Friday, September 2, 2022
माँ (कविता)
माँ
जब नहीं होती है माँ
तभी बहुत याद आती है माँ
यूँ तो हवा की तरह कब
सांसो में आती जाती रहती थी
कब पानी की तरह अपनी ममता से प्यास बुझाती रहती थी
कब खाने की तरह हमारी भूख मिटाती रहती थी
कुछ पता नहीं चलता था
उसका होना अपने वजूद से
इस कदर जुड़ा रहता था कि कभी अलगाव ही महसूस नहीं होता
पर जब नहीं होती है माँ
तभी बहुत याद आती है माँ
आज नहीं होने पर होता है महसूस कि माँ तुम मेरे लिए चिराग जिन थी
जो मेरी हर जरूरत को चुटकी में पूरा कर दिया करती थी
कब कैसे नींद ना आने पर थपकियों से सुला दिया करती थी
सपनों को मेरे साकार कर आकार दिया करती थी
सच ही माँ तुम चिराग जिन हुआ करती थी
@वसुंधरा मिश्र, 22.8.2022
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