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Friday, March 31, 2023

अन्त्याक्षरी

अन्त्याक्षरी भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के पोलिटिकल साइंस की ओर से आयोजित अन्त्याक्षरी कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है । विभागाध्यक्ष अमला ढाढनिया जी को मैं धन्यवाद देती हूँ जिन्होंने मुझे इसमें भाग लेने का अवसर दिया। देश की सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं है। देश गीतों के माध्यम से हम आज दो बातें सीखेंगे पहला तो गीतों से परिचय और दूसरा जोश और उत्साह का संचार। खैर! ये सब तो हम लोग सभी जानते हैं। आप यहाँ आए किसलिये? आपने बुलाया इसलिये आये हैं तो काम भी बताइये पहले ज़रा आप मुस्कुराईये मुस्कुराने की न कोई बात है अजी देखिये तो क्या हसीन शाम है ओहो काम तो बताइये, बताइये ना ना ना पहले ज़रा आप मुस्कुराईये आप यहाँ आये... पूरे गाने पे मत जाइए अब तो तालियाँ बजती रहेंगी हम तो तेरे आशिक हैं सदियों पुराने चाहे तू माने चाहे न माने यहाँ एक से बढ़कर एक प्रतिभागी बैठे हुए हैं। प्रतियोगिता टक्कर की होगी। 🙏 दिल थाम के सुने और जीतने वाले का झंडा फहराने दें और हारने वाले का हौसला बुलंद करें। सभी भाषा में गा सकते हैं।अन्त्याक्षरी का अर्थ तो पता ही है। जब समय नहीं बीत रहा हो तो कुछ गाने गा लेने चाहिए। लेकिन हम लोगों के पास तो समय ही नहीं है। देश प्रेम के प्रति हमारी जिम्मेदारी है वो तो निभाने के लिए पूरा जीवन है। क्योंकि इसी देश में हमने जन्म लिया है तो आइए अन्त्याक्षरी आरंभ करते हैं। अन्त्याक्षरी का अर्थ है अंत के अक्षर से प्रारंभ करना है। इसके पहले की अन्त्याक्षरी आरंभ हो मैं तृषा जी कहूंगी कि वे इसके नियम भी बता दें। आपने नियमों को जान लिया है। परंपरा से हटकर इस गीत से शुरुआत करते हैं - - सभी टीम को शुभकामनाएँ - - - आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की इस मिट्टी से तिलक करें ये धरती है बलिदान की वंदेमातरम वंदेमातरम वंदेमातरम *पहला राउंड - साधारण *दूसरा राउंड - शब्द गीत - *बसेरा *राही *शान *संदेश *चोला *पारसमणि *डाक *कापोर *प्रीत *सरफरोशी *लहरा दो *होठों पे *करम होठों पे, नन्हा मुन्ना राही,हर करम अपना, सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,रंग दे बसंती चोला,है प्रीत जहां की रीत सदा, जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती हैं बसेरा,ओ देस मेरे तेरी शान पे सदके ,तेरी मिट्टी में मिल जांवा, हो हो हो संदेशे आते हैं हमें तड़पाते हैं तो चिट्ठी आती है वो पूछे जाती है के घर कब आओगे के घर कब आओगे लिखो कब आओगे के तुम बिन ये घर सूना सूना है संदेशे आते हैं हमें तड़पाते हैं तो चिट्ठी आती है वो पूछे जाती है के घर कब आओगे के घर कब आओगे लिखो कब आओगे के तुम बिन ये घर सूना सूना है किसी दिलवाली ने किसी मतवाली ने हमें खत लिखा है ये हमसे पूछा है किसी की साँसों ने किसी की धड़कन ने किसी की चूड़ी ने किसी के कंगन ने किसी के कजरे ने किसी के गजरे ने महकती सुबहों ने मचलती शामों ने अकेली रातों ने अधूरी बातों ने तरसती बाहों ने और पूछा है तरसी निगाहों ने - *तीसरा राउंड - गीत की पहली पंक्ति बतायी जाएगी इसके बाद का अंतरा गाना होगा -तेरी मिट्टी में मिल जांवा तेरी मिट्टी में मिल जावां गुल बनके मैं खिल जावां इतनी सी है दिल की आरजू तेरी नदियों में बह जावां तेरे खेतों में लहरावां इतनी सी है दिल की आरजू ओ.. ओ.. ओओओ.. -कर चले हम फ़िदा, जान-ओ-तन साथीयों अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयों … सांस थमती गई, नब्ज जमती गई, फिर भी बढ़ते कदम को ना रुकने दिया कट गये सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं सर हिमालय का हमने न झुकने दिया मरते मरते रहा बाँकपन साथीयों अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयों … -जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा वो भारत देश है मेरा जहाँ सत्य, अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा वो भारत देश है मेरा वो भारत देश है मेरा जय भारती, जय भारती, जय भारती, जय भारती -छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी नए दौर में लिखेंगे, मिल कर नई कहानी हम हिन्दुस्तानी, हम हिन्दुस्तानी हम हिन्दुस्तानी, हम हिन्दुस्तानी छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी नए दौर में लिखेंगे, मिल कर नई कहानी हम हिन्दुस्तानी, हम हिन्दुस्तानी हम हिन्दुस्तानी, हम हिन्दुस्तानी आज पुरानी ज़ंजीरों को तोड़ चुके हैं क्या देखें उस मंज़िल को जो छोड़ चुके हैं चाँद के दर पर जा पहुंचा है आज ज़माना नए जगत से हम भी नाता जोड़ चुके हैं नया खून है नई उमंगें, अब है नई जवानी हम हिन्दुस्तानी, हम हिन्दुस्तानी हम हिन्दुस्तानी, हम हिन्दुस्तानी -ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझपे दिल क़ुरबान तू ही मेरी आरज़ू, तू ही मेरी आबरू तू ही मेरी जान ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझपे दिल क़ुरबान तेरे दामन से जो आए उन हवाओं को सलाम तेरे दामन से जो आए उन हवाओं को सलाम चूम लूँ मैं उस ज़ुबाँ को जिसपे आए तेरा नाम सबसे प्यारी सुबह तेरी, सबसे रंगीं तेरी शाम तुझपे दिल क़ुरबान -मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती बैलों के गले में जब घुँघरू जीवन का राग सुनाते हैं ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं सुन के रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती -वन्दे मातरम् वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् सुजलां सुफलाम् मलयजशीतलाम् शस्यश्यामलाम् मातरम्… वन्दे सुजलां सुफलाम् मलयजशीतलाम् शस्यश्यामलाम् मातरम्… वन्दे मातरम् वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् माँ… वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीम् फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीम् शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीम् फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीम् सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम् सुखदां वरदां मातरम् -ऐ वतन.. मेरे वतन.. ऐ वतन.. आबाद रहे तू आबाद रहे तू.. आबाद रहे तू ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू मैं जहाँ रहूँ जहाँ में याद रहे तू मैं जहाँ रहूँ जहाँ में याद रहे तू ऐ वतन.. मेरे वतन ऐ वतन.. मेरे वतन तू ही मेरी मंजिल है, पहचान तुझी से तू ही मेरी मंजिल है, पहचान तुझी से पहुंचू मैं जहां भी मेरी बुनियाद रहे तू पहुंचू मैं जहां भी मेरी बुनियाद रहे तू ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू मैं जहाँ रहूँ जहाँ में याद रहे तू ऐ वतन.. मेरे वतन.. ऐ वतन.. मेरे वतन आ.. आ.. तुझपे कोई गम की आंच आने नहीं दूं तुझपे कोई गम की आंच आने नहीं दूं कुर्बान मेरी जान तुझपे शाद रहे तू कुर्बान मेरी जान तुझपे शाद रहे तू - *चौथा राउंड - धुन बजायी जाएगी, गाना बताना होगा *स्वदेस *चक * -जोगी, हम तो लुट गये तेरे प्यार में जाने तुझको, हाय रे जाने तुझको खबर कब होगी ओ हम तो लुट गये तेरे प्यार में जाने तुझको हाय रे जाने तुझको खबर कब होगी चन्दा भी देखा तारे भी देखे देखा सूरज बरसों लेकिन जिस दिन तुझको देखा मन में फूटी सरसों हाय रे जोगी ... -स्वदेस: एक मजबूत और भावनात्मक राष्ट्रवादी संदेश 3399750आशुतोष गोवारीकर की फिल्म स्वदेस एक भारतीय समाज में स्थापित अहसास और उत्थान की कहानी है, जिसमें फिल्म का शीर्षक शाब्दिक रूप से "अपना देश" है। ये जो देश है तेरा • पांचवां राउंड - फिल्म बतायी जाएगी उसका देश गीत गाना होगा • मणिकंनिका भारत • मेरी कॉम सलाम इंडिया • उरी - छल्ला • शेषा जय हिंद की सेना • लक्ष्य - कंधों से कंधा • परमाणु का थारे वास्ते • गुंजन सक्सेना भारत की बेटी • परदेस आई लव माई इंडिया • छठा राउंड -देशगीत का गीतकार गायक और फिल्म का नाम बताना होगा • सातवां राउंड गीत का दूसरा अंतरा गाना होगा। छह टीम - - दिवाने, परवाने, मस्ताने, दिलवाले, जांबाज , धरती ,राजा, प्रजा, सिपाही, या गांधी, पटेल,लक्ष्मी बाई, भगतसिंह, सुभाष,बादल, विनोद, विपिन,आजाद,मंगल पाण्डेय कल्पना, अब्दुल कलाम,तिलक,रानी चेनम्मा, मातंगिनी हाजरा या अस्तित्व, समीक्षा, आंदोलन, स्वतंत्रता, आजादी, परतंत्रता, जनता, लोकसभा, चुनाव,

देश भक्ति गीतों की लहर अन्त्याक्षरी

देशभक्ति गीतों की लहर तालाबों में होने वाली तरंगों की तरह खामोशी से सरसरते रहते हैं गणतंत्र दिवस और विभिन्न देशभक्तों को याद करना हमारा धर्म है आजादी दिलाने वाले अनगिनत देश प्रेमियों के प्रति हम नतमस्तक हैं उनके प्राणों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया है आज हम आजादी के अमृत महोत्सव पर देश प्रेम के गीतों की इन तरंगों को महसूस करेंगे 1943 फिल्म किस्मत का गीत दूर हटो ए दुनिया वालो हिंदुस्तान हमारा है अंग्रेजों के विरोध के लिए काफी था। गांधी जी के भारत छोड़ो आंदोलन के कुछ महीनों बाद आई यह फिल्म अपने इस गाने की वजह से अमर हो गई आज फिल्मों के निर्माण में भी स्वार्थ राजनीति और लाभ छुपा है उसमें साहित्य संगीत समाज राजनीति और देश के लिए ही लोग सोचते थे कुछ फिल्में है जिन्हें हम व्यक्ति विशेष फिल्में कह सकते हैं जैसे शहीद 1965 में आती है और शहीद भगत सिंह पर यह फिल्म बनी है 2002 में द लीजेंड ऑफ भगत सिंह अजय देवगन की गांधी राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय अवार्ड मिला नेताजी सुभाष चंद्र बोस हीरो श्याम बेनेगल के निर्देशन 2004 मंगल पांडे द राइजिंग 2005 अट्ठारह सौ सत्तावन में अंग्रेजो के खिलाफ क्रांति के मंगल पांडे पर आधारित फिल्म निर्देशक केतन मेहता और उन्होंने अभिनय किया आमिर खान सरदार-1993 में वल्लभ भाई पटेल पर आधारित है झांसी की रानी है 1953 में आती है निर्देशक व अभिनेता सोहराब मोदी युद्ध पर आधारित फिल्मों में देशभक्ति को हमेशा युद्ध से जोड़कर भी देखा जाता रहा है भारत-पाक युद्ध पर आधारित मिलती हैं हकीकत चेतन आनंद द्वारा निर्देशित 1946 में आती है बॉर्डर 1997 जेपी दत्ता द्वारा निर्देशित भारत-पाक की सच्ची घटना पर आधारित फिल्म 2007 में आती है 1971 जिसमें मनोज बाजपेई व रवि किशन जैसे दमदार अभिनेताओं ने 1971 में भारतीय सैनिकों पर आधारित एक फिल्म बनाई 2004 में आती है लक्ष्य कारगिल युद्ध पर बनी है रितिक रोशन प्रीति जिंटा और अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत एलओसी और मां तुझे सलाम भी पिक्चर आती है खेल पर आधारित पिक्चरों में जंग के मैदान में नहीं खेल के मैदान में भी दुश्मनों को धूल चटाते देखना भारतीय दर्शकों को खूब भाता है कई ब्लॉकबस्टर फिल्में आई जैसे चक दे इंडिया 2007 में शाहरुख खान और चक दे इंडिया यह देश भक्ति का गीत भी बन गया खेल के मैदान में भारतीय टीमें बजाती हैं। भाग मिल्खा भाग 2013 में पिक्चर आती है फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर एथलीट मिल्खा सिंह की जीवनी पर आधारित है। मैरी कॉम आती है 2014 में ।महिला मुक्केबाज ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुकी मेरीकॉम की जिंदगी पर आधारित है जिसको प्रियंका चोपड़ा ने निभाया। दंगल 2016 में ब्लॉकबस्टर फिल्म जिसमें अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान गीता बबीता फोगाट की कहानी आती है जो हरियाणा के छोटे से गांव से संबंधित है सामाजिक समस्याओं पर आधारित फिल्में भी आती है भविष्य की बहुत सारी समस्याएं जो हैं ।उनको भी जोड़कर कुछ पिक्चरें बनाई है जैसे स्वदेश 2004 में आती है विदेश से वापस लौट कर एक गांव में रहने लगता है उसकी कहानी है शाहरुख खान जिसमें अभिनेता है । रंग दे बसंती 2006 में आती है,अंग्रेजों से आजादी के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ आमिर खान शरमन जोशी कुणाल कपूर अली खान और निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा । अ वेडनेसडे 2008 में आती है आम आदमी की ताकत को दिखाया गया है और आतंकवाद जैसे बड़े बड़े खतरे को भी सफाया किया जा सकता है इस फिल्म के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है नसरुद्दीन शाह अनुपम खेर और नीरज पांडे का निर्देशन है। 1991 में प्रहार पिक्चर आती है जिसमें नाना पाटेकर माधुरी दीक्षित डिंपल कपाड़िया है और इसी तरह से एक था टाइगर ,टाइगर जिंदा है, मनोज कुमार की क्रांति, पूरब पश्चिम आदि आती है मदर इंडिया, लव स्टोरी ,1942लव स्टोरी, लगान देश भक्ति का जज्बा उत्पन्न करते हैं लगान २००१ में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। लगान (उर्फ़ लगान: वन्स अपॊन अ टाइम इन इन्डीया) हिन्दी चलचित्र ई.स.२००१ में भारत में प्र्स्तुत की गई थी। यह फ़िल्म आशुतोष गौरीकर की मूल कथा पर आधारित है, जिसका उन्होनेही दिग्दर्शन किया है। आमीर ख़ान इसके सहनिर्माता होने के अलावा मुख्य अभिनेता भी है। साथ मे ग्रेसी सींह, रचेल शॅली और पॉल ब्लॅकथॉर्न ने पात्र निभाये है।यह फ़िल्म १९वी सदी में बसी अंग्रेज़ राज के दौर की एक कहानी है। एल ओ सी कारगिल 2003 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है।लक्ष्य ( अनुवाद।  लक्ष्य )धीरेंद्र संतोष जगरलापुडी द्वारा लिखित और निर्देशित एक 2021 भारतीय तेलुगु भाषा की स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म है। यह श्री वेंकटेश्वर सिनेमा और नॉर्थस्टार एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित है। फिल्म में नागा शौर्य , जगपति बाबू , केतिका शर्मा और सचिन खेडेकर हैं । [1] फिल्म 10 दिसंबर 2021 को रिलीज हुई थी। [2]

भवानीपुर कॉलेज की एन एस एस ईकाई ने केवरातापा लक्षमीपुर वेस्ट पश्चिम बंगाल के बंगाल केवरातापा स्कूल में मनाया गया वूमेंस डे

भवानीपुर कॉलेज की एनएसएस इकाई ने केवरातापा लक्ष्मीपुर वेस्ट पश्चिम बंगाल के बेंगाल केवड़ातापा स्कूल में मनाया वूमेंस डे - भवानीपुर कॉलेज की एनएसएस इकाई ने बंगाल केवरातापा लक्ष्मीपुर वेस्ट पश्चिम बंगाल मेंट स्कूल के गांव के विद्यार्थियों के साथ वूमेंस डे मनाया। स्कूल की 120 छात्राओं को स्कूल बैग और ज‌‌‌मैट्रिक बॉक्स दिए।एन एसएस की प्रमुख प्रोफेसर गार्गी के संयोजन में प्रोफेसर चंदन झा एवं अन्य शिक्षकों ने एनएसएस की ओर से इस विमेंस डे को अलग तरह से मनाया । भवानीपुर कॉलेज के स्वयंसेवी छात्र छात्राओं ने महिलाओं के अधिकार , महिलाओं के स्वास्थ्य और सफाई, सुरक्षा, खेल ,स्कॉलरशिप और योग के विषय में अपना वक्तव्य दिया। इस अवसर पर स्कूल की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में नृत्य प्रस्तुति दी। पूरे दिन को आनंद एवं सामाजिक कार्य के रूप में मनाया गया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के राष्ट्रीय स्वयंसेवी विद्यार्थियों साथ मिलकर गांव के स्कूल की छात्राओं के साथ भोजन किया और अपने विचारों को साझा कर एक नई मिसाल कायम की।

भवानीपुर कॉलेज में ओरेकल रेड बुल रेसिंग का आयोजन

भवानीपुर कॉलेज में ओरेकल रेड बुल रेसिंग का आयोजन - - आठ वर्षों के लंबे समय के बाद, ओरेकल रेड बुल रेसिंग 2023 में भारत लौटा। आरबीआर (रेड बुल रेसिंग) एक फ़ॉर्मूला वन रेसिंग टीम है, जो ऑस्ट्रियाई लाइसेंस के तहत रेसिंग करती है और यूनाइटेड किंगडम में स्थित है। यह समूह कंपनी रेड बुल जीएमबीएच के स्वामित्व वाली दो फॉर्मूला वन टीमों में से एक है, दूसरी स्क्यूडेरिया अल्फाटौरी है। भारत भर के अन्य शहरों के साथ, कोलकाता में भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने इस शो रन को सक्रिय किया, छात्रों को वास्तव में F1 कार की सवारी करने का एक अद्भुत अनुभव देने के लिए फॉर्मूला 1 सिमुलेटर को कॉलेज में लाया। प्रत्येक शहर द्वारा अपने सबसे तेज टाइमलैप्स विजेताओं की घोषणा करने के बाद प्रत्येक विजेता को मुंबई, F1 शोरन की एक प्रायोजित ट्रिप मिलेगी। सिमुलेशन की घोषणा मल्टीपल रेस-विजेता और सत्यनिष्ठ किंवदंती डेविड कल्चरड द्वारा की गई थी, जो अपने इंजन के एड्रेनालाईन-पंपिंग दहाड़ को मुंबई लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस रेसिंग में 100 से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया और सक्रियता में भाग लिया, जहाँ प्रत्येक छात्र को दो चक्कर पूरे करने थे। जिस छात्र ने उन दो चक्करों को सबसे तेजी से पूरा किया, उसे रेड बुल रेसिंग कैप मिला। भवानीपुर में, पार्थिव मिश्रा ने 1.10 सेकेंड के एफ1 सिमुलेशन में सबसे तेज टाइम लैप्स किया और उन्होंने रेड बुल रेसिंग कैप जीता। यह आयोजन बीईएससी के एक छात्र नेहल मेहता द्वारा की गई पहल के कारण संभव हुआ।इसकी जानकारी नेहल मेहता ने दी। डॉ वसुंधरा मिश्र ने जानकारी प्रदान की।

भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने किया रेड बुल डूडल कला का प्रदर्शन

भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने किया रेड बुल डूडल कला का प्रदर्शन भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने रेड बुल डूडल आर्ट का प्रदर्शन किया जो रेड बुल की एक नयी पहल थी। जहां विद्यार्थियों को कला और तकनीक से युक्त रचनात्मक डूडलर्स के लिए नए अवसर मिले। 20 फरवरी 2023 को भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में 50 से अधिक छात्रों ने कल्पनाशील डूडल के माध्यम से अपने दिमाग का इस्तेमाल कर कल्पनाओं की उड़ान भर नए नए रचनात्मक कार्यों में भाग लिया। प्रतियोगिता के लिए उन्हें डूडल आर्ट पेपर दिए गए, जिस पर उन्होंने अपने विचारों द्वारा डूडल बनाया और अपना आवेदन ऑनलाइन जमा किया। कॉलेज के दो बेहद प्रतिभाशाली डूडल कलाकारों, दिशानु साहा और स्वागतो मुखर्जी ने व्हाइटबोर्ड पर लुभावने डूडल बनाए। इस आयोजन की विशेषता यह थी कि इस रेड बुल डूडल आर्ट एक्टिवेशन में भाग लेने वाले 60 देशों में से प्रत्येक के एक विजेता को मई के महीने में एम्स्टर्डम में विश्व के अंतिम दिन ब्लॉकचेन पर अपना डूडल लाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि यह कार्यक्रम नेहल मेहता द्वारा आयोजित किया गया।

भवानीपुर कॉलेज में इंट्रा बास्केटबाल टूर्नामेंट 2023

भवानीपुर कॉलेज में इंट्रा बास्केटबाल टूर्नामेंट 2023- - भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 23 फरवरी 2023 को सुबह 8:30 बजे से कॉलेज टर्फ में इंट्रा कॉलेज बास्केटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया। इस लीग में 18 टीमों ने भाग लिया। 1891 में आविष्कृत बास्केटबॉल वर्तमान समय में सबसे अधिक खेले जाने वाले खेलों में से एक बन गया है। आज यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी खेला जा रहा है क्योंकि यह NBA जैसी विभिन्न लीगों का हिस्सा बन गया है। लीग में सभी में 9 मैच थे और फाइनल और सेमीफाइनल तक गए। जो टीम अधिकांश रैंक जीतने में सफल रही, वह 'स्ट्रेंजर बॉयज़' थी और उसे टूर्नामेंट का विजेता घोषित किया गया। उन्होंने एथलेटिक प्रतियोगिता में सेमी-फाइनल में 'एली ऑप्स' टीम के खिलाफ मुकाबला किया। लीग के लड़कियों के वर्ग में, सेमीफाइनल 'कॉन्करर्स' और 'नेट रिपर्स' टीमों के बीच खेला गया, जिसमें से 'कॉन्करर्स' ने मैच जीता। इन सभी मैचों को देखना एक रोमांचकारी अनुभव था, क्योंकि कुछ मैचों में गति में लगातार परिवर्तन हुआ, जिसने दर्शकों को बांधे रखा। प्रीमियर लीग का मुख्य आकर्षण प्रत्येक टीम के कप्तानों और उनके प्रतिभागियों द्वारा प्रदर्शित टीम भावना की उच्च भावना थी। टूर्नामेंट का श्रेय छात्र मामलों के डीन प्रोफेसर दिलीप शाह को जाता है, जिनकी प्रेरणा से एथलेटिक्स में छात्रों को शामिल किया गया।डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि टूर्नामेंट को सफल बनाने में मदद करने वाले छात्र स्वयंसेवक थे - अमन दुबे, समर्थ श्रीवास्तव, आभास राजवंश, पवनजोत सिंह, हर्ष पटेल, उत्कर्ष आनंद, झलक शाह, मेघाली सेनगुप्ता, अभिषेक शाह और आयुष तिवारी।

