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Friday, August 25, 2023

रिश्तों की दुनिया (संस्मरण)

रिश्तों की दुनिया - (संस्मरण) - डॉ वसुंधरा मिश्र, भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज, कोलकाता कैब में बैठते ही कैब ड्राइवर ने खुश होते हुए कहा कि आज तो मेरा दिन बहुत अच्छा बीतेगा। लग रहा है कि देश के प्रति प्रेम और भक्ति अभी भी जिंदा है। जानती हैं मैडम सुबह से ही एक मायूसी लग रही थी। मैं रात भर गाड़ी चलाता हूँ। अलग अलग तरह के लोग मेरी गाड़ी में बैठते हैं। मैं पिछले सात वर्षों से गाड़ी चला रहा हूँ। स्वतंत्रता दिवस पर सुबह-सुबह आपको देख कर कुछ आशा जगी है कि देश से प्यार करने वाले लोगों की कमी नहीं है। मैं जुड़वा बच्चों का पिता हूँ। आशुतोष कॉलेज का विद्यार्थी रहा हूँ। मैंने माँ बाप के खिलाफ़ जाकर अपने से सात साल छोटी लड़की से शादी की और तभी से मेरे जीवन में संघर्ष शुरु हो गया। मैं असमंजस में पड़ गई कि एक ड्राइवर से इतनी बातें करुं कि न करुं।वैसे मैं उसकी बातों में रुचि ले रही थी। अच्छा! अच्छा! ओह! कह रही थी। उसकी बातें दिल से निकलती हुई लग रही थीं। अधिक जानने की इच्छा हो रही थी। उसके जीवन की कहानी क्या है? ऐसे किन संघर्षों का सामना करना पड़ा कि वह अंदर से टूट कर भी संवेदनशील है। जानने की रुचि बढ़ रही थी। परंतु वह मुझे कुछ पूछने का मौका नहीं दे रहा था और अपनी कहानी को सहज रूप से सुनाता जा रहा था। मैंने उसे धैर्य से सुना। किसी व्यक्ति को टोकना भी ठीक नहीं लगता जब वह अपनी वेदना पीड़ा के भावों को सुनाने में अनवरत बहता जा रहा हो। ये भी एक नैतिकता का अंग ही है या यों कहें कि वह अपनी दबी हुई बातों को जल्दी जल्दी मुझसे बांट लेना चाहता था। टैक्सी आधे घंटे में मुझे कॉलेज पहुंचा देगी। फिर उसने इस बात को भी स्वीकार किया कि आजकल की पीढ़ी सिर्फ़ स्वार्थ और अर्थ को ही महत्वपूर्ण मानती है। मैं शिक्षा से जुड़ी हुई थी और मेरा धर्म भी था कि मैं उसकी बात को महत्व दूं। ड्राइवर को कई बार कमतर आंका जाता है। 15 अगस्त 2023 की सुबह संभवतः मेरे शिक्षकीय व्यक्तित्व से प्रभावित लगा होगा। अनुभव तो कहीं से भी मिल सकता है। सभी के जीवन की कहानी अवश्य होती है। उसने मुझे सही श्रोता समझा । रिश्तों की ऐसी कहानी निकल कर आई कि सुनकर आंसू निकल आए। उसकी माँ ने उस समय उसे घर से निकाल दिया जब उसकी पत्नी ने जुड़वा एक बेटा और एक बेटी को जन्म दिया था। जिस दिन अस्पताल से घर आने वाली थी उसी दिन उसकी माँ ने कहा अब मेरे घर का दरवाजा तेरे लिए बंद है। अपना इंतजाम कहीं और कर ले। उसके ऊपर तो पहाड़ ही टूट पड़ा। मैडम आप सोचिए एक ओर भगवान ने मुझे दो बच्चे दिए और दूसरी ओर मुझे अपने ही घर से बेघर कर दिया। कुछ घंटों के लिए मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया।एक दोस्त ने मेरा साथ दिया। मेरी पत्नी बच्चे और मैं एक महीने उसके घर के बाहर बरामदे में बने एक स्टोर रूम में रहे। मैं जमीन पर सोता और पत्नी के लिए एक छोटी-सी खाट थी। रात भर दोनों बच्चों को देखना पड़ता एक जगता तो एक सोता। वे दिन और रात बड़ी मुश्किल से कटे। मैं बेरोजगार था। कहीं काम नहीं था। वैसे आपको जानकर अच्छा लगेगा कि मैं शादी के पहले एक बड़े आर्कियोलॉजिस्ट के अंडर में मुंबई में काम करता था। पैसे भी कमा रहा था। आप जानती हैं कि मुंबई में कई तरह के काम होते हैं जो आपको गलत राह पर चलने के लिए मजबूर भी कर देंगे। पर जिनके साथ मैं था वे मुझे बेटे की तरह मानते थे। वह काम मुझे पसंद भी था। अच्छे पैसे भी मिलते थे। पर वहीं से मेरे नसीब का बुरा मोड़ आया।