कुहासा
इस कुहासे में मानो
जिंदगी ठहर गई है
कुछ करने की ललक
जकड़ी सी रह गई है
ऐसे तो जिंदगी भर कुछ न कर पाए
कुहासे को देख लगा
ऐसे ही एक आवरण से ढके रह जाएंगे क्त
कुछ रोशनीरोशनी कुछ अंधेरे
कुछ भ्रम और कुछ वहम
इन्हीं को ओढ़े
बस सोचते रह जाएंगे।
- @वसुंधरा मिश्र, 26.12.22
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