*कुछ बातें बस बातें ही
बन कर जी लेती हैं
*उनको तो खबर ही न थी
पूरे शहर के हंगामे की
रात के गहरे अंधेरे को चीर
कुछ राज खुल चुके थे
बाकी थी जो उसकी आत्महत्या
जो इसी रात घट चुकी थी
*उन्हें थी आहट
उनके आने की
तभी तो रात
कब सुबह हो गई
जान ही न पाए
*तुम पर प्यार ही प्यार बरसने लगा
यह तो दिल का धड़कना है
* प्रेम में कब हम गए भीग
कपड़े और जेवर सूखे ही रहे
@वसुंधरा मिश्र 6.9.22
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