Monday, August 8, 2022
हिंदी हमसे है हम हिंदी से हैं
हिंदी सरल और ग्राह्य भाषा है जो सहज ही सबके हृदय में बस जाती है। हिंदी सबको आंतरिक और बाह्य रूप से मिलाने वाली भाषा है। मातृभूमि की ऋषि गंध है, अखंडता का पावन प्रदीप है। ऋग्वेद की वाणी 'भारततीभिः भारती सजोषा' को चरितार्थ करती है हिंदी। भारत के दक्षिण से उत्तर की ओर हिंदी ही रही जो हमारी भावनाओं को जोड़ती रही।
कबीर ने कहा है' भाषा बहता नीर' । जायसी ने कहा- 'तुरकी अरबी हिंदुई भाषा जेती आहि,
जेहि मह मारग प्रेम का सबै सराहे ताहि।' हिंदी सचमुच प्रेम का मारग रही है।
हिंदी तो जबां है हमारी, कहने न लगे हमन कूँ मारी।
कवि गरीब 18वीं सदी में कहते हैं-'
हिंदी पर ना मारो ताना
सभी बतावें हिंदी माना
यह जो है कुरान खुदा का
हिंदी करें बयान सदा का। '
केरल, आंध्र, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, बंगाल और पूरे उत्तर भारत में गैर हिंदी राज्यों में हिंदी साहित्य के साथ संपर्क स्थापित करने वाली भाषा हिंदी ही है।
14 सितंबर 1953 से पूरे देश में हिंदी दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। राजभाषा होते हुए भी आज पूरे विश्व में भी तीसरे नम्बर पर बोलने वाली भाषा है। सही कहा है -
'कुछ बात है जो हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमांँ हमारा'
भारत के संविधान में भी अनुच्छेद 343 के अंतर्गत ही हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है ।
लेकिन अपनी लोकप्रियता के कारण अपनी हृदय ग्रहिता के कारण आज पूरे देश के साथ विश्व में भी अपना स्थान रखती है।
भारतेंदु ने बहुत पहले ही कहा था -
' निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा ज्ञान के मिटे न हिय की शूल'
सन्मार्ग के संस्थापक राम अवतार गुप्त जी को अपनी भाषा के प्रति प्रेम था और आज उनके नाम पर यह हिंदी पुरस्कार हर भारतीय नागरिक के लिए गौरव की बात है। भावी पीढ़ी ही भाषा को सुरक्षित और संरक्षित करने का काम करेंगे। -
हिंदी में हम जीते हैं
हिंदी से हम ऊंँचे हैं
हिंदी सबकी अपनी है
भाषा ही तो जोड़े हैं
नहीं तो सब कुछ भ्रम है
आओ भूल राजनीति को
भाषा को मन से अपनाएँ
हम भाषा से
भाषा है हम से
पूछने अमीर गरीब सब से हाथ मिलाते हिंदी
और जोड़े हिंदी से सबको मान बढ़ाएं
हिंदी के हम
हिंदी हमसे
@वसुंधरा मिश्र, कोलकाता 30,7,22
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