षर करने का बीड़ा उठाया ।भारतीय भाषा परिषद द्वारा पुरस्कृत और उदयपुर से दिए
भीखारी सम्मान मिला।
मधु कांकरिया का लेखन भावना दर्शन परक है। वे मानती हैं कि आज भौतिकतावाद चरम पर हैऔर सांस्कृतिक जीवन मूल्यों का ह्रास हुआ है । जरुरत से ज्यादा सुविधाएं हैं। बुद्ध और गीता का ह्रास हुआ है , जीवन की समस्याओं को दूर किया जा सकता है।आज बच्चों का बचपना कम हो गया है और आत्महत्या बढ़ रही है। हम अच्छा इंसान नहीं बना रहे हैं। जीवन सार्थक हो तो सफल हो सकता है।
शर्मिला वोहरा ने - उपन्यास की शीर्ष लाइन समर्थ सफलता के आधार पर उपन्यास के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला जिसकी सूत्रधार स्वंय लेखिका है।
अध्यक्षीय वक्तव्य में दुर्गा व्यास ने सभी वक्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि उपन्यास बहुत ही महत्वपूर्ण और समसामयिक है ।अविनाश जाता है तो खरा सोना था लेकिन लौटा तो विचलित होकर। स्वनिर्भर हो जाएं तो समस्याएं खत्म हो जाती है। अम्मा के चरित्र का विस्तार होता है। लेखिका ने महाराष्ट्र की पूरी चित्रात्मक यात्रा उपन्यास में करवाई है जो विशिष्टता है। सार्थक लेखन, दार्शनिकता नैनसी को लिखे पत्रों में दिखाई पड़ती है ।
आशा जायसवाल ने धन्यवाद ज्ञापन दिया
यह कार्यक्रम भारतीय भाषा परिषद के छोटे सभागार में हुआ। वाणीश्री बाजोरिया और डॉ मंजू रानी गुप्ता ने सक्रिय योगदान दिया।
कबड्डी टीम चैंपियनशिप 22
भवानीपुर कॉलेज की लड़कियों की टीम कबड्डी चैंपियनशिप 22में प्रथम स्थान पर रही - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज में होने वाले भवानीपुर कबड्डी चैंपियनशिप 22 में लड़कों की अट्ठाइस टीमों और लड़कियों की चार टीमों ने भाग लिया। लड़कियों ने अपनी टीमों में मजबूत स्थिति बनाई और फायनल में प्रथम स्थान पर रहीं। लड़कों की अट्ठाइस टीमों में से लड़कों ने भी प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान बनाया ।दोनों ही टीमों का मुकाबला बहुत ही रोमांचक भरा रहा। इस अवसर पर भवानीपुर दोनों टीमों के बीच सेमीफाइनल का मुकाबला भी टक्कर का रहा ।फाइनल की चयनित टीमों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। गत दो वर्षों से लड़कियाँ भी कबड्डी में रुचि ले रही हैं जो एक नयी पहल है।
इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने टॉस उछाल कर कबड्डी टूर्नामेंट 22 का उद्घाटन किया।भवानीपुर स्पोर्ट्स एरिना के प्रमुख रूपेश गांधी ने सभी विजेताओं को मेडल प्रदान किए। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कबड्डी टीम के प्रथम सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले लड़की और लड़के को ट्राफी देकर उनका उत्साहवर्धन किया। प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी ने दोनों टीमों का जायजा लिया। अट्ठारह वोलिंटियर्स ने दिन भर चलने वाले कबड्डी चैंपियनशिप के आयोजन में सक्रिय भूमिका अदा की। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
एनसीसी दिवस 22
भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी में 74वें एनसीसी स्थापना दिवस का आयोजन - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने अपना पहला एनसीसी दिवस बड़े उत्साहपूर्वक मनाया।
छात्र मामलों के हमारे डीन - प्रोफेसर दिलीप शाह, सम्मानित डीजी बीबीए
विभाग के डॉ सुमन चक्रवर्ती सहित प्रतिष्ठित सेना कार्मिक
कमांडिंग ऑफिसर 31 बंगाल बटालियन एनसीसी, कर्नल सोमनाथ गुप्ता, मेजर समर प्रताप, 4/9
गोरखा राइफल्स और कमांडिंग ऑफिसर नंबर 1 बंगाल एयर स्क्वाड्रन, ग्रुप कैप्टन विष्णु शर्मा उपस्थिति ने कार्यक्रम का गौरव बढ़ाया।
जोश से भरे राष्ट्रीय कैडेट कोर पर एक संक्षिप्त परिचय के बाद, दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में फ्लेम कलेक्टिव और एनसीसी के छात्रों द्वारा वंदना नृत्य किया।
इसके बाद सीडीटी अदिति ए संजय और सीडीटी रोहित दुबे द्वारा रचित एक कविता का पाठ हुआ,जिसका शीर्षक 'कैडेट की अभिलाषा' था फिर अग्नि मशाल द्वारा भारत माता को श्रद्धांजलि दी गई । छात्र
क्रेस्केंडो सामूहिक के छात्रों ने देश भक्ति गीत गाया जिसका सभी ने आनंद लिया।
इसके बाद पूरे भारत में विभिन्न नृत्य रूपों और संस्कृतियों का सम्मिलन हुआ।
एनसीसी कैडेटों द्वारा "एक भारत श्रेष्ठ भारत" का प्रदर्शन करते हुए प्राण-प्रतिष्ठा की गई। भवानीपुर कॉलेज के
कैडेटों ने हाल ही में जोधपुर राजस्थान में आयोजित कैम्प 22 में अखिल भारतीय वायु सैनिक ने कमाल का प्रदर्शन किया एक पत्र के साथ सम्मानित किया गया जो काबिलेतारीफ था।
सीडब्ल्यूओ स्नेहा सेठिया, सीडब्ल्यूओ शशांक शेखर तिवारी, सी/एसजीटी सबिहा नूर, सी/एसजीटी की सराहना
राहिल हक, एलएफसी मुकद्दस बिन नासिर और सीडीटी रोहन सिंह चावला। डीन प्रो दिलीप शाह ने लिया
संबंधित अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया।