मालिक पर ऊपर दुनिया भर का कर्ज था। उनको धमकियां मिलने लगी। कुछ दिनों में हार्ट फेल से उनकी मृत्यु हो गई। मैं अनाथ हो गया। फिर बंगाल चला आया। बंगाल में आया तो पहली मुश्किल हुई रोजगार पाने की। फिर एक जगह एकांउट्स का काम शुरू किया। मैंने पूछा, 'अच्छा आप एकांउट्स का काम भी किया करते थे। तो आपने ड्राइवर का काम क्यों पकड़ लिया।' आशुतोष कॉलेज से बीकॉम के दौरान मैंने एक कपड़े की दुकान में भी काम किया था। मैडम ईमानदारी से करता हूँ जो भी काम करता हूँ। यही कारण है कि आज मेरी इमेज अच्छी है। बाजार में दो आना इज्जत है। मैंने पूछा आपकी माँ को ऐसे नहीं करना चाहिए। आपने उनके साथ जरूर कुछ गलत किया है। कोई भी माँ आप जैसे मेहनती और ईमानदार बेटे को ऐसे कैसे दूर कर सकती है। जी मैडम! आपने ठीक ही पूछा मेरी शादी से वे बिलकुल ही खुश नहीं थीं। माँ को बिना बताए अचानक ही एक दिन मंदिर में जाकर शादी कर ली। लड़की भी गरीब परिवार से है, उसके भी पिता नहीं हैं। मैंने पूछा उस लड़की में ऐसी कोई खास बात थी कि तुमने उससे बिना सोचे समझे शादी कर डाली। बहुत कामकाजी और दबंग है क्या? उसने कहा नहीं, मैडम! वह बहुत सुंदर है। बंगाली है। और मैं पंजाबी हूँ इसलिए माँ को अच्छी नहीं लगती। आज सात साल हो गये मैं ही घर में बच्चों को देखता हूं और खाना भी बना देता हूं। वह बाहर नहीं निकलती। बाहर निकलती है तो रास्ते भी भूल जाती है। मुझे फोन करके बुलाती है कि अमुक जगह आ जाओ। एक साथ दो बच्चों को लेकर तो जाना संभव ही नहीं है। एक छोटे से कमरे में रहते हैं। किराए के पैसे बच्चों का दूध खाना-पीना और पूरे घर की जिम्मेदारी निभाने के लिए रात में गाड़ी चलाता हूँ। अब पहले जितनी परेशानी नहीं है। पर जब बच्चों का जन्म हुआ था तो ऐसा लगा था कि सड़क पर मेरे बच्चे भी भीख मांगेंगे। सपने भी वैसे ही आते थे। माँ ने कहा था कि तूने मुझे दुख दिया है। मेरा दुख तो जिंदगी भर का हो ही गया है पर तू भी कभी सुख से नहीं सो सकेगा। सच में, मैडम जी! मैं रात में खाना नहीं खाता हूँ और दिन में दो ही घंटे सो पाता हूँ। माँ का अभिशाप लग गया है। माँ खुद भी दुखी होगी। वह मेरे बड़े भाई के परिवार के साथ रहती है। मैडम जी रिश्ते क्या होते हैं? किन भावों के बंधे होते हैं? माँ, घर वाले, रिश्तेदार सभी छूट जाते हैं। मेरी पत्नी भी शादी करके अपने को कोसती है और मैं उसे खुश रखने के लिए सब कुछ न्यौछावर करता हूँ। मेरी माँ मुझसे रूठ गई। मैं मन ही मन अपनी कविता रिश्ते की पंक्तियाँ दोहरा रही थी 'रिश्ते ग्लेशियर से पिघलता जल है जिस ओर बह जाए उधर के ही हो जाते हैं' मेरा कॉलेज आ ही गया था। मैंने कहा हर व्यक्ति की कोई न कोई कहानी होती है। कोई भी व्यक्ति रिश्तों की दुनिया में सुखी नहीं है। माँ की ममता ने भी उसे ठुकरा दिया। जिंदगी में मिला यह घाव साधारण नहीं है कि समय का मलहम उसे ठीक कर देगा। ऐसे रिश्तों की टीस मरते दम तक रहती है।

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