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Sunday, September 11, 2022

कुछ बातें (कविता)

*कुछ बातें बस बातें ही बन कर जी लेती हैं *उनको तो खबर ही न थी पूरे शहर के हंगामे की रात के गहरे अंधेरे को चीर कुछ राज खुल चुके थे बाकी थी जो उसकी आत्महत्या जो इसी रात घट चुकी थी *उन्हें थी आहट उनके आने की तभी तो रात कब सुबह हो गई जान ही न पाए *तुम पर प्यार ही प्यार बरसने लगा यह तो दिल का धड़कना है * प्रेम में कब हम गए भीग कपड़े और जेवर सूखे ही रहे @वसुंधरा मिश्र 6.9.22

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