कर्नल गुप्ता द्वारा प्रेरक वक्तव्य से अत्यधिक प्रेरणा मिली।
सभी को भारतीय सेना द्वारा एक शानदार बैंड प्रदर्शन के लिए निर्देशित किया गया था
बैंड के बाद मिलिट्री कॉम्बैट में इस्तेमाल किए गए वेपनरी के साथ-साथ ए
4/9 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट के हमारे एयर विंग कैडेटों द्वाराएयरोमॉडलिंग का प्रदर्शन किया।
भवानीपुर स्कूल और कॉलेज दोनों के छात्रों और शिक्षकों ने
हथियारों के उपयोग और निर्माण के विषय में जानकारी ली जो हरेक व्यक्ति के लिए रोमांचित करने वाला रहा।
पूरी प्रदर्शनी न केवल हमारे स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए बल्कि अन्य कॉलेजों के एनसीसी इकाइयों से संबद्ध के लिए भी खुली थी।
एनसीसी दिवस समारोह का दर्शकों ने खूब लुत्फ उठाया और यह वास्तव में एक
सफल प्रदर्शन रहा। कैडेटों की व्यवस्थाओं और प्रयासों की सभी ने खूब सराहना की।
बीबीए संकाय डायरेक्टर जनरल डॉ सुमन चक्रवर्ती और प्रोफेसर दिलीप शाह ने एनसीसी दिवस समारोह के लिए विद्यार्थियों को विभिन्न सुविधाएं देकर उत्साहित किया ।
पुस्तक ईर्ष्या नहीं करतीं
"यदि आप अन्य पुस्तकें पढ़ते हैं तो पुस्तकें ईर्ष्या नहीं करतीं”- अनाम
किताब पढ़ना एक रिवाज और सौंदर्य दोनों है। यह हमें मानव भाग्य और दुर्दशा से तो जोड़ता ही है, मानव संवेदना से जोड़ने का अच्छा जरिया है।
भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज के पुस्तकालय नोलेज अड्डा में 'पुस्तक वाचन सत्र' का आयोजन किया गया जिसमें
आधुनिक युग की प्रसिद्ध लेखिका वर्जीनिया वूल्फ पर चर्चा की गई। वूल्फ
व्यापक रूप से आधुनिकतावाद की एक प्रसिद्ध लेखिका हैं जिन्होंने लेखन के आधुनिकतावादी विषयों के साहित्य को आगे बढ़ाया।
उनकी लोकप्रिय रचनाओं के मनोविश्लेषणात्मक पठन के लिए सराहना की गई।
एक घंटे का यह सत्र सुबह साढ़े दस बजे से
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की लाइब्रेरी, नॉलेज रिसोर्स सेंटर में संपन्न हुआ। डॉ. वसुंधरा मिश्रा व समीक्षा खंडूरी प्राध्यापक उपस्थित थे। उनकी उपस्थिति स्पष्ट रूप से प्रेरणादायक थी।
छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह ने पाठकों के सामने आकर इस अवसर पर कहा कि विद्यार्थियों में पढ़ने की प्रवृत्ति बढ़े इसके लिए यह कार्यक्रम बहुत ही उपयोगी और सार्थक है।
उन्होंने अपनी अंतर्दृष्टि साझा करते हुए कहा कि , "किताबें चरित्रों को समझने के लिए पढ़ें' और इसीलिये वूल्फ' को आज तक याद किया जाता है और उनका सम्मान किया जाता है।
वसुंधरा मिश्र ने वूल्फ के जीवन और नुकसान पर एक प्रभावशाली नोट देकर शुरुआत की। उनका कहना है कि
प्रस्तावित तथ्य और भावनाएँ वर्जीनिया के अस्तित्व के साथ बराबर याद की जाती है। वे आज भी प्रासंगिक हैं।
उपन्यास की आंतरिक आवाज, मौन, अनुभव और समर्पण को उजागर करना दिलचस्प है।
भाषा शैली, उपन्यास के भीतरी हावभाव को समझें और इसे पढ़ें तो कठिन नहीं लगेगा ।
श्री एस एम फज़ल करीम, जो गणित ऑनर्स के विद्यार्थी हैं बुक रिडिंग सेशन के प्रतिनिधियों में से एक हैं। जिन्होंने
पुस्तक पठन सत्र, इसकी शुरुआत और स्वागत पर बात की। सबसे महत्वपूर्ण में से एक
लेखन की शैली 'चेतना की धारा', जो अनिवार्य रूप से वही है जो हमारे सिर के अंदर जाती है और है
मन के इधर-उधर जाने के बारे में सुश्री खंडूरी ने कहा था, जिन्होंने वूल्फ के प्रसिद्ध उपन्यास 'मिसेज़ डालोय' उपन्यास में स्थापित पाया।
उन्होंने बताया कि दो तीन उद्धरणों को छोड़कर पूरे पाठ में कोई उद्धरण नहीं है जिसमें वह वास्तव में सीधे किसी को संबोधित करने वाले व्यक्ति को उद्धृत करती है और संपूर्ण कथन तीसरा है।
व्यक्ति के दृष्टिकोण .. श्रीमती डलाय प्रभावशाली हैं। नम्रता चौधरी, पीजी सेमेस्टर की छात्रा
अंग्रेजी विभाग से हैं जिन्होंने उपन्यास की चेतना धारा की व्याख्या की। यह अभिव्यक्ति का सबसे सच्चा और अंतरंग रूप है।
'लाइटहाउस' लाक्षणिक रूप से एक जगह, लक्ष्य के रूप में खड़ा होता है जिसे आप प्राप्त करना चाहते हैं। उसे कहना पड़ा।
यूजी सेम तीन अंग्रेजी विभाग से उज्जवल करमचंदानी ने कोटेशन पढ़े, सभी का मानना है कि वूल्फ सशक्त लेखिका है।
उनकी उम्र की अन्य महिलाएँ और आज की पीढ़ी के बीच अभी भी बहुत कुछ वैसी ही स्थितियाँ जारी हैं। आदित्य मुखर्जी यूजी सेम तीन अंग्रेजी के छात्र ने उद्धरण के साथ दावा किया कि वूल्फ एक महान दिमाग वाली उभयलिंगी है, "जो एक बहुत ही
महत्वपूर्ण अवधारणा ”। उन्होंने कोलरिज के इस दावे की ओर इशारा किया कि "एक उभयलिंगी मन झरझरा होता है। यह संचारित करता है
भावनाओं को बिना किसी बाधा के..” कासिस शॉ, फिर से, यूजी सेम तीन अंग्रेजी की एक छात्रा ने एक विपरीत बात उठाई।
अपने दृष्टिकोण और एक संक्षिप्त वक्तव्य द्वारा प्रोत्साहित किया गया था।
