*समय के साथ भूल गए हैं लोग चाँद का दाग
चंद्र किरणों से खेलना किसे नहीं अच्छा लगता
*निंदा की आदतें अच्छी थीं
अब प्रशंसा से भी पेट भरता नहीं
*वो आज देर से लौटा था
देवी के दर्शन से मन नहीं भरा
*सडकों पर जगमगाहट थी
गलियों में अंधेरा था
*चले जाने का दुख न था
कुछ भी नहीं कहा
*ऊपर से दुख दिखाई नहीं देता
भीतर उतरता रहता है
*सुख की चाहत में उम्र रीत रही
छोटी-छोटी बातों में जिंदगी उलझती गई
*शब्दों से खेलते हैं लोग जब
जुआ और चौपड़ भी फेल हैं तब
आराधना में वाग्देवी बन
समाज को नई दिशा देती है तब
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