Thursday, February 1, 2024
बंगाल में हिंदी रंगमंच में स्त्रियों का योगदान संक्षेप में
बंगाल में हिंदी रंगमंच में स्त्रियों के योगदान पर विचार रखते हुए भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की हिंदी प्रवक्ता डॉ वसुंधरा मिश्र कहा कि बंगाल में हिंदी नाट्य कला को आगे बढ़ाने में प्रसिद्ध नाट्य कार अभिनेत्री ,निर्देशक,कवयित्री साहित्यकार प्रतिभा अग्रवाल, उषा गांगुली, उमा झुनझुनवाला तीनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है । जिन्होंने रंगमंच के नए प्रयोग और प्रतिमान स्थापित किए। बांग्ला और हिंदी के रंगमंच में सेतु का काम किया। वर्तमान में स्त्रियों ने अपनी पहचान का आंकलन किया है और विषम चुनौतियों का सामना कर जीवन के हर क्षेत्र में उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। 1955से कोलकाता में अनामिका से अपनी नाट्य यात्रा आरंभ की।रवीन्द्रनाथ ठाकुर के चार नाटकों अनुवाद के साथ साथ नाट्य शोध संस्थान की स्थापना की। प्रेमचंद के गोदान उपन्यास की धनिया के अभिनय को अभी भी याद किया जाता है। वहीं उषा गांगुली ने कोलकाता में हिंदी नाटकों में नए प्रयोग किए। स्त्री संघर्ष के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत किया।उनकी अन्तरयात्रा में उषा जी का अद्भुत अभिनय था। रूदाली कोर्ट मार्शल होली आदि उनके प्रसिद्ध नाटक हैं।डॉ वसुंधरा मिश्र ने कहा कि वर्तमान समय में उमा झुनझुनवाला भावी नाटक की जननी है जो आज के युवाओं को नाटकों से जोड़ रही हैं। रेंगती परछाई, भीगी औरतें, कोई और रास्ता में उनकी अभिनय कला अद्भुत है। वे स्वयं नाटक लेखिका हैं। डॉ मिश्र ने बताया कि पहले नाटकों में पुरुष स्त्रियों का रोल करते थे जो पुरुष वर्चस्व समाज के कारण था। नाटक में स्त्रियों के कार्य को नीचा समझा जाता था।
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