भवानीपुर कॉलेज की फैकल्टी क्रिकेट प्रतियोगिता में इवनिंग कॉमर्स की टीम चैंपियन रही

भवानीपुर कॉलेज की फैकल्टी क्रिकेट प्रतियोगिता में इवनिंग कॉमर्स की टीम चैंपियन रही - - - भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के खेल एवं खेल विभाग की ओर से इंट्रा कॉलेज फैकल्टी क्रिकेट टूर्नामेंट 2023 का आयोजन रविवार 26 फरवरी को कॉलेज टर्फ में सुबह 9 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक किया गया। इस कार्यक्रम में 17 शिक्षकों और प्रोफेसरों ने भाग लिया जिन्हें तीन टीमों में विभाजित किया गया। टीम ए भवानीपुर रॉयल्स मॉर्निंग कॉमर्स से थे, टीम बी भवानीपुर राइडर्स इवनिंग कॉमर्स और टीम सी, को द भवानीपुर डेयर डेविल्स रही जो बीबीए/विज्ञान/शाम और दोपहर वाणिज्य की फेकल्टी की मिश्रित टीम रही। सभी तीन टीमों ने एक लीग प्रारूप में एक दूसरे के खिलाफ सात ओवरों का मैच खेला और शीर्ष दो टीमें फाइनल में गईं। मॉर्निंग कॉमर्स (द भवानीपुर रॉयल्स) और द भवानीपुर राइडर्स (इवनिंग कॉमर्स) की टीम ने एक रोमांचक फाइनल मैच खेला और इवनिंग कॉमर्स सेक्शन चैंपियन के रूप में उभरा। टीम ए भवानीपुर रॉयल्स (सुबह वाणिज्य अनुभाग) ने पहले भवानीपुर डेयरडेविल के खिलाफ खेला, जिसमें कॉलेज के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य थे और उन्होंने पहले बल्लेबाजी करने के लिए टॉस जीता। स्कोर 7 ओवर में 3 विकेट पर 78 रन था, भवानीपुर रॉयल्स के साथ 2 से विकेट जीता। दूसरा मैच द भवानीपुर रॉयल्स (मॉर्निंग कॉमर्स) के बीच भवानीपुर राइडर्स (इवनिंग कॉमर्स सेक्शन) के बीच खेला गया और टॉस जीतने के बाद राइडर्स ने भवानीपुर रॉयल्स के साथ पहले क्षेत्ररक्षण करने का फैसला किया और कुल स्कोर 7 ओवर में 66 रन पर ऑल आउट कर दिया। राइडर्स 6 से जीता7 ओवर में विकेट।तीसरा मैच भवानीपुर राइडर्स और भवानीपुर डेयरडेविल्स के बीच खेला गया, जिसमें टीम राइडर्स ने 7 ओवर में 3 विकेट खोकर 114 रन बनाए और भवानीपुर डेयरडेविल्स को 74 रनों से हार का सामना करना पड़ा। फाइनल में इवनिंग कॉमर्स से भवानीपुर राइडर्स ने भवानीपुर रॉयल्स मॉर्निंग कॉमर्स सेक्शन के खिलाफ खेला जहां राइडर्स ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। जीत के लिए 106 रन के विशाल लक्ष्य को हासिल करने के लिए लक्ष्य मैच के आखिरी ओवर और मॉर्निंग कॉमर्स सेक्शन का बना, जहां भवानीपुर रॉयल्स को 12 रन से हार का सामना करना पड़ा. यह घटनाओं का एक दिलचस्प मोड़ था जिसमें शिक्षक बड़े जोश और उत्साह के साथ खेल रहे थे। टूर्नामेंट का समापन पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ, जिसके लिए टेबल टेनिस में पूर्व बंगाल चैंपियन श्री डेविड सू को विजेताओं को पदक देने के लिए आमंत्रित किया गया था। भाग लेने वाले संकायों और छात्र स्वयंसेवकों के लिए दोपहर के भोजन के बाद अभिनंदन किया गया, जिनके बिना प्रतियोगिता संभव नहीं होती। भाग लेने वाले संकायों में टीम ए भवानीपुर रॉयल्स (मॉर्निंग कॉमर्स सेक्शन)के श्री विवेक पटवारी (कप्तान), श्री चंदन झा, श्री अंकित पटवारी, श्री इब्राहिम हुसैन, श्री मोहित शॉ, श्री विकास मुंद्रा, टीम बी भवानीपुर राइडर्स में शाम वाणिज्य खंड के श्री सैकत नंदी (कप्तान), श्रीमान अरुण क्षेत्री, श्री राजेश कुमार शॉ, श्री प्रकाश कुमार ठाकुर, श्री सौविक चक्रवर्ती, श्री दीपांकर मोंडल, टीम सी कॉलेज के विभिन्न विभागों से मिश्रित (बीबीए/विज्ञान/दोपहर और शाम वाणिज्य विभाग)श्री सास्पो चक्रवर्ती (कप्तान), श्री जयजीत चक्रवर्ती, मिस्टर करण वोरा, श्री माइकल रॉनी मलिक, श्री सायन रॉय रहे। छात्र स्वयंसेवक पार्थ उदेशी, आयुष सेठ, कठोर जैन आभाष राजवंश ने सक्रिय रूप से सभी प्रकार का सहयोग दिया । कार्यक्रम की रिपोर्ट श्री रूपेश गांधी, सुश्री समीक्षा खंडूरी ने बनाई और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने । .

भवानीपुर कॉलेज ने किया खो खो प्रतियोगिता

भवानीपुर कॉलेज ने किया खो खो प्रतियोगिता - भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने खो-खो प्रतियोगिता का आयोजन 21 व 22 फरवरी 2023 को कॉलेज टर्फ में सुबह 8:00 बजे से किया गया। उद्घाटन समारोह के लिए छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह ने एक संक्षिप्त भाषण दिया, जहां उन्होंने प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता में भाग लेने और इस खेल को खेलने की परंपरा को जारी रखने के लिए धन्यवाद दिया।विशेषज्ञों का मानना ​​है कि खो खो की उत्पत्ति भारत के महाराष्ट्र क्षेत्र में हुई थी और प्राचीन काल में इसे रथों पर बजाया जाता था और इसे राठेरा कहा जाता था, राथेरा एक रथ का हिंदी अनुवाद है। बालिका वर्ग के लिए, कुल 4 टीमें थीं, और प्रत्येक टीम में एक स्थानापन्न सहित 9 खिलाड़ी शामिल थे। किसी अन्य लीग सिमुलेशन की तरह सभी टीमें एक-दूसरे के खिलाफ गईं। प्रतिभागियों के उत्साह को देख दर्शक पूरी तरह से झूम उठे। खो खो जैसे खेल में टीमवर्क जरूरी है क्योंकि तभी वे हार को मजबूती से गले लगा सकते हैं और चैंपियनशिप जीत सकते हैं। सेमीफाइनल नाइट्स और थॉमसिना के बीच था, जिसमें थॉमसिना विजयी हुई। फिर फाइनल थॉमसिना और वॉरियर्स के बीच हुआ। थॉमासिना हमलावर पक्ष में थी और वे केवल 8 अंक ही ले पाए जबकि वॉरियर्स ने हमला किया और केवल 3 मिनट में 9 लोगों को ले कर खेल समाप्त कर दिया। यह 20 मिनट का खेल था, प्रति आधा 10 मिनट। चैंपियनशिप एक पूर्ण जीत थी और प्रो दिलीप शाह को छात्रों के बीच खेल भावना को प्रोत्साहित करने के उनके निरंतर प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया गया।इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने और रिपोर्ट सहयोगी रहे अक्षत कोठारी।

भवानीपुर कॉलेज के इन एक्ट के विद्यार्थियों ने थियेटर वर्कशॉप किया

भवानीपुर कॉलेज के इन एक्ट के विद्यार्थियों ने थियेटर वर्कशॉप किया - - - भवानीपुर कॉलेज के एन एक्ट कलेक्टिव ने 14 मार्च 2023 को प्लेसमेंट हॉल में शाम 4 बजे से 6 बजे तक वर्कशॉप का आयोजन किया।कार्यशाला का संचालन किया पेशेवर नाट्यविद् श्रीअप्रतिम चटर्जी (वर्तमान में कलर्स बांग्ला पर फेरी सोम धारावाहिक में काम कर रहे हैं) और श्री पलाश चतुर्वेदी। कार्यशाला के दौरान, प्रतिभागियों ने अभिनय, निर्देशन, रंगमंच, और बहुत कुछ सहित रंगमंच के विभिन्न पहलुओं को सिखने के अवसर का आनंद लिया। वर्कशॉप की शुरुआत रिलैक्सेशन एक्सरसाइज से हुई, जिससे सभी को अपनी ऊर्जा को सही दिशा देने में मदद मिली। रंगमंच के बारे में एक संक्षिप्त परिचय श्री अप्रतिम चटर्जी द्वारा दिया गया, जिन्होंने एक मॉक सीन तैयार किया, जहां छात्रों ने ऑस्कर नामांकित व्यक्ति के रूप में अभिनय किया और अपने विजयी भाषण दिए। इसके बाद छात्रों को रिवर्स इंजीनियरिंग की जानकारी दी गई। छात्रों द्वारा अपनी ऊर्जा को बढ़ाने और अपनी मुखर क्षमता को बढ़ाने के लिए कुछ वार्म-अप अभ्यासों का अभ्यास किया गया। इन अभ्यासों ने विद्यार्थियों को रिवर्स इंजीनियरिंग की अवधारणा को समझने में मदद की। छात्रों को समूहों में विभाजित किया गया और प्रत्येक समूह को एक दृश्य तैयार करने और एक तस्वीर के रूप में प्रस्तुत करने के लिए पांच मिनट का समय दिया गया। सभी छात्रों को एक स्थान पर रहते हुए अभिनय करने के लिए कहा गया और कुछ सेकंड के लिए उसी स्थिति में रखा गया। इस बीच, अन्य समूह अनुमान लगा रहे थे कि वे दर्शकों को किस चित्र का चित्रण कर रहे हैं। उसके बाद, जिस समूह ने दृश्य प्रस्तुत किया, उसके बाद वह बता दिया कि वे अपने कार्यों के माध्यम से क्या दिखाना चाहते हैं। अंत में, पटकथा लेखन, अभिनय और निर्देशन में रुचि रखने वाले छात्रों को ऐसे निपुण नाट्यशास्त्रियों के साथ बातचीत करके पहला अनुभव प्राप्त करने के बाद शॉर्टलिस्ट किया गया, जिन्होंने उनकी नाट्य सफलता का मार्ग प्रशस्त किया। रचनात्मकता, प्रयोग, शारीरिक प्रशिक्षण, टीम वर्क और थिएटर की मूल बातें समझते हुए आत्म-खोज के माध्यम से संपूर्ण उत्पादन के निर्माण का पता लगाने के लिए एनेक्ट कलेक्टिव द्वारा की गई यह एक महत्वपूर्ण पहल रही।वर्कशॉप की रिपोर्ट बीए सेमेस्टर कशिश शॉ ने दी और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भारत और विदेश में प्रबंधन अध्ययन पर संगोष्ठी

भारत और विदेश में प्रबंधन अध्ययन पर संगोष्ठी - - भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने भारत और विदेश में प्रबंधन अध्ययन पर एक संगोष्ठी का आयोजन 17 मार्च 2023 को किया। छात्र मामलों के प्रो डीन दिलीप शाह ने छात्रों को उच्च शिक्षा की योजना बनाते समय कॉलेजों के चयन में आने वाले तनाव के विषय में बताया। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि एक छात्र के लिए सभी महिला इस संकट को कैसे कम किया जा सकता है। अंत में, प्रो शाह ने अतिथि वक्ताओं को आमंत्रित करते हुए कहा कि "सभी असाधारण उपलब्धियां सामान्य लोगों द्वारा प्राप्त की जाती हैं", जिसका अर्थ है कि किसी की सफलता उसके ध्यान, लचीलापन और दृढ़ता पर निर्भर करती है। वक्ता श्रीमानरतन कुमार मुखर्जी, महाप्रबंधक, ऑपरेशंस फ्रॉम ग्लोबल रीच, के साथ 32 साल का जुड़ाव, ने भारत के बाहर स्थित बिजनेस स्कूलों पर जोर दिया। दुनिया भर में स्थित कई कॉलेजों पर चर्चा की गई। उन्होंने छात्रों को बताया कि कैसे आप्रवासन, आवास और छात्र ऋण की प्रक्रिया होती है, अंत में उनके सत्र को क्विज़ के एक दौर के साथ अभिव्यक्त किया गया जिसमें छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया गया। . अपराह्न 3.00 बजे श्रीमती मधुमिता चटर्जी, जादवपुर विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा और स्वर्ण पदक विजेता, एमबीए, एमए और पीएच.डी. पूर्व छात्रा डिग्री धारक ने सभा को संबोधित किया। वह 'प्राचीन भारत में क्षत्रिय', 'कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व', 'नैतिक नेतृत्व - भारतीय और यूरोपीय आध्यात्मिक दृष्टिकोण' जैसी पुस्तकों की एक निपुण लेखिका हैं। वह वर्तमान में एमबीबीएस स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (आचार्य बैंगलोर बी स्कूल) की निदेशक हैं। . श्रीउपाध्याय आईआईएम इंदौर के पूर्व छात्र हैं; वह सेंट जेवियर्स कॉलेज के विद्वान और वर्तमान में पीएचडी कर रहे हैं। प्रबंधन में सेंट जेवियर्स विश्वविद्यालय, कोलकाता से। उन्होंने मुख्य रूप से निर्णय लेने और अस्वास्थ्यकर कामकाजी माहौल में सकारात्मक रहने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने एक उत्कृष्ट साइकोमेट्रिक परीक्षण भी आयोजित किया जिसके माध्यम से वक्ता छात्रों के मनोवैज्ञानिक व्यवहार का विश्लेषण कर सकते थे। वक्ताओं का अपने सत्र में बहुत गतिशील दृष्टिकोण था और एक छात्र की क्षमता का विश्लेषण करने के पारंपरिक साधनों से परे चला गया, इस दृष्टिकोण से उन्होंने अपने करियर के साथ एक कड़ी स्थापित की। दोनों सत्र दोपहर 3.30 बजे समाप्त हुए और छात्रों को इस नए अधिग्रहीत ज्ञान के आधार पर निर्णय लेने और अपने उच्च शिक्षा निर्णयों को बेहतर ढंग से सूचित करने के लिए अत्यधिक प्रेरित किया गया।रिपोर्टिंग अक्षत कोठारी ने की और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

शिक्षकगणों ने किया सरगम देशभक्ति गीत अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता

शिक्षकगणों ने किया सरगम देशभक्ति गीत अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता- भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के बत्तीस शिक्षक और शिक्षिकाओं ने सरगम कार्यक्रम के अंतर्गत देश भक्ति गीत प्रतियोगिता में भाग लिया। अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता में में साधारण, शब्द, गीत की पंक्तियाँ, धुन आदि राउंड दिए गए। आठ टीमें जिसमें आसाभरी, बिलावल, भैरव, भैरवी, काफी, कल्याण, खमाज, मारवा राग पर आधारित टीमें रहीं हैं। प्रत्येक टीम में चार शिक्षक और शिक्षिकाएंँ रहीं । सरगम अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता भवानीपुर कॉलेज के पोलिटिकल साइंस विभाग की विभागाध्यक्ष अमला ढांढनिया द्वारा आयोजित की गई। इस अवसर पर कॉलेज के टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय ने सभी को संबोधित करते हुए अन्त्याक्षरी के इतिहास पर प्रकाश डाला। प्रिन्सिपल डॉ पिंकी साहा सरदार और देवाजानी गांगुली, डॉ तथागत सेन और एजूकेशन, हिंदी, बांग्ला, गुजराती, समाजशास्त्र, इतिहास, अंग्रेजी, गणित मॉसकम्युनिकेशन, खेल और गैर शैक्षणिक विभाग आदि आर्ट्स के विभिन्न विभागों के सभी विभागाध्यक्ष और सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ एजूकेशन विभागाध्यक्ष डॉ रेखा नारिवाल के देश भक्ति गीत 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा' से हुआ। प्रातःकालीन सत्र के शिक्षक प्रो नितिन चतुर्वेदी ने गिटार बजाया। बांग्ला और हिंदी के देशभक्ति गीतों को सभी प्रतिभागियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता की शुरुआत हुई गीत आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिन्दुस्तान की इस मिट्टी को तिलक करें यह धरती है बलिदान की के साथ। अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता में राग मारवा टीम ने सबसे अधिक अंक प्राप्त किए। राग काफी टीम द्वितीय स्थान पर रही और खमाज तृतीय स्थान पर रही । कार्यक्रम का संचालन किया डॉ वसुंधरा मिश्र (हिंदी विभाग) ,प्रो तृषा चटर्जी (पोलिटिकल साइंस) , प्रो सोहिनी चट्टोपाध्याय (पोलिटिकल साइंस) और प्रो स्तुति चक्रवर्ती (समाजशास्त्र) ने। धन्यवाद ज्ञापन दिया अमला ढांढनिया ने। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज ने मैक के साथ मिलकर किया डिजिटल आर्ट्स की कार्यशाला

भवानीपुर कॉलेज ने मैक के साथ मिलकर किया डिजिटल आर्ट्स की कार्यशाला---- भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज ने 16 मार्च 2023 को सोसायटी हॉल में डिजिटल कला पर कार्यशाला का आयोजन किया गया ।कार्यशाला का संचालन किया श्री सिद्धार्थ जायसवाल, श्री अजय कुमार शॉ एवं श्रीएमएएसी का प्रतिनिधित्व करने वाले कुमार अनुपम चंद्रा ने । डिजिटल आर्ट्स में एनीमेशन, ग्राफिक डिजाइनिंग, 3डी वर्चुअल स्कल्प्चर रेंडरिंग और वीएफएक्स जैसे सभी डिजिटल काम शामिल हैं। कार्यशाला की शुरुआत डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स प्रो दिलीप शाह टीम एमएएसी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। पहले वक्ता, श्री सिद्धार्थ जायसवाल, एमएएसी के अकादमिक प्रमुख और एनिमेशन में विद्यार्थियों सत्रह साल के अनुभव वाले गुरु ने ग्राफिक डिजाइनिंग पर आधारित एक वीडियो दिखाकर दर्शकों के साथ बातचीत की। उन्होंने छात्रों को एनिमेटेड तस्वीर बनाने का तरीका सिखाया और बताया कि हरे रंग की स्क्रीन वाले चित्रों को कैसे संशोधित किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों को चित्र के ग्राफ़िक्स को संशोधित करने के चरण दिखाए, जैसा कि हॉलीवुड फ़िल्मों में डिजिटल आर्ट के कुछ प्रमुख कार्यों में देखा गया है। कैरियर के रूप में डिजिटल कला के बारे में अधिक जानने के इच्छुक अस्सी छात्रों की उपस्थिति के साथ, अगले वक्ता श्री अजय कुमार शॉ, MAAC में केंद्र अकादमिक प्रमुख, ने एनीमेशन से संबंधित तीन वीडियो दिखाए। उन्होंने छात्रों को रेखीय एनिमेशन लागू करने के चरण सिखाए और यह दिखाने के लिए एक चित्र लिया कि स्थिर आकृति को कैसे गतिमान बनाया जाए। हालांकि एक समय लेने वाली प्रक्रिया, उन्होंने समझाया कि कैसे समय वीएफएक्स और एनीमेशन की रीढ़ है। तीसरे वक्ता प्रशिक्षण और उत्पादन में चौदह वर्षों के अनुभव वाले एक पेशेवर 3डी कलाकार कुमार अनुपम चंद्रा ने डिजिटल आर्ट्स के महत्व और यह कैसे एक आकर्षक पेशे के रूप में कार्य कर सकता है, के बारे में बताया। डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स प्रो दिलीप शाह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। वर्कशॉप बहुत जानकारीपूर्ण थी, और छात्रों ने डिजिटल आर्ट्स में हैंड्स-ऑन लर्निंग के लिए एक पूरे दिन की वर्कशॉप का अनुरोध किया। यह आयोजन एक बड़ी सफलता थी, और कॉलेज द्वारा छात्रों को सामान्य से परे करियर विकल्पों के बारे में शिक्षित करने के लिए यह एक बड़ी पहल थी।रिपोर्ट दी कसिस शॉ बीए सेमेस्टर एक की छात्रा ने और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

युवा वयस्कों की चुनौतियों को कैसे संबोधित किया जाए? भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने चर्चा में भाग लिया

