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Wednesday, May 31, 2023

पत्रकार पं. झाबरमल शर्मा :राजस्थानी मानस और जातीय स्वाभिमान के पुरोधा लोकमान्य तिलक के संस्कार - गोत्र पत्रकार एवं संपादक पं. झाबरमल शर्मा गांधी युग की धारा की ऊर्जा के साथ देश- हित और जातीय चेतना के निमित्त अपने धर्म धरातल को सक्रियता से निभा रहे थे।। महात्मा गांधी, हीरालाल शास्त्री, हरिभाऊ उपाध्याय, जयनारायण व्यास, रुद्रदत्त शर्मा, अमृतलाल चक्रवर्ती, दुर्गा प्रसाद मिश्र, सत्यदेव विद्यालंकार, रामनाथ सुमन, शिवपूजन सहाय जैसे कृति संपादक और गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी, चंद्रधर शर्मा गुलेरी जैसे मनीषी उस युग के देश पुत्र थे। पं. झाबरमल शर्मा ने भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया जो राजस्थान के साथ साथ बंगाल के लिए भी गौरव का विषय है। इन सभी का लक्ष्य एक ही था जातीय चेतना का बहुमुखी विकास और देश का समग्र अभ्युत्थान। पं. जी की कर्मस्थली कलकत्ता ही रही । हिंदी पत्रकारिता की प्रवास कर रहे जन्मभूमि कलकत्ता से उस समय राजा राममोहन राय ने बंगदूत पत्र निकाला जो बंगला, फारसी, अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं में निकला। केशवचंद्र सेन, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, सर आशुतोष मुखोपाध्याय अपनी भाषा, जाति, धर्म तथा संपूर्ण समाज के हित के लिए विभिन्न पत्र-पत्रिकाएं निकाल रहे थे। राजस्थान और दूसरे प्रदेशों में व्यवसायिक प्रयोजनों से प्रवास कर रहे राजस्थानियों के उद्योग से कई पत्र-पत्रिकाएँ निकाल रहे थे। पं. झाबरमल शर्मा ने सन् 1914 में अपने संपादन में चीनी पट्टी से "कलकत्ता समाचार" निकाला जिसका जिक्र पं. झाबरमल शर्मा अभिनंदन ग्रंथ (राजस्थान मंच द्वारा 1977 में प्रकाशित) में श्री हरिलाल ठाकोर ने किया है। साहित्यकार पद्मश्री से सम्मानित डॉ. कृष्ण बिहारी मिश्र ने हिंदी "पत्रकारिता :राजस्थानी आयोजन की कृति भूमिका "ग्रंथ के पृष्ठ सैंतालीस में लिखा है कि पं झाबरमल शर्मा ने ज्ञानोदय के प्रकाशन के विषय में बताया था कि बाबू तेजपाल इसको प्रकाशित करते थे जो उनके पिताजी के मित्रों में से एक थे। पं. शर्मा रौलट एक्ट के विरुद्ध" कलकत्ता समाचार" ने जो आवाज बुलंद की थी, उसी का परिणाम था कि उन्हें गवर्नर से धमकी मिली और उन्होंने "गवर्नर का गुस्सा" लेख लिखा। जिसके बाद तो पत्र ही बंद ही करना पड़ा। वे उस दमन के युग में भी निर्भीक संपादक के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त थे। दिल्ली से हिंदू संसार नामक दैनिक पत्र निकाला। मारवाड़ी नामक मासिक पत्रिकाओं का संपादन पंडित जी की पत्रकारिता जगत को महत्वपूर्ण देन थी। राजस्थान की राजनीति, धर्म, संस्कृति, सभ्यता पर सीकर और खेतड़ी का इतिहास विवेकानंद पर दो खंड आदि दस से अधिक ग्रंथ तथा छह ग्रंथों का संपादन जिसमें माधव मिश्र निबंध माला, गुप्त निबंधावली, बालमुकुंद गुप्त स्मारक ग्रंथ आदि विशेष उल्लेखनीय हैं। नागरीप्रचारिणी सभा से गुलेरी गरिमा ग्रंथ प्रकाशित हुआ। अस्सी वर्षों तक शर्मा जी ने हिंदी साहित्य व पत्रकारिता की दुनिया सेवा की। 