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Wednesday, January 4, 2023

लेखिका ऋतु डागा की पुस्तक पर मेरा विचार

ऋतु डागा का रचनात्मक संसार हिंदी में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हर लेखक की सृजनात्मक रचना की विशिष्टता होती है। ऋतु डागा जिंदगी के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त करती रही हैं। समाचार पत्रों में बराबर आपका लेख प्रकाशित होना ही अपने आप में एक प्रमाण है। जीवन के प्रति लेखिका की स्पष्ट दृष्टि है। वे अपनी कविता में कहती हैं कि पल दो पल का साथ /आया था मेरे हिस्से /वही है मेरा अब /कहने को मेरे हिस्से में (जिंदगी कविता से) ।वर्तमान को सकारात्मक रूप से देखती हुई लेखिका भाषा, साहित्य, संस्कृति, कला संगीत और राजनीति तथा विभिन्न पौराणिक कथाओं के आधार पर अपने विचार व्यक्त करती है। वस्तुतः वह देश के विकास और उन्नयन में अपना योगदान देती है। वह भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और आदर्शों को समाज की भावी विरासत मानती हैं। वह वास्तविक स्थितियों से परिचित है जहाँ हिंदी भाषा माँ है और अंग्रेजी को बीबी मानती है क्योंकि पत्नी के आने से माँ के घर में कई परिवर्तन होते हैं। परिवर्तन के प्रति भी लेखिका अपनी जिम्मेदारी समझती है। स्त्री के रूप में लेखिका जानती है कि खुशियाँ फिसल गई/ रेत की तरह /गम जम गया /काई की तरह ऐसे में अपनी लेखनी द्वारा लेखिका समाज को नई दिशा देने की ओर अग्रसर है। मैं लेखिका को पुस्तक के लिए बधाई और शुभकामनाएं देती हूँ। -डॉ वसुंधरा मिश्र, कोलकाता

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