युवा वयस्कों की चुनौतियों को कैसे संबोधित किया जाये? भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने चर्चा में भाग लिया - - - भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के युवा वयस्कों की चुनौतियों को संबोधित करने पर पैनल चर्चा 28 फरवरी, 2023 को सुबह 11 बजे से सोसायटी हॉल में आयोजित की गई । कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाकर छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह ने छात्रों को इस सत्र के महत्व को समझाते हुए संबोधित किया और अतिथि वक्ताओं का परिचय दिया । उन्होंने स्वीकार किया कि जिस तरह हम बीमार पड़ने पर डॉक्टर के पास जाते हैं, उसी तरह किसी भी भावनात्मक अशांति को भी बिना किसी वर्जना के सही काउंसलर के पास जाकर अपनी बात बतानी चाहिए। इसके बाद वक्ताओं को प्रो. शाह ने सम्मानित किया। प्रथम वक्ता श्री जय शंकर गोपालन, आईआईएम कोलकाता के एक गौरवान्वित पूर्व छात्र, जिनके पास उत्कृष्ट संचार, रचनात्मक विपणन रणनीतियां , प्रशिक्षण और निगरानी कौशल आदि का उपयोग करके उच्च व्यापार विकास हासिल करने का बीस से अधिक वर्षों का व्यापक अनुभव है। करियर काउंसलिंग की ट्रिनिटी पर उनकी विशेष टेडेक्स वार्ता ने उन्हें करियर से संबंधित निर्णय लेने के बारे में महत्त्वपूर्ण चर्चा । उन्होंने जेनजेड और उनकी पीढ़ी के बीच एक अंतर को चित्रित करके समस्याओं के एक व्यापक स्पेक्ट्रम के लिए एक समावेशी दृष्टिकोण अपनाया, जहां पुरानी पीढ़ी की तुलना में जेनजेड के पास करियर विकल्पों की बहुतायत है। छात्रों से करियर योजना के बारे में उनके विचारों के बारे में पूछते हुए उन्होंने यह समझाने के लिए विभिन्न संकेत दिए कि कैसे छात्रों को करियर में फिट होने की कोशिश करने के बजाय ऐसा करियर चुनना चाहिए जो उनके लिए उपयुक्त हो। उन्होंने एक प्रश्नोत्तर सत्र के बाद निष्कर्ष निकाला कि एक सफल करियर के लिए सामग्री जिम्मेदारी और जवाबदेही है। द्वितीय वक्ता सुश्री निकिता जालान जो साइकोमेट्रिक असेसमेंट, क्लिनिकल डायग्नोसिस और साइकोथेरेपी में सात साल से अधिक अनुभव के साथ एक वरिष्ठ काउंसलर, इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस एंड मेडिका, कोलकाता जैसे विभिन्न संगठनों से जुड़ी हैं । उनकी बातचीत विशेष रूप से युवा वयस्कों की भावनात्मक भलाई और घर पर माता-पिता के मुद्दों से निपटने के तरीके पर रही। उन्होंने युवा वयस्कों के बीच संबंध निर्माण के मुद्दों पर भी बातचीत की जो अक्सर ध्यान की कमी के कारण तनाव, चिंता और अवसाद का सामना करते हैं। उन्होंने एक-दूसरे को स्पेस देकर रिश्ते में संतुलन कैसे लाया जाए, इसका गहन विश्लेषण भी किया और रिश्तों में सीमाओं और भरोसे के महत्व पर चर्चा की। सुश्री जालान का सत्र दर्शकों के सवालों पर आधारित था, जिसने उन्हें अपनी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित किया। तृतीय वक्ता श्री रमेश नारायण जो भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के पूर्व छात्र रहे बी.कॉम (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की और वर्तमान में पिछले चौंतीस वर्षों से चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं। अपनी पेशेवर आमंत्रण के अलावा, वे प्राणिक हीलर और आर्हेटिक योग प्रैक्टिशनर और योग विद्या प्राणिक हीलिंग फाउंडेशन के संस्थापक भी हैं। युवा वयस्कों के मुद्दों को संबोधित करने के लिए उनका दृष्टिकोण उन्हें स्वयं में एक आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि प्रदान करना था। उन्होंने अपनी स्वयं की ऊर्जा के बारे में चर्चा करते हुए प्रारंभ किया और यह भी बताया कि कैसे कोई सदियों पुरानी प्रथाओं के माध्यम से इसका उपयोग कर सकता है। यहां तक ​​कि उन्होंने श्रोताओं को एक अभ्यास में भी शामिल किया जहां उन्होंने व्यक्त किया कि कैसे ऊर्जा हमारे भीतर प्रवाहित होती है। स्वयं की आत्मा को समझने के प्रत्यक्ष अनुभव से छात्र रोमांचित हुए । अंत में, छात्रों के पास इस बहुप्रतीक्षित सत्र से एक समग्र जानकारी थी जिसने उन्हें जब भी आवश्यकता हो, चाहे कैंपस में या बाहर, परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया। प्रो शाह ने यह भी सूचित किया कि छात्रों को किसी भी परामर्श की आवश्यकता हो सकती है, कॉलेज पूरे विवेक के साथ छात्र के सामने आने वाली किसी भी समस्या का समाधान करने के लिए ऑन-कैंपस काउंसलर प्रदान करता है। यह आयोजन प्रोफेसर दिलीप शाह के मार्गदर्शन और सुश्री समीक्षा खंडूरी के साथ काम करने वाले स्वयंसेवकों की मदद से इस कार्यक्रम को संभव बनाने में काफी सफल रहा।रिपोर्ट अक्षत कोठारी ने किया और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भगत सिंह मैमोरियल कमेटी ने शहादत दिवस पर शहीद ए आज़म भगतसिंह को याद किया

भगतसिंह मैमोरियल कमेटी ने शहादत दिवस पर शहीद - ए - आज़म भगतसिंह को याद किया - - - भगतसिंह मैमोरियल कमेटी ने शहीद ए आज़म भगत सिंह को उनके शहादत दिवस 23 मार्च पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। हावड़ा के काजीपाड़ा मोड़ पर स्थित भगतसिंह की मूर्ति पर सुबह कमेटी के सदस्यों ने फूल माला चढ़ा कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। संध्या समय विभिन्न स्कूल के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत कविता गीत सुनाए। युवा छात्र छात्राओं ने शिबपुर ट्राम डिपो हावड़ा से भगतसिंह के लिए ड्रम की धुन बजाते हुए एक रैली भी निकाली जो काजीपाड़ा मोड़ स्थित भगतसिंह की मूर्ति परिसर पर समाप्त हुई। सभी युवा वर्ग ने गॉर्ड अॉफ ओनर से मूर्ति के सामने सलामी दी। इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया गया। विशिष्ट वक्ता भवानीपुर कॉलेज की हिंदी अध्यापिका डॉ वसुंधरा मिश्र ने अपने वक्तव्य में भगतसिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगतसिंह आज भी जिंदा है, आज 93वीं पुण्यतिथि पर भगतसिंह को स्मरण करना हमारे युवा पीढ़ी के लिए और सभी देशवासियों के लिए प्रेरणादायी है। मात्र 23 वर्ष का युवक धर्म, जाति और भाषा से परे अपने देश के लिए एक विचार और एक सोच बन गया है जो देशभक्ति के लिए प्रेरणादायी है। भगतसिंह मैमोरियल कमेटी के सचिव सौमित्र सेनगुप्ता ने बच्चों द्वारा तैयार की गई भगतसिंह बुलेटिन का लोकार्पण किया और कहा कि इससे बच्चों की सृजनात्मक कार्य में बढ़ोतरी होगी। अनीसूल करीम ने भगतसिंह के फांसी की सजा से संबंधित बातें बताई साथ ही जेल में उनपर हुए अंग्रेजी शासन द्वारा होने वाली अमानवीयता के विषय में बताया। वहीं शिक्षक जसवीर सिंह ने बताया कि जब भगतसिंह 14 वर्ष के थे और जलियांवाला बाग में होनेवाले नरसंहार को देखकर उनमें भारी बदलाव बदलाव आया और देश के प्रति अपने प्राणों तक की परवाह नहीं की। पूटन माला, माधुरी झा और उनकी टीम ने इस कार्यक्रम का संयोजन किया ।

साइबर अपराध से खुद को बचाने पर सत्र

साइबर अपराध से खुद को बचाने पर सत्र वित्तीय अपराधों को रोकने का प्रमुख उपाय उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ अपनी बैंकिंग सुरक्षा के बारे में लगातार सतर्क रहना है। सीएसआर पहल के हिस्से के रूप में, आईसीआईसीआई फाउंडेशन को 23 मार्च 2023 को भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में छात्रों को साइबर अपराधों के बारे में जागरूक करने के लिए आमंत्रित किया गया था। आईसीआईसीआई फाउंडेशन सीएसआर बैंकिंग में वित्तीय सलाहकार श्री मैनक चक्रवर्ती को सम्मानित किया मीनाक्षी चतुर्वेदी (समन्वयक, सुबह, वाणिज्य विभाग) ने । इसके बाद श्री चक्रवर्ती ने छात्रों से यह पूछकर सत्र शुरू किया कि उन्होंने कितने ऑनलाइन फ्रॉड के बारे में सुना है। इसके बाद छात्रों को जामताड़ा घोटाले के बारे में बताया गया और साथ ही यह भी बताया गया कि किस तरह कोलकाता में साइबर अपराध अपने उच्चतम स्तर पर है। छात्रों को साइबर क्राइम उद्योग में उपयोग किए जाने वाले ऐसे शब्दों से परिचित कराया गया जो निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। प्रतिभागियों को फिशिंग लिंक्स, विशिंग कॉल्स, जूस जैकिंग, मनी म्यूल्स, पिरामिड स्कीम्स आदि जैसे साइबर अपराधों से खुद को बचाने के तरीकों के बारे में बताया गया। छात्रों को विशेष रूप से जूस जैकिंग पर सूचनात्मक पाया, जहां सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करना और सामान्य स्थानों पर प्लग पॉइंट में चार्ज करना वित्तीय धोखाधड़ी का कारण बन सकता है। उनके सामने वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में पहुंचने के लिए हेल्पलाइन नंबरों के साथ दस्तावेज़ जालसाजी जैसी चीजों पर भी चर्चा की गई। वक्ता ने स्पष्ट रूप से उस प्रक्रिया का विवरण दिया जिसके द्वारा ग्राहक ग्राहक सेवा नंबरों तक पहुंच सकते हैं और ऑनलाइन टिकट प्राप्त कर सकते हैं जब उन्हें पता चलता है कि वे साइबर अपराध का शिकार हो गए हैं। सत्र ऑनलाइन लेनदेन में धोखाधड़ी पर दो वीडियो के साथ समाप्त हुआ और स्कैमर्स इस तरह से कैसे काम करते हैं कि भोले-भाले लोग आसानी से झुक जाते हैंअंत में, सत्र को इस दृष्टिकोण के साथ लपेटा गया था कि किसी को अपने बैंक विवरण, google pay UPI नंबर साझा न करने के प्रति जागरूक होना चाहिए, जब तक कि स्वयं बैंकों द्वारा नहीं पूछा जाता।

भवानीपुर कॉलेज के एनसीसी बैच का विदाई अभिनंदन समारोह 23

भवानीपुर कॉलेज के एनसीसी बैच का विदाई अभिनंदन समारोह संपन्न - - - भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के एनसीसी के बैच की विदाई समारोह का आयोजन कॉलेज के जुबली सभागार में आयोजित किया गया। विदाई- खट्टी-मीठी यादें समेटे एक शब्द है जो हमें स्मृतियों में घेरे रखता है। 23 मार्च, 2023 को बीईएससी एनसीसी कलेक्टिव द्वारा विदाई अभिनंदन का आयोजन किया गया जिसमें रैंक समारोह, 2020 के बीईएससी एनसीसी बैच को विदाई दी गई और उच्च कैडट को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में थल सेना और एयर विंग के अचीवर्स के साथ-साथ एयर विंग के योग्य कैडेटों को भी पदोन्नति दी गई। इसमें वन बी एयर स्क्वाड्रन एनसीसी के कमांडिंग ऑफिसर के साथ पी. आई. स्टाफ भी शामिल रहा। इस कार्यक्रम में तीनों विंगों - जल, वायु और थल के साथ यह प्रथम बीईएससी एनसीसी कार्यक्रम है जिसमें नौसैनिक भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत छात्र मामलों के सम्मानित डीन, प्रोफेसर दिलीप शाह ने अपने प्रेरक शब्दों के साथ सभा को संबोधित करते हुए एक ओजस्वी वक्तव्य दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रथम वर्ष के एनसीसी के कैडेट की नृत्य प्रस्तुति के साथ हुआ। इसके बाद सीनियर कैडट की भावी यात्रा के लिए भावनात्मक शुभकामनाएंँ दी गईं , एनसीसी आर्मी विंग के कैडेट प्रिंस मिश्रा ने स्वरचित रचना का सस्वर पाठ किया। साथ ही छोटी-छोटी ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति साझा की गई, जिसमें पुराने एनसीसी बैच के कार्यकलापों और गतिविधियों को दिखाया गया। पिछले वर्ष के उच्च उपलब्धियाँ हासिल करने वालों को आमंत्रित किया गया। गणतंत्र दिवस शिविर, नई दिल्ली, 2023 और अखिल भारतीय वायु सैनिक शिविर, जोधपुर, 2022 के सबसे प्रतिष्ठित यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम, बांग्लादेश, 2022। जेयूओ शुभदीप के माता-पिता साहा चौधरी, बांग्लादेश में वीआईपी राजदूत, 2022 और सीयूओ इफ्फत शाहिद,आरडीसी '23, थे जिन्हें आमंत्रित किया और उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को स्वीकार करते हुए सम्मानित किया गया। सीडब्ल्यूओ स्नेहा सेठिया ने बेस्ट एसडब्ल्यू और जेयूओ दीपक कुमार तिवारी ने जीता सर्वश्रेष्ठ एसडी पुरस्कार , जूनियर्स, सीनियर्स और मेहमानों के लिए समान रूप से गर्व का क्षण था। इसके बाद सांचों का वितरण, कुछ गुणवत्ता के आधार पर वरिष्ठ कैडेटों को उपाधि प्रदान की गई। अभिनंदन के अंत में, प्रथम और द्वितीय वर्ष के कैडेटों द्वारा समूह प्रदर्शन किया और द्वितीय वर्ष के कैडेटों द्वारा एक नृत्य प्रस्तुति किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ कैडेटों ने कैटवॉक किया, मिस्टर और मिस बीईएससी की उपाधि दी गई। बाद में, हास्य प्रतिस्पर्धा में जेयूओ शिवांश सोमवंशी और सीडीटी अंकित कुमार को प्रदान किया गया एवं छह एयर विंग कैडेटों को नए कार्यालयों में पदोन्नत किया गया। एनसीसी के बैनर को हमेशा के लिए ऊंचा करने की एकमात्र आशा के साथ जिम्मेदारियां दी गईं जिनमें आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए सामूहिक प्रमुख में सी/एसजीटी रोहन सिंह चावला, सीयूओ इफ्फत शाहिद और एलसीपीएल आदित्य सिंह की घोषणा की गई। स्वयं सीओ सर ने जीवन के नए अध्यायों में सफलता के लिए प्रयास करते रहने के लिए शुभकामनाएं दीं।कार्यक्रम की रिपोर्ट अरित्रिका दूबे ने दी और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

दुर्गा ए मैया थारा रूप हजार - अर्चना संस्था ने किया माँ दुर्गा की आराधना

दुर्गा ए मैया थारा रूप हजार - अर्चना संस्था ने की माँ दुर्गा की आराधना - - - दुर्गा ए मैया थारा रूप हजार /थार चरणां म शीश नवाऊं म्हारी मात।संगीता चौधरी ने लोकसंगीत में माँ दुर्गा के प्रति भक्ति प्रकट की, मृदुला कोठारी ने मांँ तुम्हारे रूप की छवि दिखलाओ एक बार, पार लगा दो सबकी नैया /स्वर्ण माता पकड़ो बइया गीत सुनाया वहीं हिम्मत चोरड़़िया प्रज्ञा ने कुण्डलिया में माता की महिमा बताई माता तेरे नाम की,महिमा अपरम्पार।/जाप जपे जो प्रेम से, ले सपने आकार।।और गीत माँ शुभंकर, माँ सहारा।माँ हमें ही दे किनारा।।अहमदाबाद से भारती मेहता ने कविता मैं धरती हूँ , माँ हूँ जन्मदात्री हूँ , पालनहारी हूँ..., शशि कंकानी ने मांँ उतरो धरा पर फिर एक बार,नया रूप ले नया अवतार।।, पत्थर को मैं क्यूँ पूजूंँ जब देवी स्वरूपा दिखती मांँ ।।, विद्या भंडारी ने अपनी माँ के साथ बिताए समय पर कविता सुनाई - समय बताती एक घङी थी माँ और दल बादल बिच चमकै जी तारा राजस्थानी लोक गीत शैल भवानी म्हाने लागै जी प्यारा सुनाया। इंदु चांडक ने आदिशक्ति जगदीश्वरी,सकल जगत आधार। नमन करूँ तव चरण में,कर लेना स्वीकार।। भजन सुनाकर माँ के प्रति भक्ति प्रकट की। जूम पर हुए इस कार्यक्रम में नौरतनमल भंडारी ने माँ दुर्गा का आवाह्न करते हुए दो गीत सुनाए हे स्वर लहरी/सरगम की देवी/वर दे,मुझे वर दे,वरद और होके सिंह पर /सवार/ करके सोलह श्रंगार आई मैया/सुनकर भक्तों की/पुकार/आई मैया।वसुंधरा मिश्र ने तुम्हारा आना कविता सूर्य की पसरी धूप में तुम्हारा आना चाँदनी सा लगा /मन के झंकृत तारों ने नई रागिनी गाई सुनाई। अर्चना संस्था के सभी सदस्यों ने स्वरचित रचनाएँ और गीत पढे़ ।संस्था सृजनात्मकता और मौलिक रचनाकारों के लिए जानी जाती है। धन्यवाद ज्ञापन दिया विद्या भंडारी ने और कार्यक्रम का संचालन किया मृदुला कोठारी ने ।सूचना दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

चैट जीपीटी और एआई एप पर सेमिनार

चैट जीपीटी और एआई ऐप्स पर सेमिनार भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के सोसाइटी हॉल में 24 मार्च 2023 को चैट जीपीटी और एआई ऐप्स पर एक सेमिनार आयोजित किया गया था। संगोष्ठी की परिकल्पना छात्र मामलों के डीन प्रोदिलीप शाह, जो चाहते थे कि छात्र भविष्य के लिए और अधिक तैयार हों, जो एआई है। चैट जीपीटी, मानव जैसी भाषा को समझने और उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन किया गया एक ट्रेंडिंग एआई ऐप अब नवंबर 2023 से टेक्स्ट जनरेशन के लिए पसंदीदा प्लेटफॉर्म बन गया है और पहले 5 दिनों में 1 मिलियन उपयोगकर्ताओं को पार कर गया है। इसकी ट्रेंडिंग व्यवहार्यता के कारण कॉलेज ने एआई ऐप्स के भविष्य के बारे में बात करने के लिए उद्योग के विशेषज्ञों को बुलाया। प्रथम वक्ता उद्योग में 11 से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ एक अत्यधिक अनुभवी और कुशल डेटा वैज्ञानिक, चार्टर्ड एकाउंटेंट और प्रमाणित फोरेंसिक पेशेवर दीपक कुमार सिंह ने चैट जीपीटी के नोट पर सत्र की शुरुआत की। उन्होंने प्रतिभागियों से पूछा कि क्या वे जानते हैं कि एआई को आखिरकार प्रासंगिक बनने में कितने साल लगे, और दर्शकों को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि एआई 1950 के दशक में वापस चला गया। उन्होंने चैट जीपीटी प्लेटफॉर्म के बारे में विस्तार से बताया और एक डेमो प्रस्तुत किया कि सभी चैट जीपीटी वास्तव में क्या कर सकते हैं। चैट जीपीटी सुविधाओं को जोड़ते हुए, दीपक ने कहा कि एआई का भविष्य ऐसा है कि "जो व्यक्ति जीपीटी का उपयोग कर रहा है, उसे जीपीटी का उपयोग करने वाले किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा।" संगोष्ठी के दूसरे वक्ता अनिमेष दास रहे जो एक सीरियल एंटरप्रेन्योर और ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट, जिनके पास आठ से अधिक उद्योगों में ब्रांड और उत्पाद-निर्माण के क्षेत्र में दस से अधिक वर्षों का अनुभव है। अनिमेष ने सत्र की शुरुआत मेम्स और उन्हें बनाने के तरीके के इर्द-गिर्द की, आगे उन्होंने रचनात्मक कार्य को आसान बनाने के लिए बीस से अधिक एआई अनुप्रयोगों को दिखाया। उनके द्वारा चर्चा किए गए अन्य सभी एआई ऐप्स विभिन्न उद्योगों जैसे सामग्री निर्माण, डिजाइनिंग, ध्वनि डिजाइन, एनीमेशन इत्यादि के लिए प्रासंगिक हैं । उन्होंने सत्र का समापन इस आधार पर किया कि कोई भी तकनीकी प्रगति को रोक नहीं सकता है इसलिए व्यक्ति को इंट्राप्रेन्योर बनने पर अधिक ध्यान देना चाहिए न कि उद्यमी बनने पर। डिजिटल स्पेस में काम करने वाले छात्रों के लिए इसकी प्रासंगिकता के कारण यह सत्र बहुत सफल रहा। छात्र वक्ताओं के साथ विचारों का आदान-प्रदान कर रहे थे और सवाल उठा रहे थे कि वास्तव में एआई का भविष्य क्या है। कार्यक्रम का समापन डीन कार्यालय से प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी, समन्वयक बीकॉम मॉर्निंग और सुश्री समीक्षा खंडूरी द्वारा वक्ताओं को सम्मानित किए जाने के साथ हुआ।सूचना दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज में दो दिवसीय कार्निवाल 2023 का आयोजन

भवानीपुर कॉलेज में दो दिवसीय कार्निवाल 2023 का आयोजन - - - भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज द्वारा कॉलेज परिसर में दो दिवसीय कार्निवल 27 - 28 मार्च, 2023 को आयोजित किया गया जो सभी छात्रों, अभिभावकों और मेहमानों के लिए खुला था। कार्निवल का माहौल ठीक उस गली से दिखाई दे रहा था जहां कॉलेज के प्रवेश द्वार पर कार्निवल बैनर में आपका स्वागत है। प्रवेश द्वार से लेकर कॉलेज के अंदर तक झालरों और सुंदर सजावट और जगमगाती रोशनी के साथ सभी को आकर्षित करने वाला रह। इसके पंजीकरण के लिए सुबह 11:30 बजे से ही विद्यार्थियों की लंबी लाइन रही। सभी को वालिया हॉल से होते हुए टर्फ तक ले जाया गया। कॉलेज का टर्फ एरिया आकर्षण का केंद्र बन गया, जिसमें टर्फ के चारों ओर गेमिंग, मर्चेंडाइज और फूड स्टॉल लगे थे। टर्फ को चमकीले रंग के फ्रिंज से सजाया गया था, जिससे बाउंसी, ट्रैम्पोलिन और बुल राइड्स जैसे मजेदार कार्निवल गेम्स हुए। स्टॉल में सैंडविच, बर्गर, चाइनीज फूड और कई तरह के स्ट्रीट फूड जैसे नमकीन शामिल थे, पेय पदार्थों में लस्सी और मॉकटेल जैसे कई विकल्प थे। सभी प्रकार की बेकरी उल्लेख से परे है।अन्य स्टालों पर कलाकृतियां, परफ्यूम, पारंपरिक कुर्तियां, इंस्टेंट फोटोग्राफ, अनुकूलित टी-शर्ट, मैग्नेट और फोटो फ्रेम बेचे गए। गेमिंग स्टालों में डार्ट्स, राइफल शूटिंग, वॉटर गन, अक्षरों की व्यवस्था और कई अन्य जैसे दिलचस्प खेल थे। वालिया हॉल में, अन्य स्टॉल लगाए गए और उन्होंने विभिन्न प्रकार के सामान बेचे जिन्हें छात्रों ने अच्छी संख्या में बेचा। एयर हॉकी, हिटिंग कप जैसे कुछ अन्य खेल स्टॉल भी वालिया हॉल में लगाए गए । कार्निवल के प्रथम दिन छात्र छात्राओं द्वारा अपने पालतू पशुओं का प्रदर्शन और कॉलेज टर्फ पर आयोजित एक ओपन माइक कार्यक्रम देखा गया। प्यारे पालतू जानवरों को देखने के लिए टर्फ पर भारी भीड़ जमा हो गई। पालतू जानवर अपने देखभाल करने वालों के साथ टर्फ पर पालतू जानवरों के साथ टहलते रहे और सभी ने उन्हें प्यार किया। ओपन माइक इवेंट के लिए रास्ता बनाते हुए शाम छह बजे पेट शो समाप्त हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत छात्र मामलों के डीन प्रो. दिलीप शाह के जोरदार भाषण से हुई। इस शो को अंकित भारद्वाज ने होस्ट किया जो एक स्टैंड अप कॉमेडियन हैं और अपने प्रफुल्लित करने वाले चुटकुलों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया । ओपन माइक में अन्य प्रतिभागियों ने प्रस्तुति दी तो कुछ गायकों ने अपनी सुरीली आवाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह शाम दिल को छू लेने वाली शायरियों से मंत्रमुग्ध कर देने वाली थी, क्योंकि कार्यक्रम शाम साढ़े सात बजे समाप्त हुआ। दिन भर के कार्यक्रमपूर्ण दिन के बाद डीजे नाइट के लिए डांस फ्लोर पर रोशनी की गई और छात्रों ने संगीत की धुन पर थिरकने के लिए ठुमके लगाए। कार्निवाल का पहला दिन रात साढ़े नौ बजे खत्म हुआ और तब तक सभी स्टॉल में समान बिक चुके थे। कार्निवल के द्वितीय दिन, फुटफॉल एक हजार से ऊपर था और स्टॉल लोगों से भर गए थे। दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण बैंड का प्रदर्शन था जो टर्फ पर आयोजित किया गया था। राग एन रॉक और रेट्रो कैट्स उस रात प्रदर्शन करने वाले बैंड थे। उनके शानदार प्रदर्शन ने दर्शकों को मनोरंजन से रोमांचित कर दिया। अगली घटना आग जगलिंग थी जो वालिया हॉल के बाहर आयोजित की गई थी। इसमें रोमांचक कार्यक्रम शामिल थे जो नृत्य तकनीकों के साथ-साथ करतब दिखाने, हेरफेर करने, अग्नि-श्वास, हास्य और दर्शकों के साथ सीधे बातचीत के साथ थे। कार्निवल छात्रों के बीच उद्यमिता के कौशल को स्थापित करने का एक हिस्सा था और दूसरे दिन के अंत तक, छात्र निश्चित रूप से सफल उद्यमी बनने के लिए भविष्य के लिए तैयार थे। कार्यक्रम का दूसरा दिन रात साढ़े नौ बजे तक समाप्त हो गया और यह एक जबरदस्त सफलता थी जिसे अंत में डीन प्रो दिलीप शाह की उपस्थिति में मनाया गया।कार्निवाल की रिपोर्ट बीए द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा कसिस शॉ ने दी और सूचना डॉ वसुंधरा मिश्र ने दी ।

