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Sunday, September 11, 2022

बहती नदी (कविता)

बहती नदी पूछा नदी को कहांँ बहती जा रही हो तुम वही हो तुम्हारी नियति वही है एक पूरी संस्कृति को ढोती क्या तुम स्त्री हो तुम्हारे दोनों किनारों पर बसे हैं गाँव शहर महानगर जिनसे जुड़ती है तुम्हारी कहानी तुम तो बहती नदी हो चलती हो उछलती हो चंचल हो सुंदर युवती सी हो। @वसुंधरा मिश्र, 6.9.22

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