Thursday, February 1, 2024
लोकगीत की विशेषता सुरंगों सावन
भारतीय भाषा परिषद के सभागार में भारत जैन महामंडल लेडिज विंग ने मनाया सुरंगों सावन - -
राजस्थान के लोकगायक संजय मुकुंदगढ ने राजस्थानी गीतों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। विशिष्ट अतिथि ताजा टीवी के डायरेक्टर वरिष्ठ संपादक विश्वंभर नेवर और मुख्य अतिथि के रूप डॉ वसुंधरा को आमंत्रित किया गया। संस्था की संस्थापक अंजू सेठिया और सरोज भंसाली का धन्यवाद ।इस अवसर पर 50 से अधिक सदस्याओं की उपस्थिति रही।
चांद चढयो गिगनार, बाई सारा बीरा जयपुर जाजो जी, पल्लो लटके रे, ओर रंग दे आदि कई गीतों ने सदस्यों और अतिथियों को भी नृत्य करने के लिए आकर्षित किया। अंजू सेठिया को धन्यवाद।
लोकगीतों से संबंधित कुछ बातें - - -
लोकगीतों से मनुष्य की व्यवहारिक आवश्यकताओं की भी पूर्ति होती है-काम का बोझ हल्का करना, अत्याचार का विरोध करना तथा सामान्य जनता का मनोरंजन करना। लोकगीत अशिक्षित सामान्य जनों के उपयोग का कलात्मक माध्यम है। लोकगित अपनी सरलता और सवाभाविकता के कारण ही मोहक होता है। लोकगीत समाज धरोहर ही नहीं लोकजीवन का दर्पन भी है।लोकगीत लोक के गीत हैं। जिन्हें कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा लोक समाज अपनाता है। लोकगीतों की प्रमुख विशेषताएँ ये हैं- (1) लोकगीत गाँवों-कस्बों आदि के संगीत हैं। (2) ये त्योहारों और विशेष अवसरों पर गाये जाते हैं। (3) लोकगीतों के लिए साधना की जरूरत नहीं होती है। (4) इनके रचने वाले अधिकतर गाँव के ही लोग होते हैं।
बिरहा उत्तर प्रदेश की एक लोकप्रिय लोक गीत शैली है।
ब्रज क्षेत्र के प्रमुख लोक गीतों की बात करें, तो झूला, होरी, फाग, लंगुरिया और रसिया ब्रज क्षेत्र के प्रमुख लोक गीत हैं।
चकरी जम्मू और कश्मीर में बजाए जाने वाले पारंपरिक संगीत के सबसे लोकप्रिय प्रकारों में से एक है ।
चकरी एक प्रकार का पारंपरिक संगीत है।
लोकगीतों की भाषा गाँवों और आंचलिक क्षेत्रों की बोलियाँ होती हैं। इनकी भाषा अच्छी तरह समझी जाने वाली तथा हृदय के भावों के अनुसार होती है। इसी कारण लोकगीत बहुत आह्लादकर और आनन्ददायक होते हैं। इनकी भाषा की सरलता प्रमुख विशेषता मानी जाती है, लोकगीतों की सफलता का कारण भी यही है।ऐसे लोकगीतों के उदाहरण हैं काजलियों, कागा, गोरबंद, कांगसिया, हिचकी, कुरजा, इंडोनी, लूर आदि। कागा एक ऐसा गीत है जिसे हर कोई अपने प्रियजनों की प्रतीक्षा में गाता है। हिचकी एक ऐसे व्यक्ति द्वारा गाया गया गीत है जो मानता है कि जैसलमेर क्षेत्र में उसकी कमी महसूस की जा रही है।
बुन्देली गारी गीत · अवधपुरी मे चैन परे न / बुन्देली · कचरिया तोरो व्याव री / बुन्देली · कछु नइया धना न्यारे की ठान मे भूलो मत झूठी ...
सैंय्या मोरा गइले विदेसबा सखीरी ।
जिया नाहीं लागे ।।
चार महीना गर्मी के लागल।
नाहीं भेजे कौनो संदेसवा सखीरी ।।पद्मावत में लोक संस्कृति का वर्णन है।
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