हर पल नई सुबह
हर क्षण है परिवर्तित
हर पल बीत रहा है
जीवन तो चलने का नाम
नेक रास्ते देते पहचान
सब कुछ नया नया है
हर दिन नया नया है
सोच नई हो जाए तो
फूलों की बगिया खिल जाए
नदियों की धाराएँ बिछ जाएँ
चारों ओर हरित हो जाए
खेतों में अनाज लहलहा जाए
बच्चों में खुशियॉं छा जाए
स्त्री पुरुषों के मन निर्मल हो जाएँ
जीवन की लंबी पगडंडियों में
खुशियों की क्यारी लगाएँ
राग द्वेष लोभ मोह के कीड़ों को
मन से दूर भगाएँ
हर पल नयी सुबह को
आओ गले लगाएँ।
@डॉ वसुंधरा मिश्र, 1.1.22
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