बहुत अच्छा लगा था
बहुत अच्छा लगा था
जब तुमने मेरी पुकार
"जरा सा ठहर जाओ" सुना था
मुझे लगा तुम बात सुन सकते हो
बहुत सालों से मिट्टी की गंध और दीमक की गति ने मेरी आत्मा को सूना कर रखा था
तुमने मुझे सुना और दो पल पास बैठे
मुझे सुकून मिला
अनदेखे थे फिर भी देखते हुए मैंने तुम्हें महसूस किया
मेरी आत्मा ने तुम्हें छुआ
लगा तुम मेरी ही तरह सबके साथ रहते हुए भी अकेले ही थे
सालों से मैं अकेले थी
न जाने अपनों का साथ कब छूटा
मुझे तारीख और समय भी याद नहीं
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