Monday, August 8, 2022
कविता वाट्सप की महिमा
माँ तुम्हारा ध्यान कहाँ है?
अरे मैंने पूछा कहाँ हो?
तुम्हारे ठीक आगे
दूध-की-बोतल कहाँ है
वह तो तुम्हारे मुंँह से लगी है
तुम दूध पियो, मैं वाट्सप देख लूँ
बच्चा और दूध-की-बोतल का बेलेंस बिगड़ गया
दूध कहीं बच्चा कहीं
माँ वाट्सप पर मानसिक खुराक लेने में व्यस्त
टाइमर सेट नहीं किया
इससे तो अच्छा होता बच्चा वर्चुअल ही दूध पी लेता
बोतल खिसक गई, बच्चा रोने लगा
माँ ने तकिये को मुंह समझ उसी में बोतल घूसेड दी
वाह रे वाट्सप
बच्चे का बचपन भी वर्चुअल लगा
एक कार्टून जैसा बच्चा लगा
बच्चा उछल कर मोबाइल छीन ले
और दूध-की-बोतल माँ के मुंँह में लगा दे
और वाट्सप करने लगे।
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