क्या वर्तमान शिक्षा भविष्य में काम आएगी? विषय पर भारत की तीन प्रतिष्ठित संस्थानों के उच्च पदाधिकारियों के बहुमूल्य विचार

क्या वर्तमान शिक्षा भविष्य में काम आएगी?विषय पर भारत की तीन प्रतिष्ठित संस्थानों के उच्च पदाधिकारियों के बहुमूल्य विचार - - - भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के जुबली सभागार में आयोजित भारत के तीन प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रमुख पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों के सम्मुख अपने बहुमूल्य विचार रखे। सभी पदाधिकारियों का अभिनंदन भी किया गया।सत्ताइस मार्च 2023 को द भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में छात्रों को अपने व्यक्तिगत करियर पथ के नायकों से मिलने का सुनहरा अवसर मिला। तीन प्रतिष्ठित संस्थानों, द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया और द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया के गणमान्य व्यक्ति सुबह ग्यारह बजे कॉलेज के जुबली हॉल में उनके योगदान के लिए सम्मानित होने के लिए एकत्रित हुए। सीए (चार्टर्ड एकाउंटेंसी), सीएमए (लागत और प्रबंधन लेखा), सीएस (कंपनी सचिवालय) के पाठ्यक्रमों का अनुसरण करने वाले भविष्य के इच्छुक छात्रों को संबोधित किया जो विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर था । जीवन में एक बार मिलने वाले इस अवसर का फायदा 225 विद्यार्थियों उठाया। गेट खुलते ही वे हॉल में उमड़ पड़े। तीन संस्थानों से कुल 12 गणमान्य व्यक्ति थे और उनमें से कुछ कॉलेज के पूर्व छात्र भी थे। कार्यक्रम की शुरुआत पूर्वाहन साढ़े ग्यारह बजे गणमान्य व्यक्तियों द्वारा औपचारिक दीप प्रज्वलित करने के साथ छात्र मामलों के डीन प्रो. दिलीप शाह के वक्तव्य के साथ हुई। इसके बाद, प्रो. सीए विवेक पी. पटवारी और प्रो नितीन चतुर्वेदी जो कार्यक्रम के एंकर भी थे द्वारा गणमान्य व्यक्तियों को मंच पर बुलाया गया। प्रो. शाह द्वारा सम्मानित किया जाना और इस तरह छात्रों के साथ अपने ज्ञानवर्धक शब्दों को साझा किया । सीए रंजीत अग्रवाल से शुरू होकर द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट से लेकर डॉ देवाशीष मित्रा, सेंट्रल काउंसिल के सदस्य और द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के तत्काल पूर्व अध्यक्ष, और सीएमए बिस्वरूप बसु, पूर्व अध्यक्ष और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के सेंट्रल काउंसिल के सदस्य। इस कार्यक्रम में सीएस का अभिनंदन भी किया गया। भारत के कंपनी सचिवों के संस्थान के EIRC के उपाध्यक्ष डॉ मोहित शॉ, जिन्होंने उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ छात्रों को अपने बहुमूल्य ज्ञान और अनुभव साझा किए, जिससे उन्हें भविष्य में अधिक उपयुक्त विकल्प बनाने में मदद मिली। छात्रों को सलाह दी गई कि वे भविष्य में और अधिक कुशल होने के लिए अधिक तकनीकी प्रथाओं को विकसित करें। एक ऐसी घटना जहां हमने ज्ञान को अनुभव से उत्साह में स्थानांतरित होते देखा।अनिकेत दासगुप्ता ने अंग्रेजी में रिपोर्ट बनाई और सूचना दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

लार्सन और टुब्रो एडुटेक के सहयोग सेमिनार

लार्सन और टुब्रो एडुटेक के सहयोग से सेमिनार - - - डिजिटल युग के इस अत्यधिक लक्ष्य-उन्मुख युग में, कौशल आधारित ज्ञान का नया युग देश में छात्रों के लिए प्रमुख महत्व बन गया है। बदलते चलन के साथ तालमेल बिठाने के लिए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने लार्सन एंड टुब्रो एडुटेक के सहयोग से एक सेमिनार का आयोजन किया। संगोष्ठी 20 मार्च 2023 को पूर्वाहन 11:30 बजे सोसाइटी हॉल में थी जिसमें विभिन्न पाठ्यक्रमों के 90 से अधिक छात्र यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि नए युग के कार्य के लिए कौशल की आवश्यकताएं क्या हैं। लार्सन एंड टुब्रो जिसे आमतौर पर एलएंडटी के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय बहुराष्ट्रीय समूह कंपनी है, जिसने छात्रों को ऑनलाइन मोड में आत्म-गति से सीखने के लिए कौशल आधारित पाठ्यक्रम प्रदान करके शिक्षा क्षेत्र में प्रवेश किया है। ये पाठ्यक्रम छात्रों को एल एंड टी और इसके कॉर्पोरेट संघों द्वारा आवश्यक आवश्यक कौशल सीखने में सक्षम बनाएंगे। सत्र की शुरुआत द्वारा L&T EduTech के परिचय के साथ हुई एलएंडटी से श्री गोविंद शॉ, कोलकाता कार्यालय की सीएसआर और प्रशासन गतिविधि के तहत एचआर, परियोजना कार्यान्वयन की देखभाल कर रहे हैं। उन्होंने डेटा एनालिटिक्स, फाइनेंस एंड अकाउंट्स आदि सहित एलएंडटी द्वारा पेश किए गए विभिन्न पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को बताया , जो छात्रों को डेटा एनालिस्ट, रिसर्च एनालिस्ट, फाइनेंस एसोसिएट आदि जैसी नौकरी की भूमिकाओं के लिए तैयार करता है। बेहतर रोजगार के लिए कौन से कौशल सीखे जा सकते हैं, इस पर आंख खोलने वाले सत्र के बाद, छात्रों ने पूछताछ की कि वे पाठ्यक्रमों के लिए नामांकन कैसे कर सकते हैं और नौकरी के अवसरों को बढ़ा सकते हैं। संगोष्ठी दोपहर 12:30 बजे डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स, प्रो. के समापन भाषण के साथ समाप्त हुई। प्रो दिलीप शाह ने छात्रों को समय के साथ चलने और स्नातक होने तक नौकरी के लिए तैयार होने के लिए प्रोत्साहित किया। संगोष्ठी के पीछे का विचार छात्रों को इस बात से परिचित कराना था कि कॉर्पोरेट वास्तव में नौकरी चाहने वालों से क्या उम्मीद करते हैं और इस तरह के पाठ्यक्रमों के माध्यम से उनकी अपेक्षाओं को कैसे पूरा किया जाए।अनिकेत दासगुप्ता बीकॉम (एच) प्रथम वर्ष के छात्र ने रिपोर्ट दी। सूचना दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

ग्रीन प्लाई औद्योगिक ईकाई जोका का दौरा

ग्रीनप्लाई औद्योगिक ईकाई जोका का दौरा-- भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने उद्योग ग्रीन प्लाई का दौरा किया जो उनके औद्योगिक ज्ञान सीखने में बढ़ोतरी करता है। कक्षा की दीवारों के अंदर और बाहर का अनुभव करता है क्योंकि कक्षा शिक्षण और कॉर्पोरेट अभ्यास के बीच हमेशा एक अंतर रहता है। वाणिज्य विभाग (सुबह) के छात्रों के लिए औद्योगिक यात्राओं की व्यवस्था करके इस अंतर को कम करने की पहल की गई ।मॉर्निंग सेशन के छठे सेमेस्टर के छात्रों को ग्रीनप्लाई देखने का मौका दिया गया। 11 मार्च, 2023 को कॉर्पोरेट जगत और प्रबंधन सिद्धांत के बीच की खाई को पाटने के लिए यह महत्वपूर्ण पहल है। अपने शैक्षणिक पाठ्यक्रम के दौरान अलग अनुभव होता है और वहां जाकर देखने में बहुत अंतर होता है। मॉर्निंग सेक्शन के लगभग 34 छात्र, विभाग के 2 फैकल्टी सदस्यों के साथ कृपारामपुर, जोका में औद्योगिक यात्रा के लिए गए। छात्रों ने फैक्ट्री में चल रही कार्यप्रणाली के बारे में जाना। प्लाई उद्योग में विनियर, फाइबर बोर्ड, हार्डबोर्ड, इंप्रेग टिम्बर जैसे विभिन्न प्रकार के उत्पाद हैं।टिम्बर्स, ब्लॉक बोर्ड्स और लेमिन बोर्ड्स को कॉम्प्रेग करें। लॉग चयन से शुरू होकर, छीलने से लेकर वीनर तक, गर्म प्रेसिंग, प्री-प्रेसिंग, सैंडिंग और एज फ़िनिश तक सुखाने से, इस दौरे ने छात्रों को औद्योगिक प्रक्रिया का एक दिलचस्प प्रत्यक्ष अनुभव दिया और व्यावहारिक आधार पर उनके तकनीकी ज्ञान को विकसित करने में मदद की। कुल मिलाकर, यात्रा एक ज्ञानवर्धक अनुभव था और छात्र संचालन के पैमाने और निर्माण प्रक्रिया में उपयोग की जाने वाली तकनीक से बहुत प्रभावित हुए। इस यात्रा ने उन्हें प्लाइवुड निर्माण प्रक्रिया और उच्च गुणवत्ता वाले प्लाइवुड उत्पादों के उत्पादन में किए जाने वाले प्रयासों की बेहतर समझ दी। वहां उन्होंने प्लाई की निर्माण प्रक्रिया, उत्पादन प्रक्रिया, लेबलिंग, परिवहन और बिक्री की प्रक्रिया को भी समझा। विभिन्न विभागों के साथ उनकी बातचीत ने कंपनी का समग्र दृष्टिकोण प्रदान किया। यह दौरा काफी संवादात्मक और जानकारीपूर्ण था क्योंकि उन्हें एक संयंत्र में होने वाली निर्माण और विपणन गतिविधियों के बारे में पता चला। यह छात्रों के लिए एक रोमांचकारी अनुभव था क्योंकि इससे उन्हें कॉर्पोरेट जगत में पैर जमाने में मदद मिलेगी। ग्रीनप्लाई के फैक्ट्री प्रबंधक श्री पार्थ नाथ को स्मृति चिन्ह के रूप में प्रशंसा का प्रतीक भेंट किया गया।सूचना दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने । 

Wednesday, March 15, 2023

साहित्यिक संस्था ने लेखिका रेणु गौरिसरिया और प्रमिला धुपिया पर की परिचर्चा

साहित्यिकी संस्था ने लेखिका रेणु गौरिसरिया और प्रमिला धूपिया के व्यक्तित्व और कृतित्व पर की चर्चा - - - साहित्यिकी संस्था द्वारा वर्चुअल गोष्ठी में संस्था की वरिष्ठ लेखिका रेणु गौरीसरिया और प्रमिला धूपिया के व्यक्तित्व और कृतित्व पर परिचर्चा का आयोजन किया गया ।दोनों का ही जन्म 1941 का है और दोनों ही बालिका शिक्षा सदन विद्यालय की छात्रा रही हैं। प्रमुख वक्ताओं में गीता दूबे और कुसुम जैन ने क्रमशः रेणु गौरिसरिया और प्रमिला धूपिया की साहित्यिक यात्रा के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार व्यक्त किए । कथाकार और साहित्यकार रेणु गौरीसरिया के जीवन यात्रा पर गीता दूबे ने विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि रेणु जी बालिका शिक्षा सदन में प्रसिद्ध कथाकार मन्नू भंडारी की शिष्या और साहित्य मर्मज्ञ रहीं। साथ में एक लोकप्रिय शिक्षिका भी रहीं। उनके जीवन के संघर्षों और दुखों को कभी भी हाईलाइट न करते हुए सकारात्मक ऊर्जा सोच से अपने अस्सी वर्ष में आज भी ऊर्जा से भरी हुई हैं। बताया कि रेणु जी की हिंदी आत्मकथा 'जकारिया स्ट्रीट से मेफेयर तक' का अब द्वितीय संस्करण आ रहा है और बांग्ला में भी अनुवाद हो रहा है। रेणु जी के आलेख 'समस्या' को साहित्यिकी की वरिष्ठ सदस्या मीना चतुर्वेदी ने पढ़ा। रेणु गौरीसरिया ने अपने वक्तव्य में संस्था को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें जीवन के हर मोड़ पर प्रेम मिला। पुस्तकें पढ़ना, फिल्म, नाटक आदि देखना रुचि रही है और हंँसते रहना ही जीवन का मूलमंत्र माना है, रोना कोई नहीं सुनता। लेखिका प्रकृति से सौम्य हैं और जीवंतता इनके जीवन के महत्वपूर्ण अंग है। उनकी अनुभूतियों को उनकी रचनाओं में पढ़ा जा सकता है। बीस जुलाई 2022 को हुई इस गोष्ठी में मीना चतुर्वेदी ने रेणु के आलेख 'समस्या' का पाठ बहुत ही भावपूर्ण होकर किया जो बहुत ही सहज और प्रभावी रचना है। रेणु गौरीसरिया ने अपने वक्तव्य में अपने जीवन के अनुभवों को साझा किया।स्कॉटिश चर्च कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष और साहित्यकार गीता दूबे ने रेणु गौरीसरिया के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा करते हुए कहा कि वे एक शिक्षिका होने के साथ-साथ एक सफल लेखिका हैं। इस अवसर पर उषा श्राफ और पूनम पाठक ने प्रश्न भी किए जो रेणु जी के जीवन के दुखों और अच्छी शिक्षिका कैसे बनें से संबंधित रहे। साहित्यिकी की दूसरी वरिष्ठ सदस्या प्रमिला धूपिया रानी जीजी के रूप में लोकप्रिय हैं। जिनकी कविता 'स्वागत है स्वर्ग में तुम्हारा 'का पाठ बबीता माँधणा ने किया। माँधणा ने स्वरचित दोहे के साथ दोनों लेखिकाओं के गुणों और विशेषताओं का वर्णन किया। प्रमिला जी ने बताया कि संस्था की निदेशक कुसुम जैन की प्रेरणा से उन्होंने लिखना शुरू किया। विशारद प्रमिला जी भी बालिका शिक्षा सदन में मन्नू भंडारी जी की शिष्या रहीं और वहीं से पढ़ने-लिखने लिखने की रुचि विकसित हुई। कुसुम जैन ने प्रमिला धूपिया के साथ अपने पचास वर्षों की यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि संयुक्त परिवार की परंपरा और पुरुष प्रधान संस्कृति में एक सशक्त महिला के रूप में अपने को प्रतिष्ठित करते हुए प्रमिला यानी रानी जीजी को एक सशक्त व्यक्तित्व की मलिका बताया। समझौता और प्रतिरोध दोनों ही उनके व्यक्तित्व के महत्वपूर्ण पहलू हैं। उनके प्रगतिशील विचारों से भरे लेखन पर विस्तार से जानकारी दी। प्रमिला धूपिया ने कहा कि मेरे लेखन पर इस तरह की चर्चा करने के लिए संस्था को धन्यवाद देती हूँ अपने जीवन में आए अच्छे शिक्षकों मन्नू भंडारी और रमेश सर के संस्कार और पढ़ने की रुचि को महत्वपूर्ण बताया। अध्यक्षता करते हुए भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की हिंदी व्याख्याता डॉ वसुंधरा मिश्र ने वरिष्ठ लेखिकाओं की रचनाधर्मिता पर अपने महत्वपूर्ण विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान संदर्भ में रेणु गौरीसरिया और प्रमिला धूपिया के व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों ही प्रेरित करने वाले हैं। दोनों ही अपने - अपने जीवन में एक संपूर्ण महिला हैं । अस्सी की उम्र में रेणु जी का लेखन अभी भी अपनी ऊंँचाइयों को छू रहा है और प्रमिला धूपिया की जीवन शैली, अनुशासन, संकल्प और आदर्शों को लेकर परिवार, समाज और संस्कृति की विरासत के रूप में सभी को प्रेरित करता है। अनुभूति जब लेखन में उतरती है तो वह सृजन बन समष्टि से जुड़ जाती है। कार्यक्रम का संयोजन व संचालन वरिष्ठ सदस्या डॉ सुषमा हंस ने किया। संस्था की अध्यक्ष विद्या भंडारी, सचिव - डॉ मंजु रानी गुप्ता ने कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी का स्वागत करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। अंत में, डॉ वसुंधरा मिश्र ने सभी सदस्याओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम लेखन को बढ़ावा देते हैं और साहित्यिकी कई महत्वपूर्ण लेखिकाओं से समय-समय पर रूबरू कराती रहती है जिससे दूसरे लेखकों को प्रेरणा मिलती है। इस प्रकार की साहित्यिक परिचर्चा से विचारों का आदान-प्रदान होने के साथ-साथ लेखन और पाठक समृद्ध होता है। तकनीकी सहयोग दिया नुपूर अशोक ने। कार्यक्रम में साहित्यिकी संस्था की सदस्याओं की अच्छी-खासी उपस्थिति रही।

Saturday, March 4, 2023

लेखन उड़ने के लिए नहीं है -डॉ अल्पना मिश्र - - हिंदी कथा जगत की प्रमुख हस्ताक्षर अल्पना मिश्र

