Saturday, May 6, 2023
साहित्यिकी संस्था ने किया वरिष्ठ सदस्याओं का सम्मान 23
साहित्यिकी संस्था ने किया वरिष्ठ सदस्याओं का सम्मान - -
कोलकाता की प्रसिद्ध संस्था साहित्यिकी ने मासिक गोष्ठी में दो वरिष्ठ सदस्याओं डॉ आशा जायसवाल और सरोजिनी शाह का सम्मान किया। डॉ मंजूरानी गुप्ता ने स्वागत करते हुए कहा कि साहित्यिकी संस्था डॉ सुकीर्ति गुप्ता द्वारा स्थापित महिला संस्था है। यह संस्था सभी प्रकार की महिलाओं को चाहे शिक्षिका, अॉफिस, गृहस्थ, लेक्चरर, प्रोफेसर, व्यवसायी, कॉर्पोरेट हों, सभी को साहित्यिक मंच प्रदान करती है।
इस कार्यक्रम में संस्था की दो वरिष्ठ सदस्याओं डॉ आशा जायसवाल और सरोजिनी शाह का स्वागत किया गया एवं उनके व्यक्तित्व और अनुभवों को सुना गया। दोनों ने ही अपने जीवन के लगभग आठ दशकों तक की यात्रा की है जिनमें संघर्ष, सुख - दुख, खट्टे - मीठे अनुभव दोनों रहे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए रेवा जाजोदिया ने प्रथम वक्तव्य के लिए संस्था की सदस्य प्रसिद्ध व्यंगकार नुपूर अशोक को आमंत्रित किया। आशा जी के व्यक्तित्व और उनके साहित्यिक अवदान की चर्चा करते हुए नुपूर जी ने कहा कि एक शिक्षिका के रूप में इस उम्र में भी वे अपना कर्तव्य बहुत ही सकारात्मक ऊर्जा लिए कर रही हैं। स्कूल से स्वेच्छापूर्वक अवकाशप्राप्त कर एनजीओ से जुड़ीं और स्वांतः सुखाय बहुजन हिताय को
चरितार्थ कर रही हैं। पुरानी पीढ़ी के लिए जीवन की चुनौतियाँ अलग तरह की होती थीं। अनुशासन, आध्यात्मिक झुकाव, चिन्मय मिशन से जुड़ाव , गीता और उपनिषद की कक्षाएँ लेना आज भी उनके जीवन का अंग है। चेहरे पर हमेशा मुस्कान उनकी ऊर्जा को दर्शाता है। डॉ आशा जायसवाल ने संस्था को धन्यवाद दिया और कहा कि संस्था की स्थापना के समय से ही जुड़ी हूँ और गुरू परंपरा पर विश्वास करती हूँ। जीवन अनुभवों की श्रृंखला है एक प्रेरक कविता भी सुनाई। अपने दृष्टिकोण को बदलने से विचारों में नयापन आता है।
दूसरी वरिष्ठ सदस्या सरोजिनी शाह का परिचय देते हुए सबिता पोद्दार ने 30 मार्च 1942 में बुलंदशहर में जन्मी सरोजिनी शाह का जीवन जीवंतता, अतिथि परायण और सरलता से पूर्ण रहा है। मारवाड़ी परिवार में पली शाह परिवार में रहकर परिवार की परंपराओं को साधक की तरह अपनाती गई जो आपको एक महत्वपूर्ण इंसान बनाता है।एम ए डिग्री प्राप्त करते ही विवाह हो गया। विवाह के पश्चात किस तरह पारिवारिक जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ा और रिश्तों को निभाया, उस पर अपनी बातें रखी। साहित्यिकी से जुड़ कर उन्होंने अपनी साहित्यिक रुचियों को आगे बढ़ाया। गीता दूबे ने ममतामयी स्वभाव, अहंकार से परे, आडंबरहीन हौसला जाही करने वाली आशा जी के कई महत्वपूर्ण कार्यों पर अपने विचार व्यक्त किए ।रेणु गौरिसरिया ने रांची में एक साथ गुजारे समय को याद किया। आशा जी के स्टडीग्रुप की प्रिय छात्रा ऋचा अहलूवालिया ने बताया कि ज्ञान की भंडार है आशा जी और जीवन में कितना कुछ जानने को मिल रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुसुम जैन ने कहा कि संस्था एक परिवार की तरह है और आप सभी का प्यार एक दूसरे की ताकत है। संबंधों की सार्थकता का भावनाओं से संबंध होता है। संस्था के आपसी संबंध रक्त संबंधों से इतर होते हुए भी हृदय से जुड़े हुए हैं। संचालन करते हुए रेवा जाजोदिया ने दोनों ही वरिष्ठ सदस्याओं को साधक, रिश्तों को साधने वाली बताया। दुर्गा व्यास ने धन्यवाद ज्ञापन किया। अॉन-लाइन हुए इस साहित्य गोष्ठी में साहित्यिकी की सदस्याओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। रिपोर्ट डॉ वसुंधरा मिश्र ने दी ।यह कार्यक्रम यूट्यूब पर भी सुना जा सकता है।
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