4 जनवरी 1983 ईस्वी को जयपुर राजस्थान में आपका देहावसान हुआ। पं. झाबरमल शर्मा द्विवेदी युग के सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं तिलक युग के संस्कारों से युक्त राजस्थान एवं बंगाल की विरासत हैं जिनका नाम सदैव सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा। 1982 ईस्वी में पद्मभूषण सम्मान से विभूषित पं शर्मा को महाराणा मेवाड़ सम्मान प्राप्त हुआ। राजस्थान पत्रिका और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के सहयोग से जयपुर में पं झाबरमल शर्मा पर मेमोरियल लेक्चर का आयोजन भी होता है। यह झाबरमल शर्मा म्यूजियम और पत्रकारिता शोध केंद्र जयपुर में संपन्न होता है। राजस्थान ब्राह्मण संघ, आर्ष भारती पं झाबरमल शर्मा साहित्य सम्मान भारत के प्रतिष्ठित और विशिष्ट साहित्य सेवियों और पत्रकारों को देता है जो राजस्थान प्रदेश की जातीय संवेदना से जुड़े हैं। राजस्थान प्रदेश की जातीय संवेदना हीरक जयंती 2014 के अवसर पर यह सम्मान बीकानेर निवासी आईआईआईटी हैदराबाद में विशिष्ट प्रोफेसर पद पर कार्यरत साहित्य साधक और गांधीवादी डॉ नंदकिशोर आचार्य को प्रदान किया गया। पत्रकारिता दिवस के अवसर पर पं. झाबरमल शर्मा जी को शत शत नमन। - - डॉ. वसुंधरा मिश्र, कोलकाता 27.05...

पत्रकार पं. झाबरमल शर्मा :राजस्थानी मानस और जातीय स्वाभिमान के पुरोधा लोकमान्य तिलक के संस्कार - गोत्र पत्रकार एवं संपादक पं. झाबरमल शर्मा गांधी युग की धारा की ऊर्जा के साथ देश- हित और जातीय चेतना के निमित्त अपने धर्म धरातल को सक्रियता से निभा रहे थे।। महात्मा गांधी, हीरालाल शास्त्री, हरिभाऊ उपाध्याय, जयनारायण व्यास, रुद्रदत्त शर्मा, अमृतलाल चक्रवर्ती, दुर्गा प्रसाद मिश्र, सत्यदेव विद्यालंकार, रामनाथ सुमन, शिवपूजन सहाय जैसे कृति संपादक और गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी, चंद्रधर शर्मा गुलेरी जैसे मनीषी उस युग के देश पुत्र थे। पं. झाबरमल शर्मा ने भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया जो राजस्थान के साथ साथ बंगाल के लिए भी गौरव का विषय है। इन सभी का लक्ष्य एक ही था जातीय चेतना का बहुमुखी विकास और देश का समग्र अभ्युत्थान। पं. जी की कर्मस्थली कलकत्ता ही रही । हिंदी पत्रकारिता की प्रवास कर रहे जन्मभूमि कलकत्ता से उस समय राजा राममोहन राय ने बंगदूत पत्र निकाला जो बंगला, फारसी, अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं में निकला। केशवचंद्र सेन, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, सर आशुतोष मुखोपाध्याय अपनी भाषा, जाति, धर्म तथा संपूर्ण समाज के हित के लिए विभिन्न पत्र-पत्रिकाएं निकाल रहे थे। राजस्थान और दूसरे प्रदेशों में व्यवसायिक प्रयोजनों से प्रवास कर