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Wednesday, May 31, 2023

कलम से निःसृत भाव

कलम से निःसृत भाव एक दिन मैंने मिट्टी में धनिए के बहुत सारे बीजों को एक जगह पर डाल दिया। माँ ने कहा उन्हें एक साथ एक जगह पर डालने से सभी बीजों से धनिए का पौधा नहीं उगेगा और यदि उग भी जाता है तो बढ़ नहीं पाएगा। मिट्टी भी ऊर्वर तभी होती है जब वह श्वास ले सके। प्रकृति को भी 'स्पेस'या स्थान की आवश्यकता होती है। मस्तिष्क को भी अपनी बात कहने के लिए स्थान देने की आवश्यकता है। बहुत से विचार आते हैं और चले जाते हैं। यदि उन्हें समय पर न लिखा जाए तो वे विस्मृति के नीचे कहीं दब जाते हैं और जो सोचा था वह न जाने किस गढ्ढे में चले जाते हैं। कई विचारों के झुंड आपस में मुठभेड़ में फंस कर, कहीं दबकर मर जाते हैं । मस्तिष्क में एक खाली स्थान को रखना होगा तभी सार्थक विचार अपनी जगह बना पाएगा। मैं पिछले 8-10 वर्षों से सोच रही हूँ कि एक उपन्यास लिखूँ लेकिन उसकी शुरुआत ही नहीं हो सकी, फिर मैंने सोचा कि केवल स्त्रियों पर कविताएं लिखूंगी तो लोग पढ़ेंगे लेकिन स्त्री विषयक कविताएं लिखनी आरंभ की तो दूसरे विषयों पर भी कविताएं लिखीं गईं, बीच-बीच में कुछ पारिवारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन आए जिन्होंने सोच को दबा कर रख दिया। करना कुछ था, होता कुछ था। फिर एक दिन मुझे एहसास हुआ कि जो भी लिखना हुआ, वह साहित्य और संस्कृति का ही परिणाम है तो इतना क्या सोचना। अपने मस्तिष्क को इतना भी दौड़ाना ठीक नहीं कि वह मशीन की तरह काम करने लग जाए। मैं बहुत आश्वस्त हूँ कि मैंने जितना लिखा है उसके पाठक हैं।भले ही उनकी संख्या कम हो लेकिन जो भी पढ़ते हैं वे अपनी प्रतिक्रिया मुझे फोन पर, वाट्सप पर और फेसबुक पर देते हैं। आज कोलकाता के हिंदी साहित्य संस्कृति और कला के क्षेत्र में शुभजिता डॉट कॉम वेबसाइट बहुत अच्छा कार्य कर रही है। वरिष्ठ संपादक और वेबसाइट की संस्थापक सुषमा त्रिपाठी की कड़ी मेहनत ने शुभ सृजन प्रकाशन को ऊंचाइयों पर पहुंचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मैं सुषमा त्रिपाठी को धन्यवाद देती हूँ कि उन्होंने मेरे लेखों, कविताओं को ई-बुक के रूप में आकार दिया है। लेखों, कविताओं और समीक्षाओं को एकत्र करने के बाद सुषमा जी ने कहा कि मैम आपकी ई-बुक बड़ी बनती जा रही है। मुझे अहसास ही नहीं था कि मैंने इतने अधिक लेख लिख लिए, जो सच में एक उपलब्धि है। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की रिपोर्ट भी इसी वर्ष ' खबरों में भवानीपुर 2022 - 2023' ई-बुक का भी प्रकाशन शुभ सृजन द्वारा हुआ है। 'सृजन के पन्ने 'आपके पास मीडिया के माध्यम से पहुंच जाएगी। इसका आवरण तरकश में तीर लिए उस स्त्री की है जो साहित्य में अपने विचार रूपी तीरों को अलग - अलग विषयों पर छोड़ती है और समाज को अपने अस्तित्व का अहसास दिलाती है। गुलज़ार जी की पंक्तियां - 'कुछ अलग करना हो तो भीड़ से हट के चलिए' प्रेरणा देती हैं। पाठकों को लाभ मिलेगा, ऐसा मेरा विश्वास है। डॉ वसुंधरा मिश्र दि भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज 5,एल्गिन रोड लाला लाजपत राय सरणी कोलकाता - 7000020 ई-मेल - mishrakolkata@gmail.com

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