यूँ भी तो आराम बहुत है
माँ के आँचल की छाया में यूँ भी तो आराम बहुत है
काम काज कुछ भी न करना
दिनभर पतंग उड़ाना
माँ जब समझाती तब
कहते हम सब कुछ जाने बैठे हैं
माँ का राज था सबसे अच्छा
मेरी जिद के आगे माँ बाबा
दोनों ही झुक जाते
डांट फटकार यूँ ही हवा में उड़ जाते
अच्छा बुरा शुभ अशुभ सभी समझाते,समाज में जीना सिखाते, भले बुरे में अंतर बतलाते
आज पैरों पर खड़े हुए हैं
हम भी बड़े हुए हैं
हँसते हँसते हाल बेहाल हैं
जब स्मृति में बचपन की वे याद कौंधती
जब यूँ ही कह देते अनजाने में
मुझ को मत समझाओ
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