अन्य छात्र जो इस कार्यक्रम के हिस्सा थे और वूल्फ को उत्साह से पढ़ते थे, वे थे रुपेश कुमार झा,अनिकेत दासगुप्ता, यश सिन्हा। तीनों पाठक बी.कॉम ऑनर्स से थे जिन्होंने
साहित्य के सार और प्रस्फुटन की सराहना करते हुए सत्र का भा लिया ।
अंत में, डॉ मिश्रा ने धन्यवाद देते हुए कहा कि की कि मूल रूप से पाठ के अनुवादित साहित्य को पढ़ना वास्तव में महत्वपूर्ण है। इससे विचारों का आदान-प्रदान होता है। विश्व ही नहीं हमें भारत की विभिन्न भाषाओं के साहित्य को अनुवाद के माध्यम से जाना जाता है जो हमें मनुष्य की संवेदना से जोड़ता है।
हमें संस्कृति, मूल्यों के साथ संवाद के लिए साहित्य पढ़ने की आवश्यकता है। यह रिपोर्ट भी छात्र ने अंग्रेजी भाषा में लिखी थी जिसे मैंने हिंदी में आपके लिए दी है। कुछ अपनी तरफ से जोड़ा है।
भारत में शिक्षा के वैचारिक सोपान (प्रभात खबर में प्रकाशित)
भारत में शिक्षा के वैचारिक सोपान---डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता
भारत वर्ष की विचार परंपरा के इतिहास का अध्ययन करने पर पता चलता है कि भारतीय साहित्य का एक बड़ा अंश हमें ऐसे प्रश्नों के समाधानों से भरा मिलता है जिनका उद्देश्य विचारकों द्वारा विभिन्न जिज्ञासाओं के उत्तर देना और उसे आध्यात्मिक आधार पर विश्लेषण करना था। यदि हम छठी शताब्दी का समय देखें तो उसे स्थूल रूप से गौतम बुद्ध का समय माना गया है । यह युग विभिन्न विचारधाराओं की उथल-पुथल विशेषकर धार्मिक और दार्शनिक मतों के अनेक आंदोलनों का था । एक शताब्दी पूर्व अर्थात मिलेटस निवासी थेलिस( मृत्यु सन् 624 ईसापूर्व) के जीवन काल से ही पश्चिम के यूनान देश में जगत के मूलाधार का अन्वेषण कार्य आरंभ हो चुका था और बहुत से चिंतनशील व्यक्ति सृष्टि तत्वों से लेकर कार्य कारण संबंधी नियम एवं संघातवाद आदि जैसे विविध प्रश्नों की छानबीन में प्रवृत्त होते जा रहे थे। उस समय तक ईरान में महात्मा जरथुस्त्र के अनुयायियों ने परम तत्व के इष्ट- अनिष्ट पर द्वंदात्मक रूप का समाधान आरंभ कर दिया था। संभवत चीन देश में भी लाओत्से तथा उसके सहयोगी ताओ प्रतिपादन एवं प्रचार में लगे हुए थे। गौतम बुद्ध के समकालीन समझे जाने वाले यूनान के ही पाइथागोरस ने (सन 582 से 506 ईसा पूर्व) आध्यात्मिक प्रश्नों पर विचार किया। परमैनाडाइस ने अपने आदर्शवाद की नींव डाली तथा सोफी प्रोटागोरसव आदि ने अपनी तर्क प्रणाली का प्रचार किया जिसका एक विशिष्ट परिणाम प्रसिद्ध महापुरुष सुकरात की विचारधाराओं में दीख पड़ता है। चीन के कन्फ्यूशियस ने भी नैतिक जीवन संबंधी विचार पद्धति को दिया तो उसके अनुयाई मेंसियस द्वारा पुष्टि पाकर पीछे और भी सुव्यवस्थित रूप में प्रचलित हुई।
उस काल के विचारशील व्यक्ति न केवल अपने निजी अनुभवों के बल पर खुद की नवीन भावनाओं को जन्म देते थे प्रत्युत वे परंपरागत बातों की समीक्षा करने से भी नहीं चूकते थे ।इस प्रकार विभिन्न विचारधाराओं से आलोड़न- विलोड़न द्वारा जहांँ एक ओर बहुत से नवीन दार्शनिक मतवाद अपना स्वरूप ग्रहण करते जा रहे थे वहाँ दूसरी ओर प्राचीन स्थापनाओं का विकास व परिष्कार भी होता जा रहा था।
भारतवर्ष की विचार परंपरा के इतिहास का अध्ययन करने पर भी पता चलता है कि यहांँ पर उक्त प्रकार की प्रवृतियांँ प्राचीन वैदिक युग से ही काम करती आ रही थीं और आध्यात्मिक विषयों से संबंध रखने वाले विविध प्रश्न - उत्तरों के आधार पर कई उपनिषदों की रचना भी हो चुकी थी। गौतम बुद्ध के आविर्भाव काल तक निर्मित हो चुके विशाल भारतीय साहित्य का एक बहुत बड़ा भाग आज हमें ऐसे प्रश्नों के समाधान से ही भरा मिलता है। जिज्ञासु द्वारा दृश्यमान जगत की सृष्टि और उसके आधारभूत परम तत्व, मानव जीवन के रहस्य आदि जैसी जटिल समस्याओं के विषय में उठाए गए हैं। जिनके उद्देश्य में विचारों द्वारा स्वानुभूतिपरक उत्तर दिए गए हैं ।मन किसके द्वारा प्रेषित होता है? किस से युक्त होकर प्राण गमन करता है ?किसकी प्रेरणा से वाणी का स्फुरण होता है अथवा हमारे नेत्र एवं श्रौत्र अपने -अपने कार्य में क्या करते हैं? तथा हम जिसकी उपासना करते हैं वह आत्मा कौन है जिसकी प्रेरणा से प्राणी देखता है ,सुनता है , सूंँघता है? इसी प्रकार जगत का कारण ब्रह्म कैसा है ?हम किस से उत्पन्न हुए हैं? किसके द्वारा जीवित रहते हैं ?कहाँ पर स्थित हैं?और किसके द्वारा सुख -दुख में प्रेरित होकर हम संसार -यात्रा का अनुवर्तन करते हैं ?बहुत सारे प्रश्न हैं जिनका उत्तर हमें काल ,स्वभाव ,नियति , भूत एवं पुरुष जैसे कारणों के आधार पर किए गए सुंदर विवेचन में भी मिला करते हैं। इस साहित्य में ऐसे भी हैं जिनमें परंपरागत बातों के प्रति आस्था प्रकट की गई है जैसे कहीं प्राप्ति के साधन की दृष्टि से यज्ञ विधान आदि के प्रति असमर्थता प्रदर्शित की गई है अथवा केवल तर्क -वितर्क ,बुद्धि अथवा वेद आदि के अध्ययन के द्वारा उपलब्ध पांडित्य को भी अपर्याप्त ठहराया गया है।