लेखन उड़ने के लिए नहीं है - - - हिंदी कथा जगत की प्रमुख हस्ताक्षर अल्पना मिश्र का जन्म 18 मई को 1969 आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ। हिंदी के मनीषी आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के परिवार में जन्म होना आपका सौभाग्य रहा जहां आंखें खुलते ही किताबों में घिरी रहीं । यही कारण रहा कि परिवेश, अनुशासन, तर्क - बहस और सीखने की बैचेनी मिली। प्रतिभा की धनी कथाकार डॉ अल्पना मिश्र ने महज कम उम्र में ही कहानीकार और उपन्यासकार के रूप में हिंदी कथा साहित्य को नये आयाम दिए। हिंदी में आपको "अनकन्वेंशनल राईटर" माना गया। गोरखपुर विश्विद्यालय से हिंदी में एम. ए., बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पी-एच. डी की शिक्षा प्राप्त डॉ मिश्र कई बड़े साहित्यकारों की छाया में पलीं। भाषा की ताजगी, विलक्षणता और लेखन में लोकरंग की उपस्थिति उनके लेखन को अलग पहचान देते हैं। 'भीतर का वक्त' ,'छावनी में बेघर' , 'कब्र भी कैद और जंजीर भी' और 'स्याही में सुरखाब के पंख' जैसे 6 कहानी संकलनों में आपने समाज के भीतर व्याप्त सच्चाई को शब्दों का उचित कैनवास दिया है। इन कहानियों के माध्यम से साहित्य जगत में एक विशेष स्थान बनाया है। समाज की जिन कुरूपताओं को कहा नहीं जा सकता, उसे उनकी कहानियों के किरदारों ने बखूबी कहा है। "हंस" पत्रिका में आपकी पहली कहानी "ऐ अहिल्या" छपी। वैसे वे स्वयं बताती हैं कि जब उन्हें कुछ समझ आई थी, संभवतः 11 वर्ष की आयु में अन्याय के विरोध में एक कविता लिखी थी जिसके शब्दों में सबकी आवाज प्रतिध्वनित हुई थी।लेखक की आवाज सबकी आवाज बने तभी वह सार्थक है। आपकी बहुत- सी कविताओं को मदनमोहन ने" नई रचना" पत्रिका में प्रकाशित कीं जिससे उत्साह वर्धन मिला। वे मानती हैं लेखक बनना बहुत ही जिम्मेदारी का कार्य है। यह बात उन्हें तब समझ में आई थी जब 2001 में कथादेश के अंक में "मुक्ति प्रसंग" कहानी छपी और वे खुशी के मारे उड़ने लगी थीं । उस समय ढेर सारे पत्र आए थे जिनमें प्रशंसा से लेकर मिलेजुले विचारों की प्रतिक्रिया वाले पत्र थे। ऋषिकेश में पढ़ाने के दौरान बस- यात्रा में साधारण लोगों की समस्याओं और उनके अनुभवों, मानसिकता आदि से गुजरने का अवसर मिला। उन्हीं अनुभवों के फलस्वरूप इस कहानी को इतनी प्रशंसा मिली। लेकिन जिनसे प्रेरणा और अनुभवों को प्राप्त करके लिखी वे लोग संतुष्ट नहीं हुए क्योंकि सबकी बातें और उनकी समस्याएं तो छूट ही गईं थीं, उस एक कहानी में सबकी बात आनी संभव नहीं थी। कहाँ तो वे आकाश में उड़ रही थीं और उनकी अनगिनत समस्याओं ने उनकी उड़ान पर मानो रोक लगा दी और धड़ाम से वे धरातल पर आ खड़ी हुईं। लेखन उड़ने के लिए नहीं है। हम तो खूब छ्प रहे हैं और पुरस्कार मिल रहे हैं, मैं हीरो बन गई या खुशियां मिल गईं। नहीं, उनका मानना है कि लेखन जिम्मेदारी और गंभीरता का विषय है।अपनी जमीन न छोड़ने वाली अल्पना मिश्र ने उपन्यास का सहारा लिया जहाँ वे बहुत से लोगों की बात को कह सकती हैं। छपने और प्रकाशित होने के बाद भी वे वहीं रहती हैं। दुष्यंत कुमार की पंक्ति का हवाला देते हुए उनका कहना है - "मुझमें रहते हैं करोड़ों लोग, चुप कैसे रहूँ।" अपनी बैचेनी को सबसे जोड़ना ही सबकी आवाज है। उपन्यास 'अन्हियारे तलछट में चमका ' के प्रथम पृष्ठ के कुछ अंश पढ़ने से ही उत्सुकता जगती है - - "मैं अपने-आप से लड़ रही थी। यह आसान नहीं था। आदमी लहूलुहान हो जाता था और बाहर से दिखता भी नहीं था। दुनिया चोट के निशान को प्रत्यक्ष प्रमाण मांगती थी। प्रमाण नहीं होने पर सिरे से खारिज कर दिया जाता था। इसके बावजूद भीतर की लड़ाई जारी रहती थी। बड़ा भीषण था युद्ध का भीतर होना, बड़ा भीषण था कि शत्रु अपने ही भीतर छिपा बैठा था। अपने ही भीतर कायरता का अगाध समुद्र लहरा रहा था। रोकता, डराता, विचलित करता जहाँ सबसे ज्यादा गहरा था, वहीं से उतरा कर निकलना था। * * * अलग दिखना और अलग होने में फर्क होता है। जीवन बहता रहता था। बहते हुए को साफ दिख जाता था, कुछ बहकर आगे निकल जाता था। हमारी पकड़ से बाहर, हमारी नींद से भी बाहर, हमारे स्वप्न से भी बाहर, हमारी पहचान से भी बाहर रहता था।इसी फर्क में जीवन बहता रहता था। " यह उपन्यास बनारस की पृष्ठभूमि पर लिखा हुआ है। " अस्थि फूल" सामाजिक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में आंदोलनों की साझेदारी है जो झारखंड - हरियाणा से होता हुआ दिल्ली तक फैला हुआ है। जहां स्त्री और पृथ्वी उपस्थित है। तीन आलोचना की पुस्तकें" स्त्री कथा के पांच स्वर", "सहस्त्रों विखंडित आईने में आदमकद" , "स्वतंत्रोतर कविता "ने लेखन जगत में खूब धाक जमाई। मध्यवर्गीय स्त्रियों के साथ साथ निम्न वर्ग की स्त्रियां भी इनके लेखन का विषय रहीं। "भीतर का वक्त" कहानी में आज की स्त्री के मन में हो रहे परिवर्तन की ओर तथा अपनी लैंगिक वर्जनाओं की सीमा को लांघकर अपने व्यक्तित्व की खोज कर रही स्त्री की अन्तर्गाथा है। पंजाबी, बांग्ला, कन्नड़, अंग्रेजी, मलयालम, जापानी, रूसी भाषाओं में आपकी कहानियों का अनुवाद हुआ है। कुनूर विश्विद्यालय, केरल, केरल विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, अवध और फैजाबाद विश्वविद्यालयों में बीए तथा एम ए के पाठ्यक्रमों में आपकी कहानियां शामिल की गई हैं। शैलेश मटियानी स्मृति कथा सम्मान(2006) और परिवेश सम्मान, राष्ट्रीय रचनाकार सम्मान, शक्ति सम्मान, प्रेमचंद स्मृति कथा सम्मान, भारतीय भाषा परिषद कोलकाता (2008) सम्मान से सम्मानित की गई। उनका मानना है कि पुरस्कार लेखन के प्रति और जिम्मेदारी बनाते हैं। नवाचार के विषय में उनका कहना है कि निरी कल्पना नहीं, ट्रीटमेंट नया होना आवश्यक है। नये यथार्थ को लाने के साथ-साथ नई दृष्टि लाने की आवश्यकता है। सच्चाई की मूल समस्याओं पर जाना चाहिए।हर क्षेत्र में स्पेस देने की आवश्यकता है। कोई भी साहित्य तभी नया होता है जब समाज में संवाद हो, बहस हो, तर्क हो तभी नई नई शाखाएं बनती हैं। परिवेश के साथ वैयक्तिक अनुभव, अध्ययन और परिश्रम से प्रतिभा का विकास होता है। आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदीजी का कहना है कि" प्रतिभा किसी के कुल की विरासत नहीं है।" अल्पना मिश्र किसी भी बड़े साहित्यकार की रचना को उनके मापदंडों के अनुसार ही आंकती हैं न कि किसी और से समानता के आधार पर। 2018 नवंबर में जापान सरकार ने किसी हिंदी रचनाकार पर फोकस कर 15 दिनों तक कार्य किया जो हिंदी जगत के लिए गौरव की बात है। जहां जापान की प्रसिद्ध कवि योको तवाडा़ और अस्सी की दशक की मशहूर कथाकार हिरोमी इटो जी से आपका अविस्मरणीय संवाद हुआ। उस यात्रा का संस्मरण भी आपने लिखा है। वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी की ऐसोसिएट प्रोफेसर हैं। अभी भी उनका काम जारी है - 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मुक्ता मणि माला से

द्वारका प्रसाद गर्ग 32 पृष्ठ 32 1- शान्ति तुल्यं तपो नास्ति संतोषात्परं सुखम् । न तृष्णायाः परोव्याधिर्नं च धर्मो दयापरः।। (चाणक्य नीति) अर्थ - शांति के समान तप नहीं, संतोष के पृष्ठ 35- 1- प्रह्लाद की निर्भीकता - मोको पहिरावो पाँव बेड़ी ने बँधाओ गाढ़े बंधन बंधाओ वो, खिंचावों काची खाल तें बिछूले बिछाओ तापे मोहि लो सुलाओ फिर आग भी लगाओ बाँध कापड़ दुशाले तें गिरी तें गिराओ काले नाग से डसाओ मझधार में डुबोओ बांध पाथर कमाल से विष भी पिलाओ मोहि अग्नि में जराओ पर नेह न छुडा़ओ गिरधारी गोपाल तें। 2- नृसिंह भगवान की कृपा - गिरीते गिराये पुनि, जल में डुबोये हाय अग्नि में जलाये राखि, कभी न सताने में मंजुल मुखारविन्द चूम - चूम कहे प्रभू क्षमा करो पुत्र मोहे देर भई आने में। 3- क्वेदं वपुः क्व च वयः सुकुमारमेतत्, क्वेतः प्रमत्तकृतदारुणयात् नाश्च । श्रुत्वा तवदार्तवचनं झटिति प्रातः, क्षन्तव्यमङ्ग! यदि में समये विलम्बः।। पृष्ठ 36- 1-सर्वे क्षयान्ता निचयाः पतनान्ताः समुच्छ्रयाः । संयोगा विप्रयोगान्ता मरणान्तं च जीवितम्। (महाभारत, स्त्री पर्व) 2- सर्वथा सुकरं मित्रं दुष्करं प्रतिपालनम् । (वाल्मीकि रामायण 2.105.16) अर्थ - मित्रता करना सहज है लेकिन उसको निभाना कठिन है। अनित्य त्वात् तु चितानां प्रीतिरल्पे$पि मिद्यते।। 3- ### 4- शोको नाशयते धैर्यं शोको नाशयते श्रुतम्। शोको नाशयते सर्वं नास्ति शोकसमो रिपुः।। (वाल्मीकि रामायण 2.62.15) 5- सुलभा पुरुषा राजन सततं प्रियवदिनः। अप्रियस्य च पथ्यसय वक्तॉ श्रोता च दुर्लभः।। (वाल्मीकि रामायण, अरण्यकाण्ड) 6- सुखावसाने इद्मेव सांरं दुःखावसाने इदमेव ज्ञेयम्। देहावसाने इदमेव जाप्यं, गोविंद दामोदर माधवेति।। अर्थ - जीवन में सुख का समय जब अवसान की तरफ़ हो तो यही सार है। जीवन में दुख का समय जब जाने वाला हो तब यही एक मंत्र जानने योग्य है। पृष्ठ 37 प्रश्न 1-- जल से पतला कौन है? कौन भूमि से भारी? कौन अग्नि से तेज है? कौन काजल से कारी? उत्तर - जल से पतला ज्ञान है। पाप भूमि से भारी। क्रोध अनल से तेज है कलंक काजल से कारी। प्रश्न 2- सबसे विश्वसनीय मित्र कौन है? सर्वश्रेष्ठ प्रकाश कौन-सा है? दूध किसका अच्छा है? सबसे अच्छा कौन है? उत्तर - भाई सरीखो भट नहीं। तेज न सूर्य समान। दूध गाय के सम नहीं है। भूप न भोज समान। दूसरा उत्तर - भुजा सरीखो भट नहीं, तेज न नेत्र समान । दूध मात के सम नहीं, भूप न इन्द्र समान। पृष्ठ 38 1- भूखे को अन्नदान और जलदान, रोगियों के हेतु औषधालय खुलवाते हैं। किंतु दोनों में से श्रेष्ठ ज्ञान दान हेतु अधिकारी विद्वानों को बुलाते हैं। ऐसे उदार दान - दाताओं को धन्य-धन्य उनकी क्या गति होती सुनो! वे बताते हैं और सब लोग भगवान की खोज करते, किंतु दानी की खोज स्वयं भगवान करते हैं। 2- सानन्द सदनं सुताश्च सुधियः कान्ता मनोहारिणी सन्मित्रं सधनं स्वयोषिति रतिः चाज्ञापराः सेविकाः। आतिथ्यं सुरपूजनं प्रतिदिनं मिष्टान्नपानं गृहे साधोः संङ्ग मुपासमते हि सततं धन्यो गृहस्थाश्रमः।। (गृहस्थाश्रम) अर्थ - आनंद हो ,पुत्र विद्वान हो , संतान, सुंदरी पत्नी प्रिय बोलने वाली हो , सच्चे मित्र, सात्विक धन, स्वपत्नी में प्रीति, सेवा परायण सेवक, प्रतिदिन अतिथि - सत्कार, देव- पूजन एवं भोजन में मिष्ठान्न का प्रबंध तथा जिस घर में साधुओं का संग मिलता रहता है और उपासना होती रहती है, वह गृहस्थाश्रम धन्य होता है। पृष्ठ 39 1- प्रीणति यः सुचरितैः पितरं स पुत्रो, यद् भर्तुरेव हितमिच्छति तत्कलत्रम्। तन्मित्रमापादि सुखे च समक्रियं, यद्एतत्त्रयं जगति पुण्यकृतो लभन्ते। अर्थ - जो अपने पिता को अपने सदाचरण से प्रसन्न कर देता है वही वस्तुतः पुत्र है। जो पति के हित की कामना करती है वस्तुतः पत्नी है। सच्चा मित्र वही है जो संकट और सुख के समय समान रूप से साथ निभाता है। इस प्रकार ये तीनों श्रेष्ठ व्यक्तियों को पुण्यशाली लोग ही प्राप्त कर सकते हैं। 2- पुनर्वो असुं पृथिवी ददातुः पुनद्रयौ दैवी पुनरिन्त रक्षम्। पुनर्नः सोमस्तन्वं ददातु पुनः पूषां पथ्यांयास्वस्ति।। (ऋग्वेद अ. 8.अ 1 1ब 23.मंत्र 677) अर्थ - दिव्य गुणों वाली यह पृथ्वी हमें फिर प्राणशक्ति दे, द्यो लोक भी हमें प्राण शक्ति दे, अन्तरिक्ष भी हमें प्राणशक्ति दे , परमेश्वर हमें उत्तम शरीर दे, पोषक वायु हमें पुष्टि दे और जो प्रभु की वाक् शक्ति हमें कल्याणकारी वाणी प्रदान करे। 3- #### सत्यं वद, धर्मं चर स्वाध्यायान्मा प्रमदः। आचारस्य प्रियं धन माहृत्य प्रजातंतुं मा व्यवच्छेत्सीः।।(शिक्षावल्ली, तैत्तिरीय उपनिषद् पृष्ठ 40- 1- तुलसी या संसार में सबसे मिलिए धाय। क्या जाने किस वेष में नारायण मिल जाय।। 2- क्षणभंगुर जीवन की कलिका प्रातः खिली न खिली, मलयाचल की शुचि शीतलमंद सुगंध समीर चली न चली, भजले हरि नाम अरे रसना, फिर अन्त समय में जाने हिली न हिली। 3- नाचना जो चाहो, तो नाच रघुनाथ आगे । गाना जो चाहो, तो गोविंद गुण गाओ जी। भागना जो चाहो, तो भाग मंद कामों से। आना जो चाहो तो राम शरण आओ जी। 4- बड़े न हूजे गुन न बीन, बिरद बड़ाई पाय। कहत धतूरे को कनक, गहनों गढ़ो न जाय।। 5- धन- यौवन उड़ जाएगा, जेहि विधि उड़त कपूर। मन- मूरख गोविंद भज, क्यों चाहत जगधूर।। 6- कर्कोटकस्य नागस्य दमयन्त्या नलस्य च। ऋतुपर्णस्य राजर्षेः कीर्तनं कलिनाशनम्।। (महाभारत पुराण) पृष्ठ 41- 1- तन पवित्र सेवा किए, धन पवित्र कर दान। मन पवित्र हरिभजन कर, त्रिविध होत कल्याण। 2- माया तजी तो क्या भया, मान तजा नहीं जाय। जेहिं मानैं मुनिवर ठगे, मान सबन को खाय।। 3- मैं मैं बड़ी बलाय, सको तो निकलो भाग। कह कबीर कहँ लग रहे, रुई लपटी आग।। 4- सुशीलो मातृपुण्येन पितृ पुण्येन चातुरः । औदार्य वंश पुण्येन आत्मा पुण्येन भाग्यवान।। 5-स्वैरत्वै संग दोषेण दार दोषे दरिद्रता।। सुशीलो मातृ पुण्येन पितृपुण्येन पंडिताः। औदार्यं वंश पुण्येन आत्म पुण्याद् धनार्जनः।। 6- आचारः परमो धर्मः सर्वेषामिति निश्चयः । हीनाचारपरितात्मा प्रेत्य चेह विनश्यति ।। 7- नैनं तपांसि न ब्रह्म नाग्निहोत्रं न दक्षिणाः।q111q हीनाचार मितो भ्रष्टं तारयन्ति कथञ्च ।। 8- सर्व लक्षण हीनो$पि यः सदाचारवान्नरः। श्रद्दधानो$नसूयश्च शतं बर्षाणि जीवति ।। पृष्ठ 42 1- भीष्म को कृष्ण का आश्वासन - भाखत कहा हौं, ऐसी धारणा न राखो चित्त, प्रण के विरुद्ध पक्षपात ना बिचारिहौं, सारथी बनों हों रथ हांँकिबे मेरो काम, न्याय बद्ध युद्ध के नियम न बिगारिहौं। ' बिन्दु' कवि होयना प्रतीति जो तुम्हें तो सुनों साँची सौं करिके समस्त शंक टारिहौं जो पै होय हौं सबल सपूत एक बाप ही को तो पै काहूँ भांँति शस्त्र करि में धारिहौं पुनः भीष्म की शंका का निवारण - - - - 2- बोले घनश्याम सुनों भीषम भगत राज मेरे जन्म देने वाले जग में अपार हैं। खम्भ, सिन्धु, पृथ्वी, पावक से प्रकट हौंहूँ, कहाँ लौ बखानों ये अमित अवतार हैं, 'बिन्दु' कवि कहे कोई देवकी को लाल कहे, कोई कहे नंद के यशोदा को कुमार है। होय एक बाप तो बचावें निज लाज को, मेरी कौन लाज मेरे बाप तो हजार हैं। 3- प्रायेण देव मुनियों स्वमुक्ति कामाः मौन्नं चींरती विजने न परार्थ निष्ठा नैताणविहाय कृपणान् मुमुक्ष एको, नान्यं त्वदेव शरणम् भ्रमताने पश्च्य । पृष्ठ 43- श्री 1- प्रभु ने दो दो कर दिए हैं, करो कमाई आप। पराधीनता सम नहीं, और दूसरा पाप।। 2- जो पराये काम आता धन्य है जग में वही। द्रव्य ही जोड़कर कोई सुयश पाता नहीं।। 3- पास जिनके रत्न शशि, अनन्त और अशेष हैं । क्या वह सुरधुनि कै, सम हुआ लेश है।। 4- संदेश यहाँ मैं नहीं स्वर्ग का लाया। इस भूतल को ही स्वर्ग बनाने आया।। (मैथिली शरण गुप्त, साकेत) 5- जिन्दगी में किसी का साथ ही काफी है, कन्धे पर रखा हुआ हाथ ही काफी है, दूर हो पास क्या फर्क पड़ता है, क्योंकि अनमोल रिश्तों का अहसास ही काफी है। 6- ## कालो वा कारणं राज्ञो राजा वा काल कारणम् इति ते संशयो मा भूद् राजा कालस्य कारणम्। 7- सर्वतीर्थ मयी माता सर्वदेवमयः पिता। मातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन पूज्येत्।। (पद्मपुराण, सृष्टि खंड 47/11) 8- विद्वत्वं च नृपत्वं च नैव तुल्ये कदाचन। स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान सर्वत्र पूज्यते। 9- शुभस्य शीघ्रम् अशुभस्य काल हरणम्। पृष्ठ 44- 1- रहिमन निज मन व्यथा, मन ही राखो गोय। सुनि हठिलें हैं लोग सब, बाँट न लहिए कोय।। 2- कबिरा जो मन निरमला, जैसा गंगा नीर। पाछे पाछे हरि फिरे, कहत कबीर कबीर।। 3- भरम परा तिहुँ लोक में, भरम बसा सब ठांँव। कहे कबीर पुकार के बसे भरम के गाँव।। 4- जो रहीम ओछे बढ़े, तो बहुत उत्पात। प्यादे से फरजी भयो, टेडो़ टेड़ो जात।। 5- नर सम्पत्ति बिन पाय के, अति मत करियो कोय। दुर्योधन अति भावतें, भयो निर्धन कुल खोय।। 6- कबिरा गरब न कीजिये, कबहूँ न हंँसिये कोय। अबहूँ नाँव समुद्र में, क्या - क्या जाने क्या होय।। 7- तुलसी जाके बदन से, धोकेहुँ निकसत राम। ताके पग की पगतरी, मेरे तन की चाम।। पृष्ठ 45- 1- जिसने देखा कभी नयन भर, मोहन रूप बिना बाधा। वही जान सकता है क्योंकर, कुल कलंकिनि है राधा।। 2- माया तजि तो क्या भया, मान तजा नहीं जाय। जेहिं मानैं मुनिवर ठगे, मान सबन को खाय।। 3- हम गंगोदक, हम गगन, हम दीपक, हम भानु। ये हीं तुम्हें डूबहैं, कुल कोरी अभिमान।। 4- सात दीप नवखण्ड में, तीन लोक जग माहिं। तुलसी शांति समान सुख, और दूसरो नाहिं।। 5- चार वेद षट् शास्त्र में, बात मिली है दोय। सुख दीने सुख होत है, दुःख दीने दुःख होय।। 6- कानन भूधर बारि बयारी, महाविषु व्याधि दवा अरि घेरे। संकट कोटि जहॉं तुलसी, सुत मातु पिता हितु बंधु न नेरे। राखिये राम कृपालु तहाँ, हनुमान से सेवक हैं जेहिं केरे। नाक रसातल भूतल में, रघुनायक एक सहायक मेरे। 7- कृष्ण त्वदीय पद पंकज पञ्जरान्ते अधैव में विशतु - मानस राजहंस प्राण प्रयाण समये, कफ़ वात पित्तै। कण्ठे वरोधन विद्यो, स्मरण कुतस्ते।। पृष्ठ 46 - राम - केवट संवाद - 1- जाने कैसे भाव के समाने हो कृपानिधान विमल विचारवान बुद्धि के सयाने हो मनि की मुदरी उपहार देत बारंबार कौन धर्मसार सरकार उर आने हो 'बिन्दु' कवि कहे जात गोत न त्यागो नाथ कहे जाँति-पाँति तोरबे की हठ ठानी है मैं तो हूँ केवट विधि सागर नदी को किन्तु आप भव सागर के केवट पुराने हो। 2- हाज़ीर हूज़री में भयो दास दीनानाथ नेक निज करुणा नजर से निहार दो देत उपहार कहाँ मुदरी मणि को मोहि देना है तो जन्म की कमाई एक बार दो रत्न, धन,धाम नाथ काम के न मेरे कछु हो प्रसन्न राम घनश्याम तो करार दो पार उतराई सरकार तब जानो जब पार भवसागर से मुझको उतार दो। 3- जो दस बीस पचास भये सत्, होय हजार तो लाख मँगेगी कोटि अरब्ब खरब्ब असंख्य पृथ्वी पति होने की चाह जगेगी स्वर्ग पताल को राज करौं, तृष्णा अघ की अति आग लगेगी 'सुन्दर 'एक संतोष बिनासठ, तेरी तो भूख कभी न मरेगी। पृष्ठ 47- 1- सत्यं शिवम् सुन्दरम् - ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्ण मुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्ण मेवावशिष्यते।। ॐ शांतिः ॐशांतिः ॐशांतिः। 2- सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत्।। (शांतिपाठ) 3- ॐकार बिंदुसंयुक्तं नित्यं ध्यायन्ति योगिनः। कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय नमो नमः।। 4- रे चित्त चिन्तय चिरं चरणों मुरारै पारं गमिष्यसि यतो भव सागरस्य पुत्र कलत्र मित्र नहीं ते सहाया सर्व विलोकय सखे मृग तृष्णा कामां। 5- व्रजे प्रसिद्धं नवनीतचौरं, गोपाङ्गनानां च दुकूलं चौरम्, अनेकजन्मार्जित पाप चौरं चौराग्रगण्यम् पुरुषं नमामि । 6- सुनहि शिष्य ये तीन उपाई, भक्ति योग हठ योग कराई पुनि सांख्य सुयोग ही मनलावै, तब तू शुद्ध स्वरूपहिं पावै। 7- ## शिवं विष्णुं गणेशं च शक्तिं सूर्यं च पूजनम् । एतत्सर्वं कृतं तेन दत्त इत्यक्षर द्वयम्।। 36।।(दत्तात्रेय स्तवं) पृष्ठ 48- 1- यं ब्रह्म वेदान्त विदो वंदती परम प्रधानं पुरुषस्तथान्ये ।। विश्वोद्गते कारण मिश्र्वंरवा तस्मै नमो विघ्नविनाशनाय।। 2- यतो वेदयाचो विकुण्ठा मनोभिः सदा नेति नेतीति यत्ता गृणान्ति परब्रह्म रूपं चिदानंदभूतं सदा तं गणेशं नमामि भजामिः 3- स्वस्ति श्री गणनायकं गजमुखं मोरेश्वरम् सिद्धिदम् बल्लालं मुरूडं विनायक मढ़ चिन्तामणिं थेवरम् लोहाद्रिं गिरिजात्मजं सुवरदं विघ्नेश्वरं ओझरम् ग्रामे रांजण संस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मंगलम्। 4- सिन्दूराभं त्रिनेत्रं पृथुत्तर जठरं हस्तपद्मैर्द धानं दंत पाशाङ्कुश्चेष्टान्युरूकर विलसद् बीज पूराभिरामम् बालेंदु द्योत मौलिं करिस्यति वदनं दानश्र्रार्द गण्डं भोगीन्द्राबद्ध भूषं भजत गणपतिं रक्त वस्त्राङ्गरागम् 5- नमस्तस्मै गणेशायं ब्रह्म विद्या प्रदायिनी। यस्यागस्यायते नाम विघ्न सागर शोषणे।। 6- ईश्वरे सानुकूले कः पीडितुं क्षमते जनम् । पृष्ठ 49 गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फलचारु भक्षणम्। उमासुतम् शोक विनाशकारकम् नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्। विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं! नागाननाय श्रुतियज्ञविभूतिषाताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।। - सुमुख श्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः । लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः। धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचंद्रो गजानन द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि ।। विद्यारंभे विवाहे च प्रवेशे निगमे तथा संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते।। पृष्ठ 50 - श्री गणेशजी की पूर्वजों द्वारा सुनी आरती - - ओम् जय गणपति स्वामी देवा जय जय जय शुण्ड जया जय चेतन शारद नामी - - ओम् जय गौरी पुत्र गणेश्वर परसन भव नामी - देवा ठुमक ठुमक पद त्रिभवन धारन गगने गुण गामी - ओम् जय एक दंत गज बदन विनायक मूषिका आरोही। - देवा मूषिका देवादि देव संतन वरदायक विघनन अघ हानी - ओम् जय भालचंद्र सिन्दूर बिराजे मुक्ता छवि मानी - देवा रिद्धि-सिद्धि नव के दायक गणपति अघ हानी - ओम् सुनि रानी सोई सुरत समानी मन वांछित दानी - देवा "अतित तुला पर "शरण बिहारी लम्बोदर नामी। - ओम् पृष्ठ 51 - 1- या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वींणा वरदण्ड मण्डित करा या श्वेत पद्मासना या ब्रह्माच्युत शंङ्कर प्रभृति भिर्दैवैः सदा वंदिता सामां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्या पहा। शुक्लां ब्रह्म विचार सार परमामाद्यां जगद् व्यापिनीं वीणा पुस्तक धारिणी मभयदां जाड्यान्धकारा पाहाम् हस्ते स्फाटिक मालिकां च मदधतीं पद्मासने संस्थिताम् वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धि प्रदां शारदाम्।। पृष्ठ 52- 1- हम ऐसी कुल बें किताबें क़ाबिल - ए-ज़ब्ती समझते हैं। कि जिनको पढ़के लड़के बाप को ख़ब्ती समझते हैं। (अक़बर इलाहाबादी) पृष्ठ 53- 1- अप जू सि नव तीस के बाकी के इकतीस फरवरी अट्ठाइस की चौथे संख्या उन्नतीस अर्थ - अप्रैल, जून, सितंबर, नवंबर चारों तीस दिन के माह होते हैं। शेष इकतीस दिन के, फरवरी 28 दिन का महिना और चौथे वर्ष 29 दिन का होता है। 2- कुम्भकर्ण - रावण संवाद - तुम चिंतित आज दशानन क्यों? हरली हमने मिथिलेश दुलारी । उपभोग किया तुमने उनका लखती न कभी वह ओर हमारी तुम राघव ही न फिर क्यों? इसमें हमको भय लागा भारी जब राघव रूप धरा मैंने जब मात समान लगी पर नारी। लक्ष्मी - पार्वती संवाद - - बाला जी बोली भिखारी, कहाँ अबला सुनिए बलिराज द्रगे पन्नग हैं कहाँ सुन्दरी भूषण ओ क्षीर समुद्र में सेज सवारे विष के पीवन हार कहाँ ओ पूतना के लिए कुच जाहिं निहारे, गोरा कहाँ व जोगी जटी धरि दण्डक में ताहि निहारें ऐ बात बताओ सखी कहाँ शंकर नाथ हैं प्राण पियारे।। पृष्ठ 54 - 1- पत्थर के जिगर वालों गम में वही रवानी है खुद ही राह बना लेगा, बहता हुआ पानी है। 2- नहाये धोये क्या भया, जो मन मैल न जाय। मीन सदा जल में रहे, धोय बास न जाय।। 3- दीदार दिलरूबा का, दीदार कह कहाँ है। देखा जो उस तरफ तो, इस तरफ वह कहाँ है।। 4- छू ले तू आसमान, जमीं की तलाश न कर, जी ले तू जिन्दगी कभी, खुशी की तलाश न कर, तकदीर बदल जायेगी अपने आप ही, ऐ मेरे भाई बस मुस्कुराना सीख लें, वजह की तलाश न कर। 5- जिन्दगी कभी उफ़, तो कभी आह होती है, ज़िन्दगी आह तो कभी वाह होती है, मुश्किल में कभी मुस्कान को न भूलें, क्योंकि मुस्कान से हर मुश्किल आसान होती है। 6- माना कि जिन्दगी में मुश्किलें खड़ी होती हैं घबराईए मत, वे हर मुश्किल से पार निकल जाते हैं जिनकी सोच बड़ी होती है। 7- अपने शुद्र अहम् का त्याग करो सफलता तुम्हारे पांँव चूमेगी। 8- भाव, ग्राहि जनार्दन। पृष्ठ 55 - कहावतें - - - - 1- पहली छोटी सेवा करना तो सीखो, फिर बड़ी सेवा का इंतजार करना, कहावत है , पहली भाटो तो उठा, डूंँगर के बांँथ पाछे पड़जे। 2- ##दगाबाज़ दूणो मवै 3- मधु पी लेते सभी, मधुप बन विषपान कठिन है। 4- भावाद्वैतं सदा कुर्यात क्रियाद्वैतं न कुत्र चित्त। 5- श्मशान - शिव का क्रीड़ा स्थल, जन का ज्ञान स्थल, शव का विश्राम स्थल 6- इनसे संतोष न करें - भजन, अध्ययन, दान 7- इनसे संतोष करें - भोग, भोजन, वित्त, परिवार, लोकेष्णा 8- आत्मानि प्रतीकानीं परेषानं समाचरेत् । 9- ##राजा कालस्य कारणम् 10- तुलसी हाय गरीब की, कभी न खाली जाय। 11- लीक लीक गाड़ी चले, लीक ही चले सपूत। लीक छोड़, तीनों चले शायर, सिंह, कपूत।। पृष्ठ 56- 1-दुःस्वप्न नाश के लिए - रामं स्कन्दं हनुमन्तं वनैतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरे नित्यं दुःस्वप्न तस्य नश्यति।। 2- सर्व देव प्रपन्नाय तवस्मिति च याचते। अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्य एतद् व्रतम्। 3- द्रव्य शुद्धि क्रियाशुद्धिर्मन्त्र शुद्धिश्च भूमिप। भवेद्मदि तदा पूर्णं फलं भवति नान्यथा।। 4- ##यह सृष्टि गौरव गज ग्रसित है, ग्रह दशा के ग्राह से है भक्तवत्सल शुभ सुदर्शन चक्र आप चलाइए। पृष्ठ 57- 1- सुख शय्या के बजाय, काँटों की गली में, कीर्ति को पकड़ो। - टॉलस्टॉय 2- प्यास कर्म के चुल्लू से ही बुझती है, वचनों के समुद्र से नहीं। - भास 3- क्षुधार्तो न तृणं चरंति सिंहः। - भूखा शेर घास नहीं खाता। 4- प्रशंसा शब्दों से नहीं, कर्मों से मानी जाती है। - लिंकन 5- आपत्ति मनुष्य बनाती है, सम्पत्ति राक्षस। - बेकन 6- उच्च पद पर टेढ़ी- मेढी़ सीढ़ी के बगैर नहीं पहुंँचा जा सकता। - बेकन 7- दो भले कान, सौ ज़बानों को ख़ुश्क कर सकते हैं। - फ्रैंकलिन 8- जिसकी इन्द्रियाँ बस में नहीं हैं , वह एक ऐसा मकान है, जिसकी दिवारें गिर चुकी हैं । - सुकरात 9- जो अपने भीतर डुबकी लगाता है, वह वहीं बस जाता है, लौटता नहीं, लौटता है तो ऐसा मोती लाता है, कि तारे भी शरमा जाते हैं। 10- जैसी करनी वैसा फल, आज नहीं तो निश्चित कल। पृष्ठ 58- 1- घृणा करना जैसे चूहे को घर से बाहर निकालने के लिए घर को जलाता है। - बर्जिल 2- मुझे देखकर कोई नाक- भौं न सिकुड़े मुझे, बस दुनिया से इतना ही लेना है। - अमृता 3- धनधान्य प्रयोगेसु विद्या संग्रहेणषु च। आहारे व्यवहार च त्यक्तं प्रजा सुखी भवेत्।। 4- हालाँकि खुदा की चक्की धीरे-धीरे पीसती है लेकिन बड़ा ही पीसती है। - लोंगफैंको 5- थोड़ा- सा भी झूठ मनुष्य का नाश कर देता है, जैसे दूध को एक बूँद जहर की। - गांँधी जी 6- भोलेनाथ का परिवार - - - काहे न मांँगत भीख फिरे, घर में नहीं अन्न न एक अधेला। मुख एक जो होय तो काम चले, मुख ही मुख से घर माहिं झमेला। शीश चढ़े सहस्रानन है और गजानन गोद लिए हैं गदेला झमेला। चतुरानन बाप पंचानन आप षडानन पूत दशानन चेला। पृष्ठ 59- 1- Every thing is fair in love and war. 2- What we are now is the second of our past actions and what we all in future that entirely depends upon our present deeds. It is fundamental truth that doer of good or giver of charity never comes to a grief. 3- Failure doesn't mean you are a failure. It is just means you haven't succeeded yet. 4- If winter comes can spring before behind. 5- Life is beautiful only for those who can citrate pain. 6- If a meritorious person becomes angry even than he is more usefull as a milk is sweet naturally but when it is churned its product butter is gained and that is more sweet.

