Monday, December 11, 2023
टिप्पणी शोधकार्य शिल्प कला
निष्कर्ष - - - भारतीय सभ्यता में वास्तुशिल, मूर्ति कला और शिल्प की जड़ें इतिहास में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। भारतीय मूर्ति कला में स्त्री आकृतियों को अधिक देखा गया है जिसमें पतली कमर, उनके लचीले अंगों को कई दृष्टि से चित्रित किया गया है। भारतीय मूर्तियों में पेड़ - पौधों, जीव- जंतुओं और अनगिनत देवी- देवताओं की मूर्ति कला के उत्कृष्ट नमूने देखे जा सकते हैं। भारत में सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर दक्षिण के मंदिरों, वाराणसी के मंदिरों की नक्काशी, मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर, उड़ीसा के सूर्य मंदिर, सांची स्तूप, सारनाथ संग्रहालय, महाराष्ट्र के एलिफेंटा की गुफाएं, हिंदू, जैन मंदिर आदि बहुत सी- मूर्ति कलाएं पूरे विश्व में अपना उच्चतम स्थान रखती हैं।
भारतीय समाज में नारी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उसके विकास में ही समाज का विकास निहित है। नारी के अभाव में सृष्टि की कल्पना संभव नहीं है। सभ्यता के उदय के साथ ही मानव जाति का विकास करना ही मानव का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य रहा है। यह कार्य निरंतर स्त्रियों के द्वारा ही होता आया है। वैदिक काल से आधुनिक काल तक कला संस्कृति समाज आदि में कई परिवर्तन हुए हैं और उनका प्रभाव हम देखते आ रहे हैं। इतिहास में आता है की अश्वमेध यज्ञ के अवसर पर राम ने सीता की स्वर्ण प्रतिमा निर्मित करवा कर यज्ञ की पूजा पूर्ण की। वास्तुकला, मूर्ति कला और शिल्प कला से ही मनुष्य सभ्यता और संस्कृति से जुड़ा रहा।
किसी भी प्राचीन तस्वीर, पेंटिंग, पांडुलिपियां, स्मारक इत्यादि हमें उसके अतीत के बारे में जानकारी देते हैं। ऐसी चीजें हमें उनके विचारों और जीवन जीने के तरीकों को एक कला के रूप में परिभाषित करते हैं। पृथ्वी पर कई जीव रहते हैं, लेकिन उनमें से मनुष्य ही केवल अपने विचारों और अभिव्यक्तियों को व्यक्त करने की क्षमता रखता है। मनुष्य के जीवन में हर चीज में कला छुपी हुई हैं।बिना किसी नवीनता/नयेपन के मनुष्य का जीवन जानवरों के जैसा प्रतीति होता है। हमारे देश के अनेक हिस्सों में शानदार प्राचीन मूर्तियां, कलाकृतियां, चित्र आदि प्राचीन कला के महान उदहारण के रूप में देखने को मिलते हैं। क्या यह सब सच नहीं है? कला एक ऐसी चीज है जो प्राचीन काल के लोगों की कल्पना शक्ति और उनकी रचनात्मकता को दर्शाती है। यह सब केवल उस कला से सम्बंधित है जो हमें अपने अतीत के लोगों से जोड़ती हैं।हमारे देश की संस्कृति मूल रूप से हमारे जीवन जीने के तरीकों को दर्शाती है। यह हमारे रीति-रिवाजों, विचारों, धर्मों, मान्यताओं, नैतिकताओं इत्यादि के बारे में बताता है, जिसका अनुसरण लोग अपने जीवन जीने के तरीकों में उपयोग करते हैं। बिना कला के संस्कृति को प्रकट नहीं किया जा सकता है। कला एक जादू की तरह है जो विभिन्न धर्मों और उनके संस्कृतियों के बीच अंतर करने में हमारी मदद करता है। संस्कृति लोगों के भोजन, कपड़े, भाषा, त्योहार और उनके धर्मों को अलग-अलग रूप से प्रदर्शित करता हैं। इस तरह से प्रत्येक धर्म एक विशिष्ट संस्कृति और परंपरा का प्रतिनिधित्व करते है।
सृष्टि की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में स्त्री-पुरुष आते हैं।भारतीय स्त्रियां संस्कृति की विरासत के रूप में जानी जाती हैं। यह सच है कि स्त्रियों को वह स्थान नहीं मिला जितना मिलनी चाहिए। हर कला साहित्य संस्कृति में उनकी उपस्थिति रही है इस बात से भी नकारा नहीं जा सकता है क्योंकि पुरुषों द्वारा निर्मित कलाकृतियों में स्त्रियों का योगदान रहा है। कहते हैं कि हर कामयाब पुरुष के पीछे एक स्त्री का हाथ होता है। वर्तमान में कहते हैं कि हर स्त्री की सफलता बिना पुरुष के नहीं है।
महिलाएं आज हर क्षेत्र में परचम लहरा रही है। खासकर कला और संस्कृति के क्षेत्र में तो महिलाएं अपना दबदबा बनाए हुए हैं। मूर्ति कला जो पहले पुरुषों तक ही सीमित थी अब महिला मूर्तिकार भी इस क्षेत्र में अपनी जड़ें जमाने लगी हैं।
प्रथम अध्याय में - - -, द्वितीय अध्याय में - - -
तृतीय अध्याय में - - -
चतुर्थ अध्याय में - - -
पंचम अध्याय में - - -
प्रमुख विषयों को लिया गया।
प्रस्तुत शोध ग्रंथ वर्तमान समय में महिला मूर्तिकारों की कलाकृतियों में उनकी अपनी विचारधारा और शिल्प विषयक भावों को उभारने का प्रयास है। महिला मूर्तिकारों की इस नयी पौध को पहचान देना समाज, देश के लिए मैं एक हितकर कदम समझता हूं। देश की महिलाओं का शिक्षा, साहित्य, कला और संस्कृति में उनके महत्वपूर्ण योगदानों को स्थान मिले, इस आशा से यह शोध विषय लिया गया है।
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