भारतवर्ष में उन दिनों बहुत पहले से ही दो विभिन्न संस्कृतियों के उदाहरण भी हमें समानांतर मिलते हैं ,एक श्रमण संस्कृति और दूसरी ब्राह्मण संस्कृति।
जिस क्षेत्र में बुद्ध का जन्म हुआ जिसे उन्होंने अपने समसामयिक और दूसरे महापुरुष महावीर ने भी अपने मतों का प्रचार केंद्र बनाया। उपनिषद काल से ही आध्यात्मिक एवं रहस्यमई बातों पर विचार -विनिमय करने तथा परंपरागत वैदिक यज्ञ की अपेक्षा ज्ञान को अधिक महत्व देने वाले की कर्मभूमि है। इसलिए हम देखते हैं कि गौतम बुद्ध के आविर्भाव काल तक वहांँ विचार स्वतंत्रता को महत्व दिया जाने लगा।
महाभागवत श्री भीष्मपितामह जी ने वृहस्पति जी को वक्तृत्व शक्ति में सर्वश्रेष्ठ बताया है -'वक्ता बृहस्पति समो न ह्यन्यो विद्यते क्वचित' (महाभारत, अनु. 111/5)।बृहस्पति जी हमें यह शिक्षा देते हैं कि लोक व्यवहार में वाणी का प्रयोग बहुत ही विचारपूर्वक करना चाहिए।वास्तव में वाग्देवी या वाणी ही मनुष्य को शिक्षित करने का आधार है।
शिक्षा का महत्व बताते हुए अरस्तू ने ठीक ही कहा है कि शिक्षा मनुष्य की मनीषा का विकास है।
तैत्तिरीय उपनिषद में विद्या शब्द को दार्शनिक अर्थ में प्रयुक्त किया है। यथार्थ ज्ञान है आत्मा का प्रकाश है।ज्ञान की व्याख्या दो प्रकार से की जा सकती है -प्रथम व्यवहारिक ज्ञान, द्वितीय आध्यात्मिक ज्ञान ।सांसारिक विषयों की जानकारी व समाज को व्यवहारिक ज्ञान कहा जाता है ।यह ज्ञान जन्म से ही माता-पिता व आगे चलकर शिक्षण संस्थाओं द्वारा प्राप्त होता है। इस शिक्षा का उद्देश्य जीविकोपार्जन के सामाजिक साधन जुटाना सामाजिक जीवन जीने की कलाओं में व्यस्त रहना है। वर्तमान समय और परिस्थिति ऐसी है कि लोगों के विचार और वृत्तियांँ अधिकांशतः बुरे मार्ग की ओर खिंच जाते हैं। भारतीय मनीषा एवं भारतीय संस्कृति की चिंतन धारा हमें असत्य से सत्य की ओर ले जाने वाली है। कहा भी गया है -असतो मा सद्गगमय तमसो मा ज्योतिर्गमय मृत्योर्मामृतं गमय।
सात्विक और शालीन चिंतन उत्कृष्ट विचारों का ही परिणाम है ।परिवार और समाज की सही दिशा उत्कृष्ट विचारों से ही मिलती है ।किसी भी राष्ट्र की उन्नति व विकास वहांँ के लोगों में व्याप्त उत्कृष्ट विचारों का ही परिणाम होता है। यह भी सच है कि विगत कुछ वर्षों में जिस प्रकार मानवीय मूल्यों और नैतिक आदर्शों का निरंतर ह्रास हो रहा है ,वह शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ पूरे राष्ट्र के लिए एक प्रश्न बनकर खड़ा है जिसका हल ढूंँढना आज प्रत्येक बुद्धिजीवी के लिए नितांत आवश्यक है। डॉ राधाकृष्णन ने बहुत पहले इस प्रकार के विध्वंस कार्य प्रवृत्तियों को 'दुर्भाग्यपूर्ण और मानवता की भावना के लिए अपमानजनक 'बता दिया था। आज हम उसी विषमतापूर्ण स्थिति में जी रहे हैं लेकिन भारतीय संस्कृति कभी भी निराशावादी नहीं रही, वह सदैव ऊर्ध्वगामी रही। विवेकानंद ने कहा कि भारत भूमि ने शाश्वत सत्य की दुंदुभी बजाई है, यहांँ मनुष्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है। 'न ही मानुषात् श्रेष्ठतरं हि किंचित।'
माता - पिता के पश्चात एक बच्चे के बहुमुखी व्यक्तित्व के विकास में विद्यालय और उसके शिक्षक गणों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। उसे केवल हमारी बुद्धि की ही सहायता मिल सकती है, आत्मा को नहीं। अतः गुरु का भी ज्ञानी होना आवश्यक है नहीं तो स्थिति यही होती है- जाका गुरु भी अंधड़ा चेला खरा निरंध। अंधे अंधा ठेलिया दोनूं कूप पडंत।।
इस प्रकार शिक्षा कैसे मिले ,यह विचारणीय है ।उच्च शिक्षित व्यक्ति के लिए भी कहा जाता है कि इसकी शिक्षा अधूरी है ।एक बच्चे का सर्वतोमुखी विकास वही है जिससे वह एक उच्च कोटि का सामाजिक मनुष्य बने ।वह अपने विकास के साथ-साथ दूसरों के विकास में भी सहायक बने उसके अंदर त्याग, निस्वार्थ सेवा, परोपकार ,दया, सहानुभूति आदि की भावना निहित हो। उसमें देश प्रेम हो, वह किसी का शोषण ना करे और अनुशासित रहे। सच पूछा जाए तो शिक्षा का क्षेत्र बहुत ही विस्तृत है ।विद्यालय आपको गढ़ता है लेकिन स्वयं की खूबियांँ तो समाज में रहकर ही उभरती हैं।
विद्यालयों में हमें धार्मिक नैतिक शिक्षा दी जाती हैं लेकिन कोरे उपदेश में सद्व्यवहार और सदाचार की शिक्षा नहीं दे पाते ।कथनी और करनी में अंतर होता है। हम अपने विद्यालय के शिक्षकों को और उनकी शिक्षाओं को बड़े होने के बाद भी याद करते हैं क्योंकि वे हमारी नींव बनाने वाले थे। गुरु ने सदा ही सद्पथ दिखाया लेकिन उस पर जीवन में कुछ ही लोग चल पाते हैं।
आज बाजार शिक्षा को संचालित कर रहा है। मांग के अनुसार शिक्षा का रूप भी बदलता जा रहा है। पिछले पचास वर्षों के बाद भी हम जाति, धर्म और भाषा से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं ।क्या हम लोकतांत्रिक शिक्षा प्रणाली को अपने जीवन में उतार रहे हैं? कहीं परिवार ,समाज और राष्ट्र टूट तो नहीं रहे हैं?