कस्तूरबा : मेरा जीवन मेरा संदेश

मेरा जीवन मेरा संदेश है-कस्तूरबा - - आप मुझे जानते हैं। मैं हूं आपकी बा, मोहनदास कर्म चंद गांधी की धर्मपत्नी। मेरा जन्म 11 अप्रेल सन् 1869 में गुजरात के पोरबंदर जिले के छोटे से गांव में पिता गोकुलदास मकनजी और माँ ब्रजकुंवर बा कपाड़िया के यहाँ हुआ। मैं उनकी तीसरी संतान थी। मेरा विवाह सन् 1883 में मेरे पिता के मित्र के बेटे मोहन के साथ 7 साल की अवस्था में कर दिया गया था । मोहन भी उस समय 13 वर्ष के थे। उस समय बाल विवाह होता था। मेरा शुरुआती जीवन कष्ट से भरा रहा। मेरा जीवन देश और पति के लिए ही समर्पित रहा। दूसरी स्त्रियों की तरह मेरी निरक्षरता के लिए बापू मुझसे अप्रसन्न रहते थे। मेरा सजना,संवरना और घर से बाहर निकलना उन्हें पसंद न था, मुझ पर अंकुश लगाते लेकिन बापू के सभी प्रयास असफल रहे। बाद में तो मैं उनके हर कदम पर साथ रही। निरक्षर होने के बावजूद मुझमें अच्छे- बुरे को पहचानने का विवेक था। मैंने ताउम्र बुराई का डटकर सामना किया। 1906 में उनके साथ अफ्रीका गई और उसी दौरान मैंने उनके साथ मिलकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अपने जीवन का सबसे पहला सत्याग्रह किया जिसमें मुझे तीन महीने की जेल हुई।अंत में, जीत हम स्त्रियों की हुई। बापू के स्वाधीनता संग्राम के बड़े लक्ष्य के पीछे मैंने सदैव उनके कदम से कदम मिलाया। कई बातों पर हमारी नोक-झोंक भी होती। 1928 में ब्रिटिश हुकूमत ने लगान बढ़ा दिया तब सरदार वल्लभभाई पटेल के सहयोग से मैंने इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को एकजुट किया। इतिहास में पहली बार इतना बड़ा महिलाओं को आंदोलन हुआ। मेरे इस प्रस्ताव को अद्भुत सफलता मिली। इसके बाद सन् 1930 में डांडी यात्रा में बापू के साथ रही। इस दौरान सूरत में शराबबंदी के लिए भी सभी महिलाओं को मैंने एकत्र किया और धरने पर बैठ गई। नतीजा यह हुआ कि सूरत की सारी शराब की दुकानें बंद हो गई। मेरी इस सफलता का यह प्रभाव यह पड़ा कि मैं अंग्रेजी हुकूमत की आँखों में चुभने लगी। 1932-33 का ज्यादातर समय जेल की सलाखों के पीछे ही गुजरा। मुझे बिजलपुर जलकपुर के अध्यक्ष पद के लिए भी शामिल किया गया। मेरा मानना है - - - 'खुशी तब होती है जब आप क्या सोचते हैं, आप क्या कहते हैं और आप क्या करते हैं, सद्भाव में है।' गांव गांव में जाकर सफाई अनुशासन पढ़ाई आदि का महत्व बताती थी, दवाइयों का वितरण भी करती। बापू के अधिकतर उपवासों में उनके खाने पीने का ध्यान रखती। 1942 की बात है जब भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बापू गिरफ्तार कर लिए गए तो मैंने मुंबई के शिवाजी पार्क में भाषण देने का निश्चय भी किया लेकिन मुझे भी गिरफ्तार कर लिया गया और पूणे के आगा खाँ महल में रखा गया।बापू भी वहीं थे। 1944 में दो बार मुझे हृदय का दौरा पड़ा। सरकार ने आयुर्वेद डॉक्टरों का प्रबंध भी किया लेकिन 22 फरवरी 1944 को बड़ा दिल का दौरा पड़ा और मैं भारत की आज़ादी का स्वप्न लिए ही चल बसी। जहां प्यार है, वहाँ जीवन है। मेरा परिवार, मेरे चार पुत्र हरिलाल, देवदास, मनिलाल और रामदास गांधी अवश्य ही स्वतंत्र भारत में तिरंगा फहराएंगे। बापू की तपस्या विफल नहीं जाएगी। वंदेमातरम। -कस्तूरबा - - मोहनदास कर्म चंद गांधी की धर्मपत्नी कस्तूरबा जी जन्म 11 अप्रेल सन् 1869 में गुजरात के पोरबंदर जिले के छोटे से गांव में पिता गोकुलदास मकनजी और माँ ब्रजकुंवर बा कपाड़िया के यहाँ हुआ। बा उनकी तीसरी संतान थी। उनका विवाह सन् 1883 में हुआ ।उस समय बा की उम्र 7 साल और गांधी जी की उम्र 13 वर्ष की थी। उस समय बाल विवाह होता था। बा निरक्षर थीं इसके लिए बापू उनसे अप्रसन्न भी रहते थे।लेकिन बा बहुत ही कर्मठ और परिश्रमी थीं। उन्होंने बापू के हर कदम पर साथ दिया। निरक्षर होने के बावजूद बा को अच्छे- बुरे को पहचानने का विवेक था। उन्होंने ताउम्र बुराई का डटकर सामना किया। चार बच्चों की माँ होने के साथ-साथ बापू के हर आंदोलन और सत्याग्रह में साथ रहीं। देश को आजादी दिलाने में बा भी कई बार जेल गईं और महिलाओं को एकजुट कर ब्रिटिश हुकूमत से लड़ाई भी लड़ीं। सूरत में शराबबंदी करवाने में बा का बहुत बड़ा योगदान रहा। 22 फरवरी 1944 में दिल का बड़ा दौरा पड़ने से बा का निधन जेल में ही हो गया। वर्तमान में 1951 में साबरमती आश्रम और स्मृति न्यास में बापू और बा की यादों को संग्रहित किया गया है। हृदय कुंज में गांधी जी एवं कस्तूरबा ने लगभग 12 वर्षों तक निवास किया था। बा ने 1906 में उनके साथ अफ्रीका गई और उसी दौरान मैंने उनके साथ मिलकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अपने जीवन का सबसे पहला सत्याग्रह किया जिसमें मुझे तीन महीने की जेल हुई।अंत में, जीत हम स्त्रियों की हुई। बापू के स्वाधीनता संग्राम के बड़े लक्ष्य के पीछे मैंने सदैव उनके कदम से कदम मिलाया। कई बातों पर हमारी नोक-झोंक भी होती। 1928 में ब्रिटिश हुकूमत ने लगान बढ़ा दिया तब सरदार वल्लभभाई पटेल के सहयोग से मैंने इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को एकजुट किया। इतिहास में पहली बार इतना बड़ा महिलाओं को आंदोलन हुआ। मेरे इस प्रस्ताव को अद्भुत सफलता मिली। इसके बाद सन् 1930 में डांडी यात्रा में बापू के साथ रही। इस दौरान सूरत में शराबबंदी के लिए भी सभी महिलाओं को मैंने एकत्र किया और धरने पर बैठ गई। नतीजा यह हुआ कि सूरत की सारी शराब की दुकानें बंद हो गई। मेरी इस सफलता का यह प्रभाव यह पड़ा कि मैं अंग्रेजी हुकूमत की आँखों में चुभने लगी। 1932-33 का ज्यादातर समय जेल की सलाखों के पीछे ही गुजरा। मुझे बिजलपुर जलकपुर के अध्यक्ष पद के लिए भी शामिल किया गया। मेरा मानना है - - - 'खुशी तब होती है जब आप क्या सोचते हैं, आप क्या कहते हैं और आप क्या करते हैं, सद्भाव में है।' गांव गांव में जाकर सफाई अनुशासन पढ़ाई आदि का महत्व बताती थी, दवाइयों का वितरण भी करती। बापू के अधिकतर उपवासों में उनके खाने पीने का ध्यान रखती। 1942 की बात है जब भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बापू गिरफ्तार कर लिए गए तो मैंने मुंबई के शिवाजी पार्क में भाषण देने का निश्चय भी किया लेकिन मुझे भी गिरफ्तार कर लिया गया और पूणे के आगा खाँ महल में रखा गया।बापू भी वहीं थे। 1944 में दो बार मुझे हृदय का दौरा पड़ा। सरकार ने आयुर्वेद डॉक्टरों का प्रबंध भी किया लेकिन 22 फरवरी 1944 को बड़ा दिल का दौरा पड़ा और मैं भारत की आज़ादी का स्वप्न लिए ही चल बसी। जहां प्यार है, वहाँ जीवन है। मेरा परिवार, मेरे चार पुत्र हरिलाल, देवदास, मनिलाल और रामदास गांधी अवश्य ही स्वतंत्र भारत में तिरंगा फहराएंगे। बापू की तपस्या विफल नहीं जाएगी। वंदेमातरम।

