Monday, February 21, 2022
कुछ बातें ऋतुराज वसंत की
कुछ बातें ऋतुराज वसंत की--
सुभद्राकुमारी चौहान जी ने वसंत आगमन पर जलियांवाला बाग में शहीदों के रक्त से सनी धरती को याद कर वसंत से कहती हैं - - -
आना हे ऋतुराज! किंतु तू धीरे से आना
यह है शोक स्थान यहाँ मत शोर मचाना।
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वीरों का कैसा हो वसंत
भूषण अथवा कवि चंद नहीं
बिजली भर दे वह छंद नहीं
है कलम बँधी स्वछंद नहीं
फिर हमें बतावे कौन हन्त? वीरों का कैसा हो वसंत?
सच ही तो है वसंत आता है तो मनुष्य मन में कई प्रश्न उठाता है और कई उत्तर की चाहत जगाता है - - -
मेरी रचना 'वसंत' में मैंने वसंत को बड़े लोगों की कृपा माना है - - -
नभ से उतरता वसंत
इतराता इठलाता
भर गया जब सूखी टहनियों पर
लहलहा उठा तब
वह गरीब वृक्ष
पूर्ण आश्वस्त
लगा सोचने
अभी भी बाकी है
इतनी संवेदना
जो बाँटती है प्रकृति में रंगीनियाँ
मुकतहस्त हो निर्जीव पतझड़ में
भरती है प्राणों का संचार
सच ही सुना है
बड़े लोग ही होते हैं
करुणा और शील के मूर्त
तभी तो उतर आता है जमीन पर
मदमस्त हो वसंत भी। (काव्य संग्रह - हर दिन नया, डॉ वसुंधरा मिश्र, पृष्ठ 27)
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