शिक्षा, पुस्तक और पुस्तकालय का पारस्परिक संबंध है। परंतु क्या आज हम अपने ही हाथों अपनी संस्कृति को संभाल पा रहे हैं या उन्हें भूलते जा रहे हैं? विश्व में वेदों की जानकारी देने वाले प्रथम विद्वान मैक्स मूलर ने महत्वपूर्ण काम किए हैं। भारतीय शिक्षा प्रमुख रूप से मनोवैज्ञानिक थी जिसमें बालक तथा बालिकाओं को उसके पूर्ण व्यक्तित्व को निखारा जाता था ।आज हमारे पाठ्यक्रम में वेद, वेदांग, ब्राह्मण ,उपनिषद, दर्शन ,पुराण, निगमन एवं रामायण, महाभारत आदि को फिर से शामिल करने की आवश्यकता है ।स्कूल ,कॉलेजों में हमारी शिक्षा मानवीय संवेदना से शून्य होती जा रही है।भारत को भारत बनने के लिए भारतीयता को प्रमुखता देनी होगी।
आज हमारा देश संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। वैश्वीकरण में एक ओर अमेरिकी डॉलर का तथा दूसरी ओर अंग्रेजी भाषा का महत्व बढ़ गया है, आंखें मूँद कर चले ही जा रहे हैं ।अच्छे बुरे अथवा उपादेय एवं हेय का भेद करना भूल गए हैं ।शिक्षित समाज ही धीरे -धीरे भारतीय संस्कृति से और स्वयं अपनी आत्मा से दूर होता जा रहा है ।अभी इनकी संख्या बहुत कम है किंतु इनका झुकाव अंग्रेजी संस्कृति एवं जीवन दर्शन की ओर दिखाई पड़ता है। यही लोग देश के नीति - निर्माता भी हैं। परिणाम यह होता है कि जब भी कोई नीति संस्कृति में बदलाव की बात कही जाती है, तब टकराव की स्थिति बन जाती है ।अधिकांश देशवासी मूल अवधारणा में बदलाव नहीं चाहते हैं ।
नई संस्कृति इन मर्यादाओं को तोड़ती हुई दिखाई पड़ती है। आज मीडिया की भूमिका को भी इसी भाषाई परिपेक्ष्य देखना होगा। अंग्रेजी मीडिया और टीवी नई विचारधारा के पोषक दिखाई पड़ते हैं ।आम आदमी से दूर रहने के कारण भारतीय मानसिकता को गहराई से नहीं समझ पाते ।भारतीय शब्दों को अंग्रेजी में अनुवाद करके ही समझते हैं ।अतः विदेशी विचारधारा एवं तर्क देकर विश्व को प्रस्तुत करते रहते हैं। हमारे नीति - निर्माता इसलिए अंग्रेजी मीडिया तथा टीवी पर आश्रित रहते हैं। वहाँ टकराव भी नहीं है और उनके अहंकार की पुष्टि भी हो जाती है। चिंतन धारा भी एक सी होती है ।इस प्रकार मीडिया भी देशी और अंग्रेजी भेद से दो भागों में बंट गया है।
वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2022 एक महत्वपूर्ण भूमिका लेकर आई है जो भारत के अनुरूप शिक्षा को एक नया आयाम देगी और समाज के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देगी। अभी हाल ही में राष्ट्रीय उच्च शिक्षा मूल्यांकन परिषद ने अपने सर्वेक्षण रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया कि भारत में विश्वविद्यालय ,कॉलेजों में उच्च शिक्षा के गुणवत्ता या तो मध्यम दर्जे के हैं या दोषपूर्ण हैं ।उक्त संस्थानों में पाठ्यक्रम, ज्ञान कौशल और परीक्षा पद्धति भी पुराने तरीके के हैं। ये संस्थान कहीं भी उच्च शिक्षा के मानकों का पालन नहीं करते हैं। उच्च शिक्षा के इन्हीं मांगों पर हमारा देश कमजोर साबित हो रहा है ।भारत में शिक्षा पर मात्र 12 फिसदी ही उच्च शिक्षा में शामिल है जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में शिक्षा का बहुत बड़ा बाजार निहित है। जिन - जिन देशों में उच्च शिक्षा का मानक प्राथमिकता पर है, उन देशों में आधुनिक परिवेश का विस्तार तेजी से हो रहा है ।आर्थिक बदलाव से सामाजिक बदलाव अपने आप होता है ।हमारे देश में युवाओं का एक बड़ा वर्ग आज भी उच्च शिक्षा से वंचित है ।भारत सरकार के लिए भी इतनी संख्या में छात्रों को उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना टेढ़ी खीर है ।इसलिए हमारा दायित्व है कि हम उच्च शिक्षा में बदलाव या परिवर्तन के लिए सत्ता मूल्यांकन कर सकते हैं।
शिक्षा मनुष्य की जन्मजात शक्तियों व प्रवृत्तियों का विकास करता है। उच्च शिक्षा मनुष्य की शक्तियों के साथ राष्ट्रीय शक्तियों का भी विकास करता है। इसलिए गंभीरता पूर्वक उच्च शिक्षा के मानक को बनाए रखने के लिए देश में व्यापक मंथन होना जरूरी है ।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 22 भारतीय संस्कृति के अनुरूप है।इसको हमें अधिक से अधिक आगे बढ़कर स्वीकारना चाहिए ।पहल तो किसी को करनी ही पड़ेगी। नींव का पत्थर ही शिखर के सपने देख सकता है--
' बीज जब मिट्टी में मिल जाए, वृक्ष तब बनता है हे मित्र! बूंँद स्याही की गिरती जाए, फलक पर उठता जाता चित्र।'
विनती हे वाग्देवी! तुमसे (कविता)
विनती हे वाग्देवी!
विनती हे वाग्देवी! तुमसे
सबकी जिह्वा पर विराजो
सुमति कुमति में भेद करके
वाणीश्री का पथ दिखलाओ ।
अमृत भारती , जगतवाहिनी
स्वर, व्यंजन तुमसे ही उद्भिद
विद्यादायिनी बुद्धि दात्री
काव्य गीत से महिमामंडित
मानव में सद्भाव भरो
विनती हे वाग्देवी! तुमसे
नव गति, नव लय, ताल छंद नव
नृत्य, संगीत तुम्हीं से निःसृत
हर युग का विकास तुम्हीं हो
श्वेतपद्मासना हे जगजननी !