रहे राजस्थानियों के उद्योग से कई पत्र-पत्रिकाएँ निकाल रहे थे। पं. झाबरमल शर्मा ने सन् 1914 में अपने संपादन में चीनी पट्टी से "कलकत्ता समाचार" निकाला जिसका जिक्र पं. झाबरमल शर्मा अभिनंदन ग्रंथ (राजस्थान मंच द्वारा 1977 में प्रकाशित) में श्री हरिलाल ठाकोर ने किया है। साहित्यकार पद्मश्री से सम्मानित डॉ. कृष्ण बिहारी मिश्र ने हिंदी "पत्रकारिता :राजस्थानी आयोजन की कृति भूमिका "ग्रंथ के पृष्ठ सैंतालीस में लिखा है कि पं झाबरमल शर्मा ने ज्ञानोदय के प्रकाशन के विषय में बताया था कि बाबू तेजपाल इसको प्रकाशित करते थे जो उनके पिताजी के मित्रों में से एक थे। पं. शर्मा रौलट एक्ट के विरुद्ध" कलकत्ता समाचार" ने जो आवाज बुलंद की थी, उसी का परिणाम था कि उन्हें गवर्नर से धमकी मिली और उन्होंने "गवर्नर का गुस्सा" लेख लिखा। जिसके बाद तो पत्र ही बंद ही करना पड़ा। वे उस दमन के युग में भी निर्भीक संपादक के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त थे। दिल्ली से हिंदू संसार नामक दैनिक पत्र निकाला। मारवाड़ी नामक मासिक पत्रिकाओं का संपादन पंडित जी की पत्रकारिता जगत को महत्वपूर्ण देन थी। राजस्थान की राजनीति, धर्म, संस्कृति, सभ्यता पर सीकर और खेतड़ी का इतिहास विवेकानंद पर दो खंड आदि दस से अधिक ग्रंथ तथा छह ग्रंथों का संपादन जिसमें माधव मिश्र निबंध माला, गुप्त निबंधावली, बालमुकुंद गुप्त स्मारक ग्रंथ आदि विशेष उल्लेखनीय हैं। नागरीप्रचारिणी सभा से गुलेरी गरिमा ग्रंथ प्रकाशित हुआ। अस्सी वर्षों तक शर्मा जी ने हिंदी साहित्य व पत्रकारिता की दुनिया सेवा की। 4 जनवरी 1983 ईस्वी को जयपुर राजस्थान में आपका देहावसान हुआ। पं. झाबरमल शर्मा द्विवेदी युग के सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं तिलक युग के संस्कारों से युक्त राजस्थान एवं बंगाल की विरासत हैं जिनका नाम सदैव सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा। 1982 ईस्वी में पद्मभूषण सम्मान से विभूषित पं शर्मा को महाराणा मेवाड़ सम्मान प्राप्त हुआ। राजस्थान पत्रिका और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के सहयोग से जयपुर में पं झाबरमल शर्मा पर मेमोरियल लेक्चर का आयोजन भी होता है। यह झाबरमल शर्मा म्यूजियम और पत्रकारिता शोध केंद्र जयपुर में संपन्न होता है। राजस्थान ब्राह्मण संघ, आर्ष भारती पं झाबरमल शर्मा साहित्य सम्मान भारत के प्रतिष्ठित और विशिष्ट साहित्य सेवियों और पत्रकारों को देता है जो राजस्थान प्रदेश की जातीय संवेदना से जुड़े हैं। राजस्थान प्रदेश की जातीय संवेदना हीरक जयंती 2014 के अवसर पर यह सम्मान बीकानेर निवासी आईआईआईटी हैदराबाद में विशिष्ट प्रोफेसर पद पर कार्यरत साहित्य साधक और गांधीवादी डॉ नंदकिशोर आचार्य को प्रदान किया गया। पत्रकारिता दिवस के अवसर पर पं. झाबरमल शर्मा जी को शत शत नमन। - - डॉ. वसुंधरा मिश्र, कोलकाता 27.05.2021

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