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Wednesday, July 12, 2023

मन का सावन कविता

मन का सावन-- सावन मन में बरसता है। जब रस रंग और रास से मन पूर्ण होता है तो सावन होता है। निश्छल और उन्मुक्त हँसी से चेहरा भरा हो तो सावन है। चिंताओं की तमाम लकीरें जब पानी की तरह पारदर्शी हो जाए तो सावन है। होठ पर जब बचपन के गीत आने लगें तो सावन है। एक पैर से दूसरा पैर जब खेलने लगे तो सावन है। पेड़ों की पत्तियों से गिरती बूदें जब शरीर को भिगो दें तो सावन है। तन और मन के पोर पोर कुछ कहकर भी जब कुछ न कहें तो सावन है। आसमान में सात रंगों का इंद्रधनुष दिखाई दे तो सावन है। हमारे मन का मयूर जब नाचे तो सावन है। यूँ ही तो कोई सावन नहीं मनाता है। किसान अपनी लहलहाती फसलें देखकर झूम उठता है, तब सावन है भारत ऋतुओं से फलता-फूलता है, त्योहार मनाता है, खुशियाँ मनाता है। तब सावन है कोयल की कूंक जब सुनाई दे तो सावन है। हर बच्चा वृद्ध और स्त्री के चेहरे पर सुकून हो तो सावन है मजदूर जब त्योहार मनाए तो सावन है कृषि के साथ कृष्ण बांसुरी बजाएं तो सावन हैं क्रोधित वर्षा के नैनों की धारा जब बुझ जाएं तो सावन है बाढ़ के खतरे न आएं पशु-पक्षी और मानव के जीवन सुरक्षित हों तो सावन है।

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