जीवन को ऊर्जा से भर दो
विनती हे वाग्देवी! तुमसे
हंस आरूढ़ वीणावादिनी
नीर - क्षीर- विवेक समझाती
कला, साहित्य, संस्कृति में निहित
देश, विश्व, परिवार जोड़ती
हर घर को जगमग कर दो
विनती हे वाग्देवी! तुमसे
प्रेम, बुद्धि, विद्या की देवी
चिंतन-मनन जगत् को देती
काट अनीति, अराजकता के बंध
तमसोर्माज्योतिर्गमय की धारा बन
जीवन ऊर्ध्व गामी कर दो
विनती हे वाग्देवी! तुमसे
@डॉ वसुंधरा मिश्र ,कोलकाता
दिनांक :12.12.2022
बुक रिडिंग सेशन में युवा लेखक
भवानीपुर कॉलेज के युवा लेखक विद्यार्थियों ने अपनी पुस्तक यात्रा के अनुभवों को साझा किया - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के बहुत से छात्र छात्राओं में प्रतिभावान लेखक और लेखिकाओं द्वारा अपनी-अपनी पुस्तक के अनुभवों को साझा किया गया ।
यह कार्यक्रम डीन प्रो दिलीप शाह की प्रेरणा से संपन्न हुआ
। बुक रिडिंग सेशन का संयोजन और संचालन करते हुए डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि अभी तक सात से अधिक ऐसे विद्यार्थियों के नाम आए हैं जिनकी किताब, कविताएँ, इ-बुक, व्हाटपैड और डिजिटल बुक प्रकाशित हो चुकी हैं। अंग्रेजी विभाग के सेमेस्टर तीन के विद्यार्थी स्वागत मुखर्जी की सद्य प्रकाशित प्रथम पुस्तक ए वर्ल्ड इज फुल अॉफ लायर दस दिसंबर 22 को प्रकाशित हुई है और कोलकाता पुस्तक मेले में रखी जाएगी जो कॉलेज के लिए गर्व की बात है। इस पुस्तक में मुखर्जी ने बलात्कार, गोद लेना, घरेलू हिंसा, यौनाचार आदि सामाजिक विषयों पर लिखी है जो एक युवा पीढ़ी की नई सोच को दर्शाती है। इस अवसर पर उन्होंने अपनी लेखन यात्रा पर विचार प्रकट किया। रिशिका बुचा सेमेस्टर पांच की छात्रा ने ई-बुक खुशी फाइंड्स खुशी, पेपर बैक दि वे आई सी - बियोंड दी विजन, ए टेल अॉफ चैंज पुस्तकें, आयुष कुमार लोधा सेमेस्टर पांच ने दी वर्डस्लिंगर एंड दी क्विल हाउस, परिवार - एक ताकत अमेजन के हुमरूह पब्लिकेशन द्वारा जनवरी में प्रकाशित होने वाली है। अपने-अपने अनुभवों को साझा किया। अनिमेश आनंद ने अपनी गजल और कविता प्रस्तुति दी।
प्रो दिलीप शाह ने सभी नये लेखकों की पुस्तक का विमोचन और उनका उत्साहवर्धन किया। शेख मोहम्मद जहिरुददीन ने अपनी कविता प्रस्तुति दी ।रिडिंग बुक सेशन के प्रतिनिधि फ़ज़ल करीम ने सभी नए विद्यार्थियों लेखकों का स्वागत किया। कम्युनिकेशन एंड सॉफ्ट स्कील्स ट्रेनर समीक्षा खंडूरी ने धन्यवाद देते हुए पुस्तक संरचना के विषय में बात की। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
उमंग22 रिपोर्ट
भवानीपुर कॉलेज में साहित्य ,कला और संगीत महोत्सव "उमंग" का आगाज़: उमंग केवल उत्सव नहीं बल्कि युवा प्रतिभाओं का चुनाव महोत्सव है - - - बस इंतज़ार समाप्त - - 26-27-28-29 दिसंबर 2022
हर वर्ष की तरह भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज में "उमंग" - 22 का आगाज़ हो चुका है। कोलकाता की एलगिन रोड फिर से जाम होने वाली है, विद्यार्थियों की लाइन लगने वाली है। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज का सांस्कृतिक त्योहार "उमंग" आने वाला है क्रिसमस के साथ ही "उमंग" भी बस इंतज़ार समाप्त । "उमंग" केवल वार्षिकोत्सव नहीं है, वह युवा प्रतिभाओं का महोत्सव है, प्रतिभाओं का चुनाव उत्सव है।
कोलकाता के प्रतिष्ठित कॉलेजों के विद्यार्थियों में भी हलचल मच जाती है, होड़ लग जाती है कि कौन किस प्रतियोगिता में जीतेगा।
पिछले छह महीने से कॉलेज के विद्यार्थियों में "उमंग" में भाग लेने की तैयारियाँ जोर शोर से चल रही हैं। 18 कलेक्टिव जैसे क्रिसेंडो, फ्लेम, इन - एक्ट, फैशनिस्टा आदि और अन्य विद्यार्थियों में छिपी प्रतिभाओं को निखारने का काम "उमंग" करता है। 2022 विशेष इसलिए भी है कि "उमंग" दो साल बाद हो रहा है।
चार दिवसीय 26-27-28 -29 दिसंबर 2022 के चार दिन हर विद्यार्थी के लिए सचमुच उमंग, उत्साह - ऊर्जा से भर देने वाले होते हैं।
इस वर्ष "उमंग" की थीम "इंडिया 75 प्लस 25" है जो देश की आजादी के 75 वें वर्ष अमृत महोत्सव के दौरान आने वाले पच्चीस वर्ष कैसे होंगे?,बदलते भारत के उत्थान और समृद्धि को दर्शाने वाले भारत की तस्वीर पर आधारित है। "उमंग" की मंच सज्जा इसी थीम को लेकर की गई है जिसका काम जोरों से चल रहा है।
भवानीपुर कॉलेज कोलकाता के लगभग 50 कॉलेजों के प्रतिभागियों के बेहतरीन प्रदर्शन को मंच देने का महत्वपूर्ण कार्य करता है जो पूरे पश्चिम बंगाल के लिए एक मिसाल है। एजीसी बोस कॉलेज, आर्मी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, आसुतोष कॉलेज, बासंती कॉलेज, बेहला कॉलेज, बेंगाल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, भारतीय विद्या भवन, कोलकाता इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट, गोयनका कॉलेज आफ कॉमर्स एंड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, जे डी बिरला इंस्टीट्यूट डिपार्टमेंट ऑफ़ मैनेजमेंट, जे डी बिरला मैन केंपस, जोगमाया कॉलेज, लेडी ब्रेबोर्न कॉलेज, मेघनाद साहा इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, प्रफुल्ल चंद्र कॉलेज, रानी बिरला गर्ल्स कॉलेज, स्कॉटिश चर्च, सेठ आनंदराम जयपुरिया कॉलेज, श्री अग्रसेन कॉलेज, गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ आर्ट एंड क्राफ्ट, हरिमोहन घोष स्कूल ऑफ़ फैशन, हेरंबा चंद्र