Tuesday, May 10, 2022
भारतीय भाषा परिषद का स्थापना दिवस 2021
भाषाओं का तीर्थ भारतीय भाषा परिषद का स्थापना दिवस मनाया गया - - - -
भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता ने अॉन-लाइन जूम पर स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर सीताराम जी सेकसरिया और भागीरथ कानोडिया जी के भाषा और शिक्षा प्रेम और उसके लिए उनके सद्प्रयासों की ओर ध्यान आकृष्ट किया गया जो आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है। परिषद के निदेशक डॉ शंभूनाथ ने बताया कि परिषद का अतीत गौरवशाली रहा है और यहां से बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। कोरोना काल के दौरान यहां से निकलने वाली पत्रिका वागर्थ अब ई - पत्रिका के रूप में निकल रही है।विश्वंभर दयाल सुरेका जी की सेवाओं के कारण ज्ञान कोष के आठ खंडों का प्रकाशन हुआ जो पचास वर्षों में किसी भी गैर सरकारी संस्था के लिए उल्लेखनीय है।
परिषद की अध्यक्ष डॉ कुसुम खेमानी ने सीताराम सेकसरिया जी(बाउजी) और भागीरथ कानोडिया जी(काकोजी) को याद करना भविष्य दृष्टा और भविष्य सृष्टा को याद करना है। सीताराम जी यदि कल्पना थे तो भागीरथ जी उनके मूर्त रूप थे, एक दूसरे के पूरक थे।डॉ कुसुम खेमानी ने कहा कि चौबीस साल की अवस्था से ही सीताराम जी सामाजिक कार्यों से जुड गए थे और दोनों ने मिलकर समाज की उन्नति के लिए शिक्षा संबंधित बहुत से ऐतिहासिक कार्य जैसे मारवाड़ी बालिका विद्यालय की स्थापना और कई संस्थाओं से जुड़े हुए थे। 88 वर्ष की आयु में भारतीय भाषाओं की समृध्दि के लिए भारतीय भाषा परिषद की स्थापना की। उन्होंने केवल हिंदी ही नहीं सभी भाषाओं के उन्नयन पर ध्यान दिया । पूरे देश से साहित्यकार, संगीतज्ञ, दार्शनिक, और चिंतक आदि ने यहां पर अपने विचार प्रकट किए हैं। भारतीय भाषा परिषद संस्था भारतीय भाषाओं के प्रति प्रेम और उत्कृष्ट योगदान का प्रतीक है। वहीं राजस्थानी भाषा के पक्षधर रतन लाल शाह ने सीताराम सेकसरिया जी और भागीरथ कानोडिया जी के साथ बिताये क्षणों को ताजा करते हुए कहा कि राजस्थान से व्यवसाय के लिए आए मारवाड़ी जाति का शिक्षा और भाषा के विकास के प्रति रूझान विकास और नई सोच को दर्शाता है। शाह ने आग्रह किया कि ऐसे महापुरुषों पर अधिक से अधिक शोधपरक अध्ययन होना चाहिए जिससे युवा पीढ़ी भी प्रेरित हो सके। लंबे समय से जुड़ी डॉ प्रतिभा अग्रवाल ने अस्वस्थता के बावज़ूद अॉडियो द्वारा परिषद को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की।ईश्वर बाबू जी और काको जी के संरक्षण में बचपन से ही देखती आ रही विमला पोद्दार परिषद से शुरू से जुड़ी रहीं। ईश्वर प्रसाद टांटिया ने शुभकामनाएँ प्रेषित की। कार्यक्रम के प्रथम भाग 'परिषद की यात्रा और वार्ता कल आज और कल' के अंतर्गत वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने वक्तव्य रखे।
द्वितीय भाग 'वर्तमान संदर्भ में संस्कृति और साहित्य' विषय पर वागर्थ वेब की एडमिन डॉ वसुंधरा मिश्र ने अपने वक्तव्य में कहा कि कोरोना महामारी काल में किस तरह का साहित्य जन्म लेगा यह आने वाला भविष्य तय करेगा। यह मृत्यु से युद्ध का समय है। साहित्य और संस्कृति मनुष्य की भावना से अन्तर्संबंधित है। इस विषय पर इस समय भी लिखा जा रहा है और आगे आने वाले समय में भी लिखा जाएगा क्योंकि यह इस युग की एक महान घटना है। डॉ संजय जायसवाल ने परिषद के स्थापना दिवस पर सीताराम जी सेकसरिया और भागीरथ कानोडिया जी के सद्प्रयासों की चर्चा की और कोरोना की भयावह स्थिति पर ध्यान आकर्षित करते हुए कार्यक्रम का आयोजन होना अच्छी पहल बताया। मधु सिंह ने कोरोना महामारी के दौरान उम्मीद लिख रही हूँ कविता सुनाकर श्रोताओं को सकारात्मक दिशा की ओर ले जाने का प्रयत्न किया। कोलकाता रंगमंच के लोकप्रिय अभिनेता अजहर आलम के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। पूजा सिंह ने कुंवर बैचेन जी कविता पाठ द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की और अपनी कविता की प्रस्तुति दी। वहीं आनंद गुप्ता ने समसामयिक भयावह महामारी में 'उम्मीद' कविता सुनाई। रावेल पुष्प ने अजहर आलम की स्मृति में बहुत ही मार्मिक कविता सुनाई। व्यंगकार नुपूर अशोक ने दो कविताएँ सुनाई। कविता 'गेम का प्लान' में किए व्यंग को बहुत पसंद किया गया। डॉ राजश्री शुक्ला ने परिषद को बधाई दी। विनोद कुमार ने रमेश उपाध्याय के व्यक्तित्व और कृतित्व की चर्चा करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।कोरोना काल में असमय मृत्यु प्राप्त रमेश उपाध्याय, अजहर आलम, मंजूर एहतेशाम, अरविंद कुमार, अमिता शाह, विमल लाठ और कुंवर बैचेन जैसे साहित्य और रंगमंच की प्रमुख हस्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर परिषद की ओर से आने वाले कार्यक्रम 'एक साहित्यकार की खोज' के विषय में डॉ केयुर मजमूदार और डॉ वसुंधरा मिश्र ने जानकारी दी जिसमें युवा पीढ़ी की विविध साहित्यिक- सांस्कृतिक प्रतिभाओं को स्थान दिया जाएगा और परिषद के मंच पर उनको चयनित कर विभिन्न कॉर्पोरेट जगत के सहयोग से उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। यह प्रतियोगिता स्कूल - कॉलेज और राष्ट्रीय स्तर पर फाइनल आकार लेगी। वागर्थ वेब युवाओं और प्रबुद्ध प्रतिभाओं का डिजिटल पटल है जो भारतीय भाषा परिषद की ही इकाई है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में परिषद के प्रांगण में संस्थापकों की मूर्तियों पर माल्यार्पण किया सचिव डॉ केयुर मजमूदार एवं वित्त सचिव घनश्याम सुगला ने , जूम पर उपस्थित सभी ने नमन किया । पूरे कार्यक्रम का संचालन और तकनीकी सहयोग डॉ केयुर मजमूदार ने किया।
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