चिंतन मोती

चिंतन - मोती द्वारका प्रसाद गर्ग हर सुबह एक प्रेरक प्रसंग लिख लें तो दिन अच्छा बीतता है। कहते हैं न कि कोई बात मन में पैठ जाय तो मनुष्य का इतिहास बदल जाता है। प्रेरक प्रसंग हमारी बुद्धि और विचारों को प्रेरित करती है। यह आपकी रुचि पर निर्भर है कि आपको अपने जीवन में क्या पसंद है उनसे संबंधित अनुभवों को अपनी डायरी में लिख लेते हैं। हमारे संस्कार ही मनुष्य की सबसे बड़ी वसीयत है और वही हमारे अंदर की मनुष्यता को बचाए रखती है।" सर्वे भवन्तु सुखिनः" की भावना रखने वाले द्वारका प्रसाद गर्ग ने भारतीय संस्कृति, आचार - विचार के प्रति अपनी श्रद्धा प्रदर्शित करते हुए इस डायरी में असंख्य विचार मोतियों को पिरोया है। आपके जीवन की गुणवत्ता को अपने चिंतन से पूर्णता प्रदान करने का प्रयास किया है। डायरी लिखना अपनी रचनात्मक ऊर्जा को प्रकाशित करना है। डायरी को व्यक्तिगत ही समझा जाता रहा है लेकिन वह कई रूपों में प्रयुक्त होती है। सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक , राजनीतिक, इतिहास, साहित्य आदि सभी विषयों में डायरी ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों और आदर्शों में आए बदलाव ने कहीं- न - कहीं भारतीय संस्कृति को आहत किया है। बुद्ध, महावीर, राम, कृष्ण, कबीर, नानक, मीरा की इस धरती को बचाने के लिए संभवतः पुनः अपनी जड़ों से जुड़ना होगा। द्वारका प्रसाद गर्ग ने आठ दशकों से अधिक अपनी जीवन यात्रा में सदैव गतिशीलता और सकारात्मक ऊर्जा को महत्व दिया। यही कारण है कि उनकी डायरी में लिखे " चिंतन- मोती "किसी भी व्यक्ति के चिंतन को आशा और उत्साह से भरने में सक्षम हैं ।ईशोपनिषद् का यह श्लोक किसी धर्म या किसी विशेष विचारधारा का प्रतीक नहीं है बल्कि मनुष्य जीवन की सच्चाई है - - - ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्, पूर्ण मुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।। ऐसे ही जहांँ से उपदेश और अच्छे दोहे मिले, वे लेखक की डायरी के अंग बनते गए। राम के आदर्शों को सर्वोपरि मानते हुए द्वारका प्रसाद गर्ग ने राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त के खंड काव्य 'साकेत' की ये पंक्तियाँ राम के मुख से सुनना पसंद किया है - - - संदेश यहाँ मैं नहीं, स्वर्ग का लाया। इस भू-तल को ही, स्वर्ग बनाने आया।। जीवन की संघर्षमय यात्रा को समतल और सामान्य बनाने में मनीषियों, महापुरुषों, साहित्यकारों, दार्शनिकों और अध्यात्मिक संतों के कहे गए अनुभवों ने हमारे जीवन को सहज - सुंदर - सरल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कबीर कहते हैं - मैं कहता आंँखिन की देखी।हमारे संतों ने जीवन को अनुभवों के आधार पर परखने की दृष्टि दी। ईश्वर के दिए शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए पंचेंन्द्रियों का संयम और नियंत्रण भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण अंग रहे हैं । उपनिषद, पुराण, गीता, महाभारत ग्रंथ और साहित्य, संस्कृति , भक्ति, ज्ञान और कर्म की महत्ता आदि की महत्वपूर्ण उक्तियों को लिखना और संरक्षित करना पीढ़ी - दर- पीढ़ी को हस्तांतरित करना, भारत को बचाने का ही उद्देश्य है। उपदेशात्मक, आध्यात्मिक, शास्त्रों का ज्ञान हमारे जीवन को स्वस्थ और अनुशासित तो करते ही हैं, साथ ही परिवार, समाज, देश और राष्ट्र के चरित्र और आदर्शों की उन्नति के लिए सहायक कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। लेखक का मानना है कि प्रशंसा के पात्र तो केवल वही हैं जिन्होंने स्व-पुरुषार्थ के बल पर राम- नाम रूपी धन संग्रह किया है। कहा गया है कि अधर्म पर आश्रित रहकर करोड़ों - अरबों रुपयों की धन - संपत्ति अर्जित भी कर ली, तो भला कौन - सा तीर मार लिया - 'सुत दारा अरु लक्ष्मी पापी के भी होय?' डायरी विधा में लिखे गए विचार अपनेपन को लिए व्यक्तिगत और बहुत ही निजी होते हैं। लेखक ने अपने लिखने के सद्प्रयास को जारी रखा जो व्यष्टिगत होते हुए भी समष्टिगत हैं । संस्कृत सुभाषित, स्कंदपुराण,पद्मपुराण, विष्णु पुराण,भोज - प्रबंध, सद्गुरु भक्ति- रहस्य, संत- वाणी, चाणक्य श्लोक, गीता, महाभारत, ईशोपनिषद्, गंगा स्तोत्र, श्रीमद्भागवत, रामधारी सिंह दिनकर की रचना आदि बहुविध भारतीय वाङ्मय में जहाँ भी सुभाषित और बहुमूल्य वचन मिले, लेखक ने सहर्ष ही डायरीबद्ध किया । अवचेतन मन में डायरी में लिखा शब्द मन- मस्तिष्क में अंकित हो जाता है।संस्कृत, अवधी, हिंदी, अरबी-फ़ारसी राजस्थानी, सधुक्कड़ी, पंजाब, उर्दू, अंग्रेजी आदि सभी भाषाओं के सुभाषित वचन उनकी डायरी के अंग बने ।कोई भी भाषा, कहीं पर भी, कोई अवरोध उत्पन्न नहीं करती है वरन् हमारे लिए एक सांस्कृतिक सेतु की तरह काम करती है। संगीत तो वही भाता है, जो शरीर के पोर - पोर को आनंदित कर दे। भारत विविध भाषाओं का देश है लेकिन उसकी आत्मा वेदों और संस्कृत की गंगोत्री से ही निकल कर संपूर्ण देश की रगों में बहती है। गंगा नदी सभी नदियों में सर्वश्रेष्ठ नदी मानी गई है। कहा भी गया है - 'तीर्थानां परम तीर्थं नदीनां परमा नदी' पौराणिक काल से ही जाह्नवी भागीरथी माँ गंगा का गुणगान चलता आ रहा है, तो भला हमारे संस्कार हमारी आत्मा में क्यों नहीं रचे-बसेगें? 'संसार है एक नदियाँ, सुख दुःख दो किनारे हैं - फिल्म का गीत जीवन के वास्तविक दर्शन और भावों को बहुत ही सरल भाषा में व्यक्त करता है जो भारतीय भाषा और संस्कृति का संगीत है। जनसाधारण से लेकर प्रबुद्ध, सभी डायरी लेखन के साथ बहुत ही निकटता और आत्मीयता के भाव को महसूस करते हैं। लेखक उदार, सकारात्मक ऊर्जा और आस्तिक दृष्टिकोण से अनुप्रेरित है, वह ईश्वर प्रदत्त शरीर की रचना को सर्वश्रेष्ठ समझता है। उसके लिए भारतीय आचार- विचार और व्यवहार को अमल करने के लिए कृतसंकल्प है ---डायरी की ये पंक्तियाँ इसी बात की द्योतक हैं-- 'ईश्वर का दिया, कभी अल्प नहीं होता। जो टूट जाय बीच में, वह संकल्प नहीं होता।' इस साधु कार्य को करवाने का श्रेय श्री आर. के. पंसारी को जाता है, जिन्होंने द्वारका प्रसाद गर्ग की व्यक्तिगत डायरी को सार्वजनिक करने के लिए प्रकाशित करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया जो 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के उद्देश्य को चरितार्थ करने वाला है ।' चिंतन - मोती' की ये बहुमूल्य लड़ियांँ किसी- न- किसी व्यक्ति को अवश्य ही उद्वेलित करेंगी, ऐसी आशा और उम्मीद रखती हूँ। बधाई और शुभकामनाएँ । दिनांक जुलाई , 2021

मुक्ता मणि माला से

पृष्ठ 2 --- 1- गायन्ति देवाः किल गीतकानीधन्यास्तु ते भारत भूमि भागे। स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात् ।।(विष्णु पुराण) 2- दुर्लभो मानुषो देहो देहिनां क्षणभंगुरः । तत्रापि दुर्लभं मन्ये नमस्ते वैकुण्ठप्रियदर्शनम्।।(श्रीमद्भागवत, 11/21/29) 3- ईश्वर नाम अनमोल, बिन दाम ही बिकाय। तुलसी अचरज देखिये, कोई ना ग्राहक आय।। 4- कबिरा सोकर क्या करे, जगकर जपो मुरारी। एक दिन तू भी सोवेगा, लंबे पाँव पसारी ।। 5- तुलसी "रा " के कहत ही निकसत पाप पहार। पुनि आवन पावत्त नहीं, देत मकार किवार।। 6- देह धरे कर यह फल भाई। भजिअ राम सब काम बिहाई।। (तुलसीदास) ऐ गुल जरा सब्र तो रख, ज़मी भी होगी मुकाम भी होगा। 8- तुलसी तनिक न छोड़िये, लेन हरि को नाम। मानुष मजुरी देत है, क्यों रखेंगे राम।। 9- ईश्वर का दिया, कभी अल्प नहीं होता। जो टूट जाय बीच में, वह संकल्प नहीं होता।। पृष्ठ 3-- 1- यत्र सर्वेपि नेतारः सर्वे पंडितमानिनः। सर्वे महत्वमिच्छंति तत्र कार्यं विनिश्यति ।। 2-प्रभु प्रभु लय लागी नहीं, पड़्यो न सद्गुरु पाय। दीठा नहिं निज दोष तो, तरिये कौण उपाय।। 3- यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा, शास्त्रं तस्य करोति किम् । लोचनाभ्यां विहीनस्य, दर्पणः किम् करिष्यति।। 4-ऋण कर्ता पिता शत्रुर्माता च व्याधिचारिणी। भार्या रूपवती शत्रु पुत्र शत्रु पंडित् 5- अर्थ नाशं मनःस्तापं गृहणी चरितानि च। नीच वाक्यं च अपमानं मति मान्न न प्रकाशयेत।। 6- नैवं पश्यति जन्मांध कामान्धेन पश्यति । न पश्यति मदोन्मत्तो त्यर्थी दोष न पश्यति।। 7- सत्यं इदं क्षमी दाता गुणग्राही स्वामी दुःखेन लभ्यते। अनुकूलः शुचिर्दक्षो राजन् भृत्योपि दुर्लभः।। (भोज प्रबंध) 8- सुख के माथे सिल पड़े, हरि हृदय से जाए। बलिहारी वा दुःख की, जो पल - पल नाम गिनाय ।। पृष्ठ 4 - - - 1- पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि, जल मंत्रम् सुभाषितम्। मूढ़ैः पाषाणखण्डेषु, रत्नसंज्ञा प्रदियते।। 2- नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृ समं त्राण, नास्ति मातृसमा प्रिया ।। 3- यं माता - पितरौ क्लेशं सहते लभते नृणाम् । न तस्य निष्कृतिःशक्या कर्तुं वर्षशतैरपि।। अर्थ - मनुष्यों के जन्म तथा पालन - पोषण में माता - पिता जिस कष्ट को सहन करते हैं, उसका ऋण सौ वर्ष में भी नहीं चुकाया जा सकता। 4- क्रोधः प्राणहरः शत्रुः क्रोधो मित्रमुखो रिपुः। क्रोधोह्यसिर्महातीक्ष्णःसर्व क्रोधो $पकर्वति ।। अर्थ — क्रोध तो प्राणों को नष्ट करने वाला शत्रु है। क्रोध मित्र - सा दिखाई देनेवाला दुश्मन है। क्रोध तीव्र तीक्ष्ण तलवार के समान है। क्रोध सभी की अवनति करने वाला है।

मुक्ता मणि माला से

पृष्ठ 2 --- 1- गायन्ति देवाः किल गीतकानीधन्यास्तु ते भारत भूमि भागे। स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात् ।।(विष्णु पुराण) 2- दुर्लभो मानुषो देहो देहिनां क्षणभंगुरः । तत्रापि दुर्लभं मन्ये नमस्ते वैकुण्ठप्रियदर्शनम्।।(श्रीमद्भागवत, 11/21/29) 3- ईश्वर नाम अनमोल, बिन दाम ही बिकाय। तुलसी अचरज देखिये, कोई ना ग्राहक आय।। 4- कबिरा सोकर क्या करे, जगकर जपो मुरारी। एक दिन तू भी सोवेगा, लंबे पाँव पसारी ।। 5- तुलसी "रा " के कहत ही निकसत पाप पहार। पुनि आवन पावत्त नहीं, देत मकार किवार।। 6- देह धरे कर यह फल भाई। भजिअ राम सब काम बिहाई।। (तुलसीदास) ऐ गुल जरा सब्र तो रख, ज़मी भी होगी मुकाम भी होगा। 8- तुलसी तनिक न छोड़िये, लेन हरि को नाम। मानुष मजुरी देत है, क्यों रखेंगे राम।। 9- ईश्वर का दिया, कभी अल्प नहीं होता। जो टूट जाय बीच में, वह संकल्प नहीं होता।। पृष्ठ 3-- 1- यत्र सर्वेपि नेतारः सर्वे पंडितमानिनः। सर्वे महत्वमिच्छंति तत्र कार्यं विनिश्यति ।। 2-प्रभु प्रभु लय लागी नहीं, पड़्यो न सद्गुरु पाय। दीठा नहिं निज दोष तो, तरिये कौण उपाय।। 3- यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा, शास्त्रं तस्य करोति किम् । लोचनाभ्यां विहीनस्य, दर्पणः किम् करिष्यति।। 4-ऋण कर्ता पिता शत्रुर्माता च व्याधिचारिणी। भार्या रूपवती शत्रु पुत्र शत्रु पंडित् 5- अर्थ नाशं मनःस्तापं गृहणी चरितानि च। नीच वाक्यं च अपमानं मति मान्न न प्रकाशयेत।। 6- नैवं पश्यति जन्मांध कामान्धेन पश्यति । न पश्यति मदोन्मत्तो त्यर्थी दोष न पश्यति।। 7- सत्यं इदं क्षमी दाता गुणग्राही स्वामी दुःखेन लभ्यते। अनुकूलः शुचिर्दक्षो राजन् भृत्योपि दुर्लभः।। (भोज प्रबंध) 8- सुख के माथे सिल पड़े, हरि हृदय से जाए। बलिहारी वा दुःख की, जो पल - पल नाम गिनाय ।। पृष्ठ 4 - - - 1- पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि, जल मंत्रम् सुभाषितम्। मूढ़ैः पाषाणखण्डेषु, रत्नसंज्ञा प्रदियते।। 2- नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृ समं त्राण, नास्ति मातृसमा प्रिया ।। 3- यं माता - पितरौ क्लेशं सहते लभते नृणाम् । न तस्य निष्कृतिःशक्या कर्तुं वर्षशतैरपि।। अर्थ - मनुष्यों के जन्म तथा पालन - पोषण में माता - पिता जिस कष्ट को सहन करते हैं, उसका ऋण सौ वर्ष में भी नहीं चुकाया जा सकता। 4- क्रोधः प्राणहरः शत्रुः क्रोधो मित्रमुखो रिपुः। क्रोधोह्यसिर्महातीक्ष्णःसर्व क्रोधो $पकर्वति ।। अर्थ — क्रोध तो प्राणों को नष्ट करने वाला शत्रु है। क्रोध मित्र - सा दिखाई देनेवाला दुश्मन है। क्रोध तीव्र तीक्ष्ण तलवार के समान है। क्रोध सभी की अवनति करने वाला है। मुक्त

मुक्ता मणि माला से

पृष्ठ 26--- 1- धनानि भूमौ पशवश्च गोष्ठे, भार्या गृहद्वारि जन स्मशाने। देहश्तियां परलोकमार्गे, कर्मानुगो गच्छाति जीव एकः।। (भर्तृहरि शतक त्रयम्) 2- देशाटनं पंडित मित्रता च, वाराङ्गना राजसभा प्रवेशः। अनेकशास्त्रार्थ विलोकनं च, चातुर्य मूलानी भवन्ति पञ्च।। 3- नास्ति काम समोव्याधिर्नास्ति मोहसमो रिपुः। कोप समो वन्हिर्नास्ति ज्ञानात् परम सुखम्।। (चाणक्य श्लोक) "" नास्ति विद्या समं चक्षु नास्ति सत्य समं तपः। नास्ति राग समं दुखं नास्ति त्याग समं सुखं।।"" "(चाणक्य श्लोक) 4- कुरंग मतंग पतंग श्रृंग भृंगा, इंद्री एक ठग्यो तिन अंगा। (सत्संग) 5- मात्रा स्वस्त्रा दुहित्रा वा नाविविक्तासनो भवेतं, बलवानं इन्द्रिय ग्रामों विद्वांसंअपि कर्षति।।श्रीमदभागवतम्, 9,19,17) 6- यत्फलं कपिला दाने कीर्ति जेष्ठं पुष्करं । तत्फलं पाण्डव श्रेष्ठ विप्राणां पाद सेवने।। पृष्ठ 27 - - - 1- येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः। ते मृत्युलोके भुवि भारभूता, मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति।। 2- नास्ति वेदांत् परं शास्त्रं नास्ति मातुः परो गुरुः। नास्ति दानात् परं मित्रं इहलोके परत्र च।।(सुभाषित) 3- दान दिया, संग लगा खाया - पीया अंग। और कुछ बचा उनके, सबके लगा जंग।। 4- तन से सेवा कीजिए, मन से भलो विचार। धन से इस संसार में, कर लो पर उपकार।। 5- अहिंसा सत्य वचनं सर्वभूतानु कम्पनम् शमो दानं यथाशक्ति गृर्हस्थ्यो धर्म उत्तमम् । 6- चिड़ी चोंच भर ले गई, नदी न घटियो नीर। दान दिये धन न घटे, कह गये दास कबीर।। 7- कबिरा यह तन जात है, सके तो राखि बहोर। खाली हाथों वे गए, जिनके लाख करोड़।। 8- मधु पी लेते सभी मधुप बन, विष का पान कठिन कितना है। पृष्ठ 28- 1- आकाशातत्पतितं तोयं यथा गच्छति सागरम्। सर्वदेवनमस्कारः केशवं प्रति गच्छति।। 2- देहाभिमाने गलिते तें विज्ञाते परमात्मनि । यत्र यत्र मनो याति तत्र तत्र समाधयः।।(श्रीमद्भगवद्गीता 6-3) 3- न हन्यते न जीयते त्वोतो नैनमंहो। धर्मेण हन्यते शत्रुः यतो धर्मोस्ततो जया।। 4-दिव्यानि पार्थिवा श्लोकं देवः कृणुते स्वाय धर्मणे । चला लक्ष्मीश्चलाः प्राणाश्चले जीवितमंदिरे। चलाचले च संसारे धर्म एकोहि निश्चलः।। (ऋग्वेद) 5- विद्या विवादाय धनं मदाय शक्तिः परेषां परपीड़नाय। खलस्यः साधोः विपरित मेतद्, ज्ञानाय, दानाय च रक्षणाय।। 6- काकस्य गात्रम् यदि काञ्चनस्य माणिकरत्नं यदि चंचुदेशे। एकैक पक्षे ग्रथितं मणीनाम् तथापि काको न तु राजहँसः।। 7- खाद्यन्न गच्छामि हसन्न गतं जल्पे, न शोचामि कृतं न मन्ये द्वाभ्यां तृतीयो न भवामी राजान् ।किं कारणम् भोज भवामि मूर्खः पृष्ठ 29 - - - 1- आग चकमक में है, जैसे हवा गगन में है, लाली मेंहदी के पात में, महक सुमन में। मक्खन ज्यों दही में, पुतली ज्यों नयन में, यूँ बसो प्रभु, सभी प्राणियों के मन में।। 2- पढे़ छवों शास्त्र व अट्ठारहों पुराण देखे, वेदों को आदि से अन्त तक छाना है। तीरथ तप ज्ञान ध्यान योग यज्ञ व्रत दान, संध्या - तर्पण शिल्प विद्या ज्योतिष को जाना है। नाड़ी पहचानना ओ चाकरी के जाने दाँव - पेंच, जाना सह नाई ओ खेती बाग का लगाना, इतना जिन जाना, तिन ख़ाक नहीं जाना, संतो जाना है वही, जिन राम नाम जाना है। 3- तपः परं कृतयुगे त्रेतायां ज्ञानमुच्यते। द्वापरे यज्ञमेवाहु र्दानमेकं कलौयुगे ।। (मनुस्मृति) 4- तात मिलै पुनि मात मिलै, सुत भ्रात मिले युवती सुखदाई। राज मिलै राज राज मिलै सब, साज मिल मन वांछी न पाई। लोक मिले सुरलोक मिलै, विधि लोक मिलै बैकुण्ठई जाई। "सुन्दर "मिलै सबहिं सुख दुर्लभ, संत समागम भा जाई। 5- हे कृष्ण द्वारका वासी यादव नन्दनः। दूतावस्था मां पन्ना अनाथा किम न रक्षसि।। पृष्ठ 30---- 1- ज्यों रवि को रवि ढूढ़त है, कहीं तप्त मिले तन तप्त गमाऊँ। ज्यों शशि को शशि चाहत है, कहीं शीत मिले तन शीत गमाऊँ। ज्यों सन्निपात भरे नर टेरत है, घर में अपने घर जाऊँ। त्यों यह "सुन्दर "भूल स्वरूप ही, ब्रह्म कहें कहीं ब्रह्म ही पाऊँ। 2- काँटों में भी खिलकर, महक और मुस्कान बिखेरने वाला गुलाब। इस धरती की ज़िन्दगी का सबसे मधुर आशावाद है। खिलने वाले को काँटे रोक नहीं सकते। महकने वाले को काँटे रोक नहीं सकते। महकने वाले को काँटे थाम नहीं सकते। सौन्दर्य को शूल पराजित नहीं कर सकते।