कॉलेज, हेरिटेज इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी लॉ कॉलेज, एसीएफए आई, बिजनेस स्कूल इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, जादवपुर यूनिवर्सिटी, टेक्नो मैन साल्ट लेक, दी भवानीपुर डिजाइन अकादमी, द भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज, द हेरिटेज अकादमी, टीएचके जैन कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता, वेदांत फाउंडेशन, वोमैंस क्रिश्चियन कॉलेज, एनएचएम, श्री शिक्षायतन, श्यामबाजार लॉ कॉलेज, निवेदिता यूनिवर्सिटी, सिस्टर निवेदिता स्कूल ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, शिवनाथ शास्त्री कॉलेज, सेंट जेवियर यूनिवर्सिटी, जेवियर कॉलेज, सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज, श्यामा प्रसाद कॉलेज, टेक्नो इंडिया इंस्टिट्यू ऑफ़ टेक्नोलॉजी आदि कॉलेज के प्रतिनिधियों ने भवानीपुर कॉलेज में मीटिंग की और इवेंट के दौरान किस तरह उन्हें कार्य करना है, इस पर विचार विमर्श किया।
"उमंग" केवल उमंग नहीं है वह एक ऐसा महोत्सव है जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में व्यवस्था, संगठन, नेतृत्व और आत्मविश्वास को विकसित करता है।
शैक्षणिक संस्था के माध्यम से इवेंट को किस तरह व्यवस्थित और संगठित करके सफल बनाया जाता है इस प्रकार की शिक्षा दी जाती है। इवेंट को समझना हर प्रोग्राम के कोऑर्डिनेटर को समझाना, किस जगह पर इवेंट होगा उसे बुक करना, गूगल फॉर्म बनाना, बजट बनाना और पास कराना, बजट की स्वीकृति की कॉपी रखना और उस पर निरंतर सलाह - मशवरा करना आवश्यक लिस्ट बनाना, वॉलिंटियर्स को पहचान पत्र देना और उनकी नियुक्ति करना, उनकी लिस्ट बनाना आदि, सलाह देना इवेंट के पहले हल्का संगीत बजाना, निर्धारित समय से 15 मिनट पहले एसी चलाना, प्रतिभागियों और वक्ताओं एवं निर्णायकों की नाश्ते की व्यवस्था करना, स्टेडियम में क्लिपबोर्ड की व्यवस्था करना, पोस्टर आदि लगवाना,रिपोर्टर, फोटोग्राफर की नियुक्ति करना और मेहमानों के हस्ताक्षर लेना, विजिटर डायरीज रखना, इवेंट्स ड्राइव में फोटो अपलोड करना, इसके साथ ही सभी कार्यक्रमों के फीडबैक का गूगल फॉर्म भरवाना इत्यादि अनेक कार्य सीखना होता है जो भविष्य में विद्यार्थियों को एक अच्छा संगठन कर्ता और अच्छा नागरिक बनाने में सहायक होते हैं।इस अवसर पर विभिन्न स्टॉल लगाए जाऐंगे। कॉलेज के वालिया सभागार, जुबली हॉल, प्लेसमेंट हॉल और कॉलेज टर्फ का इन चार दिनों तक भरपूर उपयोग होता है।
सभी कार्य विद्यार्थियों द्वारा किए जाते हैं और उनका निर्देशन डीन ऑफिस द्वारा किया जाता है जहांँ प्रमुख डीन प्रोफेसर दिलीप शाह एवं प्रोफ़ेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिव्या उदेशी का विशेष एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर, शिक्षक - शिक्षिकाएंँ, गैर शैक्षणिक स्टाफ एवं कैंटीन स्टाफ आदि विभिन्न लोगों का सहयोग और योगदान रहता है।
उमंग उत्सव में 50 से अधिक कॉलेजों के 83 इवेंट्स संपन्न किए जाएंगे जिनमें नृत्य, संगीत, खेल, सृजनात्मक लेखन बांग्ला, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में सृजनात्मक लेखन, शास्त्रीय, आधुनिक लोक संगीत, लोक नृत्य, पाश्चात्य नृत्य, नाटक स्ट्रीट प्ले, फैशन शो आदि विभिन्न इवेंट्स तीन दिनों तक चलेंगे और चौथे दिन बाहर से प्रसिद्ध गायक अरमान मल्लिक को बुलाया गया है जो सभी का मनोरंजन तो करेंगे जो विद्यार्थियों, अतिथियों तथा बंगाल के सांस्कृतिक वातावरण को समृद्ध करते हैं।फिल्मों के प्रसिद्ध गायक अरमान मल्लिक को इस बार आमंत्रित किया गया है जिनके गीत युवाओं के हृदय में बसे हैं।खेल में क्रिकेट, टग अॉफ वार, योग, फुटबाल, कबड्डी,खो खो, फिटनेस, बॉलीबॉल, बास्केटबाल आदि की प्रतियोगिताएं हो चुकी हैं। सभी विजेता छात्र - छात्राओं को उमंग में सम्मानित किया जाएगा।
"उमंग" का इंतजार अब खत्म होने वाला है ।
कॉलेज की प्रमुख प्रतिनिधि मेघाली सेनगुप्ता ने बताया कि सभी कॉलेज के प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों को हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराईं जाएंगी और सभी का यथायोग्य स्वागत किया जाएगा। हमारे 275 विद्यार्थी वोलिंटियर्स हैं जो चार दिन चलने वाले उमंग की प्रत्येक गतिविधियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभायेंगे।
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मिराज डी शाह ने विद्यार्थियों को उमंग 22 की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी। इसकी जानकारी डॉ वसुंधरा मिश्र ने दी ।
नव वर्ष पर अर्चना गोष्ठी 22
नव वर्ष पर अर्चना संस्था की अग्रिम गोष्ठी - - -
अर्चना संस्था की ओर से नव वर्ष की अग्रिम कविता गोष्ठी का आयोजन किया गया। सदस्यों ने कविता गीत दोहे कुंडलियाँ आदि की प्रस्तुति दी । देश के प्रति अपनी कृतज्ञता और प्रेम के भावों द्वारा विभिन्न विषयों पर भी अपने भावों को प्रदर्शित किया गया । कवयित्री हिम्मत चौरडिया ने गीत-जन्म दिया है जिसने तुमको, उनको देना मान रे।उनसे बढ़कर देव नहीं है,उनसे ही पहचान है।।
कुण्डलिया-माटी म्हांरे देश री शक्ति भक्ति पेछाण।
