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Tuesday, June 28, 2016

सच में तुम मेरे हो

तुमने तो कहा था तुम आओगे एक दिन
सच को फिर से लोगों के सामने रखने
तुम सच में सच बोलते हो
तभी तो हर रोज दिल की धड़कन तुमसे ही धड़कती है
बस मिलना ही नहीं होता
वैसे तो तुम मेरे आसपास नहीं
दिल में जो छिपे हो
बाहर नहीं हो, अंदर से ही आवाज लगाते रहते हो
बाहर मेरे हावभाव, मेरी बातचीत, मेरे शरीर के सभी अंगों में समाये रहते हो
तुम मेरी वाणी के मालिक हो
झूठ, फरेब, धोखा, विश्वासघात और कई अनचाहे कार्य भी करवाते हो
मन नहीं होता फिर भी करवा लेते हो
किस कोने में बैठे रहते हो
सच में उस समय मैं कितना कोसती हूँ तुम्हें और तुम्हारे सच को
आंख मिचौली के खेल में माहिर तुम
मुझे हैरान करने में लगे रहते
पर फिर तुम सही राह दिखाते
और ऐसी राह जो सही को साबित करती
सच में तुम सच हो
मेरे हो,मुझमें हो,मेरे हो
मैं ही गलती कर जाती
तुम्हें पहचान कर भी न पहचानने का ढोंग करती
मैं तुम्हारी हूँ सिर्फ तुम्हारी
सच में तुम सच में मेरे हो
तुम तो आए हुए ही हो।



1 comment:

  1. जिसे अच्छी लगे कृपया अपने विचार दें

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