Sunday, August 22, 2021
रक्षा बंधन में रेशमी डोरी
रक्षा बंधन पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं - - -
रेशम की डोरी है में बंधे रिश्ते समय पाकर फिसल भी जाते हैं। लगता है रेशम का प्रयोग इसी लिए किया गया है। कीड़ों को मारकर उनके कपड़े बनाना और उनकी सुंदर डोरी को भाई बहन के रिश्तों से जोड़ने में संवेदना को रखने का आवरण लग रहा है। वहाँ झूठे प्रेम को थोपना लग रहा है। रेशम का स्वभाव है फिसलन। मनुष्य स्वभाव में भी तो चंचलता है, स्थिरता नहीं।
रक्षा बंधन रक्षा से जुड़ा है। एक भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है। जैसे एक पिता अपनी माँ, पुत्री, पत्नी और दादी-नानी की रक्षा करता है। पुरुषों के लिए सामाजिक दबाव है कि वे अपने परिवार की रक्षा स्वयं करें।
नवजागरण की लहर से ही समाज परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजर रहा है और पुरुषत्व और स्त्रीत्व में भी परिवर्तन हुआ है।
उत्तर आधुनिकता के इस युग में बहुत कुछ बदलाव देखने में आ रहे हैं। स्त्रियों की अपनेअस्तित्व, अपनी निजता, अपना पैसा, अपना परिवार और अपने ही स्वार्थ के लिए चिंता है जो समाज के मानसिक बंधन के आंकड़ों को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विदेशों में ये निजीकरण बहुत पहले से ही चल रहा है। भावनात्मक जुड़ाव अर्थ पर निर्भर करता है। अर्थपरक सोच ने भारत के मनुष्यों के भावों मूल्यों और आदर्शों पर गहरी चोट की है।
भाई बहन के रिश्तों में मधुरता बनी रहे। रिश्तों में मिठास रहे आज इस बात की आवश्यकता है। मेरी यह कविता इसी भाव को व्यक्त करती है - -
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