करां आरती चाव स्यूँ, जै जै राजस्थान।।सुनाया।मृदुला कोठारी ने खुद से खुद की कीमत लगाई है खुदी को कुछ ऊंँचा उठा लूंँ यह कसम खाई है, पृथ्वी उपासना तुम खेत है खलिहान तू, तू बीज है तू धान तू।, चंदा सुराना ने सुख है नारी दुख है नारी सुख काली का रूप है नारी ,तो संतोषी का रूप भी नारी,,खुले आसमान के नीचे बैठे हैं हम ठंडी हवाओं को महसूस कर रहे हैं। विद्या भंडारी ने मत उलझो तुम तुलनाओं में,जीवन ठहर जाएगा।और संगीत समाधान है हर समस्या का सुनाया ।संगीता चौधरी ने कविता मैंने किया नहीं किया कर पाया नहीं, दोहे - अभिनंदन है आपका, बाधा हरो गणेश। मनोकामना पूर्ण हो, मिटते सारे कलेश।।धनुष उठाया राम ने, राजा जनक निहाल।हर्षायी तब जानकी, पहना दी जयमाल।। सुनाए।
डॉ वसुंधरा मिश्र ने देश में रंगों पर होनेवाली राजनीति को केंद्र बनाकर रंग रंग है, रंग दिखाते जीवन के चित्र, रंगों का जीवन से मिलना जीवन अर्थ सिखाता, सूखा गीला भारी हल्का सब रंगों का खेल कविता सुनाई। नौरतनमल भंडारी ने यहाॅ आता है हर कोई किरदार निभाने के लिए। , बङे नाजुक होते है,रिश्ते-नाते खींचिये नहीं इन्हें ,पल में टूट जाते है।, राहों में फूल भी है कांटें भी हैं चल सको तो साथ चलो।, इंदु चांडक ने नये वर्ष का आह्वान करते हुए सुनाया - फिर नये वर्ष की पदचाप सुनाई दी, झंकृत हो उठा थका सा अलसाया मन। गुलाब बैद ने अपने मधुर गीत आ गया बहारों का मौसम छा गया नजारों का मौसम से सभी का मन मोह लिया। संगीता चौधरी, हिम्मत चौरडिया, प्रसन्न चोपड़ा, मृदुला कोठारी, चन्द्रा सुराणा, गुलाब बैद, विद्या भंडारी, वसुंधरा मिश्र, इंदु चाँडक, नवरतन मल भंडारी सभी सदस्यों ने स्वरचित रचनाएँ सुनाई। जूम पर हुए इस कार्यक्रम का संचालन इंदु चांडक द्वारा की गई सरस्वती वंदना के साथ आरंभ हुआ। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
रंग (कविता)
रंग
रंग सिर्फ रंग है
जीवन से जुड़ जीवन में घुल जाते हैं
सुख बनकर मुस्कान में
दुख बनकर रुदन में
नृत्य बनकर थिरकन में
मोती बनकर सागर में
वर्ण बनकर शब्द में
सृष्टि चलती रहती धूरी पर
घुला श्वेत रंग सब रंगों में
अध्यात्म आत्मा से जुड़ा
ऋजु पथ का वाहक
तब का शोधक
रंग दिखा दे जीवन के चित्र
रंग रंग है।
गोरे काले श्याम चितकबरे
नीले बैंगनी गुलाबी पीले
रंगों का जीवन से मिलना
जीवन अर्थ सिखाता
सूखा गीला भारी हल्का
सब रंगों का खेल
भिन्न-भिन्न रूपों का रंग
पहचानो रंगी दीवारों को
सुर असुर देव नर किन्नर
सब रंगों का खेल।
जन-जन रंगे रंगों में
रंग बिरंगी बदरंगी राहों में
लगे हैं मन के दर्पण
पहचानो तो हरे गुलाबी
नहीं तो काले मतवाले
खेल दिखाते बलखाते से
रंग रंग के नाच नचाते
नई गति ताल छंद मृदंग भी बचते
उद्भव स्थिति संहार में घुलकर
प्रकृति और जीवन में खिलते
आओ अपने रंगों को एक सकारात्मक आकार में ढालें
आओ अपने रंगों को एक सकारात्मक आकार में ढालें
एक नया इतिहास रचने का संकल्प बनाएं रंग सिर्फ रंग ही तो हैं ।
- डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता
- 24.12.2022
भवानीपुर कॉलेज में फैशन शो
भवानीपुर कॉलेज में कोलकाता के कॉलेजों ने किया फैशन शो का प्रदर्शन - -
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के जुबली सभागार में उमंग 22 के दौरान फैशन शो का आयोजन हुआ जिसमें 39 कॉलेजों ने भाग लिया। सभी कॉलेज के नाम कोड में दिए गए। विभिन्न थीम पर आधारित विद्यार्थियों ने फैशन में भाग लिया और बेहतरीन प्रस्तुतियाँ दी। एस डी बर्मन के युग से अब तक , इंडियन सिनेमा की रिवोल्यूशन की कहानी , गॉड और डेमन, फेयरी टेल एंड रियल्टी, मेट गाला आदि अनेक विषयों पर केंद्रित फैशन शो प्रस्तुत किए गए। संचालन किया भवानीपुर कॉलेज की छात्रा तुषिता चुगानी , वैष्णवी सूर्यवंशी ने। छात्रा संजना बराई की टीम ने फैशन शो का संयोजन किया। लक्मे एकाडमी, जिंक लंडन, डाइलाइट्स इन्वेस्टमेंट द्वारा स्पॉन्सर कार्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ फैशन कॉलेज के विद्यार्थियों को चयनित किया गया। फैशन की दुनिया के प्रसिद्ध मॉडल प्रार्थना सरकार और प्रांतिका दास ने निर्णायक का भार निर्वहन किया। इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने दोनों निर्णायकों को सम्मानित किया। दोनों ही मॉडल ने मंच पर अपना रैंप वॉक भी किया। दर्शक विद्यार्थियों ने गीत गज़ल और नृत्य की सुंदर प्रस्तुतियाँ भी दी। सभी चयनित कॉलेज के विद्यार्थियों को उमंग 22 के कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
कुहासा (कविता)
कुहासा
इस कुहासे में मानो
जिंदगी ठहर गई है
कुछ करने की ललक
जकड़ी सी रह गई है
ऐसे तो जिंदगी भर कुछ न कर पाए
कुहासे को देख लगा
ऐसे ही एक आवरण से ढके रह जाएंगे क्त
कुछ रोशनीरोशनी कुछ अंधेरे
कुछ भ्रम और कुछ वहम
इन्हीं को ओढ़े
बस सोचते रह जाएंगे।
- @वसुंधरा मिश्र, 26.12.22
ऐ वर्ष 23 (कविता)
ऐ वर्ष 23
तुझमें कुछ ख़ास नहीं
ये तो पिटारा है
पिछले हिसाब का
वही सुबह वही दिन वही रात
फिर वही रोज़ के काम
ऐ वर्ष 23
मत कर गुमान
ये तो बदले कैलंडर में
फिर से दोहराने के दिन हैं
ऐ वर्ष 23
मत रह अंजान
सोमवार हो या रविवार
आदमी के अपने पैमाने हैं
तुम सिर्फ नंबर हो
ऐ वर्ष 23
कुछ लोग पैदा होते हैं
कुछ अपनी उम्र गिनते हैं
कुछ मरते हैं
यूँ ही तुम भी आगे बढ़ते हो
ऐ वर्ष 23
लोग खुशियाँ मनाते हैं
गमों से दूर
एक रात को गुलज़ार करते हैं
तुम इस साल की तरह फिर आना
@वसुंधरा मिश्र, 1.1.23
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