मुक्ता मणि माला से

द्वारका प्रसाद गर्ग 32 पृष्ठ 32 1- शान्ति तुल्यं तपो नास्ति संतोषात्परं सुखम् । न तृष्णायाः परोव्याधिर्नं च धर्मो दयापरः।। (चाणक्य नीति) अर्थ - शांति के समान तप नहीं, संतोष के पृष्ठ 35- 1- प्रह्लाद की निर्भीकता - मोको पहिरावो पाँव बेड़ी ने बँधाओ गाढ़े बंधन बंधाओ वो, खिंचावों काची खाल तें बिछूले बिछाओ तापे मोहि लो सुलाओ फिर आग भी लगाओ बाँध कापड़ दुशाले तें गिरी तें गिराओ काले नाग से डसाओ मझधार में डुबोओ बांध पाथर कमाल से विष भी पिलाओ मोहि अग्नि में जराओ पर नेह न छुडा़ओ गिरधारी गोपाल तें। 2- नृसिंह भगवान की कृपा - गिरीते गिराये पुनि, जल में डुबोये हाय अग्नि में जलाये राखि, कभी न सताने में मंजुल मुखारविन्द चूम - चूम कहे प्रभू क्षमा करो पुत्र मोहे देर भई आने में। 3- क्वेदं वपुः क्व च वयः सुकुमारमेतत्, क्वेतः प्रमत्तकृतदारुणयात् नाश्च । श्रुत्वा तवदार्तवचनं झटिति प्रातः, क्षन्तव्यमङ्ग! यदि में समये विलम्बः।। पृष्ठ 36- 1-सर्वे क्षयान्ता निचयाः पतनान्ताः समुच्छ्रयाः । संयोगा विप्रयोगान्ता मरणान्तं च जीवितम्। (महाभारत, स्त्री पर्व) 2- सर्वथा सुकरं मित्रं दुष्करं प्रतिपालनम् । (वाल्मीकि रामायण 2.105.16) अर्थ - मित्रता करना सहज है लेकिन उसको निभाना कठिन है। अनित्य त्वात् तु चितानां प्रीतिरल्पे$पि मिद्यते।। 3- ### 4- शोको नाशयते धैर्यं शोको नाशयते श्रुतम्। शोको नाशयते सर्वं नास्ति शोकसमो रिपुः।। (वाल्मीकि रामायण 2.62.15) 5- सुलभा पुरुषा राजन सततं प्रियवदिनः। अप्रियस्य च पथ्यसय वक्तॉ श्रोता च दुर्लभः।। (वाल्मीकि रामायण, अरण्यकाण्ड) 6- सुखावसाने इद्मेव सांरं दुःखावसाने इदमेव ज्ञेयम्। देहावसाने इदमेव जाप्यं, गोविंद दामोदर माधवेति।। अर्थ - जीवन में सुख का समय जब अवसान की तरफ़ हो तो यही सार है। जीवन में दुख का समय जब जाने वाला हो तब यही एक मंत्र जानने योग्य है। पृष्ठ 37 प्रश्न 1-- जल से पतला कौन है? कौन भूमि से भारी? कौन अग्नि से तेज है? कौन काजल से कारी? उत्तर - जल से पतला ज्ञान है। पाप भूमि से भारी। क्रोध अनल से तेज है कलंक काजल से कारी। प्रश्न 2- सबसे विश्वसनीय मित्र कौन है? सर्वश्रेष्ठ प्रकाश कौन-सा है? दूध किसका अच्छा है? सबसे अच्छा कौन है? उत्तर - भाई सरीखो भट नहीं। तेज न सूर्य समान। दूध गाय के सम नहीं है। भूप न भोज समान। दूसरा उत्तर - भुजा सरीखो भट नहीं, तेज न नेत्र समान । दूध मात के सम नहीं, भूप न इन्द्र समान। पृष्ठ 38 1- भूखे को अन्नदान और जलदान, रोगियों के हेतु औषधालय खुलवाते हैं। किंतु दोनों में से श्रेष्ठ ज्ञान दान हेतु अधिकारी विद्वानों को बुलाते हैं। ऐसे उदार दान - दाताओं को धन्य-धन्य उनकी क्या गति होती सुनो! वे बताते हैं और सब लोग भगवान की खोज करते, किंतु दानी की खोज स्वयं भगवान करते हैं। 2- सानन्द सदनं सुताश्च सुधियः कान्ता मनोहारिणी सन्मित्रं सधनं स्वयोषिति रतिः चाज्ञापराः सेविकाः। आतिथ्यं सुरपूजनं प्रतिदिनं मिष्टान्नपानं गृहे साधोः संङ्ग मुपासमते हि सततं धन्यो गृहस्थाश्रमः।। (गृहस्थाश्रम) अर्थ - आनंद हो ,पुत्र विद्वान हो , संतान, सुंदरी पत्नी प्रिय बोलने वाली हो , सच्चे मित्र, सात्विक धन, स्वपत्नी में प्रीति, सेवा परायण सेवक, प्रतिदिन अतिथि - सत्कार, देव- पूजन एवं भोजन में मिष्ठान्न का प्रबंध तथा जिस घर में साधुओं का संग मिलता रहता है और उपासना होती रहती है, वह गृहस्थाश्रम धन्य होता है। पृष्ठ 39 1- प्रीणति यः सुचरितैः पितरं स पुत्रो, यद् भर्तुरेव हितमिच्छति तत्कलत्रम्। तन्मित्रमापादि सुखे च समक्रियं, यद्एतत्त्रयं जगति पुण्यकृतो लभन्ते। अर्थ - जो अपने पिता को अपने सदाचरण से प्रसन्न कर देता है वही वस्तुतः पुत्र है। जो पति के हित की कामना करती है वस्तुतः पत्नी है। सच्चा मित्र वही है जो संकट और सुख के समय समान रूप से साथ निभाता है। इस प्रकार ये तीनों श्रेष्ठ व्यक्तियों को पुण्यशाली लोग ही प्राप्त कर सकते हैं। 2- पुनर्वो असुं पृथिवी ददातुः पुनद्रयौ दैवी पुनरिन्त रक्षम्। पुनर्नः सोमस्तन्वं ददातु पुनः पूषां पथ्यांयास्वस्ति।। (ऋग्वेद अ. 8.अ 1 1ब 23.मंत्र 677) अर्थ - दिव्य गुणों वाली यह पृथ्वी हमें फिर प्राणशक्ति दे, द्यो लोक भी हमें प्राण शक्ति दे, अन्तरिक्ष भी हमें प्राणशक्ति दे , परमेश्वर हमें उत्तम शरीर दे, पोषक वायु हमें पुष्टि दे और जो प्रभु की वाक् शक्ति हमें कल्याणकारी वाणी प्रदान करे। 3- #### सत्यं वद, धर्मं चर स्वाध्यायान्मा प्रमदः। आचारस्य प्रियं धन माहृत्य प्रजातंतुं मा व्यवच्छेत्सीः।।(शिक्षावल्ली, तैत्तिरीय उपनिषद् पृष्ठ 40- 1- तुलसी या संसार में सबसे मिलिए धाय। क्या जाने किस वेष में नारायण मिल जाय।। 2- क्षणभंगुर जीवन की कलिका प्रातः खिली न खिली, मलयाचल की शुचि शीतलमंद सुगंध समीर चली न चली, भजले हरि नाम अरे रसना, फिर अन्त समय में जाने हिली न हिली। 3- नाचना जो चाहो, तो नाच रघुनाथ आगे । गाना जो चाहो, तो गोविंद गुण गाओ जी। भागना जो चाहो, तो भाग मंद कामों से। आना जो चाहो तो राम शरण आओ जी। 4- बड़े न हूजे गुन न बीन, बिरद बड़ाई पाय। कहत धतूरे को कनक, गहनों गढ़ो न जाय।। 5- धन- यौवन उड़ जाएगा, जेहि विधि उड़त कपूर। मन- मूरख गोविंद भज, क्यों चाहत जगधूर।। 6- कर्कोटकस्य नागस्य दमयन्त्या नलस्य च। ऋतुपर्णस्य राजर्षेः कीर्तनं कलिनाशनम्।। (महाभारत पुराण) पृष्ठ 41- 1- तन पवित्र सेवा किए, धन पवित्र कर दान। मन पवित्र हरिभजन कर, त्रिविध होत कल्याण। 2- माया तजी तो क्या भया, मान तजा नहीं जाय। जेहिं मानैं मुनिवर ठगे, मान सबन को खाय।। 3- मैं मैं बड़ी बलाय, सको तो निकलो भाग। कह कबीर कहँ लग रहे, रुई लपटी आग।। 4- सुशीलो मातृपुण्येन पितृ पुण्येन चातुरः । औदार्य वंश पुण्येन आत्मा पुण्येन भाग्यवान।। 5-स्वैरत्वै संग दोषेण दार दोषे दरिद्रता।। सुशीलो मातृ पुण्येन पितृपुण्येन पंडिताः। औदार्यं वंश पुण्येन आत्म पुण्याद् धनार्जनः।। 6- आचारः परमो धर्मः सर्वेषामिति निश्चयः । हीनाचारपरितात्मा प्रेत्य चेह विनश्यति ।। 7- नैनं तपांसि न ब्रह्म नाग्निहोत्रं न दक्षिणाः।q111q हीनाचार मितो भ्रष्टं तारयन्ति कथञ्च ।। 8- सर्व लक्षण हीनो$पि यः सदाचारवान्नरः। श्रद्दधानो$नसूयश्च शतं बर्षाणि जीवति ।। पृष्ठ 42 1- भीष्म को कृष्ण का आश्वासन - भाखत कहा हौं, ऐसी धारणा न राखो चित्त, प्रण के विरुद्ध पक्षपात ना बिचारिहौं, सारथी बनों हों रथ हांँकिबे मेरो काम, न्याय बद्ध युद्ध के नियम न बिगारिहौं। ' बिन्दु' कवि होयना प्रतीति जो तुम्हें तो सुनों साँची सौं करिके समस्त शंक टारिहौं जो पै होय हौं सबल सपूत एक बाप ही को तो पै काहूँ भांँति शस्त्र करि में धारिहौं पुनः भीष्म की शंका का निवारण - - - - 2- बोले घनश्याम सुनों भीषम भगत राज मेरे जन्म देने वाले जग में अपार हैं। खम्भ, सिन्धु, पृथ्वी, पावक से प्रकट हौंहूँ, कहाँ लौ बखानों ये अमित अवतार हैं, 'बिन्दु' कवि कहे कोई देवकी को लाल कहे, कोई कहे नंद के यशोदा को कुमार है। होय एक बाप तो बचावें निज लाज को, मेरी कौन लाज मेरे बाप तो हजार हैं। 3- प्रायेण देव मुनियों स्वमुक्ति कामाः मौन्नं चींरती विजने न परार्थ निष्ठा नैताणविहाय कृपणान् मुमुक्ष एको, नान्यं त्वदेव शरणम् भ्रमताने पश्च्य । पृष्ठ 43- श्री 1- प्रभु ने दो दो कर दिए हैं, करो कमाई आप। पराधीनता सम नहीं, और दूसरा पाप।। 2- जो पराये काम आता धन्य है जग में वही। द्रव्य ही जोड़कर कोई सुयश पाता नहीं।। 3- पास जिनके रत्न शशि, अनन्त और अशेष हैं । क्या वह सुरधुनि कै, सम हुआ लेश है।। 4- संदेश यहाँ मैं नहीं स्वर्ग का लाया। इस भूतल को ही स्वर्ग बनाने आया।। (मैथिली शरण गुप्त, साकेत) 5- जिन्दगी में किसी का साथ ही काफी है, कन्धे पर रखा हुआ हाथ ही काफी है, दूर हो पास क्या फर्क पड़ता है, क्योंकि अनमोल रिश्तों का अहसास ही काफी है। 6- ## कालो वा कारणं राज्ञो राजा वा काल कारणम् इति ते संशयो मा भूद् राजा कालस्य कारणम्। 7- सर्वतीर्थ मयी माता सर्वदेवमयः पिता। मातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन पूज्येत्।। (पद्मपुराण, सृष्टि खंड 47/11) 8- विद्वत्वं च नृपत्वं च नैव तुल्ये कदाचन। स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान सर्वत्र पूज्यते। 9- शुभस्य शीघ्रम् अशुभस्य काल हरणम्। पृष्ठ 44- 1- रहिमन निज मन व्यथा, मन ही राखो गोय। सुनि हठिलें हैं लोग सब, बाँट न लहिए कोय।। 2- कबिरा जो मन निरमला, जैसा गंगा नीर। पाछे पाछे हरि फिरे, कहत कबीर कबीर।। 3- भरम परा तिहुँ लोक में, भरम बसा सब ठांँव। कहे कबीर पुकार के बसे भरम के गाँव।। 4- जो रहीम ओछे बढ़े, तो बहुत उत्पात। प्यादे से फरजी भयो, टेडो़ टेड़ो जात।। 5- नर सम्पत्ति बिन पाय के, अति मत करियो कोय। दुर्योधन अति भावतें, भयो निर्धन कुल खोय।। 6- कबिरा गरब न कीजिये, कबहूँ न हंँसिये कोय। अबहूँ नाँव समुद्र में, क्या - क्या जाने क्या होय।। 7- तुलसी जाके बदन से, धोकेहुँ निकसत राम। ताके पग की पगतरी, मेरे तन की चाम।। पृष्ठ 45- 1- जिसने देखा कभी नयन भर, मोहन रूप बिना बाधा। वही जान सकता है क्योंकर, कुल कलंकिनि है राधा।। 2- माया तजि तो क्या भया, मान तजा नहीं जाय। जेहिं मानैं मुनिवर ठगे, मान सबन को खाय।। 3- हम गंगोदक, हम गगन, हम दीपक, हम भानु। ये हीं तुम्हें डूबहैं, कुल कोरी अभिमान।। 4- सात दीप नवखण्ड में, तीन लोक जग माहिं। तुलसी शांति समान सुख, और दूसरो नाहिं।। 5- चार वेद षट् शास्त्र में, बात मिली है दोय। सुख दीने सुख होत है, दुःख दीने दुःख होय।। 6- कानन भूधर बारि बयारी, महाविषु व्याधि दवा अरि घेरे। संकट कोटि जहॉं तुलसी, सुत मातु पिता हितु बंधु न नेरे। राखिये राम कृपालु तहाँ, हनुमान से सेवक हैं जेहिं केरे। नाक रसातल भूतल में, रघुनायक एक सहायक मेरे। 7- कृष्ण त्वदीय पद पंकज पञ्जरान्ते अधैव में विशतु - मानस राजहंस प्राण प्रयाण समये, कफ़ वात पित्तै। कण्ठे वरोधन विद्यो, स्मरण कुतस्ते।। पृष्ठ 46 - राम - केवट संवाद - 1- जाने कैसे भाव के समाने हो कृपानिधान विमल विचारवान बुद्धि के सयाने हो मनि की मुदरी उपहार देत बारंबार कौन धर्मसार सरकार उर आने हो 'बिन्दु' कवि कहे जात गोत न त्यागो नाथ कहे जाँति-पाँति तोरबे की हठ ठानी है मैं तो हूँ केवट विधि सागर नदी को किन्तु आप भव सागर के केवट पुराने हो। 2- हाज़ीर हूज़री में भयो दास दीनानाथ नेक निज करुणा नजर से निहार दो देत उपहार कहाँ मुदरी मणि को मोहि देना है तो जन्म की कमाई एक बार दो रत्न, धन,धाम नाथ काम के न मेरे कछु हो प्रसन्न राम घनश्याम तो करार दो पार उतराई सरकार तब जानो जब पार भवसागर से मुझको उतार दो। 3- जो दस बीस पचास भये सत्, होय हजार तो लाख मँगेगी कोटि अरब्ब खरब्ब असंख्य पृथ्वी पति होने की चाह जगेगी स्वर्ग पताल को राज करौं, तृष्णा अघ की अति आग लगेगी 'सुन्दर 'एक संतोष बिनासठ, तेरी तो भूख कभी न मरेगी। पृष्ठ 47- 1- सत्यं शिवम् सुन्दरम् - ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्ण मुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्ण मेवावशिष्यते।। ॐ शांतिः ॐशांतिः ॐशांतिः। 2- सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत्।। (शांतिपाठ) 3- ॐकार बिंदुसंयुक्तं नित्यं ध्यायन्ति योगिनः। कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय नमो नमः।। 4- रे चित्त चिन्तय चिरं चरणों मुरारै पारं गमिष्यसि यतो भव सागरस्य पुत्र कलत्र मित्र नहीं ते सहाया सर्व विलोकय सखे मृग तृष्णा कामां। 5- व्रजे प्रसिद्धं नवनीतचौरं, गोपाङ्गनानां च दुकूलं चौरम्, अनेकजन्मार्जित पाप चौरं चौराग्रगण्यम् पुरुषं नमामि । 6- सुनहि शिष्य ये तीन उपाई, भक्ति योग हठ योग कराई पुनि सांख्य सुयोग ही मनलावै, तब तू शुद्ध स्वरूपहिं पावै। 7- ## शिवं विष्णुं गणेशं च शक्तिं सूर्यं च पूजनम् । एतत्सर्वं कृतं तेन दत्त इत्यक्षर द्वयम्।। 36।।(दत्तात्रेय स्तवं) पृष्ठ 48- 1- यं ब्रह्म वेदान्त विदो वंदती परम प्रधानं पुरुषस्तथान्ये ।। विश्वोद्गते कारण मिश्र्वंरवा तस्मै नमो विघ्नविनाशनाय।। 2- यतो वेदयाचो विकुण्ठा मनोभिः सदा नेति नेतीति यत्ता गृणान्ति परब्रह्म रूपं चिदानंदभूतं सदा तं गणेशं नमामि भजामिः 3- स्वस्ति श्री गणनायकं गजमुखं मोरेश्वरम् सिद्धिदम् बल्लालं मुरूडं विनायक मढ़ चिन्तामणिं थेवरम् लोहाद्रिं गिरिजात्मजं सुवरदं विघ्नेश्वरं ओझरम् ग्रामे रांजण संस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मंगलम्। 4- सिन्दूराभं त्रिनेत्रं पृथुत्तर जठरं हस्तपद्मैर्द धानं दंत पाशाङ्कुश्चेष्टान्युरूकर विलसद् बीज पूराभिरामम् बालेंदु द्योत मौलिं करिस्यति वदनं दानश्र्रार्द गण्डं भोगीन्द्राबद्ध भूषं भजत गणपतिं रक्त वस्त्राङ्गरागम् 5- नमस्तस्मै गणेशायं ब्रह्म विद्या प्रदायिनी। यस्यागस्यायते नाम विघ्न सागर शोषणे।। 6- ईश्वरे सानुकूले कः पीडितुं क्षमते जनम् । पृष्ठ 49 गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फलचारु भक्षणम्। उमासुतम् शोक विनाशकारकम् नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्। विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं! नागाननाय श्रुतियज्ञविभूतिषाताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।। - सुमुख श्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः । लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः। धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचंद्रो गजानन द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि ।। विद्यारंभे विवाहे च प्रवेशे निगमे तथा संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते।। पृष्ठ 50 - श्री गणेशजी की पूर्वजों द्वारा सुनी आरती - - ओम् जय गणपति स्वामी देवा जय जय जय शुण्ड जया जय चेतन शारद नामी - - ओम् जय गौरी पुत्र गणेश्वर परसन भव नामी - देवा ठुमक ठुमक पद त्रिभवन धारन गगने गुण गामी - ओम् जय एक दंत गज बदन विनायक मूषिका आरोही। - देवा मूषिका देवादि देव संतन वरदायक विघनन अघ हानी - ओम् जय भालचंद्र सिन्दूर बिराजे मुक्ता छवि मानी - देवा रिद्धि-सिद्धि नव के दायक गणपति अघ हानी - ओम् सुनि रानी सोई सुरत समानी मन वांछित दानी - देवा "अतित तुला पर "शरण बिहारी लम्बोदर नामी। - ओम् पृष्ठ 51 - 1- या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वींणा वरदण्ड मण्डित करा या श्वेत पद्मासना या ब्रह्माच्युत शंङ्कर प्रभृति भिर्दैवैः सदा वंदिता सामां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्या पहा। शुक्लां ब्रह्म विचार सार परमामाद्यां जगद् व्यापिनीं वीणा पुस्तक धारिणी मभयदां जाड्यान्धकारा पाहाम् हस्ते स्फाटिक मालिकां च मदधतीं पद्मासने संस्थिताम् वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धि प्रदां शारदाम्।। पृष्ठ 52- 1- हम ऐसी कुल बें किताबें क़ाबिल - ए-ज़ब्ती समझते हैं। कि जिनको पढ़के लड़के बाप को ख़ब्ती समझते हैं। (अक़बर इलाहाबादी) पृष्ठ 53- 1- अप जू सि नव तीस के बाकी के इकतीस फरवरी अट्ठाइस की चौथे संख्या उन्नतीस अर्थ - अप्रैल, जून, सितंबर, नवंबर चारों तीस दिन के माह होते हैं। शेष इकतीस दिन के, फरवरी 28 दिन का महिना और चौथे वर्ष 29 दिन का होता है। 2- कुम्भकर्ण - रावण संवाद - तुम चिंतित आज दशानन क्यों? हरली हमने मिथिलेश दुलारी । उपभोग किया तुमने उनका लखती न कभी वह ओर हमारी तुम राघव ही न फिर क्यों? इसमें हमको भय लागा भारी जब राघव रूप धरा मैंने जब मात समान लगी पर नारी। लक्ष्मी - पार्वती संवाद - - बाला जी बोली भिखारी, कहाँ अबला सुनिए बलिराज द्रगे पन्नग हैं कहाँ सुन्दरी भूषण ओ क्षीर समुद्र में सेज सवारे विष के पीवन हार कहाँ ओ पूतना के लिए कुच जाहिं निहारे, गोरा कहाँ व जोगी जटी धरि दण्डक में ताहि निहारें ऐ बात बताओ सखी कहाँ शंकर नाथ हैं प्राण पियारे।। पृष्ठ 54 - 1- पत्थर के जिगर वालों गम में वही रवानी है खुद ही राह बना लेगा, बहता हुआ पानी है। 2- नहाये धोये क्या भया, जो मन मैल न जाय। मीन सदा जल में रहे, धोय बास न जाय।। 3- दीदार दिलरूबा का, दीदार कह कहाँ है। देखा जो उस तरफ तो, इस तरफ वह कहाँ है।। 4- छू ले तू आसमान, जमीं की तलाश न कर, जी ले तू जिन्दगी कभी, खुशी की तलाश न कर, तकदीर बदल जायेगी अपने आप ही, ऐ मेरे भाई बस मुस्कुराना सीख लें, वजह की तलाश न कर। 5- जिन्दगी कभी उफ़, तो कभी आह होती है, ज़िन्दगी आह तो कभी वाह होती है, मुश्किल में कभी मुस्कान को न भूलें, क्योंकि मुस्कान से हर मुश्किल आसान होती है। 6- माना कि जिन्दगी में मुश्किलें खड़ी होती हैं घबराईए मत, वे हर मुश्किल से पार निकल जाते हैं जिनकी सोच बड़ी होती है। 7- अपने शुद्र अहम् का त्याग करो सफलता तुम्हारे पांँव चूमेगी। 8- भाव, ग्राहि जनार्दन। पृष्ठ 55 - कहावतें - - - - 1- पहली छोटी सेवा करना तो सीखो, फिर बड़ी सेवा का इंतजार करना, कहावत है , पहली भाटो तो उठा, डूंँगर के बांँथ पाछे पड़जे। 2- ##दगाबाज़ दूणो मवै 3- मधु पी लेते सभी, मधुप बन विषपान कठिन है। 4- भावाद्वैतं सदा कुर्यात क्रियाद्वैतं न कुत्र चित्त। 5- श्मशान - शिव का क्रीड़ा स्थल, जन का ज्ञान स्थल, शव का विश्राम स्थल 6- इनसे संतोष न करें - भजन, अध्ययन, दान 7- इनसे संतोष करें - भोग, भोजन, वित्त, परिवार, लोकेष्णा 8- आत्मानि प्रतीकानीं परेषानं समाचरेत् । 9- ##राजा कालस्य कारणम् 10- तुलसी हाय गरीब की, कभी न खाली जाय। 11- लीक लीक गाड़ी चले, लीक ही चले सपूत। लीक छोड़, तीनों चले शायर, सिंह, कपूत।। पृष्ठ 56- 1-दुःस्वप्न नाश के लिए - रामं स्कन्दं हनुमन्तं वनैतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरे नित्यं दुःस्वप्न तस्य नश्यति।। 2- सर्व देव प्रपन्नाय तवस्मिति च याचते। अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्य एतद् व्रतम्। 3- द्रव्य शुद्धि क्रियाशुद्धिर्मन्त्र शुद्धिश्च भूमिप। भवेद्मदि तदा पूर्णं फलं भवति नान्यथा।। 4- ##यह सृष्टि गौरव गज ग्रसित है, ग्रह दशा के ग्राह से है भक्तवत्सल शुभ सुदर्शन चक्र आप चलाइए। पृष्ठ 57- 1- सुख शय्या के बजाय, काँटों की गली में, कीर्ति को पकड़ो। - टॉलस्टॉय 2- प्यास कर्म के चुल्लू से ही बुझती है, वचनों के समुद्र से नहीं। - भास 3- क्षुधार्तो न तृणं चरंति सिंहः। - भूखा शेर घास नहीं खाता। 4- प्रशंसा शब्दों से नहीं, कर्मों से मानी जाती है। - लिंकन 5- आपत्ति मनुष्य बनाती है, सम्पत्ति राक्षस। - बेकन 6- उच्च पद पर टेढ़ी- मेढी़ सीढ़ी के बगैर नहीं पहुंँचा जा सकता। - बेकन 7- दो भले कान, सौ ज़बानों को ख़ुश्क कर सकते हैं। - फ्रैंकलिन 8- जिसकी इन्द्रियाँ बस में नहीं हैं , वह एक ऐसा मकान है, जिसकी दिवारें गिर चुकी हैं । - सुकरात 9- जो अपने भीतर डुबकी लगाता है, वह वहीं बस जाता है, लौटता नहीं, लौटता है तो ऐसा मोती लाता है, कि तारे भी शरमा जाते हैं। 10- जैसी करनी वैसा फल, आज नहीं तो निश्चित कल। पृष्ठ 58- 1- घृणा करना जैसे चूहे को घर से बाहर निकालने के लिए घर को जलाता है। - बर्जिल 2- मुझे देखकर कोई नाक- भौं न सिकुड़े मुझे, बस दुनिया से इतना ही लेना है। - अमृता 3- धनधान्य प्रयोगेसु विद्या संग्रहेणषु च। आहारे व्यवहार च त्यक्तं प्रजा सुखी भवेत्।। 4- हालाँकि खुदा की चक्की धीरे-धीरे पीसती है लेकिन बड़ा ही पीसती है। - लोंगफैंको 5- थोड़ा- सा भी झूठ मनुष्य का नाश कर देता है, जैसे दूध को एक बूँद जहर की। - गांँधी जी 6- भोलेनाथ का परिवार - - - काहे न मांँगत भीख फिरे, घर में नहीं अन्न न एक अधेला। मुख एक जो होय तो काम चले, मुख ही मुख से घर माहिं झमेला। शीश चढ़े सहस्रानन है और गजानन गोद लिए हैं गदेला झमेला। चतुरानन बाप पंचानन आप षडानन पूत दशानन चेला। पृष्ठ 59- 1- Every thing is fair in love and war. 2- What we are now is the second of our past actions and what we all in future that entirely depends upon our present deeds. It is fundamental truth that doer of good or giver of charity never comes to a grief. 3- Failure doesn't mean you are a failure. It is just means you haven't succeeded yet. 4- If winter comes can spring before behind. 5- Life is beautiful only for those who can citrate pain. 6- If a meritorious person becomes angry even than he is more usefull as a milk is sweet naturally but when it is churned its product butter is gained and that is more sweet.