बहुत सारे युद्ध होते रहते हैं। कभी घर में कभी बाहर या फिर अॉफिस में। कभी तो अपने भीतर ही एक युद्ध चलता रहता है। मैं जब लिखने बैठती हूँ तो मन विचलित हो जाता है। एक पंक्ति लिखने के लिए सोचती रहती हूँ। पता नहीं लोग इतना कैसे लिख लेते हैं, इतना बोल भी लेते हैं। कौन - सा टॉनिक लेते हैं।
कोरोना महामारी ने तो लोगों के पसीने छुडा़ दिए। योग आसन, ध्यान करने और फिर जडी़- बूटियों को खाने में लगे हुए हैं।सारा स्ट्रेंथ तो कोरोना के भय से ही निकल गया। बड़े-बड़े दिग्गजों ने योग के उस्तादों से अॉन-लाइन क्लास ले रखी है। कितनी कमाई होने लगी है। मैं अंदर ही अंदर अपने मन मस्तिष्क से युद्ध करती रहती हूँ कि तुमने किसमें उम्र गंँवाई है। कुछ तो अच्छा कमाती केवल पार्ट टाइम टीचर बनी फिरती हो। बुढ़ापे में पेंशन भी नहीं। फैलाना हाथ सबके सामने!
फिर युद्ध वाली बात? अरे क्या करुँ। मेरे बराबर की घर में बोरी भर भर कर रुपया ला रही हैं और मैं इतना मेहनत करती हूँ फिर भी मेरी तनख्वाह नहीं बढ़ी। बहुत युद्ध चलता है आप लोग नहीं समझेंगे।माँ की दुआ मेरे साथ है। वो अपनी बेटी को शिक्षित बनाना चाहती थी। सो तो बन गई लेकिन उस समय कैरियर की कोई नहीं सोचता था खाते पीते घर की बहुएँ कमाती नहीं थी। बस पति के साथ रहो। घर संसार बच्चों में व्यस्त रहो। घर का युद्ध तो ऐसा है कि जहां जीत हार का प्रश्न ही नहीं है बस लगे रहो छोटे बड़े मझोले युद्धों में। बार्डर में लड़ना आसान है एक बार या तो विजेता बनकर आ जाओ या शहीद हो कर आओ। दोनों में ही जीत है लेकिन घर? बाप रे बाप बताया न युद्ध चलता ही रहता है। सुबह से लेकर रात बारह बजे तक युद्ध। रसोई घर का युद्ध स्थल है। ये तो समझ में आया है लेकिन वसु समझी तो इस उम्र में - - - - हा हा हा। आजकल बहुत से आसान तरीके हैं ऐसे युद्ध से निपटने के 👍👍😜

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