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Saturday, May 6, 2023

डॉ कुसुम खेमानी का सम्मान 23 स्थापना दिवस

डॉ कुसुम खेमानी हिंदी की विरासत - - डॉ कुसुम खेमानी (कुसुम दी) जी सिर्फ लेखिका नहीं हैं बल्कि वे समाज की भाषा, संस्कृति और संस्कार से जुड़ी एक विरासत हैं, थाती हैं जिनका पूरा जीवन साहित्य सेवा के प्रति समर्पित रहा। विगत चार दशकों से कुसुम खेमानी जी भारतीय भाषा परिषद हिंदी की प्रतिष्ठित संस्था की मंत्री और अध्यक्ष पद पर कार्यरत रहते हुए अपने कार्यों द्वारा हिंदी और अन्य भाषाओं के सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक स्तर पर गंभीर और उत्कृष्ट कार्य किया है। सात कहानी संग्रह, चार उपन्यास, जीवनी, यात्रा वृतांत, ललित निबंध, सचित्र हिंदी बाल कोश, हिंदी- अंग्रेजी बाल कोश और अनवरत 'वागर्थ' पत्रिका का प्रकाशन उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं। एक बार आकाशवाणी कोलकाता में कुसुम दी के साथ कविता पाठ करने का अवसर मिला जिसका शीर्षक था 'हस्ती मिटती नहीं हमारी' जो यादगार कार्यक्रम रहा।परिषद में होने वाले कई साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संयोजन और संचालन में भी भाग लिया। प्रो दिलीप शाह डीन भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के सहयोग से परिषद के साथ मिलकर भवानीपुर कॉलेज लाइब्रेरी में कुसुम दी के उपन्यास लावण्य देवी पर चर्चा की गई जो विद्यार्थियों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी रही। कुसुम दी का आशीर्वाद बना रहे। प्रसाद जी की ये पंक्तियाँ उनके लिए सटीक हैं - - चेतना का सुंदर इतिहास अखिल मानव भावों का सत्य। विश्व के हृदय पटल पर दिव्य अक्षरों से अंकित हो नित्य। भारतीय भाषा परिषद के स्थापना दिवस पर मंगलकामना और शुभकामनाओं सहित। -डॉ वसुंधरा मिश्र, हिंदी अध्यापिका भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज कोलकाता

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